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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 159050 (ALL)

KALEEM v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME LKO

BAIL/7885/2025 · 2025-08-27

Subhash Vidyarthi

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD LUCKNOW CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 7885 of 2025 Court No. - 13 HON'BLE SUBHASH VIDYARTHI, J. 1. प्राथीर् के िवद्वान अिधवक्ता श्री िवनय कु मार ितवारी की तरफ से उपिस्थत िवद्वान अिधवक्ता श्री शुभम श्रीवास्तव तथा िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता श्री प्रशांत ित्रपाठी को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 2. धारा 483 भारतीय नागिरक सुरक्षा संिहता के अंतगर्त प्रस्तुत इस प्राथर्ना-पत्र द्वारा प्राथीर् ने मुकदमा अपराध संख्या 0228 सन 2025 अन्तगर्त धारा 3(1) उ०प्र० िगरोहबन्द समाज िवरोधी िक्रयाकलाप (िनवारण) अिधिनयम थाना छिपया िजला गोण्डा में जमानत की प्राथर्ना की है। 3. गैंग चाटर् में एक प्रकरण में प्राथीर् की संिलप्तता दशार्यी गयी है िजसमें उसको जमानत पर िरहा िकये जाने का आदेश हो चुका है। 4. प्राथर्ना-पत्र के साथ प्रस्तुत शपथ-पत्र के प्रस्तर 6 में 6 अन्य आपरािधक प्रकरणों में प्राथीर् की संिलप्तता दशार्यी गयी है, िजन सभी में प्राथीर् को जमानत पर िरहा िकये जाने का आदेश हो चुका है। 5. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने प्राथर्ना-पत्र का िवरोध िकया िकन्तु वह मामले के उपरोक्त पहलुओं पर िववाद नहीं कर सके । 6. प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है िक प्राथीर् को वतर्मान मामले में के वल इसिलए फं साया गया है क्योंिक उसका आपरािधक इितहास है। प्राथीर् िदनांक 09.04.2025 से कारागार में िनरुद्ध है तथा प्रथम दृष्टया यह मानने का कोई उिचत आधार प्रतीत नहीं होता है िक प्राथीर् किथत अपराध का दोषी है। 7. प्राथीर् की दोषिसिद्ध की िस्थित में न्यूनतम सजा दो वषर् का कारावास है। 8. पत्रावली में ऐसी कोई सामग्री नहीं है िजससे इस आशंका का समुिचत आधार उत्पन्न हो िक प्राथीर् साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ कर सकता है या गवाहों को प्रभािवत कर सकता है या प्राथीर् फरार हो जाएगा और मुकदमे का सामना नहीं करेगा या जमानत पर िरहा होने की िस्थित में उसके द्वारा कोई अन्य अपराध िकए जाने की संभावना है। 9. उपरोक्त तथ्यों को दृिष्टगत रखते हुए, जबिक मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त िकए िबना, Versus Counsel for Applicant(s) : Vinay Kumar Tiwari Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Kaleem .....Applicant(s) State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Lko .....Opposite Party(s) न्यायालय का मत है िक प्राथीर् जमानत पर िरहा िकए जाने का अिधकारी है। 10. तदनुसार, जमानत प्राथर्ना-पत्र स्वीकार िकया जाता है। 11. आवेदक को उ०प्र० िगरोहबन्द समाज िवरोधी िक्रयाकलाप (िनवारण) अिधिनयम, 1986 के अंतगर्त पंजीकृ त मामले में संबंिधत मिजस्ट्रेट/न्यायालय की संतुिष्ट के अनुसार व्यिक्तगत बंधपत्र और समान रािश के दो िवश्वसनीय जमानतदार प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के अधीन जमानत पर िरहा िकया जाए: (i) आवेदक अिभयोजन साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा; (ii) आवेदक अिभयोजन पक्ष के गवाहों पर दबाव नहीं डालेगा; (iii) आवेदक ट्रायल कोटर् द्वारा तय की गई प्रत्येक तारीख पर उपिस्थत होगा। August 27, 2025 Ankit BAIL No. 7885 of 2025 2 (Subhash Vidyarthi,J.) Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench