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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 15387 (ALL)
ARUN KUMAR ALIAS ARUN KATHERIA v. STATE OF U.P.
BAIL/6349/2025 · 2025-07-24
Gautam Chowdhary
body2025
[ 2025 DAILYLAW 15387 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC:123191 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 6349 of 2025 Applicant :- Arun Kumar Alias Arun Katheria Opposite Party :- State of U.P. Counsel for Applicant :- Ankit Shukla,Ratnesh Kumar Shukla Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J.
1. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा ककी तरफ सवे आज पपूरक शपथपत्र दद्वाधखिल वकयद्वा गयद्वा, धजसवे पत्रद्वावलली पर रखिद्वा जद्वाय।
2. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा एववं रद्वाज्य ककी तरफ सवे ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा कको ससुनद्वा तथद्वा पत्रद्वावलली कद्वा पररशलीलन वकयद्वा।
3. वतरमद्वान दद्वाणणण्डिक प्रककीरर जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वा पत्र आववेदक Arun Kumar Alias Arun Katheria ककी ओर सवे मसु०अ०सवं० 92/2024, अवंतगरत धिद्वारद्वा 379, 411, 413, 414, 483, 420 भद्वा.दवं.सवं., थद्वानद्वा धसम्भद्वावलली, धजलद्वा हद्वापसुड़ मम जमद्वानत पर मसुक करनवे हवेतसु प्रस्तसुत वकयद्वा गयद्वा हहै।
4. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा नवे तकर प्रस्तसुत वकयद्वा वक आववेदक कको इस प्रकरर मम गलत एववं फजर्जी ढवंग सवे झपूठद्वा फवं सद्वायद्वा गयद्वा हहै, उसनवे कधथत अपरद्वाधि कद्वाररत नहहीं वकयद्वा हहै। आववेदक दद्वारद्वा ऐसद्वा ककोई कक त्य कद्वाररत नहहीं वकयद्वा गयद्वा हहै, जहैसद्वावक प्रद्वाथवमककी मम दवशरत वकयद्वा गयद्वा हहै। प्रथम सपूचनद्वा ररपकोरर ववलणम्म्बित हहै तथद्वा उक ववलम्म्बि कद्वा ककोई स्पषलीकरर नहहीं वदयद्वा गयद्वा हहै। आववेदक कवे पद्वास सवे वतरमद्वान वद्वाद सवे सवंम्बिवंधधित वकसली भली सवंवदग्धि वस्तसु ककी म्बिरद्वामदगली नहहीं पद्वायली गयली हहै, जको भली म्बिरद्वामदगली दवशरत ककी गयली हहै , वह पपूररततः म्बिनद्वावरली एववं फजर्जी हहै। उक म्बिरद्वामदगली कद्वा ककोई स्वतवंत्र सद्वाकली नहहीं हहै। आववेदक दद्वारद्वा अपनवे पपूवर कवे आपरद्वाधधिक इवतहद्वास कको शपथपत्र कवे प्रस्तर सवं० 8 एववं आज दद्वाधखिल पपूरक शपथपत्र कवे प्रस्तर सवं० 2 मम पपूररततः स्पष वकयद्वा गयद्वा हहै। उक वद्वाद मम सह -अवभयसुक मकोवहत चद्वाहर ककी जमद्वानत दद्वाणणण्डिक प्रककीरर जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वापत्र सवं० 7314/2025, आदवेश वदनद्वावंवकत 09.05.2025 कको स्वलीकक त हको चसुककी हहै, अततः जमद्वानत प्रद्वाप्त सह-अवभयसुक सवे समद्वान भपूवमकद्वा कवे आधिद्वार पर आववेदक भली जमद्वानत पद्वानवे कद्वा अधधिकद्वारली हहै। पसुनतः उनकद्वा यह भली कथन हहै वक आववेदक ककी तरफ सवे यह आश्वद्वासन वदयद्वा गयद्वा हहै वक वह कद्वानपून ककी प्रवक्रियद्वा मम सहयकोग करनवे कवे धलए तहैयद्वार हहै और जम्बि भली आवश्यकतद्वा हकोगली वह ईमद्वानदद्वारली सवे अदद्वालत कवे समक खिसुद कको उपलब्धि करद्वाएगद्वा और उन सभली शतरवं कको स्वलीकद्वार करनवे कवे धलए भली तहैयद्वार हहै जको न्यद्वायद्वालय उस पर
अधधिरकोवपत करवेगली। आववेदक वनदरष हहै तथद्वा वह इस प्रकरर मम वद० 31.03.2024 सवे कद्वारद्वागद्वार मम वनरुद्ध हहै। इसधलए आववेदक कको जमद्वानत पर छकोड़ वदयद्वा जद्वाय।
5.
ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा नवे आववेदक कवे जमद्वानत कद्वा प्रम्बिल ववरकोधि करतवे हहए तकर प्रस्तसुत वकयद्वा वक आववेदक दद्वारद्वा कद्वाररत अपरद्वाधि सवंवंजवेय एववं गवंभलीर प्रकक वत कद्वा हहै , इसधलए आववेदक कको जमद्वानत पर न छकोड़द्वा जद्वाय।
5. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा कवे तकरवं कवे पररप्रवेक्ष्य मम पत्रद्वावलली पर उपलब्धि सद्वारवद्वान तथ्ययों एववं पररणस्थवतययों कद्वा समग्र रूप सवे अवलकोकन करनवे कवे म्बिद्वाद , सम्बिपूतयों ककी प्रकक वत और वकसली भली ठकोस ववरकोधिद्वात्मक सद्वामग्रली ककी अनसुपणस्थवत एववं उपलब्धि सद्वामग्रली सवे छवेड़छद्वाड़ ककी सवंभद्वावनद्वा न हकोनवे कवे तथ्य कको दवेखितवे हहए मवेरली रद्वाय मम आववेदक कको जमद्वानत पर मसुक करनवे कद्वा उपयसुक आधिद्वार हहै।
7. अततः वद्वाद कवे गसुर -दकोष पर वम्बिनद्वा ककोई वरप्परली वकए हहए आववेदक कको उपरकोक ववररत अपरद्वाधि मम सवंम्बिवंधधित न्यद्वायद्वालय ककी सवंतसुवष पर व्यवकगत म्बिवंधि-पत्र एववं अधधिक धिनरद्वावश कवे ककोई भली दको प्रवतभपू प्रस्तसुत करनवे पर वनम्नधलधखित शतरवं कवे सद्वाथ जमद्वानत पर छकोड़ वदयद्वा जद्वाय। i. आववेदक ववववेचनद्वा यद्वा परलीकर कवे ददौरद्वान अवभयकोजन सद्वाक्ष्ययों कवे सद्वाथ छवेड़छद्वाड़ नहहीं करवेगद्वा। ii. आववेदक अवभयकोजन सद्वावकययों व पलीवड़तद्वा/ वशकद्वायतकतद्वार कको ण्डिरद्वायवेगद्वा/धिमकद्वायवेगद्वा नहहीं। iii. आववेदक न्यद्वायद्वालय कवे आदवेशयों कद्वा पद्वालन करवेगद्वा , वह परलीकर कवे ददौरद्वान वम्बिनद्वा ककोई अनद्वावश्यक स्थगन धलए वनयत वतधथ पर न्यद्वायद्वालय मम उपणस्थत हकोगद्वा तथद्वा परलीकर मम ईमद्वानदद्वारली सवे सहयकोग करवेगद्वा। iv. आववेदक जमद्वानत पर ररहद्वा हकोनवे कवे म्बिद्वाद जमद्वानत ककी स्वतवंत्रतद्वा कद्वा दसुरूपयकोग नहली करवेगद्वा और वकसली भली अपरद्वाधधिक गवतववधधि मम धलप्त नहहीं हकोगद्वा न ककोई अपरद्वाधधिक कक त्य करवेगद्वा। v. आववेदक प्रत्यक यद्वा अप्रत्यक रूप सवे मद्वामलवे कवे तथ्ययों सवे पररवचत वकसली भली व्यवक यद्वा पसुधलस अधधिकद्वाररययों कको ककोई प्रलकोभन यद्वा धिमककी नहहीं दवेगद्वा न हली उनसवे ककोई वद्वायदद्वा करवेगद्वा , धजसकवे कद्वारर उन्हम न्यद्वायद्वालय मम तथ्ययों कको उजद्वागर करनवे सवे ववरत रहनद्वा पण्डिवेडे़।
8. उपरकोक शतरवं मम सवे वकसली कवे उलवंघन कवे मद्वामलवे मम , परलीकर न्यद्वायद्वालय आववेदक ककी जमद्वानत वनयमद्वानसुसद्वार रद्द करनवे कको स्वतवंत्र हहै। Order Date :- 25.7.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad