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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 155662 (ALL)

MAHENDRA YADAV v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME LKO

BAIL/7205/2025 · 2025-08-07

Subhash Vidyarthi

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:46076 Court No. - 13 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 7205 of 2025 Applicant :- Mahendra Yadav Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Lko Counsel for Applicant :- Samrat Gupta Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J. 1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री समप्राट गगुपप्रा तरप्रा वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा शश्री अभय कगु मप्रार धससिंह कको सगुनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा पररशश्रीलन वकयप्रा। 2. धिप्रारप्रा 483 भप्रारतश्रीय नप्रागररक सगुरकप्रा ससिंवहतप्रा कके असिंतगरत पस्तगुत इस पप्राररनप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मगुकदमप्रा अपरप्राधि ससिंख्यप्रा 0083 सन 2025 अन्तगरत धिप्रारप्रा 319(2), 318(4), 338, 336(3), 340(2), 61(2), 49 बश्री०एन०एस० रप्रानप्रा वनगकोहप्रा धजिलप्रा लखनऊ मम जिमप्रानत ककी पप्राररनप्रा ककी हहै। 3. वदनप्रासिंक 13.05.2025 कको चप्रार व्यवकयय, धजिसमम पप्रारर्थी समममधलत नहहीं हहै कके वविरुद्ध धलखप्राई गई परम ससूचनप्रा मम वशकप्रायतकतप्रार नके कहप्रा वक उसककी भसूवम कके ससिंबसिंधि मम एक वविक्रय-पत वकसश्री फजिर्थी व्यवक नके वदनप्रासिंक 26.04.2025 कको वनष्पप्रावदत कर वदयप्रा। 4. वविविकेचनप्रा कके ददौरप्रान वविक्रय-पत कके लकेखक नके वविविकेचक कको यह बयप्रान वदयप्रा वक विह क्रके तप्रा कप्रा अधधिविकप्रा हहै, उसनके ससिंपधत्ति कके अवभलकेख तहसश्रील कप्रायप्रारलय सके सत्यप्रावपत वकयके रके। जिमश्रीन तको सहश्री वनकलश्री परन्तगु वविक्रके तप्रा एविसिं उसकप्रा गविप्राह नकलश्री वनकलप्रा। वविक्रय - पत लकेखक नके कहप्रा वक उसके लगतप्रा हहै वक इस पकरण मम मगुख्य भसूवमकप्रा रप्राहहल पप्राल , सरदप्रार तस्विश्रीर धससिंह, रसिंजिश्रीत यप्रादवि, महकेन्द्र यप्रादवि (पप्रारर्थी) वि सदौरभ पटकेल वि उनकके सप्राधरयय ककी हहै। 5. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा कप्रा करन हहै वक मप्रात एक व्यवक कको ऐसप्रा लगनके पर , वक पप्रारर्थी नके भश्री अन्य व्यवकयय कके सप्रार अपरप्राधि कप्राररत करनके मम ककोई भसूवमकप्रा वनभप्राई हहै धजिसकप्रा ककोई वविवशष्ट उलकेख नहहीं हहै। पप्रारर्थी कको अवभरकप्रा मम नहहीं रखप्रा जिप्रा सकतप्रा। 6. जिमप्रानत पप्राररनप्रा-पत एविसिं पसूरक शपर -पत कके मप्राध्यम सके 3 अन्य आपरप्राधधिक पकरणय मम पप्रारर्थी ककी ससिंधलपतप्रा दशप्रारयश्री गयश्री हहै धजिन सभश्री मम उसके जिमप्रानत पर ररहप्रा वकयप्रा जिप्रा चगुकप्रा हहै। 7. उपरकोक तथ्यय कको दृवष्टगत रखतके हहए , जिबवक पप्रारर्थी परम ससूचनप्रा ररपकोटर मम नप्रावमत नहहीं हहै एविसिं उसकको मप्रात वविक्रय -पत लकेखक कके अनगुमप्रान कके आधिप्रार पर आरकोपश्री बनप्रायप्रा गयप्रा हहै; पप्रारर्थी कके वविरुद्ध ककोई वविवशष्ट करन नहहीं हहै , न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हहै वक पप्रारर्थी जिमप्रानत पर ररहप्रा वकयके जिप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हहै। 8. तद्नगुसप्रार, जिमप्रानत पप्राररनप्रा-पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जिप्रातप्रा हहै। 9. आविकेदक महकेन्द्र यप्रादवि कको वनमनधलधखत शतरसिं कके अधिश्रीन ससिंबसिंधधित मधजिस्टटकेट / न्यप्रायप्रालय ककी ससिंतगुवष्ट कके अनगुसप्रार एक व्यवकगत बसिंधिपत और समप्रान रप्रावश ककी दको जिमप्रानतम पस्तगुत करनके पर उपरकोक मप्रामलके मम जिमप्रानत पर ररहप्रा वकयप्रा जिप्राए: - (i) आविकेदक अवभयकोजिन सप्राक्ष्य कके सप्रार छकेड़छप्राड़ नहहीं करकेगप्रा; (ii) आविकेदक अवभयकोजिन पक कके गविप्राहय पर दबप्रावि नहहीं डप्रालकेगप्रा; (iii) आविकेदक टटप्रायल ककोटर दप्रारप्रा तय ककी गई पत्यकेक तप्रारश्रीख पर उपमस्रत हकोगप्रा। [Subhash Vidyarthi,J.] Order Date :- 7.8.2025 Ankit Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench