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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 154309 (ALL)
ADITYA TRIPATHI v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME LKO.
/938/2025 · 2025-08-04
Subhash Vidyarthi
body2025
[ 2025 DAILYLAW 154309 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:45073 Court No. - 13 Case :- CRIMINAL MISC. ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 482 BNSS No. - 938 of 2025 Applicant :- Aditya Tripathi Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Lko. Counsel for Applicant :- Dheeraj Awasthi,Amar Singh,Shailendra Kumar Mishra Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J.
1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री अमर धससिंह तरप्रा वविदप्रान अवतररक शप्रासककीय अधधिविकप्रा शश्री मनश्रीष वविक्रम धससिंह चचौहप्रान कको ससुनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा अविलकोकन वकयप्रा।
2. भप्रारतश्रीय नप्रागररक ससुरकप्रा ससिंवहतप्रा ककी धिप्रारप्रा 482/438 दसिं०प०ससिं० कके असिंतगरत पस्तसुत इस पप्राररनप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मसुकदमप्रा अपरप्राधि ससिंख्यप्रा 72 सन 2025 अन्तगरत धिप्रारप्रा 109, 352, 351(3), 3(5) बश्री०एन०एस०, रप्रानप्रा वशविरतनगसिंज, धजलप्रा अमकेठश्री, मम अवग्रिम जमप्रानत ककी पप्राररनप्रा ककी हहै।
3. वदनप्रासिंक 21.06.2025 कको पप्रारर्थी सवहत चप्रार नप्रावमत व्यवकययों एविसिं एक अजप्रात व्यवक कके वविरुद्ध धलखप्राई गई परम ससूचनप्रा ररपकोरर मम कहप्रा गयप्रा हहै वक कल वदनप्रासिंक 26.06.2025 ककी रप्रात 10 बजके जब वशकप्रायतकतप्रार अपनके घर कके बप्राहर रहल रहप्रा रप्रा, सभश्री अवभयसुकगण पप्रारर्थी ककी विकेन्यसू गप्राडश्री सके आए और पप्रारर्थी नके गप्रालश्री -गलचौज करतके हहए वशकप्रायतकतप्रार पर तप्राबडतकोड पप्रापाँच फप्रायर वपस्रल सके वकए, वकन्तसु वशकप्रायतकतप्रार भप्रागकर अपनके घर मम जप्रा छसु पप्रा और अगल-बगल कके लकोगयों कको इक्टप्रा हकोतके दकेख अवभयसुकगण धिमककी दकेतके
हहए पप्रारर्थी ककी विकेन्यसू गप्राडश्री सके मचौकके सके फरप्रार हको गए। परम ससूचनप्रा ररपकोरर मम यह भश्री कहप्रा गयप्रा हहै वक ससूचनप्रा पप्राप्त हकोनके पर पसुधलस चचौककी इसिंचप्राजर कसु छ हश्री समय मम मचौकके पर पहहपाँचके और उन्हयोंनके घरनप्रास्रल सके पप्रापाँच खप्रालश्री खकोखके बरप्रामद वकए।
4. पप्राररनप्रा पत कके सप्रार पस्तसुत शपर पत मम कहप्रा गयप्रा हहै वक पप्रारर्थी वनदर्दोष हहै और उसकप्रा ककोई आपरप्राधधिक इवतहप्रास नहहीं हहै।
5. वविविकेचक नके वशकप्रायतकतप्रार तरप्रा उसकके चप्राचप्रा दयप्रानसिंद अविस्रश्री कके बयप्रान असिंवकत वकए। दकोनयों व्यवकययों नके परम ससूचनप्रा ररपकोरर कके करनयों कको दकोहरप्रायप्रा। एक अन्य व्यवक रप्रामधिन अविस्रश्री नके भश्री परम ससूचनप्रा ररपकोरर कके करनयों कप्रा समररन वकयप्रा। वविविकेचक नके कके स डप्रायरश्री मम असिंवकत वकयप्रा हहै वक घरनप्रास्रल कप्रा वनरश्रीकण कके दचौरप्रान वशकप्रायतकतप्रार कके कब्जकेजे़ सके घरनप्रा कके समय पयसुक फप्रायर ससुदप्रा 5 अदद खकोखके बरप्रामद वकए गए।
6. इसकके पसूविर पप्रारर्थी तरप्रा सह -अवभयसुक रप्रामसू वतपप्राठश्री नके इस न्यप्रायप्रालय कके समक आपरप्राधधिक पककीणर ररर यप्रावचकप्रा ससिंख्यप्रा 5703/2025 पस्तसुत ककी रश्री, धजसमम पप्रारर्थी कके वपतप्रा ककी वगरफ्तप्रारश्री पर रकोक लगप्राई गई रश्री। इसकके पश्चप्रात वदनप्रासिंक 04.07.2025 कको पप्रारर्थी कके ससिंदभर मम उपरकोक ररर यप्रावचकप्रा विप्रापस लके लश्री गई।
7.
पप्राररनप्रा पत मम कहप्रा गयप्रा हहै वक सश्री०सश्री०रश्री०विश्री० मम यह ररककॉडरड हहै वक पप्रारर्थी ककी विकेन्यसू गप्राडश्री घरनके कके पसूरके वदन उसकके घर मम पप्राकर रहश्री हहै।
8. वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा नके जमप्रानत पप्राररनप्रा पत कप्रा वविरकोधि वकयप्रा, वकन्तसु विह पकरण कके उपरकोक वबन्दसुओसिं पर तकर नहहीं कर सकके ।
9. उपरकोक तथ्ययों कके दृवष्टिगत , जबवक घरनप्रा मम पप्रारर्थी दप्रारप्रा पप्रापाँच गकोधलयप्रासिं चलप्रायप्रा जप्रानप्रा कहप्रा गयप्रा हहै , वकन्तसु वकसश्री व्यवक कको ककोई चकोर कप्राररत नहहीं हहई हहै; फप्रायर शसुदप्रा खप्रालश्री खकोखके वशकप्रायतकतप्रार नके हश्री पसुधलस कको वदए हह ; गकोलश्री चलनके सके वशकप्रायतकतप्रार कके घर ककी दश्रीविप्रार अरविप्रा दरविप्राजके पर ककोई वनशप्रान आयप्रा हको, ऐसप्रा ककोई तथ्य वविविकेचनप्रा मम पकप्राश मम आयप्रा हहै; पप्रारर्थी कप्रा
करन हहै वक उसककी विकेन्यसू गप्राडश्री घरनप्रा कके वदन पसूरके समय उसकके घर पर खडश्री रहश्री, इसकप्रा विश्रीवडयको सप्राक्ष्य मचौजसूद हहै , न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हहै वक उपरकोक तथ्य पप्रारर्थी कको अवग्रिम जमप्रानत वदए जप्रानके कके पयप्रारप्त आधिप्रार पदप्रान करतके हह।
10. तदनसुसप्रार, अवग्रिम जमप्रानत पप्राररनप्रा-पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जप्रातप्रा हहै।
11.
उपरकोक मसुकदमप्रा अपरप्राधि ससिंख्यप्रा मम आविकेदक ककी वगरफ्तप्रारश्री/न्यप्रायप्रालय कके समक उपसस्रवत ककी दशप्रा मम , उसके ससिंबसिंधधित रप्रानके कके भप्रारसप्राधिक अधधिकप्रारश्री/न्यप्रायप्रालय ककी ससिंतसुवष्टि कके अनसुसप्रार व्यवकगत बसिंधि पत एविसिं दको पवतभसू पस्तसुत करनके पर परश्रीकण कके असिंवतम रूप सके वनस्तप्रारण तक , वनम्न शतर्दोसिं कके अधिश्रीन अवग्रिम जमप्रानत पर ररहप्रा वकयप्रा जप्राएगप्राग- क- आविकेदक, यवद आविश्यक हकोगप्रा तको पसुधलस अधधिकप्रारश्री दप्रारप्रा जकॉच हकेतसु अपकेवकत समय पर उपसस्रत हकोगप्रा। ख- आविकेदक मप्रामलके कके तथ्ययों सके पररवचत वकसश्री व्यवक यप्रा पसुधलस अधधिकप्राररययों कको पत्यक यप्रा परकोक रूप सके ककोई धिमककी , विप्रादप्रा यप्रा पलकोभन नहहीं दकेगप्रा धजससके वक विह ऐसके तथ्य कको न्यप्रायप्रालय कके समक यप्रा वकसश्री पसुधलस अधधिकप्रारश्री कके समक पकर न करनके पर मप्रान जप्राए। ग- आविकेदक अदप्रालत ककी पसूविर अनसुमवत कके वबनप्रा भप्रारत नहहीं छकोडकेगप्रा; घ- आविकेदक कको पत्यकेक वनधिप्रारररत वतधर पर रटप्रायल ककोरर कके समक उपसस्रत हकोनप्रा हकोगप्रा, जब तक वक व्यवकगत उपसस्रवत सके छसू र न दश्री गयश्री हको; ङ- आविकेदक अवभयकोजन पक कके गविप्राह पर दबप्रावि नहहीं डप्रालकेगप्रा / धिमककी नहहीं दकेगप्रा। च- आविकेदक वविविकेचनप्रा एविसिं वविचप्रारण कके दचौरप्रान सहयकोग करमगके और जमप्रानत
ककी स्वितसिंततप्रा कप्रा दसुरुपयकोग नहहीं करकेगप्रा। Order Date :- 4.8.2025 Himanshu Digitally signed by :- HIMANSHU SHUKLA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench