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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 157751 (ALL)

INDREMANI MISHRA v. STATE OF U.P. THRU. ADDL. CHIEF SECY. HOME LKO.

NABAIL/1030/2025 · 2025-08-19

Subhash Vidyarthi

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:48492 Court No. - 13 Case :- CRIMINAL MISC. ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 482 BNSS No. - 1030 of 2025 Applicant :- Indremani Mishra Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Addl. Chief Secy. Home Lko. Counsel for Applicant :- Satyendra Nath Mishra Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J. 1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री सत्यकेन्द्र नप्रार वमिशप्रा तरप्रा वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा परमि शश्री मिमो० आधसफ खप्रान कमो ससुनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा अविलमोकन वकयप्रा। 2. धिप्रारप्रा 438 ददं०प०सदं० दप्रारप्रा पस्तसुत पप्राररनप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मिसुकदमिप्रा अपरप्राधि सदंख्यप्रा 95 सन 2025 अन्तररत धिप्रारप्रा 3(1) उ०प० वररमोहबन्द समिप्राज वविरमोधिश्री वक्रियप्राकलप्राप (वनविप्रारण) अधधिवनयमि रप्रानप्रा कररौंदश्रीकलप्रादं धजलप्रा ससुल्तप्रानपसुर मिम अवग्रिमि जमिप्रानत ककी पप्राररनप्रा ककी हहै। 3. उपरमोक पकरण एक पसुधलस पभप्रारश्री वनरश्रीक्षक दप्रारप्रा वदनप्रादंक 15.05.2025 कमो पप्रारर्थी सवहत 4 अन्य नप्रावमित व्यवकययों कके वविरुद्ध धलखप्राई रई परमि ससूचनप्रा ररपमोरर कके आधिप्रार पर सदंसस्रत हहआ, धजसमिम कहप्रा रयप्रा वक अवभयसुकरण नके एक सदंरवठित वररमोह बनप्रा रखप्रा हहै। 4. पप्राररनप्रा-पत कके सप्रार पस्तसुत शपर-पत मिम कहप्रा रयप्रा हहै वक पप्रारर्थी वनदर्दोष हहै और उसकप्रा कमोई पसूविर आपरप्राधधिक इवतहप्रास नहहीं हहै। 5. परमि ससूचनप्रा ररपमोरर कके सप्रार सदंलग्न रगर चप्रारर मिम मिप्रात एक आपरप्राधधिक पकरण मिम पप्रारर्थी ककी सदंधलप्ततप्रा दशप्रारयश्री रयश्री हहै धजनमिम उसकमो कमो जमिप्रानत पर ररहप्रा वकयके जप्रानके कप्रा आदकेश हमो चसुकप्रा हहै। 6. उपरमोक तथ्ययों कमो दृवष्टिरत रखतके हहए , जबवक रगर चप्रारर मिम विवणरत एक मिप्रात आपरप्राधधिक पकरण मिम पप्रारर्थी कमो जमिप्रानत पर ररहप्रा वकयप्रा जप्रा चसुकप्रा हहै, न्यप्रायप्रालय कप्रा मित हहै वक पप्रारर्थी अवग्रिमि जमिप्रानत पप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हहै। 7. तद्नसुसप्रार, अवग्रिमि जमिप्रानत पप्राररनप्रा-पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जप्रातप्रा हहै। 8. उपरमोक मिसुकदमिप्रा अपरप्राधि सदंख्यप्रा मिम आविकेदक ककी वररफ्तप्रारश्री /न्यप्रायप्रालय कके समिक्ष उपसस्रवत ककी दशप्रा मिम , उसके सदंबदंधधित रप्रानके कके भप्रारसप्राधिक अधधिकप्रारश्री /न्यप्रायप्रालय ककी सदंतसुवष्टि कके अनसुसप्रार व्यवकरत बदंधि पत एविदं दमो पवतभसू पस्तसुत करनके पर परश्रीक्षण कके अदंवतमि रूप सके वनस्तप्रारण तक, वनम्न शतर्दोदं कके अधिश्रीन अवग्रिमि जमिप्रानत पर ररहप्रा वकयप्रा जप्राएरप्राग- क- आविकेदक, यवद आविश्यक हमोरप्रा तमो पसुधलस अधधिकप्रारश्री दप्रारप्रा जजॉच हकेतसु अपकेवक्षत समिय पर उपसस्रत हमोरप्रा; ख- आविकेदक मिप्रामिलके कके तथ्ययों सके पररवचत वकसश्री व्यवक यप्रा पसुधलस अधधिकप्राररययों कमो पत्यक्ष यप्रा परमोक्ष रूप सके कमोई धिमिककी , विप्रादप्रा यप्रा पलमोभन नहहीं दकेरप्रा धजससके वक विह ऐसके तथ्य कमो न्यप्रायप्रालय कके समिक्ष यप्रा वकसश्री पसुधलस अधधिकप्रारश्री कके समिक्ष पकर न करनके पर मिप्रान जप्राए; र- आविकेदक अदप्रालत ककी पसूविर अनसुमिवत कके वबनप्रा भप्रारत नहहीं छमोडकेरप्रा; घ- आविकेदक कमो पत्यकेक वनधिप्रारररत वतधर पर रटप्रायल कमोरर कके समिक्ष उपसस्रत हमोनप्रा हमोरप्रा, जब तक वक व्यवकरत उपसस्रवत सके छसू र न दश्री रयश्री हमो; ङ- आविकेदक अवभयमोजन पक्ष कके रविप्राह पर दबप्रावि नहहीं डप्रालकेरप्रा / धिमिककी नहहीं दकेरप्रा; च- आविकेदक वविविकेचनप्रा एविदं वविचप्रारण कके ददौरप्रान सहयमोर करमरके और जमिप्रानत ककी स्वितदंततप्रा कप्रा दसुरुपयमोर नहहीं करकेरप्रा। [Subhash Vidyarthi,J.] Order Date :- 19.8.2025 Ankit Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench