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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 15366 (ALL)
AMJAD ALI v. STATE OF U.P.
BAIL/3903/2025 · 2025-08-11
Gautam Chowdhary
body2025
[ 2025 DAILYLAW 15366 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC:136690 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 3903 of 2025 Applicant :- Amjad Ali Opposite Party :- State of U.P. Counsel for Applicant :- Amit Kumar Srivastava Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J.
1. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा शश्री अवमित कक मिद्वार शश्रीवद्वास्तव ककी तरफ सवे ववदद्वान अधधिवकद्वागण शश्री रमिवेश कक मिद्वार वमिशद्वा, शबद्वानद्वा वनजद्वामि एववं रद्वाज्य ककी तरफ सवे ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा कको सकनद्वा तथद्वा पतद्वावलश्री कद्वा पररशश्रीलन वकयद्वा।
2. वतरमिद्वान दद्वाणणण्डिक प्रककीणर जमिद्वानत प्रद्वाथरनद्वा पत आववेदक अमिजद अलश्री ककी ओर सवे मिक०अ०सवं० 214/2024, अवंतगरत धिद्वारद्वा 351(2), 118(1), 109, 333 बश्री.एन.एस., थद्वानद्वा अलश्रीगवंज, धजलद्वा बरवेलश्री मिम जमिद्वानत पर मिकक करनवे हवेतक प्रस्तकत वकयद्वा गयद्वा हहै।
3. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा नवे तकर प्रस्तकत वकयद्वा वक आववेदक कको इस प्रकरण मिम गलत एववं फजर्जी ढवंग सवे झझूठद्वा फवं सद्वायद्वा गयद्वा हहै , उसनवे कधथत अपरद्वाधि कद्वाररत नहहीं वकयद्वा हहै। आववेदक दद्वारद्वा ऐसद्वा ककोई भश्री कक त्य कद्वाररत नहहीं वकयद्वा गयद्वा हहै, जहैसद्वावक प्रद्वाथवमिककी मिम दवशरत वकयद्वा गयद्वा हहै। प्रथमि सझूचनद्वा ररपकोरर ववलणमबत हहै तथद्वा उक ववलमब कद्वा ककोई समिकवचत स्पषश्रीकरण नहहीं वदयद्वा गयद्वा हहै। चकरहैल नवे अपनवे बयद्वान मिम कथन वकयद्वा हहै वक आववेदक दद्वारद्वा उसकवे शरश्रीर पर चद्वाकझू सवे हमिलद्वा करकवे पद्वावंच चकोरम कद्वाररत ककी गयश्री हहै , वकन्तक चकरहैल कवे शरश्रीर पर चद्वाकझू ककी कवे वल एक चकोर पद्वायश्री गयश्री हहै तथद्वा कधथत घरनद्वा कको कद्वाररत वकयवे जद्वानवे कद्वा ककोई स्वतवंत जनसद्वाकश्री नहहीं हहै। चकरहैल कवे बयद्वान , अवभयकोजन कथद्वानक एववं वचवकत्सश्रीय आख्यद्वा मिम परस्पर ववरकोधिद्वाभद्वास हहै। आववेदक दद्वारद्वा अपनवे पझूवर कवे
आपरद्वाधधिक इवतहद्वास कको शपथपत कवे प्रस्तर सवं० 32 मिम स्पष वकयद्वा गयद्वा हहै। पकननः उनकद्वा यह भश्री कथन हहै वक आववेदक ककी तरफ सवे यह आश्वद्वासन वदयद्वा गयद्वा हहै वक वह कद्वानझून ककी प्रवक्रियद्वा मिम सहयकोग करनवे कवे धलए तहैयद्वार हहै और जब भश्री आवश्यकतद्वा हकोगश्री वह ईमिद्वानदद्वारश्री सवे अदद्वालत कवे समिक खकद कको उपलब्धि करद्वाएगद्वा और उन सभश्री शतरवं कको स्वश्रीकद्वार करनवे कवे धलए भश्री तहैयद्वार हहै जको न्यद्वायद्वालय उस पर अधधिरकोवपत करवेगश्री। आववेदक वनदरष हहै तथद्वा वह इस प्रकरण मिम वद० 02.09.2024 सवे कद्वारद्वागद्वार मिम वनरुद्ध हहै। इसधलए आववेदक कको जमिद्वानत पर छकोड़ वदयद्वा जद्वाय।
4. ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा नवे आववेदक कवे जमिद्वानत कद्वा प्रबल ववरकोधि करतवे हहए तकर प्रस्तकत वकयद्वा वक आववेदक दद्वारद्वा कद्वाररत अपरद्वाधि सवंवंजवेय एववं गवंभश्रीर प्रकक वत कद्वा हहै, इसधलए आववेदक कको जमिद्वानत पर न छकोड़द्वा जद्वाय।
5.
आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा कवे तकरवं कवे पररप्रवेक्ष्य मिम पतद्वावलश्री पर उपलब्धि सद्वारवद्वान तथ्ययों एववं पररणस्थवतययों कद्वा समिग्र रूप सवे अवलकोकन करनवे कवे बद्वाद , सबझूतयों ककी प्रकक वत और वकसश्री भश्री ठकोस ववरकोधिद्वात्मिक सद्वामिग्रश्री ककी अनकपणस्थवत एववं उपलब्धि सद्वामिग्रश्री सवे छवेड़छद्वाड़ ककी सवंभद्वावनद्वा न हकोनवे कवे तथ्य कको दवेखतवे हहए मिवेरश्री रद्वाय मिम आववेदक कको जमिद्वानत पर मिकक करनवे कद्वा उपयकक आधिद्वार हहै।
6. अतनः वद्वाद कवे गकण-दकोष पर वबनद्वा ककोई वरप्पणश्री वकए हहए आववेदक कको उपरकोक ववणरत अपरद्वाधि मिम सवंबवंधधित न्यद्वायद्वालय ककी सवंतकवष पर व्यवकगत बवंधि -पत एववं अधधिक धिनरद्वावश कवे ककोई भश्री दको प्रवतभझू प्रस्तकत करनवे पर वनमनधलधखत शतरवं कवे सद्वाथ जमिद्वानत पर छकोड़ वदयद्वा जद्वाय। i. आववेदक ववववेचनद्वा यद्वा परश्रीकण कवे ददौरद्वान अवभयकोजन सद्वाक्ष्ययों कवे सद्वाथ छवेड़छद्वाड़ नहहीं करवेगद्वा। ii. आववेदक अवभयकोजन सद्वावकययों व पश्रीवड़तद्वा / वशकद्वायतकतद्वार कको ण्डिरद्वायवेगद्वा/धिमिकद्वायवेगद्वा नहहीं।
iii. आववेदक न्यद्वायद्वालय कवे आदवेशयों कद्वा पद्वालन करवेगद्वा , वह परश्रीकण कवे ददौरद्वान वबनद्वा ककोई अनद्वावश्यक स्थगन धलए वनयत वतधथ पर न्यद्वायद्वालय मिम उपणस्थत हकोगद्वा तथद्वा परश्रीकण मिम ईमिद्वानदद्वारश्री सवे सहयकोग करवेगद्वा। iv. आववेदक जमिद्वानत पर ररहद्वा हकोनवे कवे बद्वाद जमिद्वानत ककी स्वतवंततद्वा कद्वा दकरूपयकोग नहश्री करवेगद्वा और वकसश्री भश्री अपरद्वाधधिक गवतववधधि मिम धलप्त नहहीं हकोगद्वा न ककोई अपरद्वाधधिक कक त्य करवेगद्वा। v. आववेदक प्रत्यक यद्वा अप्रत्यक रूप सवे मिद्वामिलवे कवे तथ्ययों सवे पररवचत वकसश्री भश्री व्यवक यद्वा पकधलस अधधिकद्वाररययों कको ककोई प्रलकोभन यद्वा धिमिककी नहहीं दवेगद्वा न हश्री उनसवे ककोई वद्वायदद्वा करवेगद्वा, धजसकवे कद्वारण उन्हम न्यद्वायद्वालय मिम तथ्ययों कको उजद्वागर करनवे सवे ववरत रहनद्वा पण्डिवेडे़।
7. उपरकोक शतरवं मिम सवे वकसश्री कवे उलवंघन कवे मिद्वामिलवे मिम , परश्रीकण न्यद्वायद्वालय आववेदक ककी जमिद्वानत वनयमिद्वानकसद्वार रद्द करनवे कको स्वतवंत हहै। Order Date :- 12.8.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad