Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.
HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD LUCKNOW CRIMINAL REVISION No. - 924 of 2025 Court No. - 11 HON'BLE SAURABH LAVANIA, J.
1. Heard learned counsel for the revisionist and learned AGA for the State of U.P. as well as perused the record. 2. The instant revision has been preferred seeking following main relief:-
"a) To set aside the impugned order dated 19.05.2025 passed by Ld. APJ 5, Lucknow in the criminal case No. 467/2019 U/s 125 Cr.P.C."
3. Vide order under challenge dated 19.05.2025 passed in Case No. 467 of 2019 (Ram Briksh Prasad and another Versus Subhash Chandra Arya) filed by opposite party no.2 under provisions of Section 125 Cr.P.C., the Additional Principal Judge 5th, Lucknow (in short "Family Court") partly allowed the case of the opposite party no.2. The relevant portion of the order dated 19.05.2025 reads as under:-
"13- िवचारणीय िबन्दु सं०-3 का िनस्तारण- क्या आवेदक स्वयं से भरण पोषण करने में असमथर् है तथा क्या िवपक्षी आवेदक का भरण पोषण करने में समथर् है? 14- इस सम्बन्ध में आवेदक द्वारा यह कथन िकया गया है िक आवेदक उम्र की लाचारी की हालत में आवेदक को िवपक्षी ने घर से बाहर िनकाल िदया है और आवेदकगण के पास भरण पोषण, दवाई इलाज की कोई व्यवस्था नहीं है। जबिक िवपक्षी गुजरात में इिण्डयन रायान इण्डस्ट्रीज में प्रोडक्शन िडपाटर्मेंट में नौकरी करता है और लगभग 30,000/- रू. वेतन प्राप्त करता है। िवपक्षी द्वारा उक्त के खण्डन में पत्रावली में कोई जवाबदेही दािखल नहीं िकया गया है। 15- आवेदक द्वारा उक्त कथन को सािबत करने हेतु मौिखक साक्ष्य में स्वयं को पी०डब्लू0-1 के रूप में परीिक्षत कराया है, जो अपने मुख्य परीक्षा में उपरोक्त कथनों को दोहराया है तथा उक्त साक्षी ने अपने प्रितपरीक्षा में कहा है िक मैं गुजरात में काम करता था। कम्पनी का नाम इिण्डयन रायान इण्डस्ट्रीज है। सन् 1971 में कायर् करने के समय 311/- रू.
वेतन िमलता था। मैंने वी०आर०एस० िलया था। वी०आर०एस० के समय 11 से 12 हजार रूपये मािसक वेतन िमलता था। वी०आर०एस० के समय दो सवा दो लाख रूपये खाते में आया था। पुस्तैनी सम्पित्त में एक मण्डा जमीन है एवं नौकरी करने के दौरान एक बीघा जमीन िलया था, िजसमें Versus Counsel for Revisionist(s) : Prateek Tewari, Atul Tiwari, Sujeet Kumar Yadav, Utkarsh Counsel for Opposite Party(s) :
Subash Chandra Arya .....Revisionist(s) Ram Briksh Prasad .....Opposite Party(s)
आधा बीघा जमीन हमारी है। छोटा बेटा बेरोजगार है। बी०ए०, एम०बी०ए० व बी०एड० िकया है। छोटा बेटा काम करता है। वतर्मान में 1000/- रू. मुझे पेंशन िमलती है। यह कहना सही है िक िवपक्षी गोरखपुर वाले मकान पर व गुजरात वाले मकान पर भी कब्जा कर रखा है। 16- िवपक्षी द्वारा मौिखक साक्ष्य में शपथपत्र बयान दािखल िकया है। उक्त साक्षी ने अपने शपथपत्र बयान में कहा है िक िवपक्षी के िपता रामवृक्ष मूल रूप से िजला गोरखपुर के रहने वाले हैं। िवपक्षी के िपता सन् 1970 में गुजरात चले गये थे, और वहां इिण्डयन रायान इण्डस्ट्रीज आिदत्य िबरला प्रा० िल० कम्पनी में सन् 1970 से नौकरी करना प्रारम्भ कर िदया और सन् 2000 में उपरोक्त कम्पनी से वी०आर०एस० ले िलया। उसके पश्चात् वह अपने मूल िनवास िजला गोरखपुर में रहने लगे और सन् 2002 से ही प्राइमरी िवद्यालय डॉ० भीमराव अम्बेडकर में बतौर िशक्षक पढ़ाते चले आ रहे हैं। िवपक्षी के गुजरात में िस्थत सोसाइटी के मकान की कोई रिजस्ट्री आवेदक के पक्ष में नहीं हुई थी, बिल्क नौकरी करने के दौरान िवपक्षी व आवेदक ने संयुक्त रूप से िमलकर िपजारा इस्माइल से मात्र कब्जा प्राप्त कर िलया था, िजसके बाबत बेरा विल्गर सोमनाथ की अदालत में एक मुकदमा दािखल हुआ जो िवपक्षी के पक्ष में िनणीर्त हुआ। िवपक्षी का छोटा भाई एम०बी०ए० व बी०ए० उत्तीणर् है तथा गांव के समीप इण्टरमीिडएट कॉलेज में पढ़ाता है और मािसक वेतन 30,000/- रू.
प्राप्त होता है और गाँव में ही 2000 वगर् फु ट का दो मंिजला मकान बनवाया है और उक्त मकान बनवाते समय िवपक्षी के भाई ने िवपक्षी के बने भूतल मकान के प्रथम तल पर 7 फु ट िहस्से पर जबरन कब्जा कर िद्वतीय तल तक िनमार्ण करवा रखा है। िवपक्षी के िपता गृह जनपद गोरखपुर में पैतृक सम्पित्त में िनवास करते हैं और गुजरात की कम्पनी से िरटायर होने के समय 8 लाख रूपये िमला था जो िक उनके बैंक खाते में जमा है और आज की ितिथ तक उक्त धनरािश व्याज के साथ 15 लाख रूपये हो गयी होगी और गांव के प्राइमरी िवद्यालय में पढ़ाते हैं, िजससे उनको प्रितमाह 5000/- रू. प्राप्त होता है और गांव में ही पैतृक कृ िष भूिम खसरा सं0-60 रकबा 0.2510 हेक्टेयर व खसरा सं0-102 क रकबा 0.0730 हेक्टेयर व खसरा स०-66 रकबा 0.3460 हेक्टेयर के आधे भाग जोिक आवेदक के िपता लोकई के नाम है, उक्त सम्पित्त का उपयोग व उपभोग आवेदक करते हैं तथा िजससे उनको 50,000/- रू. सालाना आय होती है। आवेदक अपना भरण पोषण करने में पूणर् रूप से सक्षम है। िवपक्षी प्राइवेट कम्पनी में नौकरी करता है तथा दावा दािखला के समय िवपक्षी का वेतन 14,000/- रू. था। वतर्मान समय में नवम्बर, 2024 का वेतन 16,901/- रू. है। उक्त रूपयों से ही िवपक्षी अपनी पत्नी, बेटी व बेटा का भरण पोषण करता है तथा िवपक्षी की पत्नी मानिसक रोगी है, िजसका इलाज चल रहा है तथा बेटे को िकडनी की बीमारी है, िजसका भी इलाज चल रहा है तथा िवपक्षी के बेटी व बेटा पढ़ाई िलखाई कर रहे हैं। 17- उक्त साक्षी ने अपने प्रितपरीक्षा में कहा िक मेरे िपताजी ने मुझे नौकरी िदलायी थी सन् 1989 में। मैं उनका बड़ा लड़का हूँ। िपता जी के सेवािनवृत्त होने पर 8 लाख रूपये िमले थे। यह कहना सही है िक मैं हाउिसग सोसाइटी से एक मकान िलया था। मैंने मकान का ताला तोडकर कब्जा िकया था। यह मकान मेरे िपता जी ने िलया और मैंने भी पैसा िदया था। मेरे पास इसका कोई सबूत नहीं है िक मेरे िपता के पास 15 लाख रूपया हो गया होगा। 50 हजार सलाना आय िपता की नहीं है। इससे कम होती होगी। 18- आवेदक द्वारा स्वयं का रजनेश बनाम नेहा के अंतगर्त शपथपत्र दािखल िकया है, िजससे अपनी उम्र 77 वषर् व योग्यता में िशिक्षत हाईस्कू ल अिभिलिखत िकया है तथा 1000/- रू.
पेंशन प्राप्त करने का भी उल्लेख िकया गया है तथा कृ िष योग्य भूिम होने का भी उल्लेख उक्त शपथपत्र में िकया गया है। उक्त के समथर्न में िवपक्षी द्वारा अपने खाते का िववरण व खतौनी की छायाप्रितयां दािखल िकया है। उक्त खतौनी में सह खातेदार के साथ आवेदक का नाम उिल्लिखत है। िवपक्षी द्वारा स्वयं का रजनेश बनाम नेहा के अंतगर्त शपथपत्र दािखल िकया है, िजसमें व्यवसाय में प्राइवेट नौकरी व 16904/- रू. प्रितमाह वेतन प्राप्त करने का अिभकथन िकया है। उक्त साक्षी ने स्वयं का अगस्त, 2024 का पे-िस्लप दािखल िकया है, िजसमें प्रितमाह कु ल आय 41,833 /- रू. जो 25,265 /- रू. कटौती के उपरांत नेट सैलरी 16,578/- रू. अिभिलिखत है। 19- उपरोक्त िववेचना से यह स्पष्ट होता है िक आवेदक सं0-1 रामवृक्ष के दो पुत्र हैं, िजसमें से बड़ा पुत्र िवपक्षी है तथा छोटा पुत्र के साथ ही आवेदक िनवास करता है। चूंिक आवेदक सं0-1 के भरण पोषण का दाियत्व दोनों पुत्रों पर है. उक्त दोनों पुत्र में से आवेदक अपने छोटे पुत्र के साथ िनवास करता है। िवपक्षी द्वारा आवेदक के आय के सम्बन्ध में जो कथन अपने शपथपत्र बयान व प्रितपरीक्षा में कहा गया है, उसको सािबत करने हेतु पत्रावली में कोई अिभलेखीय साक्ष्य दािखल नहीं िकया है, िजससे यह स्पष्ट हो सके िक आवेदक कोई स्थायी आय अिजत करता हो। जबिक िवपक्षी ने अपने शपथपत्र बयान में स्वयं स्वीकार िकया है िक वह प्राइवेट नौकरी करके 16.904/- रू. प्रितमाह आय अिजत करता है तथा िवपक्षी द्वारा पत्रावली में माह अगस्त, 2024 का स्वयं का पे-िस्लप दािखल िकया है, िजससे भी स्पष्ट है िक िवपक्षी 25,265/- CRLR No. 924 of 2025 2
रू. कटौती के उपरांत नेट सैलरी 16,578/- रू.
प्रितमाह प्राप्त करता है। आवेदक द्वारा दािखल शपथपत्र बयान में अपनी उम्र 77 वषर् अिभिलिखत िकया है, िजससे भी स्पष्ट है िक िवपक्षी बुजुगर् है। इस प्रकार उपरोक्त िववेचना से आवेदक द्वारा यह सािबत िकया गया है िक वह स्वयं से भरण पोषण करने में असमथर् है, जबिक िवपक्षी आवेदक का भरण पोषण करने में समथर् है। अतः िवचारणीय िबन्दु सं०-3 आवेदक के पक्ष में िनणीर्त िकया जाता है। 20- उपरोक्त िववेचना से यह सािबत है िक आवेदक िवपक्षी का िपता है िजसकी उम्र वतर्मान में 77 वषर् है, जो स्वयं से अपना भरण पोषण करने में असमथर् है। उपरोक्त से यह भी सािबत है िक आवेदक वतर्मान समय में अपने बडे पुत्र िवपक्षी से अलग अपने छोटे पुत्र के साथ िनवास करता है। उपरोक्त से यह भी सािबत है िक दौरान मुकदमा आवेिदका सं0-2 की मृत्यु हो चुकी है। चूंिक आवेदक सं0-1 के दो, पुत्र हैं. िजसके भरण पोषण की िजम्मेदारी दोनों पर है, िजसमें से आवेदक अपने छोटे पुत्र के साथ िनवास करता है। आवेदकं िवपक्षी का िपता है, िजससे िवपक्षी पर आवेदक का भरण पोषण करने का उत्तरदाियत्व है। उपरोक्त तथ्य एवं पिरिस्थितयों में आवेदक सं0-1 को प्राथर्नापत्र दािखल करने के िदनांक से आदेश की ितिथ तक मु0 2000/- रू. प्रितमाह व आदेश की ितिथ से मु० 4000/- रू. प्रितमाह िदलाया जाये, िजससे आवेदक सं 0-1 का भरण पोषण सुचारू रूप से हो सके गा। चूंिक आवेिदका सं0-2 की दौरान मुकदमा मृत्यु हो चुकी है, िजसके बाबत प्राथर्नापत्र अंतगर्त धारा-125 सी०आर०पी०सी० खािरज िकये जाने योग्य है तथा आवेदक सं0-1 के बाबत प्राथर्नापत्र अंतगर्त धारा-125 सी०आर० पी०सी० आंिशक रूप से स्वीकार िकये जाने योग्य है। आदेश 21- आवेिदका सं०-2 के बाबत प्राथर्नापत्र अंतगर्त धारा-125 सी०आर०पी०सी० खािरज िकया जाता है। 22- आवेदक सं0-1 के बावत प्राथर्नापत्र अंतगर्त धारा-125 सी०आर०पी०सी० आंिशक रूप से स्वीकार िकया जाता है। िवपक्षी को आदेिशत िकया जाता है िक वह प्राथर्नापत्र दािखल करने के िदनांक से आदेश की ितिथ तक मु० 2000/- रू. प्रितमाह व आदेश की ितिथ से मु० 4000/- रु.
प्रितमाह, प्रत्येक माह के 10 तारीख तक अदा करे। दौरान मुकदमा िवपक्षी द्वारा अंतिरम भरण पोषण के रूप में दी गयी धनरािश उक्त में समायोिजत की जायेगी। 23-िवपक्षी द्वारा उपरोक्त धनरािश अदा नहीं करने पर आवेदक सं0-1 न्यायालय में प्राथर्नापत्र दािखल कर उक्त धनरािश प्राप्त करने का अिधकारी होगा। उसके पश्चात् यिद िवपक्षी द्वारा धनरािश की अदायगी नहीं की जाती है तो िवपक्षी को प्रत्येक चूक के िलए एक मास के िसिवल कारावास से दिण्डत िकया जा सकता है तथा भरण पोषण की धनरािश अथर्दण्ड की भाँित वसूल की जा सकती है।"
4. Impeaching the order under challenge dated 19.05.2025, learned counsel for the revisionist states that the Family Court erred in fact and law both while passing the impugned order dated 19.05.2025. 5. Learned AGA however opposed the instant revision. Supporting the order impugned dated 19.05.2025 passed by the Family Court, it is stated that the same is just and proper and being so is not liable to be interfered with by this Court. 6. Considered the aforesaid and perused the records. 7. Upon due consideration of the facts of the case, which borne out from the above quoted portion of the order impugned dated 19.05.2025, this Court finds no illegality, irregularity, or jurisdictional error in the order impugned dated 19.05.2025. For the reasons that the Family Court partly allowed the case of the opposite party no.2 after considering the undisputed following facts:- CRLR No. 924 of 2025 3
(i) The revisionist has not filed the written statement. Accordingly, the evidence related to his defence/case cannot be considered. (ii) The revisionist is the son of the opposite party no.2. (iii) Net salary/income of the revisionist is Rs. 16,578/-. (iv) The opposite party no.2, an old person aged about 77 years and is getting Rs. 1,000/- as pension, is not in a position to maintain himself. (v) The revisionist is not financially supporting the opposite party no.2, though, ought to be being son of opposite party no.2, who is living with his second son. 8. In view of the aforesaid, the instant revision is accordingly dismissed. No order as to costs. August 26, 2025 Jyoti/- CRLR No. 924 of 2025 4 (Saurabh Lavania,J.) Digitally signed by :- JYOTI RAJWANI High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench