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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 155123 (ALL)
ASSTT. DIRECTOR DIRECTORATE OF ENFORCEMENT LKO. v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME DEPTT. AND ANOTHER
BAILC/85/2025 · 2025-08-07
Subhash Vidyarthi
body2025
[ 2025 DAILYLAW 155123 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:46035 Court No. - 13 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL CANCELLATION APPLICATION No. - 85 of 2025 Applicant :- Asstt. Director Directorate Of Enforcement Lko. Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Deptt. And Another Counsel for Applicant :- Kuldeep Srivastava Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J.
1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री कक लदश्रीप शश्रीविप्रास्तवि तरप्रा वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा परम शश्री रप्राजकेश कक मप्रार धससिंह कको सकनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा पररशश्रीलन वकयप्रा।
2. धिप्रारप्रा 483 भप्रारतश्रीय नप्रागररक सकरकप्रा ससिंवहतप्रा कके असिंतगरत पस्तकत इस पप्राररनप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके वविशकेष न्यप्रायप्राधिश्रीश , भ्रषप्राचप्रार वनविप्रारण, सश्री.बश्री.आई. पशशचम, लखनऊ दप्रारप्रा जमप्रानत पप्राररनप्रा-पत ससिंख्यप्रा 2485 सन 2025 मम पप्राररत आदकेश वदनप्रासिंक 08.05.2025 ककी विवैधितप्रा कको चकननौतश्री दश्री हवै, धजसकके दप्रारप्रा वविपकश्री ससिंख्यप्रा 2 कको ECIR . / /43/2021 No ECIR LKZO धिप्रारप्रा 3/4 पश्री०एम०एल०ए० 2002 रप्रानप्रा डप्रायरकेक्टटकेट ऑफ इन्फकोसरमकेण्ट लखनऊ जकोनल ऑवफस मम जमप्रानत पर ररहप्रा करनके कप्रा आदकेश पप्राररत हहआ।
3. उपरकोक जमप्रानत आदकेश कप्रा वनरस्तश्रीकरण इस आधिप्रार पर मप्रासिंगप्रा गयप्रा हवै वक वविदप्रान वविशकेष न्यप्रायप्राधिश्रीश नके मप्रात इन आधिप्राररों पर वविपकश्री ससिंख्यप्रा 2 कको जमप्रानत दश्री वक उसकको ससूचश्री मम विवणरत अनकससूचश्रीबद्ध अपरप्राधि मम जमप्रानत वमल चकककी हवै , उससके ककोई बरप्रामदगश्री नहहीं हहई हवै, विह वविचप्रारण मम सहयकोग करकेगप्रा तरप्रा वविचप्रारण पसूणर हकोनके मम कप्राफकी लसिंबप्रा समय लगनके ककी ससिंभप्राविनप्रा हवै।
4. पवितरन वनदकेशप्रालय कके वविदप्रान अधधिविकप्रा नके तकर वदयप्रा वक वविचप्रारण न्यप्रायप्रालय नके इस तथ्य कप्रा ससिंजप्रान नहहीं धलयप्रा वक अनकससूचश्री मम विवणरत अपरप्राधि मम जमप्रानत पर ररहप्रा हकोनके कके उपरप्रान्त वविपकश्री ससिंख्यप्रा 2 नके एक नयश्री कसिं पनश्री बनप्रा लश्री हवै तरप्रा विह अभश्री भश्री पवतबसिंधधित दविप्राओसिं कके वनयप्रारत मम ससिंलग्न हवै तरप्रा उस अपरप्राधि सके धिन अधजरत कर रहप्रा हवै।
5. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा नके दश्रीपक यप्रादवि बनप्राम उत्तर पदकेश रप्राज्य तरप्रा अन्य (2022) 8 SCC 559 कके वनणरय कप्रा आशय धलयप्रा धजसमम मप्राननश्रीय उच्चतम न्यप्रायप्रालय नके यह अविधिप्राररत वकयप्रा हवै वक जमप्रानत कप्रा वनरस्तश्रीकरण न धसफर जमप्रानत आदकेश पप्राररत हकोनके कके उपरप्रान्त उसकके दकरुपयकोग हकोनके कके शस्रवत मम मप्रासिंगप्रा जप्रा सकतप्रा हवै वकन्तक जहप्राहाँ न्यप्रायप्रालय नके जमप्रानत अससिंगत सप्रामगश्री कको ध्यप्रान मम रखतके हहए अरविप्रा ससिंगत सप्रामगश्री कको ध्यप्रान मम न रखतके हहए पप्राररत वकयप्रा हको , अवभयकक कप्रा आपरप्राधधिक इवतहप्रास
अरविप्रा उसकप्रा आचरण दकेखके वबनप्रा जमप्रानत आदकेश पप्राररत वकयप्रा हको , जमप्रानत वविधधि मम ससिंधिप्रायर आधिप्राररों पर न दश्री गयश्री हको आवद आधिप्राररों पर भश्री वनरस्त वकयप्रा जप्रा सकतप्रा हवै।
6.
वकसश्री भश्री अवभयकक कको जमप्रानत वदयके जप्रानके हकेतक मकख्यतयप्रा एक न्यप्रायप्रालय कको यह दकेखनप्रा हकोतप्रा हवै वक वकयप्रा जमप्रानत वदयके जप्रानके कके पशचप्रात उसकके वविचप्रारण मम सहयकोग न करनके एविसिं न्यप्रावयक पवक्रियप्रा सके भप्रागनके ककी पबल ससिंभप्राविनप्रा हवै अरविप्रा क्यप्रा वविचप्रारण कके दनौरप्रान विह सप्रावकयरों कको पभप्राववित कर सकतप्रा हवै। धिप्रारप्रा 45 धिन शकोधिन वनविप्रारण अधधिवनयम मम यह पप्राविधिप्रान हवै वक उपरकोक अधधिवनयम मम वकसश्री भश्री अवभयकक कको जमप्रानत दकेनके सके पहलके न्यप्रायप्रालय लकोक अवभयकोजक कको जमप्रानत पप्राररनप्रा-पत कप्रा वविरकोधि करनके कप्रा समकवचत अविसर दकेगप्रा तरप्रा जहप्राहाँ लकोक अवभयकोजक जमप्रानत पप्राररनप्रा-पत कप्रा वविरकोधि करके, न्यप्रायप्रालय कको यह असिंवकत करनप्रा हकोगप्रा वक ऐसप्रा ससिंतकोष करनके कके समकवचत आधिप्रार हह वक अवभयकक कधरत अपरप्राधि कप्रा दकोषश्री नहहीं हवै तरप्रा जमप्रानत पर ररहप्रा वकयके जप्रानके पर उसकके दप्रारप्रा वकसश्री और अपरप्राधि कको वकयके जप्रानके ककी ससिंभप्राविन नहहीं हवै।
7. धिप्रारप्रा 45 धिन शकोधिन वनविप्रारण अधधिवनयम मम पयकक हहए शब्द अपरप्राधि कप्रा अरर धिन शकोधिन वनविप्रारण अधधिवनयम असिंतगरत अपरप्राधि सके हवै।
8. आलकोच्य आदकेश वविचप्रारण न्यप्रायप्रालय दप्रारप्रा पवितरन वनदकेशप्रालय ककी आपधत्तयरों कको ध्यप्रान मम रखतके हहए पप्राररत वकयप्रा गयप्रा हवै। वविचप्रारण न्यप्रायप्रालय नके अपनके आदकेश मम यह असिंवकत वकयप्रा वक अवभयकक कके पप्रास सके वकसश्री भश्री नशश्रीलके पदप्रारर अरविप्रा दविप्रा ककी बरप्रामदगश्री नहहीं हहई हवै, मप्रात कम्प्यसूटर हप्राडर वडस्क वि लवैपटप्राप बरप्रामद हहए हह। कसिं पनश्री कके बहक खप्रातके मम करकोडरों रुपयरों कप्रा लकेनदकेन पवतबसिंधधित दविप्राओसिं सके ससिंबसिंधधित हवै, यह धसद्ध नहहीं हको पप्रायप्रा हवै। अवभयकक कप्रा ककोई आपरप्राधधिक इवतहप्रास नहहीं हवै तरप्रा ऐसश्री ककोई सप्रामगश्री नहहीं हवै धजससके यह धसद्ध हको सकके वक अनकससूचश्रीगत अपरप्राधि मम जमप्रानत वमलनके कके पशचप्रात उसकके दप्रारप्रा ककोई अपरप्राधि कप्राररत वकयप्रा गयप्रा हको।
9. जहप्राहाँ तक पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा कप्रा यह तकर हवै वक अनकससूचश्रीगत अपरप्राधि मम जमप्रानत वमलनके कके पशचप्रात अवभयकक पकननः नशश्रीलश्री दविप्राओसिं कके कप्रारकोबप्रार मम धलप्त हवै , इस ससिंबसिंधि मम स्विप्रापक औषधधि और मननः पभप्राविश्री पदप्रारर अधधिवनयम कके पप्राविधिप्रानरों कके असिंतगरत ककोई भश्री परम ससूचनप्रा ररपकोटर असिंवकत नहहीं हहई अरविप्रा ककोई पकरण पसिंजश्रीकक त नहहीं हहआ हवै। ऐसश्री पररशस्रवत मम यह नहहीं कहप्रा जप्रा सकतप्रा हवै वक अनकससूचश्रीगत अपरप्राधि मम जमप्रानत वमलनके कके पशचप्रात पकननः वविपकश्री ससिंख्यप्रा 2 स्विप्रापक औषधधि और मननः पभप्राविश्री पदप्रारर कके वनयप्रारत मम धलप्त हवै और ऐसप्रा करकके विह ककोई आपरप्राधि कप्राररत कर रहप्रा हवै। ऐसश्री पररशस्रवत मम वविशकेष न्यप्रायप्रालय दप्रारप्रा वविस्तकत आधिप्राररों पर पप्राररत जमप्रानत आदकेश वदनप्रासिंक 08.05.2025 कको वनरस्त करनके कप्रा न्यप्रायप्रालय ककोई औवचत्य नहहीं पप्रातश्री हवै।
10.
तद्नकसप्रार, यह जमप्रानत वनरस्तश्रीकरण पप्राररनप्रा-पत वनरस्त वकयप्रा जप्रातप्रा हवै। इस आदकेश मम यह भश्री स्पष वकयप्रा जप्रातप्रा हवै वक इस आदकेश मम ककी गयश्री ककोई भश्री वटप्पणश्री
वविचप्रारण कके गकण-दकोष कको पभप्राववित नहहीं करकेगश्री। [Subhash Vidyarthi,J.] Order Date :- 7.8.2025 Ankit Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench