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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 159082 (ALL)

VINOD PAL v. STATE OF U.P.THRU. PRIN. SECY. HOME LKO AND ANOTHER

NABAIL/1079/2025 · 2025-08-27

Subhash Vidyarthi

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD LUCKNOW CRIMINAL MISC. ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 482 BNSS No. - 1079 of 2025 Court No. - 13 HON'BLE SUBHASH VIDYARTHI, J. 1. प्राथीर् के िवद्वान अिधवक्ता श्री िवजयंत िनगम तथा िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता श्री अशोक कु मार श्रीवास्तव को सुना तथा पत्रावली का अवलोकन िकया। 2. धारा 482 भारतीय नागिरक सुरक्षा संिहता द्वारा प्रस्तुत प्राथर्ना-पत्र द्वारा प्राथीर् ने मुकदमा अपराध संख्या 0561 सन 2024 अन्तगर्त धारा 420, 467, 468, 471, 506, 34 भा०द०िव० थाना पारा िजला लखनऊ में अिग्रम जमानत की प्राथर्ना की है। 3. प्रस्तुत प्रकरण िदनांक 29.09.2024 को प्राथीर् सिहत चार व्यिक्तयों के िवरुद्ध िलखाई गई प्रथम सूचना िरपोटर् के आधार पर संिस्थत हुआ िजसमें कहा गया है िक िशकायतकतीर् ने िकस्त पर एक भूखण्ड खरीदने के िलए सह-अिभयुक्त अंिकत यादव से संपकर् िकया िजसने सागर िसटी इन्फ्राटेक प्रा० िल० के अमरेश यादव एवं मुके श कु मार पाल व िवनोद पाल से 1500 वगर् फु ट के एक भूखण्ड की बात करायी। िशकायतकतीर् तथा उसके कहने पर चार अन्य व्यिक्तयों ने लगभग 22 लख रुपये का भुगतान अमरेश यादव को िकया िकन्तु लगभग दो साल होने के बाद िशकायतकतीर् द्वारा दबाव डालने पर अमरेश यादव ने एक नोटरी अिभलेख तैयार करा िदया िकन्तु िवक्रय-पत्र िनष्पािदत नहीं िकया गया। 4. प्राथर्ना-पत्र के साथ प्रस्तुत शपथ-पत्र में कहा गया िक प्राथीर् िनदोर्ष है और उसका कोई आपरािधक इितहास नहीं है। 5. एक पूरक शपथ-पत्र के माध्यम से यह कहा गया है िक प्राथीर् वैवािहक मतभेदों से उत्पन्न एक आपरािधक प्रकरण में आरोपी था िजसमें िववाद समाप्त होने के पश्चात प्राथीर् की पत्नी अब उसके साथ रह रही है िकन्तु प्रकरण अभी लंिबत है। 6. प्रस्तुत प्रकरण में सह-अिभयुक्त मुके श कु मार पाल को इस न्यायालय की एक अन्य पीठ द्वारा जमानत प्राथर्ना-पत्र संख्या 7087 सन 2025 में पािरत आदेश िदनांक 31.07.2025 द्वारा जमानत िदये जाने का आदेश हो चुका है तथा अन्य सह-अिभयुक्त अमरेश कु मार यादव को जमानत प्राथर्ना-पत्र संख्या 7842 सन 2025 में पािरत आदेश िदनांिकत 22.08.2025 द्वारा जमानत पर िरहा िकये जाने का आदेश िकया जा चुका है। Versus Counsel for Applicant(s) : Vijyant Nigam, Ashish Agarwal Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Vinod Pal .....Applicant(s) State Of U.P.Thru. Prin. Secy. Home Lko And Another .....Opposite Party(s) 7. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने प्राथर्ना-पत्र का िवरोध करते हुए कहा िक प्रकरण में िववेचना अभी लंिबत है। 8. उपरोक्त तथ्यों को दृिष्टगत रखते हुए, जबिक प्रथम सूचना िरपोटर् में सह-अिभयुक्त अमरेश यादव को सागर िसटी इन्फ्राटेक प्रा०िल० में भूखण्ड खरीदने के िलए धनरािश िदये जाने का कथन िकया गया है तथा प्राथीर् को कोई धनरािश देने का कथन नहीं िकया गया है; भूखण्ड खरीदने के संबंध में कोई िनबंिधत समझौता िनष्पािदत नहीं हुआ था; िशकायतकतीर् ने न तो भूखण्ड का तय िवक्रय मूल्य अंिकत िकया है और न ही यह कहा है िक संपूणर् तय िवक्रय मूल्य का भुगतान हो गया है तथा प्राथीर् के िवरुद्ध कोई िविशष्ट कथन नहीं िकया गया है, न्यायालय का मत है िक प्राथीर् अिग्रम जमानत पाने का अिधकारी है। 9. तद्नुसार अिग्रम जमानत प्राथर्ना-पत्र स्वीकार िकया जाता है। 10. उपरोक्त मुकदमा अपराध संख्या में आवेदक की िगरफ्तारी/न्यायालय के समक्ष उपिस्थित की दशा में, उसे संबंिधत थाने के भारसाधक अिधकारी/न्यायालय की संतुिष्ट के अनुसार व्यिक्तगत बंध पत्र एवं दो प्रितभू प्रस्तुत करने पर परीक्षण के अंितम रूप से िनस्तारण तक, िनम्न शतोर्ं के अधीन अिग्रम जमानत पर िरहा िकया जाएगाः- क- आवेदक, यिद आवश्यक होगा तो पुिलस अिधकारी द्वारा जॉच हेतु अपेिक्षत समय पर उपिस्थत होगा। ख- आवेदक मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कोई धमकी, वादा या प्रलोभन नहीं देगा िजससे िक वह ऐसे तथ्य को न्यायालय के समक्ष या िकसी पुिलस अिधकारी के समक्ष प्रकट न करने पर मान जाए। ग- आवेदक अदालत की पूवर् अनुमित के िबना भारत नहीं छोड़ेगा; घ- आवेदक को प्रत्येक िनधार्िरत ितिथ पर ट्रायल कोटर् के समक्ष उपिस्थत होना होगा, जब तक िक व्यिक्तगत उपिस्थित से छू ट न दी गयी हो; ङ- आवेदक अिभयोजन पक्ष के गवाह पर दबाव नहीं डालेगा / धमकी नहीं देगा। च- आवेदक िववेचना एवं िवचारण के दौरान सहयोग करेंगे और जमानत की स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं करेगा। August 27, 2025 Ankit NABAIL No. 1079 of 2025 2 (Subhash Vidyarthi,J.) Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench