BRIJ BHUSHAN SHUKLA ALIAS SAURABH SHUKLA AND ANOTHER v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. DEPTT. OF HOME LKO. AND ANOTHER
ABAIL/895/2025 · 2025-08-25
Subhash Vidyarthi
body2025
DailyLaw.ai
[ 2025 DAILYLAW 158386 (ALL) · dailylaw.ai ]
DailyLaw.ai
[ 2025 DAILYLAW 158386 (ALL) · dailylaw.ai ]
Judgment text
Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.
HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD LUCKNOW CRIMINAL MISC ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 438 CR.P.C. No. - 895 of 2025 Court No. - 13 HON'BLE SUBHASH VIDYARTHI, J.
1. प्राथीर्गण के िवद्वान अिधवक्ता श्री िदनेश कु मार चौधरी, िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता श्री अभय कु मार िसह तथा िवपक्षी संख्या 2 के िवद्वान अिधवक्ता श्री सक्षम अग्रवाल को सुना तथा पत्रावली का अवलोकन िकया।
2. धारा 438 दं०प्र०सं० द्वारा प्रस्तुत प्राथर्ना-पत्र द्वारा प्राथीर्गण ने मुकदमा अपराध संख्या 221 सन 2023 अन्तगर्त धारा 452, 324, 308, 323, 504, 506, 427 भा०द०िव० थाना कोतवाली नगर िजला बलरामपुर में अिग्रम जमानत की प्राथर्ना की है।
3. िदनांक 06.07.2023 को समय 6:45 बजे िवपक्षी संख्या 2 द्वारा प्राथीर्गण के िवरुद्ध िलखाई गई प्रथम सूचना िरपोटर् में यह कहा गया है िक िदनांक 06.07.2023 को सुबह 5:30 बजे अिभयुक्तगण ने लाठी, दुरमुट व धारदार हिथयार से िशकायतकतार् के घर पर हमला बोल िदया, डाउन पाइप तथा दरवाजा तोड़कर घर में घुस आए एवं जान से मारने की िनयत से सर पर वार कर िदया िजससे उसका सर फट गया। भद्दी-भद्दी गािलयां देते हुए अिभयुक्तगण िशकायतकतार् को घसीटकर बाहर लाकर लात-घूसों से मारने लगे। हल्ला सुनकर आसपास के लोग आ गए, िजससे अिभयुक्तगण जान से मारने की धमकी देते हुए फरार हो गए।
4. िशकायतकतार् का चोट प्रपत्र एक पूरक शपथ-पत्र के माध्यम से प्रस्तुत िकया गया है। िचिकत्सक ने अपने बयान में कहा है िक िशकायतकतार् के शरीर पर कु ल चार चोटें आयी थी। दो चोटों एक्स-रे के िलए िरफर की गयी थी, एक चोट िकसी धारदार हिथयार से कािरत हुई थी। एक्स-रे परीक्षण में कोई असामान्यता नहीं पायी गयी।
5. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता के पास भी मात्र इतनी ही सूचना उपलब्ध है तथा चोटें शरीर के िकस भाग पर कािरत हुईं, यह सूचना के स डायरी पर उपलब्ध नहीं है।
6. प्राथर्ना-पत्र के साथ प्रस्तुत शपथ-पत्र में कहा गया िक प्राथीर्गण प्रथम सूचना िरपोटर् संख्या 318 सन 2022 अंतगर्त धारा 325, 452, 323, 504, 506 भा०दं०सं० थाना कोतवाली नगर जनपद बलरामपुर में आरोपी हैं िजसमें उनको िदनांक 16.12.2022 को जमानत िमल चुकी है। यह प्रकरण िवपक्षी संख्या 2 द्वारा िलखाई गई प्रथम सूचना िरपोटर् के आधार पर संिस्थत हुआ है। इसके अितिरक्त इसमें प्राथीर् संख्या 2 दो अन्य प्रकरणों मे आरोपी है िजससे िजनमें से एक में उसको जमानत िमल चुकी है तथा एक प्रकरण में उसे कोई Versus Counsel for Applicant(s) : Dinesh Kr.
Chaudhary Counsel for Opposite Party(s) : G.A., Pradeep Kumar Mishra, Saksham Agarwal Brij Bhushan Shukla Alias Saurabh Shukla And Another .....Applicant(s) State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Deptt. Of Home Lko. And Another .....Opposite Party(s)
समन प्राप्त नहीं है।
7. प्राथर्ना-पत्र के साथ प्रस्तुत शपथ-पत्र में कहा गया है िक इसी घटना के संबंध में प्राथीर्गण की तरफ से एक प्रथम सूचना िरपोटर् संख्या 222 सन 2023 िदनांक 06.07.2023 को िशकायतकतार् धमेर्न्द्र कु मार शुक्ला सिहत पांच अिभयुक्तों के िवरुद्ध यह कहते हुए िलखाई गई थी िक अिभयुक्तगण ने प्राथीर्गण के घर के सामने बने सीढ़ी तथा दरवाजे को िदनांक 05.07.2023 को तोड़ िदया था। िदनांक 06.07.2023 को सुबह 05:40 पर अिभयुक्तगण ने प्राथीर्गण को मारा-पीटा।
8. प्रकरण में दोनों प्रािथयों को चोटों आयी हैं। प्राथीर् संख्या 1 के चोट प्रपत्र में िसफर् माथे के दािहनी तरफ तथा दािहनी आँख के ऊपर दो कटे हुए घाव, बाएं घुटने के नीचे सूजन तथा दािहने हाथ में, पीठ पर एवं सीने पर ददर् की िशकायत बतायी गयी। प्राथीर् के संख्या 2 के शरीर में कई स्थान पर सूजन तथा ददर् की िशकायत थी।
9. िवपक्षी संख्या 2 के िवद्वान अिधवक्ता ने प्राथर्ना-पत्र का घोर िवरोध करते हुए कहा िक प्राथीर्गण के िवरुद्ध प्रस्तुत प्रकरण में गैर जमानतीय अिधपत्र िनगर्त हो चुका है। उन्होंने कहा िक माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अंिकत िमश्रा बनाम मध्य प्रदेश राज्य तथा एक अन्य 2025 SCC Online SC 809, श्रीकान्त उपाध्याय तथा अन्य बनाम िबहार राज्य तथा अन्य 2024 SCC Online SC 282, सुशीला अग्रवाल और अन्य बनाम एनसीटी िदल्ली तथा एक अन्य (2020) 5 SCC 1, श्री गुरुबक्श िसह िसिब्बया और अन्य बनाम पंजाब राज्य (1980) 2 SCC 565 तथा इस न्यायालय की एक एकल पीठ द्वारा िदये गये आशीष कु मार बनाम उ०प्र० राज्य तथा अन्य अिग्रम जमानत प्राथर्ना-पत्र संख्या 4464 सन 2025 में पािरत िनणर्य िदनांक 01.08.2025 का आश्रय िलया।
10.
अंिकत िमश्रा बनाम मध्य प्रदेश राज्य तथा एक अन्य के प्रकरण में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अवधािरत िकया गया है िक अंिकत िमश्रा बनाम मध्य प्रदेश राज्य का प्रकरण मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा अिभयुक्त को अिग्रम जमानत देने के आदेश के िवरुद्ध प्रस्तुत अपील में पािरत िकया गया था। अिग्रम जमानत आदेश की वैधता को इस आधार पर चुनौती दी गयी थी िक अिभयुक्त का एक आपरािधक िगरोह था िजसमें 58 सदस्य थे। अिभयुक्त के िवरुद्ध 45 प्रथम सूचना िरपोटर् दजर् होकर आपरािधक प्रकरण संिस्थत हुए थे। एक प्रकरण में अिभयुक्त दोषिसद्ध होकर दिण्डत हो चुका था तथा ऐसी पिरिस्थित में यह संदेह व्यक्त िकया गया था िक अिभयुक्त अिग्रम जमानत का दुरुपयोग कर सकता है। अिग्रम जमानत आदेश को िनरस्त करने की प्राथर्ना अस्वीकार करते हुए माननीय उच्चतम न्यायालय ने यह कहा िक उच्च न्यायालय ने अिभयुक्त के आपरािधक इितहास को दृिष्टगत रखते हुए अिग्रम जमानत आदेश पािरत िकया है तथा यह भी देखा है िक सभी अपराध मिजस्ट्रेट द्वारा िवचारणीय हैं। िकसी अपराध में सात वषर् से अिधक का दण्ड का प्रावधान नहीं है। प्रश्नगत अपराध भी सात साल से कम अविध के कारावास से दण्डनीय था। माननीय उच्चतम न्यायालय ने यह पाया िक अिभयुक्त को िकसी जघन्य अपराध में अिग्रम जमानत नहीं दी गयी थी। उच्च न्यायालय ने प्रकरण की िवस्तृत समीक्षा के उपरान्त अिभयुक्त को अिग्रम जमानत प्रदान की थी तथा ऐसी पिरिस्थित में माननीय उच्चतम न्यायालय ने इस अिग्रम जमानत आदेश में हस्तक्षेप करने से इंकार कर िदया।
11. श्रीकान्त उपाध्याय तथा अन्य बनाम िबहार राज्य तथा अन्य के प्रकरण में माननीय उच्चतम न्यायालय ने यह िसद्धान्त प्रितपािदत िकया िक अिग्रम जमानत प्राथर्ना-पत्र न्याियक िववेक के सतकर् तापूवर्क प्रयोग के साथ ही दी जानी चािहए। जहाँ िगरफ्तारी अिधपत्र अथवा भगोड़े अपराधी की उद्धोषण िनगर्त हो चुकी है, अिग्रम जमानत मात्र अपवाद स्वरूप दी जानी चािहए। जहाँ अिभयुक्त लगातार न्याियक प्रिक्रया से भाग रहा हो, उसे अिग्रम जमानत नहीं दी जानी चािहए।
12.
आशीष कु मार बनाम उ०प्र० राज्य तथा अन्य के प्रकरण में अिग्रम जमानत प्राथर्ना-पत्र के िवरुद्ध िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने यह प्रारंिभक आपित्त प्रस्तुत की थी िक प्रकरण एक पिरवाद के आधार पर ABAIL No. 895 of 2025 2
संिस्थत हुआ था िजसमें अिभयुक्त को न्यायालय से समन िनगर्त हुआ था। पिरवाद का समन िनगर्त होने पर अिभयुक्त को िगरफ्तार होने की कोई आशंका नहीं थी। इस न्यायालय ने "िगरफ्तारी" तथा "अिभरक्षा" की समीक्षा करते हुए कहा िक िगरफ्तारी अिभरक्षा से िभन्न है। धारा 482 भारतीय नागिरक सुरक्षा संिहता में प्रयुक्त हुआ शब्द िगरफ्तारी न्यायालय द्वारा अिभयुक्त को िगरफ्तार िकये जाने के पश्चात दी गयी अिभरक्षा अथवा न्यायालय में समपर्ण के बाद की गयी अिभरक्षा के समान नहीं है। इस न्यायालय ने यह िसद्धान्त प्रितपािदत िकया िक जहाँ पर एक गैर जमानतीय अिधपत्र के संबंध में एक पिरवाद प्रस्तुत हुआ है, पिरवाद का समन िनगर्त होने पर अिग्रम जमानत प्राथर्ना-पत्र पोषणीय नहीं होगा क्योंिक इसमें पुिलस द्वारा िगरफ्तारी की कोई आशंका नहीं है। जहाँ पर अिभयुक्त के िवरुद्ध पिरवाद के संबंध में एक जमानती वारण्ट िनगर्त हुआ है, उसे न्यायालय के समक्ष उपिस्थत होने पर जमानत पर िरहा कर िदया जायेगा तथा ऐसी पिरिस्थित में भी अिग्रम जमानत प्राथर्ना-पत्र पोषणीय नहीं होगा। जहाँ अिभयुक्त के िवरुद्ध गैर जमानती अिधपत्र अथवा उद्धोषणा िनगर्त हो चुकी है, अिभयुक्त को मात्र िवशेष पिरिस्थितयों में अिग्रम जमानत दी जा सकती है। उक्त प्रकरण में पिरवाद के संबंध में अिभयुक्त को िकसी भी प्रकार का जमानती अिधपत्र अथवा गैर जमानती अिधपत्र िनगर्त नहीं हुआ था तथा न्यायालय ने मात्र पिरवाद पर समन िनगर्त िकया था। न्यायालय ने यह पाया िक ऐसी पिरिस्थित में अिग्रम जमानत प्राथर्ना-पत्र पोषणीय नहीं है।
13.
प्रस्तुत प्रकरण में प्राथीर्गण के िवरुद्ध धारा 308 भा०दं०सं० के अपराध के िलए प्रथम सूचना िरपोटर् पंजीकृ त हुई है न िक पिरवाद। िवपक्षी संख्या 2 के िवद्वान अिधवक्ता ने ही अपने तकर् में यह कहा है िक प्राथीर् के िवरुद्ध गैर जमानती अिधपत्र िनगर्त हो चुका है, ऐसी पिरिस्थित में यह नहीं कहा जा सकता िक प्राथीर्गण की िगरफ्तारी की कोई आशंका नहीं है एवं अिग्रम जमानत प्राथर्ना-पत्र पोषणीय नहीं है। तद्नुसार, िवपक्षी संख्या 2 के िवद्वान अिधवक्ता की आपित्त िनराधार है एवं िनरस्त की जाती है।
14. उपरोक्त तथ्यों को दृिष्टगत रखते हुए, जबिक इस घटना में दोनों प्राथीर्गण को कई चोटें आयी हैं तथा प्राथीर्गण ने भी घटना की प्रथम सूचना िरपोटर् पंजीकृ त करायी है; प्राथीर्गण को आयी चोटों का िजक्र प्रश्नगत प्रथम सूचना िरपोटर् में नहीं है िजससे यह प्रतीत होता है िक िवपक्षी संख्या 2 ने प्रकरण के समस्त संगत तथ्य प्रथम सूचना िरपोटर् में नहीं िलखाये हैं; न्यायालय का मत है िक प्राथीर्गण अिग्रम जमानत पाने के अिधकारी हैं।
15. तद्नुसार अिग्रम जमानत प्राथर्ना-पत्र स्वीकार िकया जाता है।
16. उपरोक्त मुकदमा अपराध संख्या में आवेदकगण की िगरफ्तारी/न्यायालय के समक्ष उपिस्थित की दशा में, उसे संबंिधत थाने के भारसाधक अिधकारी/न्यायालय की संतुिष्ट के अनुसार व्यिक्तगत बंध पत्र एवं दो प्रितभू प्रस्तुत करने पर परीक्षण के अंितम रूप से िनस्तारण तक, िनम्न शतोर्ं के अधीन अिग्रम जमानत पर िरहा िकया जाएगाः- क- आवेदकगण, यिद आवश्यक होगा तो पुिलस अिधकारी द्वारा जॉच हेतु अपेिक्षत समय पर उपिस्थत होंगे; ख- आवेदकगण मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कोई धमकी, वादा या प्रलोभन नहीं देंगे िजससे िक वह ऐसे तथ्य को न्यायालय के समक्ष या िकसी पुिलस अिधकारी के समक्ष प्रकट न करने पर मान जाए; ग- आवेदकगण अदालत की पूवर् अनुमित के िबना भारत नहीं छोड़ेंगे; घ- आवेदकगण को प्रत्येक िनधार्िरत ितिथ पर ट्रायल कोटर् के समक्ष उपिस्थत होना होगा, जब तक िक व्यिक्तगत उपिस्थित से छू ट न दी गयी हो; ङ- आवेदकगण अिभयोजन पक्ष के गवाह पर दबाव नहीं डालेंगे / धमकी नहीं देंगे। ABAIL No. 895 of 2025 3
च- आवेदकगण िववेचना एवं िवचारण के दौरान सहयोग करेंगे और जमानत की स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं करेंगे। August 25, 2025/Ankit ABAIL No. 895 of 2025 4 (Subhash Vidyarthi,J.) Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench