SANJAY KUMAR v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME LKO. AND 3 OTHERS
CRLR/850/2025 · 2025-08-07
Saurabh Lavania
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[ 2025 DAILYLAW 156705 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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1 Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:46031 Court No. - 11 Case :- CRIMINAL REVISION No. - 850 of 2025 Revisionist :- Sanjay Kumar Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Lko. And 3 Others Counsel for Revisionist :- Rama Shanker,Rakesh Pratap Singh Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Saurabh Lavania,J.
1. Heard learned counsel for the revisionist, learned AGA for the State and perused the record. 2. This Criminal Revision under Section 19 (4) of the Family Court Act, 1984 has been filed impeaching the judgment and order dated 03.06.2025, passed by the Principal Judge, Family Court, Ambedkar Nagar (in short "Family Court") in Maintenance Petition No.50 of 2022 (Shakuntala Devi and others Vs. Sanjay Kumar) filed under Section 125 Cr.P.C.
3. By the impugned, the Family Court has directed the revisionist to pay Rs.5000/- as maintenance to the opposite party No.2 and Rs.2500/- each to the opposite party Nos. 3 and 4. 4. For coming to the conclusion on the prayer sought this court took note of the facts of the case as also the observations made by the Family Court in the impugned order dated 03.06.2025. 5. A case i.e. Maintenance Petition No.50 of 2022 (Computerized Case No.69 of 2022) (Shakuntala and others Vs. Sanjay Kumar) was filed by the opposite party Nos.2, 3 and 4 (in short "claimants", who are wife and two minor children, aged about 13 and 8 years respectively). 6. Before the Family Court, regarding the income of the revisionist, the claimants stated that the present revisionist is earning Rs.70,000/- per month, which could not be established by the claimants before the Family Court. 7. The Family Court taking note of the statement of the revisionist according to which the revisionist is earning by discharging the duties of the post of Guard/Watchman at Police Station Akhand Nagar, District Sultanpur as also having agricultural land, the Family Court directed the revisionist to pay Rs.5,000/- to the opposite party No.2- Shakuntala (wife
2 of the revisionist) and Rs.2,500/- each to the two children namely Parul (daughter) and Prakhar (son). 8. The present revision has been filed based upon the ground that the opposite party No.2 is an earning lady and therefore, the Family Court in awarding Rs.5,000/- per month as maintenance to the opposite party No.2 has erred in law. 9.
On the aforesaid aspect of the case, this Court took note of the observations made by the Family Court in paragraph 11 of the order under challenge, which, for ready reference, is extracted herein under :-
"11. निस्तारण अवधार्य
प्रश्न संख्र्या- (1) अवधार्य
प्रश्न संख्र्या-1 इस आशर्य का निवरचित निकर्या गर्या है निक क्र्या परिरवानिर्यागण अपा भरण-पोषण करे में असमर्थ
है ?
9. On the aforesaid aspect of the case, this Court took note of the observations made by the Family Court in paragraph 11 of the order under challenge, which, for ready reference, is extracted herein under :-
"11. निस्तारण अवधार्य
प्रश्न संख्र्या- (1) अवधार्य
प्रश्न संख्र्या-1 इस आशर्य का निवरचित निकर्या गर्या है निक क्र्या परिरवानिर्यागण अपा भरण-पोषण करे में असमर्थ
है ? परिरवानिर्या संख्र्या-1 े अपे भरण-पोषण परिरवा के प्रस्तर 10 में तथ्र्य प्रकट निकर्या है निक वह निांक-20.05.2016 से अपे माता-निपता के घर अपे ोो ाबालि,ग बच्चों के सार्थ आभाव में जी रही है। सार्थ ही परिरवा के प्रस्तर 12 में तथ्र्य प्रकट निकर्या है निक परिरवानिर्या संख्र्या-1 असहार्य मनिह,ा है जो स्वर्यं अपा व अपे ाबालि,ग बच्चों को जीव निवा ह करे में सक्षम हीं है और पचित पर पूण रूप से आश्रि8त है। परिरवा के उक्त तथ्र्यों के सापेक्ष निवपक्षी े अपे उत्तरपत्र (11 ब) के प्रस्तर 2 में तथ्र्य प्रकट निकर्या है निक परिरवानिर्या संख्र्या-1 पढ़ी लि,खी है। निवपक्षी व उसके परिरवार वा,ो े परिरवानिर्या संख्र्या-1 को बी०टी०सी० की श्रिशक्षा करार्यी और परिरवानिर्या संख्र्या-1 की ौकरी श्रिशक्षानिमत्र के रूप में प्रार्थनिमक निवद्या,र्य बारी सनिहज, रतपुर, जप सु,तापुर में ,गा र्था। कु छ नि बा परिरवानिर्या संख्र्या-1 की निर्युनिक्त स्र्थाई रूप से प्रार्थनिमक निवद्या,र्य ताजुद्दीपुर, सु,तापुर में हुई। वहाँ परिरवानिर्या संख्र्या-1 का वेत 50 हजार रूपर्या से अचिधक र्था और वह सरकारी अध्र्यानिपका के रूप में कई वषI तक कार्य रत रही है। निवपक्षी के उत्तरपत्र (11 ब ) के उक्त तथ्र्यों से ऐसा प्रतीत होता है निक परिरवानिर्या संख्र्या -1 श्रिशचिक्षका के तौर पर कई वषI तक कार्य रत रही है। निकन्तु निवपक्षी के उत्तरपत्र में र्यह तथ्र्य स्पष्ट ही होता है निक परिरवा र्योजिजत होे के निांक को भी परिरवानिर्या संख्र्या -1 श्रिशचिक्षका के तौर पर कार्य रत है। सम्भवता इसी कारण निवपक्षी ( डी०डब्,ू० 1) संजर्य कु मार े अपे साक्ष्र्य शपर्थपत्र (17 अ ) के प्रस्तर 10 में सशपर्थ कर्थ निकर्या है निक परिरवानिर्या संख्र्या -1 एक हुरमं श्रिशचिक्षत मनिह,ा है जो अपे मार्यके में ट्यूश कोचिंग ,ाकर अच्छे तरीके से आर्य अर्जिजत कर रही है और अपा व बच्चों को भरण - पोषण कर रही है। साक्ष्र्य शपर्थपत्र (17 अ ) के उक्त सशपर्थ कर्थों से र्यह स्पष्ट है निक अद्यत रूप से परिरवानिर्या संख्र्या -1 श्रिशचिक्षका के तौर पर कार्य रत हीं है। इस संबंध में निवपक्षी ( डी०डब्,ू० 1) संजर्य से की गई प्रचितपरीक्षा में र्यह स्वीकार निकर्या है निक र्यह कहा सही है निक शकु न्त,ा वष 2016 से कोई ौकरी हीं कर रही है। इस प्रकार निवपक्षी ( डी०डब्,ू० 1) संजर्य कु मार के मुख्र्य परीक्षा साक्ष्र्य शपर्थपत्र (17 अ ) के प्रस्तर 10 एवं प्रचितपरीक्षा के उक्त कर्थ से र्यह एकम स्पष्ट है निक परिरवानिर्या संख्र्या -1 वष 2016 से तर्थाकश्रिर्थत श्रिशचिक्षका की ौकरी हीं कर रही है। इसके
बावजू निवपक्षी द्वारा भ्रामक तरीके से अपे जवाबावें एवं साक्ष्र्य शपर्थपत्र में इस प्रकार व निकर्यें है निक जिजससे ऐसा दृश्र्यमा हो निक परिरवानिर्या संख्र्या -1 अद्यत रूप से श्रिशचिक्षका की ौकरी कर रही है। ऐसे छद्म अश्रिभव निवपक्षी की परिरवानिर्या संख्र्या -1 को जाबूझकर भरण - पोषण करे से उपेक्षा करे के तथ्र्य को अवधारिरत करे को बाध्र्य भी करती है। निवपक्षी द्वारा साक्ष्र्य शपर्थपत्र (17 अ) के प्रस्तर 10 में परिरवानिर्या संख्र्या-1 द्वारा मार्यके में ट्यूश कोचिंग ,ाकर अपा व अपे बच्चों का भरण-पोषण करे का कर्थाक 3 प्रर्थम बार शपर्थपत्र (17 अ) में प्रकट निकर्या है। र्यनि उक्त तथ्र्य में सत्र्यता रहती तो परिरवानिर्या संख्र्या - 1 द्वारा मार्यके में ट्यूश पढ़ाे का तथ्र्य उत्तरपत्र (11 ब) के अवसर पर भी उत्तरपत्र में समावेश होकर आ जाा ानिहए र्था। ऐसे में शपर्थपत्र (17 अ) में प्रर्थम बार परिरवानिर्या संख्र्या-1 का मार्यके में ट्यूश कोचिंग ,ाकर अच्छे तरीके से आर्य अर्जिजत करे का तथ्र्य माे जाे र्योग्र्य ही है। निवपक्षी द्वारा साक्ष्र्य शपर्थपत्र (17 अ ) के प्रस्तर 10 में परिरवानिर्या संख्र्या -1 द्वारा ट्यूश कोचिंग ,ाकर आर्य अर्जिजत करे के संबंध में कोई ठोस आकडे आर्य के संबंध में अंनिकत हीं निकर्ये है और ही अन्र्य कोई साक्ष्र्य प्रस्तुत की है निक जिजससे र्यह माा जा सके निक परिरवानिर्या संख्र्या -1 के मार्यके में ट्यूश कोचिंग ,ाकर अच्छे तरीके से आर्य अर्जिजत कर अपा व अपे बच्चों को अच्छे तरीके से भरण - पोषण कर रही हो। एतद् परिरवानिर्या संख्र्या -1 वष 2016 से तर्थाकश्रिर्थत श्रिशचिक्षका / श्रिशक्षानिमत्र की ौकरी ,े जाे के कारण अपे परिरवापत्र के प्रस्तर 10 एवं प्रस्तर 12 के अुरूप निांक -20.05.2016 से अपे माता - निपता के घर अपे ोों ाबालि,ग बच्चों के सार्थ आभाव में जीव जी रही है तर्था परिरवानिर्या संख्र्या -1 अपे तर्था अपे ाबालि,ग बच्चों को जीव निवा ह करे में सक्षम हीं है और निवपक्षी पर पूण रूप से आश्रि8त है। इससे स्पष्ट है निक परिरवानिर्या संख्र्या-1
की कोई व्र्यनिक्तगत आमी भरण-पोषण हेतु मौजू ही है जिजससे निक वह अपा व अपी पुत्री परिरवानिर्या संख्र्या-2 तर्था पुत्र परिरवानिर्या संख्र्या-3 का र्यर्थोचित भरण-पोषण कर सके और परिरवानिर्या संख्र्या-1 अपे मार्यके में अपे बच्चों सनिहत रहकर निकसी तरह गुजर बसर कर रही है। ऐसे में न्र्यार्या,र्य का समाधा हो जाता है निक परिरवानिर्यागण अपा भरण-पोषण करे में असमर्थ है? तुसार र्यह अवधार्य
प्रश्न संख्र्या-1 परिरवानिर्यागण के पक्ष में निर्णिणत निकर्या जाता है।"
10. On the aforesaid aspect of the case, this Court also took note of annexures annexed to the present revision. 11. Upon due consideration of the aforesaid, this Court finds that at the time of filing of the claim, i.e. the Maintenance Petition No. 50 of 2022, the opposite party No.2 was not working. In other words, she was not an earning lady and the revisionist tried to mislead the Family Court as also this court on the aforesaid aspect of the case. 12. For the aforesaid reasons, this Court finds that in the instant revision, no interference is required. It is accordingly dismissed. Order Date :- 7.8.2025 ML/- Digitally signed by :- MUNNA LAL High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench