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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 154354 (ALL)

SAHDEV v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME DEPTT. LKO. AND ANOTHER

/948/2025 · 2025-08-04

Subhash Vidyarthi

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:45214 Court No. - 13 Case :- CRIMINAL MISC. ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 482 BNSS No. - 948 of 2025 Applicant :- Sahdev Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Deptt. Lko. And Another Counsel for Applicant :- Vikas Sharma,Ajay Kushwaha Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J. 1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री वविकप्रास शरप्रार्मा तरप्रा वविदप्रान अवतररिक शप्रासककीय अधधिविकप्रा परर शश्री रमोहम्रद आवशफ खप्रान कमो ससुनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा अविलमोकन वकयप्रा। 2. भप्रारितश्रीय नप्रागररिक ससुरिकप्रा ससंवहतप्रा ककी धिप्रारिप्रा 482/438 दसं०प०ससं० कके असंतगर्मात पस्तसुत इस पप्रारर्मानप्रा-पत दप्रारिप्रा पप्रारर्थी नके रसुकदरप्रा अपरिप्राधि ससंख्यप्रा 0053 सन 2025 अन्तगर्मात धिप्रारिप्रा 109(1), 191(2), 326( ), g 326( ), 125, 324(4), 324(5), 118(1), 115(2) f बश्री०एन०एस०, रप्रानप्रा फफ लबकेहड, धजिलप्रा लखश्रीरपसुरि खश्रीरिश्री, रम अवग्रिर जिरप्रानत ककी पप्रारर्मानप्रा ककी हहै। 3. उपरिमोक पकरिण वदनप्रासंक 05.02.2025 कमो पप्रारर्थी सवहत छछः व्यवकयय कके वविरुद्ध धलखप्राई गई परर सफचनप्रा ररिपमोरर्मा कके आधिप्रारि परि ससंसस्रत हहआ , धजिसरम कहप्रा गयप्रा हहै वक बश्रीतश्री रिप्रात लगभग 8:30 बजिके अवभयसुकगण नके वशकप्रायतकतप्रार्मा वि उसकके भप्राई कके घरि परि ईसंर -पत्ररि सके पररिप्रावि करि वदयप्रा तरप्रा सह-अवभयसुक दप्रातप्रारिप्रार नके बप्रासंकके सके वशकप्रायतकतप्रार्मा कके 14 विरर्थीय पसुत कके धसरि परि रप्रारिप्रा, धजिससके विह गम्भश्रीरि रुप सके घप्रायल हमोकरि वगरि गयप्रा। 4. पप्रारर्मानप्रा पत कके सप्रार पस्तसुत शपर पत रम कहप्रा गयप्रा हहै वक पप्रारर्थी वनदर्दोर हहै औरि उसकप्रा कमोई आपरिप्राधधिक इवतहप्रास नहहीं हहै। 5. उक पकरिण कके तश्रीन सह-अवभयसुक छमोरके लप्राल, अरन तरप्रा दश्रीपक कमो इस न्यप्रायप्रालय दप्रारिप्रा अवग्रिर जिरप्रानत दश्री जिप्रा चसुककी हहै तरप्रा उनकके अवग्रिर जिरप्रानत आदकेशय ककी पवतयप्रासं पप्रारर्मानप्रा पत कके सप्रार ससंलग्न हहै। उपरिमोक सह- अवभयसुकय कके जिरप्रानत आदकेश रम यह असंवकत हहै वक घप्रायल व्यवक कमो कप्राररित चमोरम सप्राधिप्रारिण पकक वत ककी हह तरप्रा विके सभश्री सह -अवभयसुक दप्रातप्रारिप्रार दप्रारिप्रा कप्राररित ककी गई हह। 6. वविदप्रान अपरि शप्रासककीय अधधिविकप्रा परर पप्रारर्मानप्रा पत कप्रा वविरिमोधि करितके हहए कहप्रा वक घप्रायल व्यवक कके चमोर पपत पप्रारर्मानप्रा पत कके सप्रार ससंलग्न हहै , धजिसकके अनसुसप्रारि उसकमो दप्रावहनके कप्रान कके पश्रीछके 2 सकेरश्री X 0.5 सकेरश्री कप्रा एक फरप्रा हहआ घप्रावि तरप्रा दप्रावहनके कप्रान कके वपनप्रा परि 3 सकेरश्री X 0.5 सकेरश्री कप्रा एक फरप्रा हहआ घप्रावि रप्रा तरप्रा दप्रावहनके कप्रान सके खफन आ रिहप्रा रप्रा। वचवकत्सक नके चमोरय ककी पकक वत सप्राधिप्रारिण बतप्राई। 7. उपरिमोक तथ्यय कके दृवष्टिगत, जिबवक पप्रारर्थी कप्रा पकरिण भश्री सह-अवभयसुकगण छमोरके लप्राल, अरन तरप्रा दश्रीपक कके सरप्रान हश्री हहै , न्यप्रायप्रालय कप्रा रत हहै वक पप्रारर्थी भश्री अवग्रिर जिरप्रानत पप्रानके कप्रा अधधिकप्रारिश्री हहै। 8. तदनसुसप्रारि, अवग्रिर जिरप्रानत पप्रारर्मानप्रा-पत स्विश्रीकप्रारि वकयप्रा जिप्रातप्रा हहै। 9. उपरिमोक रसुकदरप्रा अपरिप्राधि ससंख्यप्रा रम आविकेदक ककी वगरिफ्तप्रारिश्री /न्यप्रायप्रालय कके सरक उपसस्रवत ककी दशप्रा रम , उसके ससंबसंधधित रप्रानके कके भप्रारिसप्राधिक अधधिकप्रारिश्री/न्यप्रायप्रालय ककी ससंतसुवष्टि कके अनसुसप्रारि व्यवकगत बसंधि पत एविसं दमो पवतभफ पस्तसुत करिनके परि परिश्रीकण कके असंवतर रूप सके वनस्तप्रारिण तक , वनम्न शतर्दोसं कके अधिश्रीन अवग्रिर जिरप्रानत परि ररिहप्रा वकयप्रा जिप्राएगप्राछः- क- आविकेदक, यवद आविश्यक हमोगप्रा तमो पसुधलस अधधिकप्रारिश्री दप्रारिप्रा जिजॉच हकेतसु अपकेवकत सरय परि उपसस्रत हमोगप्रा। ख- आविकेदक रप्रारलके कके तथ्यय सके पररिवचत वकसश्री व्यवक यप्रा पसुधलस अधधिकप्राररियय कमो पत्यक यप्रा परिमोक रूप सके कमोई धिरककी , विप्रादप्रा यप्रा पलमोभन नहहीं दकेगप्रा धजिससके वक विह ऐसके तथ्य कमो न्यप्रायप्रालय कके सरक यप्रा वकसश्री पसुधलस अधधिकप्रारिश्री कके सरक पकर न करिनके परि रप्रान जिप्राए। ग- आविकेदक अदप्रालत ककी पफविर्मा अनसुरवत कके वबनप्रा भप्रारित नहहीं छमोडकेगप्रा; घ- आविकेदक कमो पत्यकेक वनधिप्रार्माररित वतधर परि रटप्रायल कमोरर्मा कके सरक उपसस्रत हमोनप्रा हमोगप्रा, जिब तक वक व्यवकगत उपसस्रवत सके छफ र न दश्री गयश्री हमो; ङ- आविकेदक अवभयमोजिन पक कके गविप्राह परि दबप्रावि नहहीं डप्रालकेगप्रा / धिरककी नहहीं दकेगप्रा। च- आविकेदक वविविकेचनप्रा एविसं वविचप्रारिण कके ददौरिप्रान सहयमोग करिमगके औरि जिरप्रानत ककी स्वितसंततप्रा कप्रा दसुरुपयमोग नहहीं करिकेगप्रा। Order Date :- 4.8.2025 Himanshu Digitally signed by :- HIMANSHU SHUKLA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench