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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 15790 (ALL)
MUSTAKEEM @ MUSAHID v. STATE OF U.P.
BAIL/3936/2025 · 2025-07-24
Gautam Chowdhary
body2025
[ 2025 DAILYLAW 15790 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC:123326 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 3936 of 2025 Applicant :- Mustakeem @ Musahid Opposite Party :- State of U.P. Counsel for Applicant :- Irshad Ahmad Counsel for Opposite Party :- Adil Khan,G.A. Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J.
1. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा शश्री इरशद अहमत , पररवद्वादश्री कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा शश्री आवदल खद्वान एववं रद्वाज्य ककी तरफ सवे ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा कको ससुनद्वा तथद्वा पतद्वावलश्री कद्वा पररशश्रीलन वकयद्वा।
2. वतरमद्वान दद्वाणणण्डिक प्रककीरर जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वा पत आववेदक Mustakeem @ Musahid ककी ओर सवे मसु०अ०सवं० 306/2024, अवंतररत धिद्वारद्वा 318(4), 338, 336(3), 340(2), 352, 351(3) बश्री.एन.एस., थद्वानद्वा सम्भल, धजलद्वा सम्भल मम जमद्वानत पर मसुक करनवे हवेतसु प्रस्तसुत वकयद्वा रयद्वा हहै।
3. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा नवे तकर प्रस्तसुत वकयद्वा वक आववेदक कको इस प्रकरर मम रलत एववं फजर्जी ढवंर सवे झझूठद्वा फवं सद्वायद्वा रयद्वा हहै, उसनवे कधथत अपरद्वाधि कद्वाररत नहहीं वकयद्वा हहै। आववेदक दद्वारद्वा ऐसद्वा ककोई भश्री कक त्य कद्वाररत नहहीं वकयद्वा रयद्वा हहै, जहैसद्वावक प्रद्वाथवमककी मम दवशरत वकयद्वा रयद्वा हहै। प्रद्वाथवमककी अवत-ववलणम्बत हहै तथद्वा उक ववलम्ब कद्वा ककोई समसुवचित स्पषश्रीकरर नहहीं वदयद्वा रयद्वा हहै। आववेदक दद्वारद्वा सझूचिनद्वाकतद्वार कवे सद्वाथ मद्वारपश्रीट नहहीं ककी रयश्री हहै , न हश्री ककोई कझू टरवचित दस्तद्वाववेज तहैयद्वार वकयद्वा हहै। घटनद्वा कद्वा ककोई स्वतवंत सद्वाकश्री नहहीं हहै। वतरमद्वान वद्वाद दश्रीवद्वानश्री प्रकक वत कद्वा हहै, वकन्तसु जद्वान-बझूझकर इसवे आपरद्वाधधिक रूप वदयद्वा रयद्वा हहै। उक वद्वाद मम सह -अवभयसुक मसुदणस्सर उफर मसुजद्वावहद ककी जमद्वानत दद्वाणणण्डिक प्रककीरर जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वापत सवं० 4288/2025, आदवेश वदनद्वावंवकत 05.04.2025 कवे दद्वारद्वा स्वश्रीकक त ककी जद्वा चिसुककी हहै। अततः समद्वानतद्वा कवे आधिद्वार पर आववेदक भश्री जमद्वानत पद्वानवे कद्वा अधधिकद्वारश्री हहै। पसुनतः उनकद्वा यह भश्री कथन हहै वक आववेदक ककी तरफ सवे यह आश्वद्वासन वदयद्वा रयद्वा हहै वक वह कद्वानझून ककी प्रवक्रियद्वा मम सहयकोर करनवे कवे धलए तहैयद्वार हहै और जब भश्री आवश्यकतद्वा हकोरश्री वह ईमद्वानदद्वारश्री सवे अदद्वालत कवे समक खसुद कको उपलब्धि करद्वाएरद्वा और उन सभश्री शतरवं कको स्वश्रीकद्वार करनवे कवे धलए भश्री तहैयद्वार हहै जको न्यद्वायद्वालय उस पर अधधिरकोवपत करवेरश्री। आववेदक वनदरष हहै तथद्वा वह इस प्रकरर मम वद० 10.11.2024 सवे कद्वारद्वारद्वार मम वनरुद्ध हहै। इसधलए आववेदक कको जमद्वानत पर छकोड़ वदयद्वा जद्वाय।
4. पररवद्वादश्री कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा एववं ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा नवे आववेदक कवे
जमद्वानत कद्वा प्रबल ववरकोधि करतवे हहए तकर प्रस्तसुत वकयद्वा वक आववेदक दद्वारद्वा कद्वाररत अपरद्वाधि सवंवंजवेय एववं रवंभश्रीर प्रकक वत कद्वा हहै, इसधलए आववेदक कको जमद्वानत पर न छकोड़द्वा जद्वाय।
5.
आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा कवे तकरवं कवे पररप्रवेक्ष्य मम पतद्वावलश्री पर उपलब्धि सद्वारवद्वान तथ्ययों एववं पररणस्थवतययों कद्वा समग्र रूप सवे अवलकोकन करनवे कवे बद्वाद , सबझूतयों ककी प्रकक वत और वकसश्री भश्री ठकोस ववरकोधिद्वात्मक सद्वामग्रश्री ककी अनसुपणस्थवत एववं उपलब्धि सद्वामग्रश्री सवे छवेड़छद्वाड़ ककी सवंभद्वावनद्वा न हकोनवे कवे तथ्य कको दवेखतवे हहए मवेरश्री रद्वाय मम आववेदक कको जमद्वानत पर मसुक करनवे कद्वा उपयसुक आधिद्वार हहै।
6. अततः वद्वाद कवे रसुर -दकोष पर वबनद्वा ककोई वटप्परश्री वकए हहए आववेदक कको उपरकोक ववररत अपरद्वाधि मम सवंबवंधधित न्यद्वायद्वालय ककी सवंतसुवष पर व्यवकरत बवंधि-पत एववं अधधिक धिनरद्वावश कवे ककोई भश्री दको प्रवतभझू प्रस्तसुत करनवे पर वनम्नधलधखत शतरवं कवे सद्वाथ जमद्वानत पर छकोड़ वदयद्वा जद्वाय। i. आववेदक ववववेचिनद्वा यद्वा परश्रीकर कवे ददौरद्वान अवभयकोजन सद्वाक्ष्ययों कवे सद्वाथ छवेड़छद्वाड़ नहहीं करवेरद्वा। ii. आववेदक अवभयकोजन सद्वावकययों व पश्रीवड़तद्वा/ वशकद्वायतकतद्वार कको ण्डिरद्वायवेरद्वा/धिमकद्वायवेरद्वा नहहीं। iii. आववेदक न्यद्वायद्वालय कवे आदवेशयों कद्वा पद्वालन करवेरद्वा , वह परश्रीकर कवे ददौरद्वान वबनद्वा ककोई अनद्वावश्यक स्थरन धलए वनयत वतधथ पर न्यद्वायद्वालय मम उपणस्थत हकोरद्वा तथद्वा परश्रीकर मम ईमद्वानदद्वारश्री सवे सहयकोर करवेरद्वा। iv. आववेदक जमद्वानत पर ररहद्वा हकोनवे कवे बद्वाद जमद्वानत ककी स्वतवंततद्वा कद्वा दसुरूपयकोर नहश्री करवेरद्वा और वकसश्री भश्री अपरद्वाधधिक रवतववधधि मम धलप्त नहहीं हकोरद्वा न ककोई अपरद्वाधधिक कक त्य करवेरद्वा। v. आववेदक प्रत्यक यद्वा अप्रत्यक रूप सवे मद्वामलवे कवे तथ्ययों सवे पररवचित वकसश्री भश्री व्यवक यद्वा पसुधलस अधधिकद्वाररययों कको ककोई प्रलकोभन यद्वा धिमककी नहहीं दवेरद्वा न हश्री उनसवे ककोई वद्वायदद्वा करवेरद्वा , धजसकवे कद्वारर उन्हम न्यद्वायद्वालय मम तथ्ययों कको उजद्वारर करनवे सवे ववरत रहनद्वा पण्डिवेडे़।
7. उपरकोक शतरवं मम सवे वकसश्री कवे उलवंघन कवे मद्वामलवे मम , परश्रीकर न्यद्वायद्वालय आववेदक ककी जमद्वानत वनयमद्वानसुसद्वार रद्द करनवे कको स्वतवंत हहै। Order Date :- 25.7.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad