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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 154560 (ALL)
SARVAN KUMAR YADAV v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME LKO. AND ANOTHER
/943/2025 · 2025-08-04
Subhash Vidyarthi
body2025
[ 2025 DAILYLAW 154560 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:45126 Court No. - 13 Case :- CRIMINAL MISC. ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 482 BNSS No. - 943 of 2025 Applicant :- Sarvan Kumar Yadav Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Lko. And Another Counsel for Applicant :- Pradeep Kumar Singh Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J.
1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री पदश्रीप कक मप्रार धससिंह तरप्रा वविदप्रान अवतररक शप्रासककीय अधधिविकप्रा शश्री वदविप्राकर धससिंह कको सकनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा अविलकोकन वकयप्रा।
2. भप्रारतश्रीय नप्रागररक सकरकप्रा ससिंवहतप्रा ककी धिप्रारप्रा 482/438 दसिं०प०ससिं० कके असिंतगरत पस्तकत इस पप्राररनप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मककदमप्रा अपरप्राधि ससिंख्यप्रा 133 सन 2025, अन्तगरत धिप्रारप्रा 3(1) गगगस्टर अधधिवनयम, रप्रानप्रा महममूदप्राबप्राद, धजिलप्रा सश्रीतप्रापकर, मम अवग्रिम जिमप्रानत ककी पप्राररनप्रा ककी हहै।
3. उपरकोक पकरण पकधलस कके पभप्रारश्री वनरश्रीकक दप्रारप्रा पप्रारर्थी सवहत पप्रापाँच व्यवकययों कके वविरुद्ध धलखप्राई गई परम समूचनप्रा ररपकोटर कके आधिप्रार पर ससिंसस्रत हहआ हहै, धजिसमम कहप्रा गयप्रा हहै वक अवभयककगण नके एक आपरप्राधधिक वगरकोह बनप्रा रखप्रा हहै, धजिसकप्रा सरगनप्रा पप्रारर्थी हहै। परम समूचनप्रा ररपकोटर कके सप्रार ससिंलग्न गगग- चप्राटर मम मप्रात एक अन्य आपरप्राधधिक पकरण मम पप्रारर्थी तरप्रा अन्य सह - अवभयककगण ककी ससिंधलप्ततप्रा दशप्रारई गई हहै , जिको गगौ विधि वनविप्रारण अधधिवनयम तरप्रा पशक कमू रतप्रा अधधिवनयम सके ससिंबसिंधधित हहै तरप्रा धजिसमम पप्रारर्थी कको जिमप्रानत वमल चकककी हहै।
4. पस्तकत पकरण मम सह-अवभयकक महप्रारप्राजि उरर महप्रारप्राजि धससिंह कको अवग्रिम जिमप्रानत पप्राररनप्रा पत ससिंख्यप्रा 452/2025 मम पप्राररत आदकेश वदनप्रासिंक 14.5.2025 दप्रारप्रा अवग्रिम जिमप्रानत वमल चकककी हहै।
5. उपरकोक तथ्ययों कके आलकोक मम, न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हहै वक पप्रारर्थी भश्री अवग्रिम जिमप्रानत पप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हहै।
6. तदनकसप्रार, अवग्रिम जिमप्रानत पप्राररनप्रा-पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जिप्रातप्रा हहै।
7.
उपरकोक मककदमप्रा अपरप्राधि ससिंख्यप्रा मम आविकेदक ककी वगरफ्तप्रारश्री/न्यप्रायप्रालय कके समक उपसस्रवत ककी दशप्रा मम , उसके ससिंबसिंधधित रप्रानके कके भप्रारसप्राधिक अधधिकप्रारश्री/न्यप्रायप्रालय ककी ससिंतकवष्टि कके अनकसप्रार व्यवकगत बसिंधि पत एविसिं दको पवतभमू पस्तकत करनके पर परश्रीकण कके असिंवतम रूप सके वनस्तप्रारण तक, वनम्न शतरसिं कके अधिश्रीन अवग्रिम जिमप्रानत पर ररहप्रा वकयप्रा जिप्राएगप्राग- क- आविकेदक, यवद आविश्यक हकोगप्रा तको पकधलस अधधिकप्रारश्री दप्रारप्रा जिजॉच हकेतक अपकेवकत समय पर उपसस्रत हकोगप्रा। ख- आविकेदक मप्रामलके कके तथ्ययों सके पररवचत वकसश्री व्यवक यप्रा पकधलस अधधिकप्राररययों कको पत्यक यप्रा परकोक रूप सके ककोई धिमककी , विप्रादप्रा यप्रा पलकोभन नहहीं दकेगप्रा धजिससके वक विह ऐसके तथ्य कको न्यप्रायप्रालय कके समक यप्रा वकसश्री पकधलस अधधिकप्रारश्री कके समक पकट न करनके पर मप्रान जिप्राए। ग- आविकेदक अदप्रालत ककी पमूविर अनकमवत कके वबनप्रा भप्रारत नहहीं छकोडकेगप्रा; घ- आविकेदक कको पत्यकेक वनधिप्रारररत वतधर पर टटप्रायल ककोटर कके समक उपसस्रत हकोनप्रा हकोगप्रा, जिब तक वक व्यवकगत उपसस्रवत सके छमू ट न दश्री गयश्री हको; ङ- आविकेदक अवभयकोजिन पक कके गविप्राह पर दबप्रावि नहहीं डप्रालकेगप्रा / धिमककी नहहीं दकेगप्रा। च- आविकेदक वविविकेचनप्रा एविसिं वविचप्रारण कके दगौरप्रान सहयकोग करमगके और जिमप्रानत ककी स्वितसिंततप्रा कप्रा दकरुपयकोग नहहीं करकेगप्रा। Order Date :- 4.8.2025 Himanshu Digitally signed by :- HIMANSHU SHUKLA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench