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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 155969 (ALL)

RISHI VERMA @ RISHI YADAV v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME DEPTT. U.P. GOVT. LKO. AND ANOTHER

NABAIL/977/2025 · 2025-08-07

Subhash Vidyarthi

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:46135 Court No. - 13 Case :- CRIMINAL MISC. ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 482 BNSS No. - 977 of 2025 Applicant :- Rishi Verma @ Rishi Yadav Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Deptt. U.P. Govt. Lko. And Another Counsel for Applicant :- Seraj Ahmad,Farhan Ahmad Khan,Sandeep Kumar Ojha,Shrikant Tripathi,Touqeer Ahmad Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J. 1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री धसिरप्राज अहमद तरप्रा वविदप्रान अपर शप्रासिककीय अधधिविकप्रा शश्री मनश्रीष वविक्रम धसिसिंह चचौहप्रान कको सिसुनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा अविलकोकन वकयप्रा। 2. पप्रारर्थी नके एक पपूरक शपर-पत कके मप्राध्यम सिके परम सिपूचनप्रा ररपकोरर ककी एक सिप्राफ पवत पस्तसुत ककी धजसिके अवभिलकेख पर धलयप्रा जप्राय। 3. धिप्रारप्रा 482 भिप्रारतश्रीय नप्रागररक सिसुरकप्रा सिसिंवहतप्रा कके असिंतगरत पस्तसुत पप्राररनप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मसुकदमप्रा अपरप्राधि सिसिंख्यप्रा 232 सिन 2025 अन्तगरत धिप्रारप्रा 351(2), 131, 324(4), 309(4) बश्री०एन०एसि० रप्रानप्रा पश्री०जश्री०आई० धजलप्रा लखनऊ मम अवग्रिम जमप्रानत ककी पप्राररनप्रा ककी हहै। 4. वदनप्रासिंक 21.05.2025 कको पप्रारर्थी सिवहत 3 व्यवकययों कके वविरुद्ध धलखप्राई गई परम सिपूचनप्रा ररपकोरर मम वशकप्रायतकतप्रार नके कहप्रा वक रप्रात मम कप्राम सिके विप्रापसि आतके सिमय तश्रीनयों अवभियसुकयों नके उसिके रकोक धलयप्रा, उसिके दचौडप्रायप्रा और मप्रारनके ककी ककोवशश ककी। वशकप्रायतकतप्रार विहप्रासिं सिके भिप्राग वनकलप्रा और उसिकके बप्राद मम अवभियसुकगण नके चप्रासिंदश्री ककी चकेन तकोड लश्री। 5. पप्राररनप्रा-पत कके सिप्रार पस्तसुत शपर-पत मम कहप्रा गयप्रा वक पप्रारर्थी एक 19 विषर्थीय वनदर्दोष नवियसुविक हहै और उसिकप्रा ककोई आपरप्राधधिक इवतहप्रासि नहहीं हहै। 6. वविदप्रान अपर शप्रासिककीय अधधिविकप्रा नके उनकको पप्राप्त अनसुदकेशयों कके आधिप्रार पर न्यप्रायप्रालय कको सिपूवचत वकयप्रा वक पप्रारर्थी कके वविरुद्ध मप्रात 351(2), 131 बश्री०एन०एसि० कके आरकोपयों ककी पसुवष्टि हहई हहै धजसिमम अधधिकतम दण्ड 7 विषर कके कप्रारप्राविप्रासि सिके दण्डनश्रीय हहै। 7. उपरकोक तथ्ययों कको दृवष्टिगत रखतके हहए, जबवक परम सिपूचनप्रा ररपकोरर मम मप्रात 3 लडकयों दप्रारप्रा वशकप्रायतकतप्रार कको दचौडप्रानके एविसिं मप्रारनके ककी ककोवशश करनके कप्रा करन वकयप्रा गयप्रा हहै ; वशकप्रायतकतप्रार नके कहप्रा वक उसिकके भिप्राग वनकलनके कके बप्राद अवभियसुकगण नके चप्रासिंदश्री ककी चकेन कको तकोड लश्री तरप्रा यह आरकोप पप्रारर्थी कके वविरुद्ध नहहीं लगप्रायप्रा गयप्रा हहै एविसिं पप्रारर्थी एक 19 विषर्थीय नवियसुविक हहै; धजसिकप्रा ककोई आपरप्राधधिक इवतहप्रासि नहहीं हहै, न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हहै वक पप्रारर्थी अवग्रिम जमप्रानत पप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हहै। 8. तद्नसुसिप्रार अवग्रिम जमप्रानत पप्राररनप्रा-पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जप्रातप्रा हहै। 9. उपरकोक मसुकदमप्रा अपरप्राधि सिसिंख्यप्रा मम आविकेदक ककी वगरफ्तप्रारश्री /न्यप्रायप्रालय कके सिमक उपसस्रवत ककी दशप्रा मम , उसिके सिसिंबसिंधधित रप्रानके कके भिप्रारसिप्राधिक अधधिकप्रारश्री /न्यप्रायप्रालय ककी सिसिंतसुवष्टि कके अनसुसिप्रार व्यवकगत बसिंधि पत एविसिं दको पवतभिपू पस्तसुत करनके पर परश्रीकण कके असिंवतम रूप सिके वनस्तप्रारण तक, वनम्न शतर्दोसिं कके अधिश्रीन अवग्रिम जमप्रानत पर ररहप्रा वकयप्रा जप्राएगप्राग- क- आविकेदक, यवद आविश्यक हकोगप्रा तको पसुधलसि अधधिकप्रारश्री दप्रारप्रा जजॉच हकेतसु अपकेवकत सिमय पर उपसस्रत हकोगप्रा। ख- आविकेदक मप्रामलके कके तथ्ययों सिके पररवचत वकसिश्री व्यवक यप्रा पसुधलसि अधधिकप्राररययों कको पत्यक यप्रा परकोक रूप सिके ककोई धिमककी , विप्रादप्रा यप्रा पलकोभिन नहहीं दकेगप्रा धजसिसिके वक विह ऐसिके तथ्य कको न्यप्रायप्रालय कके सिमक यप्रा वकसिश्री पसुधलसि अधधिकप्रारश्री कके सिमक पकर न करनके पर मप्रान जप्राए। ग- आविकेदक अदप्रालत ककी पपूविर अनसुमवत कके वबनप्रा भिप्रारत नहहीं छकोडकेगप्रा; घ- आविकेदक कको पत्यकेक वनधिप्रारररत वतधर पर रटप्रायल ककोरर कके सिमक उपसस्रत हकोनप्रा हकोगप्रा, जब तक वक व्यवकगत उपसस्रवत सिके छपू र न दश्री गयश्री हको; ङ- आविकेदक अवभियकोजन पक कके गविप्राह पर दबप्रावि नहहीं डप्रालकेगप्रा / धिमककी नहहीं दकेगप्रा। च- आविकेदक वविविकेचनप्रा एविसिं वविचप्रारण कके दचौरप्रान सिहयकोग करमगके और जमप्रानत ककी स्वितसिंततप्रा कप्रा दसुरुपयकोग नहहीं करकेगप्रा। [Subhash Vidyarthi,J.] Order Date :- 7.8.2025 Ankit Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench