RAVI YADAV @ ASHISH YADAV v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME LKO
BAIL/7890/2025 · 2025-08-27
Subhash Vidyarthi
body2025
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[ 2025 DAILYLAW 159018 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD LUCKNOW CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 7890 of 2025 Court No. - 13 HON'BLE SUBHASH VIDYARTHI, J.
1. प्राथीर् के िवद्वान अिधवक्ता श्री अरूण िसन्हा की तरफ से उपिस्थत िवद्वान अिधवक्ता श्री िसद्धाथर् िसह तथा िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता श्री प्रशांत ित्रपाठी को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया।
2. धारा 483 भारतीय नागिरक सुरक्षा संिहता के अंतगर्त प्रस्तुत इस प्राथर्ना-पत्र द्वारा प्राथीर् ने मुकदमा अपराध संख्या 020 सन 2025 अन्तगर्त धारा 2(b)(1) 3 उ०प्र० िगरोहबन्द समाज िवरोधी िक्रयाकलाप (िनवारण) अिधिनयम,1986 थाना बाजारशुक्ल िजला अमेठी में जमानत की प्राथर्ना की है।
3. गैंग चाटर् में दो आपरािधक प्रकरणों में प्राथीर् की संिलप्तता दशार्यी गयी है िजनमें प्राथीर् को जमानत पर िरहा िकये जाने का आदेश िकया जा चुका है। इसके अलावा प्राथीर् िकसी अन्य प्रकरण में अिभयुक्त नहीं है।
4. पूरक शपथ-पत्र के माध्यम से प्राथीर् द्वारा इस न्यायालय की एक अन्य पीठ द्वारा आपरािधक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना-पत्र संख्या 2850 सन 2025 में पािरत आदेश िदनांक 04.07.2025 िजसके द्वारा प्राथीर् को जमानत पर िरहा िकये जाने का आदेश िकया जा चुका है।
5. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने जमानत की प्राथर्ना का िवरोध िकया है, लेिकन वह मामले के उपरोक्त पहलुओं पर िववाद नहीं कर सके ।
6. प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है िक आवेदक को वतर्मान मामले में के वल इसिलए फं साया गया है क्योंिक उसका आपरािधक इितहास है। प्राथीर् िदनांक 10.02.2025 से कारागार में िनरुद्ध है तथा प्रथम दृष्टया यह मानने का कोई उिचत आधार प्रतीत नहीं होता है िक प्राथीर् किथत अपराध का दोषी है।
7. प्राथीर् की दोषिसिद्ध की िस्थित में न्यूनतम सजा दो वषर् का कारावास है। Versus Counsel for Applicant(s) : Arun Sinha Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Ravi Yadav @ Ashish Yadav .....Applicant(s) State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Lko .....Opposite Party(s)
8. पत्रावली में ऐसी कोई सामग्री नहीं है िजससे इस आशंका का समुिचत आधार उत्पन्न हो िक प्राथीर् साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ कर सकता है या गवाहों को प्रभािवत कर सकता है या प्राथीर् फरार हो जाएगा और मुकदमे का सामना नहीं करेगा या जमानत पर िरहा होने की िस्थित में उसके द्वारा कोई अन्य अपराध िकए जाने की संभावना है।
9. उपरोक्त तथ्यों को दृिष्टगत रखते हुए, जबिक मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त िकए िबना, न्यायालय का मत है िक प्राथीर् जमानत पर िरहा िकए जाने का अिधकारी है।
10.
तदनुसार, जमानत प्राथर्ना-पत्र स्वीकार िकया जाता है।
11. आवेदक को उ०प्र० िगरोहबन्द समाज िवरोधी िक्रयाकलाप (िनवारण) अिधिनयम, 1986 के अंतगर्त पंजीकृ त मामले में संबंिधत मिजस्ट्रेट/न्यायालय की संतुिष्ट के अनुसार व्यिक्तगत बंधपत्र और समान रािश के दो िवश्वसनीय जमानतदार प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के अधीन जमानत पर िरहा िकया जाए: (i) आवेदक अिभयोजन साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा; (ii) आवेदक अिभयोजन पक्ष के गवाहों पर दबाव नहीं डालेगा; (iii) आवेदक ट्रायल कोटर् द्वारा तय की गई प्रत्येक तारीख पर उपिस्थत होगा। August 27, 2025 Ankit BAIL No. 7890 of 2025 2 (Subhash Vidyarthi,J.) Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench