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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 155800 (ALL)

SMT. GULSHAN THRU. HER HUSBAND AKBAR ALI AND ANOTHER v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME LKO. AND 4 OTHERS

/277/2025 · 2025-08-05

body2025

Judgment text

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Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:45349 Court No. - 13 Case :- HABEAS CORPUS WRIT PETITION No. - 277 of 2025 Petitioner :- Smt. Gulshan Thru. Her Husband Akbar Ali And Another Respondent :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Lko. And 4 Others Counsel for Petitioner :- Shitla Prasad Tripathi,Shivani Soni,Vibhuti Narayan Counsel for Respondent :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J. 1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री शश्रीतलप्रा पसप्राद वत्रिपप्राठश्री तरप्रा वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा परम शश्री रप्राजकेश कक मप्रार धससिंह कको सकनप्रा तरप्रा पत्रिप्राविलश्री कप्रा अविलकोकन वकयप्रा। 2. भप्रारतश्रीय ससिंवविधिप्रान कके अनकच्छकेद 227 कके असिंतररत पस्तकत इस बसिंदश्री पत्यकश्रीकरण यप्रावचिकप्रा दप्रारप्रा यप्रावचिकप्राकतप्रार ससिंख्यप्रा 1 कके पवत तरप्रा यप्रावचिकप्राकतप्रार ससिंख्यप्रा 2 कके वपतप्रा नके अपनके मप्राध्यम सके यह यप्रावचिकप्रा पस्तकत करतके हहए कहप्रा हहै वक यप्रावचिकप्राकतप्राररण वविपकश्री ससिंख्यप्रा 5 ककी अविहैधि अवभरकप्रा मम हह तरप्रा उन्हहोंनके यह यप्राचिनप्रा ककी हहै वक पप्रारर्थी यप्रावचिकप्राकतप्रार ससिंख्यप्रा 1 तरप्रा 2 कको वविपकश्री ससिंख्यप्रा 5 न्यप्रायप्रालय मम पस्तकत करकके अविहैधि अवभरकप्रा सके मकक कर दके। 3. इस ससिंबसिंधि मम यप्रावचिकप्राकतप्रार नके पकधलस अधिश्रीकक , लखश्रीमपकर खश्रीरश्री कको वदनप्रासिंक 23.07.2025 कको पसिंजश्रीकक त डप्राक कके मप्राध्यम सके एक पप्राररनप्रा-पत्रि भश्री भकेजप्रा रप्रा। 4. पप्राप्त धलधखत अनकदकेशहों कके आधिप्रार पर वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा परम नके यप्रावचिकप्रा कप्रा वविरकोधि करतके हहए कहप्रा वक यप्रावचिकप्राकतर्थी ससिंख्यप्रा 1 शश्रीमतश्री रकलशन नके रप्राज्य सरकप्रार कके एककीकक त वशकप्रायत वनविप्रारण पणप्रालश्री पकोररल पर ऑनलप्राइन वशकप्रायत करकके कहप्रा रप्रा वक उसकप्रा वविविप्राह 15 विरर पपूविर अकबर कके सप्रार हहआ रप्रा, धजस वविविप्राह सके उसके तश्रीन बच्चिके हहए धजनककी आयक वितरमप्रान मम 13 विरर, 11 विरर एविसिं 6 विरर हहै। उसकके पवत तरप्रा अन्य ससकरप्रालश्रीजन उसकको अत्यधधिक पतप्राड़नप्रा दकेतके रके धजस कप्रारण विह अपनके 6 विरर्थीय पकत्रि हहैदर कको लकेकर वदनप्रासिंक 18.07.2025 कको लकधधियप्रानप्रा चिलश्री रयश्री हहै और घरहों मम चिपूल्हप्रा चिचौकप्रा करकके अपनप्रा और अपनके बच्चिके कप्रा जश्रीविन यप्रापन कर रहश्री हहै। उसकप्रा पवत लरप्रातप्रार उसकके पश्रीछके पड़प्रा हहआ हहै और अरर विह दकोबप्रारप्रा विप्रापस आयश्री तको उसके जप्रान सके मप्रार वदयके जप्रानके कप्रा भय हहै। 5. पकधलस अधिश्रीकक दप्रारप्रा ससिंपकर वकयके जप्रानके पर भश्री यप्रावचिकप्राकतर्थी नके यहश्री बतप्रायप्रा हहै तरप्रा यह भश्री कहप्रा वक उसकके पप्रास इस न्यप्रायप्रालय कके समक उपसस्रत हकोनके कके धलए आनके कको वकरप्रायके कके धलए भश्री धिनरप्रावश उपलब्धि नहहीं हहै तरप्रा विह वकसश्री सके विश्रीवडयको बनविप्राकर अपनप्रा ससिंदकेश भकेज सकतश्री हहै। 6. उपरकोक तथ्यहों सके यह स्पष्ट हहै वक यप्रावचिकप्राकतर्थी ससिंख्यप्रा 1 वियस्क हहै तरप्रा विह अपनके पवत एविसिं ससकरप्रालश्रीजनहों ककी पतप्राड़नप्रा सके तसिंर आकर घर छकोड़कर लकधधियप्रानप्रा चिलश्री रयश्री हहै। यप्रावचिकप्राकतप्रार ससिंख्यप्रा 2 यप्रावचिकप्राकतर्थी ससिंख्यप्रा 1 कप्रा 6 विरर्थीय पकत्रि हहै, धजसके विह अपनके सप्रार लके रयश्री हहै और उसकप्रा पप्रालन पकोरण कर रहश्री हहै। ऐसश्री पररसस्रवत मम दकोनहों मम ककोई भश्री यप्राचिश्रीरण अविहैधि अवभरकप्रा मम नहहीं हहै। 7. ऐसश्री पररसस्रवत मम बसिंदश्री पत्यकश्रीकरण यप्रावचिकप्रा पकोरणश्रीय नहहीं हहै और तद्नकसप्रार वनरस्त ककी जप्रातश्री हहै। [Subhash Vidyarthi,J.] Order Date :- 5.8.2025 Ankit Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench