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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 156286 (ALL)

RAVINDRA YADAV v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME LKO. AND ANOTHER

ABAIL/878/2025 · 2025-08-18

Subhash Vidyarthi

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:48103 Court No. - 13 Case :- CRIMINAL MISC ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 438 CR.P.C. No. - 878 of 2025 Applicant :- Ravindra Yadav Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Lko. And Another Counsel for Applicant :- Dilip Kumar Pandey,Praveen Kumar Sharma Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J. 1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री वदिलश्रीप कक मप्रार पप्रापांडकेय तरप्रा वविदप्रान अवतररक शप्रासककीय अधधिविकप्रा शश्री अभय कक मप्रार धसपांह कको सकनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा अविलकोकन वकयप्रा। 2. भप्रारतश्रीय नप्रागररक सकरकप्रा सपांवहतप्रा ककी धिप्रारप्रा 482/438 दिपां०प०सपां० कके अपांतगरत पस्तकत इस पप्राररनप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मककदिमप्रा अपरप्राधि सपांख्यप्रा 18 सन 2020 अन्तगरत धिप्रारप्रा 18/27 औषधधि एविपां पसप्राधिन सप्रामगश्री अधधि० 1940, रप्रानप्रा बघघौलश्री, धजिलप्रा हरदिकोई मम अवगम जिमप्रानत ककी पप्राररनप्रा ककी हहै। 3. उपरकोक पकरण एक औषधधि वनरश्रीकक दप्रारप्रा पस्तकत वकए गए पररविप्रादि कके आधिप्रार पर सपांसस्रत हहआ, धजिसमम कहप्रा गयप्रा हहै वक पप्रारर्थी सके ऑक्सश्रीटकोधसन इपांजिकेक्शन ककी 42 शश्रीवशयप्रापां बरप्रामदि हहईपां तरप्रा उसनके कहप्रा वक यह पशकपप्रालक, पशक सके ज्यप्रादिप्रा दिदधि लकेनके कके धलए, उससके खरश्रीदि कर लगप्रातके हह। पररविप्रादि मम यह भश्री कहप्रा गयप्रा हहै वक पप्रारर्थी सके 5800 शश्रीशश्री कहै सपसकम वटपांचर भश्री बरप्रामदि हहआ रप्रा। उपरकोक कके सपांबपांधि मम पप्रारर्थी कके वविरुद्ध एक परम सदचनप्रा ररपकोटर सपांख्यप्रा 18 सन 2020, रप्रानप्रा बघघौलश्री, जिनपदि हरदिकोई मम धिप्रारप्रा 60, उत्तर पदिकेश उत्पप्रादि शकल्क/आबकप्रारश्री अधधिवनयम तरप्रा धिप्रारप्रा 207 मकोटर विप्राहन अधधिवनयम कके अन्तगरत अपांवकत हहई रश्री, धजिसमम पप्रारर्थी कको जिमप्रानत वमल चकककी हहै। 4. पप्राररनप्रा पत कके सप्रार पस्तकत शपर पत मम कहप्रा गयप्रा हहै वक पप्रारर्थी वनदिर्दोष हहै। 5. वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा नके पप्राररनप्रा पत कप्रा वविरकोधि करतके हहए कहप्रा वक पप्रारर्थी दप्रारप्रा कप्राररत अपरप्राधि जिघन्य पकक धत्त कप्रा हहै , क्ययोंवक इससके जिन सप्रामप्रान्य कके स्विप्रास्थ्य एविपां पशकओपां कके स्विप्रास्थ्य पर वविपरश्रीत पभप्रावि पड़तप्रा हहै। उन्हयोंनके यह भश्री कहप्रा वक पप्रारर्थी कके वविरुद्ध धिप्रारप्रा 82 दिपांड पवक्रियप्रा सपांवहतप्रा ककी कप्रायरविप्राहश्री सपांसस्रत हको चकककी हहै। उन्हयोंनके यह भश्री कहप्रा वक बरप्रामदि ककी गई दिविप्रा जिप्रापांच मम ऑक्सश्रीटकोधसन पप्राई गई हहै, जिको वक पवतबपांधधित दिविप्रा हहै। 6. लगप्राए गए आरकोपयों ककी पकक वत एविपां पप्रारर्थी कके इस आचरण पर उसकके वविरुद्ध धिप्रारप्रा 82 दिपां०प०सपां० ककी कप्रायरविप्राहश्री सपांसस्रत हकोनके कके बप्राविजिददि , विह वविचप्रारण न्यप्रायप्रालय कके समक उपसस्रत नहहीं हहआ हहै, न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हहै वक पस्तकत पकरण मम पप्रारर्थी कको अवगम जिमप्रानत वदिए जिप्रानके कप्रा ककोई आधिप्रार नहहीं हहै। 7. तदिनकसप्रार, यह पप्राररनप्रा पत वनरस्त वकयप्रा जिप्रातप्रा हहै। 8. यवदि पप्रारर्थी वविचप्रारण न्यप्रायलय कके समक उपसस्रत हकोकर जिमप्रानत पर ररहप्राई हकेतक पप्राररनप्रा पत दिकेतप्रा हहै तको उसके मप्राननश्रीय उच्चतम न्यप्रायप्रालय दप्रारप्रा सतमदिर कक मप्रार अपांवतल बनप्राम सश्री.बश्री.आई., (2021) 10 एससश्रीसश्री 773 मम अविधिप्राररत वविधधिक धसद्धप्रापांतयों कके आलकोक मम उसके अवगम जिमप्रानत पप्राररनप्रा-पत कके वनरस्तश्रीकरण सके पभप्राववित हहए वबनप्रा, गकण-दिकोष कके आधिप्रार वविधधि अनकसप्रार शश्रीघप्रातपदविरक वनस्तप्राररत वकयप्रा जिप्राएगप्रा। Order Date :- 18.8.2025 Himanshu Digitally signed by :- HIMANSHU SHUKLA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench