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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 154605 (ALL)

RAMYASH DIXIT v. STATE OF U.P. THRU. SECY. HOME LKO.

/7004/2025 · 2025-08-04

Subhash Vidyarthi

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:45046 Court No. - 13 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 7004 of 2025 Applicant :- Ramyash Dixit Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Secy. Home Lko. Counsel for Applicant :- Pravin Singh Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J. 1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री पविश्रीन धससिंह तरप्रा वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा शश्री मनश्रीष वविक्रम धससिंह चचौहप्रान कको ससुनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा अविलकोकन वकयप्रा। 2. धिप्रारप्रा 439 दसिं०प०ससिं०/483 भप्रारतश्रीय नप्रागररक ससुरकप्रा ससिंवहतप्रा (B.N.S.S.) मम पस्तसुत इस पप्राररनप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मसुकदमप्रा अपरप्राधि ससिंख्यप्रा 665 सन 2020, अन्तगरत धिप्रारप्रा 406, 419, 420, 506 भप्रा०द०ववि०, रप्रानप्रा-ककोतविप्रालश्री अयकोध्यप्रा, धजिलप्रा-अयकोध्यप्रा, मम जिमप्रानत ककी पप्राररनप्रा ककी हहै। 3. उपरकोक पकरण वदनप्रासिंक 13.09.2020 कको पप्रारर्थी सवहत 17 व्यवकययों कके वविरुद्ध धलखप्राई गई परम सचचूनप्रा ररपकोरर कके आधिप्रार पर ससिंसस्रत हहआ, धजिसमम कहप्रा गयप्रा हहै वक आई वविजिन इसणण्डियप्रा क्रके वण्डिर कको -आपरकेवरवि सकोसप्राइरश्री तरप्रा अनश्री गसुप ऑफ कम्पनश्रीजि मम कई लकोगयों नके वनविकेश वकयप्रा तरप्रा उनककी वनविकेवशत धिनरप्रावश पर ककोई भश्री लप्राभ पदप्रान नहहीं वकयप्रा गयप्रा। 4. पप्राररनप्रा पत मम कहप्रा गयप्रा हहै वक पप्रारर्थी वनदर्दोष हहै तरप्रा पप्राररनप्रा कके पस्तर 31 मम एक अन्य पकरण मम पप्रारर्थी ककी ससिंधलप्ततप्रा दशप्रारई गई हहै , धजिसमम उसकको जिमप्रानत वमल चसुककी हहै। 5. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा नके तकर वदयप्रा वक पप्रारर्थी उपरकोक कम्पनश्री मम एक विकेतन भकोगश्री कमरचप्रारश्री रप्रा तरप्रा न तको विह कम्पनश्री कप्रा वनदकेशक रप्रा न हश्री कम्पनश्री मम ककोई पमसुख पद धिप्रारण करतप्रा रप्रा। 6. वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा नके जिमप्रानत पप्राररनप्रा पत कप्रा वविरकोधि वकयप्रा, वकन्तसु विह पकरण कके उपरकोक वबिन्दसुओसिं पर तकर नहहीं कर सकके । 7. उपरकोक तथ्ययों कके दृवष्टिगत, जिबिवक पस्तसुत पकरण मम पप्रारर्थी कके अवतररक अन्य सभश्री नप्रावमत अवभयसुकयों कको जिमप्रानत वमल चसुककी हहै, न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हहै वक पप्रारर्थी भश्री इस पकरण मम जिमप्रानत पर ररहप्रा वकए जिप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हहै। 8. तदनसुसप्रार, जिमप्रानत पप्राररनप्रा-पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जिप्रातप्रा हहै। 9. आविकेदक रप्रामयश दश्रीवकत कको वनम्नधलधखत शतर्दोसिं कके अधिश्रीन ससिंबिसिंधधित मधजिस्रटकेर/न्यप्रायप्रालय ककी ससिंतसुवष्टि कके अनसुसप्रार एक व्यवकगत बिसिंधिपत और समप्रान रप्रावश ककी दको जिमप्रानतम पस्तसुत करनके पर उपरकोक मप्रामलके मम जिमप्रानत पर ररहप्रा वकयप्रा जिप्राए: - (i) आविकेदक अवभयकोजिन सप्राक्ष्य कके सप्रार छकेड़छप्राड़ नहहीं करकेगप्रा; (ii) आविकेदक अवभयकोजिन पक कके सप्रावकययों पर दबिप्रावि नहहीं ण्डिप्रालकेगप्रा; (iii) आविकेदक वविचप्रारण न्यप्रायप्रालय दप्रारप्रा वनयत ककी गई पत्यकेक वतधर पर उपसस्रत हकोगप्रा। Order Date :- 4.8.2025 Himanshu Digitally signed by :- HIMANSHU SHUKLA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench