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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 155643 (ALL)
LAXMI THRU. HER HUSBAND SRI SANDEEP KUMAR v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME LKO AND 5 OTHERS
/278/2025 · 2025-08-05
body2025
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:45377 Court No. - 13 Case :- HABEAS CORPUS WRIT PETITION No. - 278 of 2025 Petitioner :- Laxmi Thru. Her Husband Sri Sandeep Kumar Respondent :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Lko And 5 Others Counsel for Petitioner :- Shiv S.E. Chitambar,Shikhar Raj Singh Counsel for Respondent :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J.
1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश वशिवि एस.ई. वचिततंबर तरप्रा वविदप्रान अपर शिप्रासककीय अधधिविकप्रा परम शश रप्राजकेशि कक मप्रार धसतंह कको सकनप्रा तरप्रा पतप्राविलश कप्रा पररशिशलन वकयप्रा।
2. भप्रारतशय सतंवविधिप्रान कके अनकच्छकेद 227 कके अतंतररत पस्तकत इस बतंदश पत्यकशकरण यप्रावचिकप्रा दप्रारप्रा यप्रावचिकप्राकतर्थी कके पवत कके मप्राध्यम सके पस्तकत इस यप्रावचिकप्रा मम यह कहप्रा रयप्रा हहै वक यप्रावचिकप्राकतर्थी कको उसकके वपतप्रा वविपकश सतंख्यप्रा 4, बहन वविपकश सतंख्यप्रा 5 तरप्रा बहनकोई तरप्रा वविपकश सतंख्यप्रा 6 ककी तरप्राकधरत अविहैधि अवभरकप्रा सके इस न्यप्रायप्रालय कके समक उपसस्रत करविप्राकर मकक करविप्रानके ककी यप्राचिनप्रा ककी हहै।
3. पप्राररनप्रा-पत मम कहप्रा रयप्रा हहै वक यप्रावचिकप्राकतर्थी कप्रा वविविप्राह सतंदशप कक मप्रार कके सप्रार लरभर ढप्राई विरर पपूविर हहआ रप्रा, उसककी बहन तरप्रा बहनकोई (वविपकश सतंख्यप्रा 5 वि 6) डडॉक्टर हह। रभरवितश हकोनके पर यप्रावचिकप्राकतर्थी कप्रा पवत उसकप्रा इलप्राज कर रहप्रा रप्रा वकन्तक वविपकश सतंख्यप्रा 4, 5 तरप्रा 6 उसके मप्रायकके लके रयके और उसकप्रा रभरपप्रात करविप्रा वदयप्रा तरप्रा उसकके बप्राद सके उसकको अविहैधि अवभरकप्रा मम रखके हहए हह एवितं यप्रावचिकप्राकतर्थी सके वमलनके नहहीं दके रहके हह।
4. पकधलस दप्रारप्रा वदयके रयके धलधखत अनकदकेशिशों कके आधिप्रार पर वविदप्रान अपर शिप्रासककीय अधधिविकप्रा नके बतप्रायप्रा वक यप्रावचिकप्राकतर्थी नके कहप्रा वक विह अपनके पवत कके दप्रारप्रा वकयके जप्रा रहके दकरयरविहप्रार कके कप्रारण अपनके वपतप्रा कके सप्रार रह रहश हहै, विह अपनके पवत कके सप्रार नहहीं जप्रानप्रा चिप्राहतश हहै तरप्रा विह वकसश भश अविहैधि अवभरकप्रा मम नहहीं हहै।
5. उपरकोक अनकदकेशिशों मम वकयके रयके करनशों सके यह पतशत हकोतप्रा हहै वक यप्रावचिकप्राकतर्थी अविहैधि अवभरकप्रा मम नहहीं हहै। यप्रावचिकप्रा तरप्रा अनकदकेशिशों मम वकयके रयके करनशों कके तथ्यप्रात्मक वविविप्राद कके सतंबतंधि मम न्यप्रायप्रालय बतंदश पत्यकशकरण यप्रावचिकप्रा मम तथ्यशों ककी सत्यतप्रा कके बप्रारके मम न्यप्रायप्रालय बतंदश पत्यकशकरण यप्रावचिकप्रा मम ककोई परशकण नहहीं कर सकतप्रा तरप्रा यप्रावचिकप्राकतप्रार उवचित अनकतकोर हकेतक पररविप्राररक न्यप्रायप्रालय मम विप्राद पस्तकत कर सकतप्रा हहै।
6. तद्नकसप्रार, यह यप्रावचिकप्रा वनरस्त ककी जप्रातश हहै। [Subhash Vidyarthi,J.] Order Date :- 5.8.2025 Ankit Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench