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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 15793 (ALL)
AKASH MISHA v. STATE OF U.P.
BAIL/6711/2025 · 2025-08-20
Gautam Chowdhary
body2025
[ 2025 DAILYLAW 15793 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC:144027 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 6711 of 2025 Applicant :- Akash Misha Opposite Party :- State of U.P. Counsel for Applicant :- Shikhar Tandon Counsel for Opposite Party :- Anshuman Singh,G.A. Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J.
1. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा शश्री वशिखर टटंडन , पररवद्वादश्री कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा शश्री अटंशिशुमद्वान धसटंह ककी ओर सवे ववदद्वान अधधिवकद्वा शश्री अटंवकत कशु मद्वार यद्वादव एवटं रद्वाज्य ककी तरफ सवे ववदद्वान अपर शिद्वासककीय अधधिवकद्वा कको सशुनद्वा तथद्वा पतद्वावलश्री कद्वा पररशिश्रीलन वकयद्वा।
2. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा ककी तरफ सवे आज अनशुपद्वालन आख्यद्वा दद्वाधखल वकयद्वा गयद्वा, धजसवे पतद्वावलश्री पर रखद्वा जद्वाय।
3. वतरमद्वान दद्वाणणडक प्रककीरर जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वा पत आववेदक आकद्वाशि वमशद्वा ककी ओर सवे मशु०अ०सटं० 802/2024, अटंतगरत धिद्वारद्वा 386, 419, 506, 120-बश्री. भद्वा.दटं.सटं., थद्वानद्वा इणनदरद्वापशुरम, धजलद्वा गद्वाधजयद्वाबद्वाद मम जमद्वानत पर मशुक करनवे हवेतशु प्रस्तशुत वकयद्वा गयद्वा हहै।
4.
आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा नवे तकर प्रस्तशुत वकयद्वा वक आववेदक कको इस प्रकरर मम गलत एवटं फजर्जी ढटंग सवे झझूठद्वा फटं सद्वायद्वा गयद्वा हहै , उसनवे कधथत अपरद्वाधि कद्वाररत नहहीं वकयद्वा हहै। पझूवर मम वदनद्वाटंक 24.07.2025 कको आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा दद्वारद्वा कथन वकयद्वा गयद्वा थद्वा वक यवद आववेदक कको अटंतररम जमद्वानत पर ररहद्वा वकयद्वा जद्वातद्वा हहै, तको वह वववद्वावदत धिनरद्वावशि सझूचनद्वाकतद्वार कको वद्वापस कर दवेगद्वा, इसश्री आधिद्वार पर आववेदक कको आदवेशि वदनद्वाटंक 24.07.2025 कको अटंतररम जमद्वानत प्रदद्वान ककी गयश्री थश्री। आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा दद्वारद्वा अवग्रिम कथन वकयद्वा गयद्वा वक उक आदवेशि कवे अनशुपद्वालन मम बकद्वायद्वा धिनरद्वावशि रु० 2,58,100/- (दको लद्वाख
अटद्वावन हजद्वार एक ससौ रु०) आववेदक दद्वारद्वा सझूचनद्वाकतद्वार कवे बबक मम जमद्वा ककी जद्वा चशुककी हहै तथद्वा सटंबटंधधित दस्तद्वाववेज/सद्वाक्ष्ययों कको आज दद्वाधखल अनशुपद्वालन शिपथपत मम अनशुलग्नक सटं०-1 कवे रूप मम सटंलग्न वकयद्वा गयद्वा हहै , धजससवे यह स्पष्ट हहै वक आववेदक दद्वारद्वा बकद्वायद्वा धिनरद्वावशि रु० 2,58,100/- (दको लद्वाख अटद्वावन हजद्वार एक ससौ रु०) सझूचनद्वाकतद्वार कवे खद्वातवे मम जमद्वा ककी जद्वा चशुककी हहै तथद्वा ककोई भश्री बकद्वायद्वा धिनरद्वावशि शिवेष नहहीं हहै। पशुननः उनकद्वा यह भश्री कथन हहै वक आववेदक ककी तरफ सवे यह आश्वद्वासन वदयद्वा गयद्वा हहै वक वह कद्वानझून ककी प्रवक्रियद्वा मम सहयकोग करनवे कवे धलए तहैयद्वार हहै और जब भश्री आवश्यकतद्वा हकोगश्री वह ईमद्वानदद्वारश्री सवे अदद्वालत कवे समक्ष खशुद कको उपलब्धि करद्वाएगद्वा और उन सभश्री शितरटं कको स्वश्रीकद्वार करनवे कवे धलए भश्री तहैयद्वार हहै जको नयद्वायद्वालय उस पर अधधिरकोवपत करवेगश्री। आववेदक वनदरष हहै तथद्वा वह इस प्रकरर मम वद० 19.08.2024 सवे कद्वारद्वागद्वार मम वनरुद्ध हहै। इसधलए आववेदक कको जमद्वानत पर छकोड़ वदयद्वा जद्वाय।
5. पररवद्वादश्री कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा दद्वारद्वा आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा कवे कथनयों कद्वा समथरन वकयद्वा गयद्वा तथद्वा आववेदक कद्वा जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वापत स्वश्रीकद्वार वकयवे जद्वानवे मम उनहम ककोई आपधत्ति नहहीं हहै।
6.
उभयपक्ष कवे ववदद्वान अधधिवकद्वागर कवे तकरटं कवे पररप्रवेक्ष्य मम पतद्वावलश्री पर उपलब्धि सद्वारवद्वान तथ्ययों एवटं पररणस्थवतययों कद्वा समग्रि रूप सवे अवलकोकन करनवे कवे बद्वाद, सबझूतयों ककी प्रकक वत और वकसश्री भश्री ठकोस ववरकोधिद्वात्मक सद्वामग्रिश्री ककी अनशुपणस्थवत एवटं उपलब्धि सद्वामग्रिश्री सवे छवेड़छद्वाड़ ककी सटंभद्वावनद्वा न हकोनवे कवे तथ्य कको दवेखतवे हहए मवेरश्री रद्वाय मम आववेदक कको जमद्वानत पर मशुक करनवे कद्वा उपयशुक आधिद्वार हहै।
7. अतनः वद्वाद कवे गशुर-दकोष पर वबनद्वा ककोई वटप्परश्री वकए हहए आववेदक कको उपरकोक ववररत अपरद्वाधि मम सटंबटंधधित नयद्वायद्वालय ककी सटंतशुवष्ट पर व्यवकगत बटंधि -पत एवटं अधधिक धिनरद्वावशि कवे ककोई भश्री दको प्रवतभझू प्रस्तशुत करनवे पर वनम्नधलधखत शितरटं कवे सद्वाथ जमद्वानत पर छकोड़ वदयद्वा जद्वाय।
i. आववेदक ववववेचनद्वा यद्वा परश्रीक्षर कवे दसौरद्वान अवभयकोजन सद्वाक्ष्ययों कवे सद्वाथ छवेड़छद्वाड़ नहहीं करवेगद्वा। ii. आववेदक अवभयकोजन सद्वावक्षययों व पश्रीवड़तद्वा / वशिकद्वायतकतद्वार कको डरद्वायवेगद्वा/धिमकद्वायवेगद्वा नहहीं। iii. आववेदक नयद्वायद्वालय कवे आदवेशियों कद्वा पद्वालन करवेगद्वा , वह परश्रीक्षर कवे दसौरद्वान वबनद्वा ककोई अनद्वावश्यक स्थगन धलए वनयत वतधथ पर नयद्वायद्वालय मम उपणस्थत हकोगद्वा तथद्वा परश्रीक्षर मम ईमद्वानदद्वारश्री सवे सहयकोग करवेगद्वा। iv. आववेदक जमद्वानत पर ररहद्वा हकोनवे कवे बद्वाद जमद्वानत ककी स्वतटंततद्वा कद्वा दशुरूपयकोग नहश्री करवेगद्वा और वकसश्री भश्री अपरद्वाधधिक गवतववधधि मम धलप्त नहहीं हकोगद्वा न ककोई अपरद्वाधधिक कक त्य करवेगद्वा। v. आववेदक प्रत्यक्ष यद्वा अप्रत्यक्ष रूप सवे मद्वामलवे कवे तथ्ययों सवे पररवचत वकसश्री भश्री व्यवक यद्वा पशुधलस अधधिकद्वाररययों कको ककोई प्रलकोभन यद्वा धिमककी नहहीं दवेगद्वा न हश्री उनसवे ककोई वद्वायदद्वा करवेगद्वा, धजसकवे कद्वारर उनहम नयद्वायद्वालय मम तथ्ययों कको उजद्वागर करनवे सवे ववरत रहनद्वा पडवेडे़।
8. उपरकोक शितरटं मम सवे वकसश्री कवे उलटंघन कवे मद्वामलवे मम , परश्रीक्षर नयद्वायद्वालय आववेदक ककी जमद्वानत वनयमद्वानशुसद्वार रद्द करनवे कको स्वतटंत हहै। Order Date :- 21.8.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad