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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 153195 (ALL)

SANJAY SINGH v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME LKO. AND ANOTHER

CRLR/803/2025 · 2025-09-17

Saurabh Lavania

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD LUCKNOW CRIMINAL REVISION No. - 803 of 2025 Court No. - 11 HON'BLE SAURABH LAVANIA, J. 1. Vakalatnama filed on behalf of opposite party No.2 by Shri Prashant Srivastva, Advocate is taken on record. 2. Heard learned counsel for the revisionist, learned A.G.A. for the State as well as Shri Prashant Srivastava and perused the record. 3. This criminal revision under Section 19(4) of the Family Court Act, read with Section 438/442 of the BNSS has been filed against the judgment and order dated 09.05.2025, passed by the Principal Judge, Family Court, Hardoi (in short "Family Court") in Criminal Misc. Case No. 521 of 2019 (Smt. Saroj Singh Vs. Sajnay Singh) under Section 125 Cr.P.C., whereby the maintenance of Rs.2500/- per month has been awarded. 4. In compliance of this Court order dated 25.07.2025, revisionist - Sanjay Singh and opposite party No.2 - Smt. Saroj Singh are present before this court duly identified by their respective counsel namely Shri Pankaj Gupta and Shri Prashant Srivastva, Advocates. Opposite party No.2-Smt. Saroj Singh has been brought by S.I. Kallu Ram Gupta and lady head constable Neelam Singh of Police Station -Baghauli, District - Hardoi. 5. The opposite party No.2 is not ready to settle the dispute amicably by way of mediation. In this view of the matter, this court proceeded to decide the case on merits. 6. Brief facts of the case are as under :- (i) The marriage of the revisionist and opposite party no.2 was solemnized according to Hindu rites and rituals on 01.07.2002. Versus Counsel for Revisionist(s) : Pankaj Gupta, Rachna Gupta Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Sanjay Singh .....Revisionist(s) State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Lko. And Another .....Opposite Party(s) (ii) Out of the wedlock of the revisionist and opposite party No.2, three children were born namely daughter Naina aged about 18 years, daughter Krishna aged about 15 years and daughter Sunaina aged about 7 years. (iii) On 25.05.2019, opposite party no.2 had gone to to her sisters' house and since then she is living with her family without any reason, as stated by the revisionist. (iv) The revisionist has also stated that he made several efforts to bring the opposite party No.2 back to matrimonial home but due to unnecessary interruption of her sister and her husband she is not ready to live with revisionist. (v) On 27.7.2019, the opposite party no.2 filed a case under section 125 Cr.P.C. (vi) On 03.11.2022, the revisionist filed reply to the application of opposite party no.2 and denied the allegations made in application. (vii) The Principal Judge, Family Court, Hardoi vide judgment and order dated 09.05.2025, after considering the pleadings and evidence adduced by the parties, allowed the application under Section 125 Cr.P.C. Hence, the revisionist by means of this revision has challenged the order dated 09.05.2025. 7. Impeaching the order of the Family Court, the learned counsel for the revisionist has submitted that the findings of the Family Court on issue No. 4 are perverse. The findings/observations on this issue ought to have been given by the Family Court in favour of the revisionist on the basis of evidence adduced by the parties. If the findings/observations on the issue No.4 were in favour of the revisionist then, no amount would have been awarded to the applicant/opposite party No.2 by the Family Court in view of Section 125(4) of the Cr.P.C. Referred relevant portion of the order impugned dated 09.05.2025 is extracted herein under :- "िनस्तारण िवचारणीय िबन्दु सं० 4 18- िवचारणीय िबन्दु सं० 4 इस आशय से िविनिश्वत िकया गया है िक क्या प्रािथनी स्वेच्छा से िबना युिक्त युक्त कारण के िवपक्षी से अलग रह रही है? 19- उक्त के पिरप्रेक्ष्य में प्रािथनी का कथन है िक शादी के कु छ समय बाद िवपक्षी व उसके पिरजन प्रािथनी से अितिरक्त दहेज में मोटर साइिकल की मांग करने लगे तथा अितिरक्त दहेज की मांग को लेकर प्रािथनी को मारने पीटने लगे। प्रािथनी जब मायके िवदा होकर आयी तब अपने िपता को अितिरक्त दहेज मांगने वाली बात बतायी। प्रािथनी के िपता कु छ िरश्तेदारों को ले जाकर िवपक्षी व उसके पिरजनो से खुशामद की और कहा िक हम गरीब आदमी है। हम दहेज की मांग कै से पूरी कर पायेंगे। तब िवपक्षीगण िकसी प्रकार रखने को तैयार हुए और िवदा कराकर ले गये। प्रािथनी के िपता की मृत्यु हो जाने के पश्चात िवपक्षी प्रािथनी को पुनः अितिरक्त दहेज की खाितर शारीिरक व मानिसक रूप से प्रतािडत करने और खाना कपड़ा की तकलीफ देने लगा। िदनांक 25.5.2019 को िवपक्षी ने प्रािथनी को मारा पीटा। बच्चों को छीनकर मात्र पहने हुए कपड़ो में प्रािथनी की बहन आशा के यहां छोड़कर चले गये। तब से प्रिथनी अपनी बहन आशा के घर में रह रही है। िवपक्षी द्वारा कोई खोज खबर नहीं ली गयी। अपने उक्त कथन के समथर्न प्रािथनी सरोज िसह साक्षी पी० डब्ल्यू 1 के रूप में परीिक्षत हुई है। साक्षी पी०डब्ल्यू 1 ने अपनी मुख्य परीक्षा साक्ष्य शपथ पत्र में उक्त कथनों का समथर्न िकया है तथा प्रित परीक्षा में िवपक्षी द्वारा िदये गये सुझाव से इनकार करते हुए यह कहा िक यह कहना गलत है िक मैं अपनी इच्छा से अपने पित को छोड़कर बहनोई के साथ रह रही हूँ। बिल्क मेरे पित ने मुझे मारा CRLR No. 803 of 2025 2 पीटा था। इस सुझाव से भी इनकार िकया िक प्रािथनी का अपने बहनोई में नाजायज सम्बन्ध है इसिलये वह बहनोई के साथ रह रही हो। बिल्क संजय ने मारपीट कर घर से िनकाल िदया। प्रािथनी की ओर से परीिक्षत माक्षी पी०डब्ल्यू 2 प्रमोद कु मार िसह ने अपनी मुख्य परीक्षा साक्ष्य शपथ पत्र में िवपक्षी द्वारा प्रािथनी से अितिरक्त दहेज की मांग करने और अितिरक दहेज की मांग को लेकर प्रतािड़त करने का कथन िकया है, िकन्तु अपनी प्रित परीक्षा में यह कहा है िक मेरे सामने सरोज व संजय के मध्य कभी िववाद नहीं हुआ और न ही मुझसे संजय िसह ने अितिरक्त दहेज की मांग की। इसप्रकार चूंिक साक्षी पी०डबल्यू 2 के समक्ष प्रािथनी एवं िवपक्षी के बीच कोई मारपीट नहीं हुयी, न ही उसके सामने कभी दहेज की मांग की गयी। अतः िवपक्षी द्वारा प्रािथनी को प्रतािड़त करने एवं अितिरक्त दहेज की मांग करने का तथ्य साक्ष्य पी०डब्ल्यू 2 की व्यिक्तगत जानकारी में नहीं है। अतः साक्षी पी०डब्ल्यू 2 द्वारा अपनी मुख्य परीक्षा साक्ष्य शपथ पत्र में िकये गये इस कथन िक िवपक्षी व उसके पिरजन प्रािथनी को अितिरक्त दहेज के िलए प्रतािड़त करते थे, का कोई महत्व नहीं रह जाता है। इसी प्रकार साक्षी पी०डब्ल्यू 3 बालकराम ने भी अपनी मुख्य परीक्षा साक्ष्य शपथ पत्र में िवपक्षी द्वारा प्रािथनी से अितिरक्त दहेज की मांग करने और अितिरक्त दहेज की मांग को लेकर प्रतािड़त करने का कथन िकया है, िकन्तु अपनी प्रित परीक्षा में यह कहा है िक मै संजय को पहचानता हूँ। संजय ने मेरे सामने कभी सरोज को नहीं मारा पीटा, न ही िकसी प्रकार के दहेज की मांग की। इसप्रकार चूंिक साक्षी पी०डब्ल्यू 3 के समक्ष प्रािथनी एवं िवपक्षी के बीच कोई मारपीट नहीं हुयी, न ही उसके सामने कभी दहेज की मांग की गयी। अतः िवपक्षी द्वारा प्रािथनी को प्रतािड़त करने एवं अितिरक्त दहेज की मांग करने का तथ्य साक्षी पी०डब्ल्यू3 की व्यिक्तगत जानकारी में नहीं है। अतः साक्षी पी०डब्ल्यू द्वारा अपनी मुख्य परीक्षा साक्ष्य शपथ पत्र में िकये गये इस कथन िक िवपक्षी व उसके पिरजन प्रािथनी को अितिरक्त दहेज के िलए प्रतािड़त करते थे, का कोई महत्व नहीं रह जाता है। इस प्रकार अितिरक्त दहेज की मांग िवपक्षी द्वारा िकया जाना तथा अितिरक्त दहेज की मांग पूरी न होने पर प्रािथनी को मानिसक एवं शारीिरक रूप से प्रतािड़त करने के तथ्य के बावत एक मात्र साक्षी पी०डब्ल्यू 1 श्रीमती सरोज का है। भले ही साक्षी पी०डब्ल्यू 2 व पी०डब्ल्यू3 के साक्ष्य से िवपक्षी द्वारा प्रािथनी को दहेज की मांग को लेकर प्रतािड़त करने की पुिष्ट नही होती है, िकन्तु साक्षी पी०डब्ल्यू 1 ने अपने साक्ष्य से िवपक्षी द्वारा प्रािथनी को दहेज की मांग को लेकर प्रतािड़त करने की पुिष्ट की है। 20- दूसरी ओर िवपक्षी का कथन है िक प्रािथनी िववाह के उपरान्त िवपक्षी तथा उसके पिरवार वालो के प्रित क्रू रता व अभद्रता करने की आदत बना ली तथा स्वयं की मजीर् से मायके व अपनी बहन के यहां चली गयी। उक्त कथन के समथर्न में स्वयं िवपक्षी संजय िसह डी०डब्ल्यू 1 के रूप में अपनी मुख्य परीक्षा साक्ष्य शपथ पत्र दािखल िकया है। िवपक्षी ने अपनी मुख्य परीक्षा साक्ष्य शपथ पत्र में यह कहा है िक िववाह के एक वषर् बाद ही प्रािथनी ने अपनी स्वेच्छा से अपने बहनोई अरुण कु मार िसह के यहां जाना प्रारम्भ कर िदया िजस पर िवपक्षी ने प्रािथनी को िबना िकसी कारण या िबना बुलावे के अपने बहनोई के यहां जाने से रोका, परन्तु प्रािथनी नही मानी और अपने जीजा के घर आती जाती रही। यहां पर यह उल्लेखनीय है िक यह तथ्य िक प्रािथनी स्वेच्छा से िबना िकसी युिक्त युक्त कारण के िवपक्षी से प्रथक रह रही है, को सािबत करने का भार िवपक्षी पर हैं। िवपक्षी की ओर से एक मात्र साक्षी स्वयं िवपक्षी डी०डब्ल्यू1 के रूप में अपनी मुख्य परीक्षा साक्ष्य शपथ पत्र दािखल िकया है और उसके पक्षात न्यायालय आना बंद कर िदया, िजसके कारण साधी डी०डब्ल्यू1 से प्रािथनी की ओर से कोई प्रित परीक्षा नहीं की जा सकी। ऐसी िस्थित में साक्षी डी०डब्ल्यू1 संजय िसह का अपनी मुख्य परीक्षा साक्ष्य शपथ पत्र में यह कहना िक प्रािथनी स्वेच्छा से िबना िकसी युिक्त युक्त कारण के अपने मायके या अपने बहनोई के साथ रह रही है, सािबत नहीं माना जा सकता। िवपक्षी की ओर से िकसी अन्य साक्षी को अपने उक्त कथनों की पुिष्ट हेतु परीिक्षत नहीं कराया गया है। जबिक दूसरी ओर प्रािथनी ने अपने इस कथन के समथर्न में िक िवपक्षी द्वारा प्रािथनी को अितिरक्त दहेज की मांग को ले करके प्रतािडत िकया गया और मारपीट कर घर से िनकाल िदया गया, की पुिष्ट स्वयं प्रािथनी ने अपने साक्ष्य के माध्यम से िकया है। 21- इसके अितिरक्त यहां पर यह भी उल्लेखनीय है िक सािक्षयों में यह आया है िक प्रािथनी के माता िपता की मृत्यु हो चुकी है। जब प्रािथनी के मायके में उसके माता िपता की मृत्यु हो जाती है, तो मायके में भी आश्रय िमल पाना मुिश्कल होता है। ऐसी िस्थित में जहां तक प्रािथनी का अपनी बहन के यहां रहने का प्रश्न है, यह सम्भव है िक इसी कारण से वह अपनी बहन के यहां आश्रय िलये हो। इस प्रकार िवपक्षी की ओर से कोई भी ऐसा साक्ष्य व प्रमाण दािखल नहीं िकया गया है िजससे यह पाया जाये िक प्रािथनी स्वेच्छा से िबना युिक्त युक्त कारण के िवपक्षी से प्रथक रह रही है। 22- इसके अितिरक्त भारतीय समाज में वैवािहक िस्थित को बनाये रखना पुरुष की तुलना में मिहलाओं के िलये अिधक महत्वपूणर् होता है क्योंिक सामािजक व आिथक सुरक्षा के िलये अिधकतर मिहलायें िववाह के पहले िपता पर और िववाह के पश्चात पित पर िनभर्र हो जाती है। CRLR No. 803 of 2025 3 िववाह के पश्चात पत्नी अपने माता िपता का घर छोड़कर पित के घर रहने के िलये जाती है। इस प्रकार यह कहा जा सकता है िक पत्नी मानिसक रूप से इस बात की तैयारी करके ससुराल जाती है िक शेष जीवन उसे अपने पित के साथ ससुराल में ही व्यतीत करना है। यिद ससुराल में िकसी मिहला के रहने की पिरिस्थितयां कु छ प्रितकू ल भी हो, तब भी मिहला यथा सम्भव उन पिरिस्थितयों के अनुरूप स्वयं को ढालने का प्रयास करती है, क्योंिक उसके सामने दूसरा िवकल्प अथार्त मायके में रहने का, अिधक अच्छा िवकल्प नहीं होता। इन पिरिस्थितयों के आधार पर यह कहा जा सकता है िक सामान्य पिरिस्थितयों में कोई मिहला अकारण अपने पित को छोडकर अपने मायके में रहना पसन्द नहीं करेगी। स्पष्ट है िक इस मामले में भी यह कहा जा सकता है िक प्रािथनी सरोज िसह के िलये उसकी ससुराल में रहने की पिरिस्थितयां सहज एवं स्वाभािवक नहीं थी, िजसके कारण उसे अपनी ससुराल को छोड़कर अपने मायके में रहना पड रहा है। यिद प्रािथनी अपने माता िपता का घर छोडकर िवपक्षी के घर शेष जीवन व्यतीत करने के िलये गयी थी, तो यह कहा जा सकता है िक यह उत्तरदाियत्व िवपक्षी का था िक वह प्रािथनी को इस प्रकार अपने घर में रखता िजससे प्रािथनी सामान्य रूप से अपना जीवन व्यतीत कर सकें । यद्यिप यह सही है िक कु छ मिहलायें अपनी संकीणर् मानिसक सोच के कारण शादी के बाद से ही पित पर यह दबाव बनाने लगती हैं िक उसके पित उसकी इच्छाओं के अनुसार चले और वह अपनी कमाई का पूरा भाग या अिधकांश भाग उस पर और उसके बचों पर खचर् करे। इस प्रवृित्त की मिहलायें यह सहन नहीं कर पाती िक पित की कमाई का कोई भाग पित के माता िपता या भाई बहन के ऊपर खचर् हो। कभी कभी पत्नी की यही प्रवृित्त बड़े िववाद का रूप ले लेती है, िकन्तु इस मामले में यिद ऐसी कोई पिरिस्थित थी तो िवपक्षी को यह बात न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करना चािहए था और अपने साक्ष्यों से इसे सािबत करना चािहए था। यिद प्रािथनी के अपने ससुराल में रहने की पिरिस्थितयां सही नही थी और िवपक्षी द्वारा भी प्रािथनी के अलग रहने का कोई तकर् संगत कारण स्पष्ट नहीं िकया गया है तो इन पिरिस्थितयों में यह माना जा सकता है िक िवपक्षी का व्यवहार प्रािथनी के प्रित उिचत नहीं था। स्पष्ट है िक इन समस्त तथ्यों पिरिस्थितयों को देखते हुये यह कहा जा सकता है िक भले ही प्रािथनी के व्यवहार में कु छ त्रुिट या कमी रही हो, िकन्तु यिद प्रािथनी को अपने मायके में रहना पड़ रहा है तो िवपक्षी उसके भरण पोषण के िलये उत्तरदायी है। तदनुसार िवचारणीय िबन्दु सं० 4 िनस्तािरत िकया जाता है। िनस्तारण िवचारणीय िबन्दु सं० 5 23- वाद िबन्दु सं० 5 इस आशय से िविनिश्चत िकया गया है िक क्या िवपक्षी द्वारा प्रािथनी का भरण-पोषण करने में उपेक्षा की गयी है या इन्कार िकया गया है? 24- उक्त के पिरप्रेक्ष्य में प्रािथनी का कथन है िक िवपक्षी ने जब से प्रािथनी को मारपीट कर घर िनकाला है तब से आजतक िवपक्षी ने प्रािथनी की कोई खोज खबर नहीं ली है और न ही कोई खाना खचार् आिद िदया है। मजबूर होकर प्रािथनी अपनी बहन के यहां रह रही है। िवपक्षी की ओर से प्रािथनी के भरण पोषण प्राथर्ना पत्र के िवरूद्ध 16 क अपना जवाब दावा दािखल िकया गया है िजसमे िवपक्षी ने कही पर भी यह कथन नहीं िकया है िक जब से प्रािथनी अपनी बहन के यहां रह रही है तब से िवपक्षी ने प्रािथनी को भरण पोषण की कोई धनरािश दी हो। उभय पक्ष की ओर से रजनेश बनाम नेहा के अनुपालन में शपथ पत्र दािखल िकये गये हैं। शपथ पत्र में भी उभय पक्षों ने यह उल्लेख िकया है िक पूवर् के िकसी मामले में प्रािथनी को भरण पोषण की धनरािश प्राप्त नही हो रही है। इसके अितिरक्त िवपक्षी की ओर से कोई भी ऐसा साक्ष्य पत्रावली पर दािखल नहीं िकया गया है िजससे यह पाया जाये िक िवपक्षी द्वारा प्रािथनी को उसके भरण पोषण हेतु कोई व्यवस्था की गयी हो। प्रािथनी िवपक्षी की िववािहता पत्नी है। अतः िवपक्षी का यह दाियत्व है िक अपनी पत्नी के भरण पोषण की व्यवस्था करें। इस प्रकार यह कहा जा सकता है िक िवपक्षी द्वारा प्रािथनी के भरण पोषण में उपेक्षा बरती जा रही है एवं इनकार िकया जा रहा है। तदनुसार िवचारणीय िबन्दु सं० 5 िनस्तािरत िकया जाता है। िनस्तारण िवचारणीय िबन्दु सं० 6 25- िवचारणीय िबन्दु सं० 6 इस तथ्य से सम्बिन्धत है िक क्या प्रािथनी कोई अनुतोष प्राप्त करने की अिधकािरणी है? 26- वाद िबन्दु सं० 1, 2, 3, 4 एवं 5 के अवधारण के दौरान न्यायालय द्वारा यह अवधािरत िकया जा चुका है िक प्रािथनी सरोज िसह िवपक्षी संजय िसह की िववािहता पत्नी है। प्रािथनी अपना भरण पोषण करने में असमथर् मिहला है जबिक िवपक्षी संजय िसह पयार्प्त साधनों वाला व्यिक्त है। अतः िवपक्षी का वैधािनक दाियत्य है िक वह अपनी पत्नी का भरण पोषण अपने संसाधनों से करे। पत्रावली पर ऐसा कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं है िक िजससे यह पाया जाये िक प्रािथनी ने िवपक्षी का पिरत्याग िकया हो या वह जारता की दशा में रह रही है। प्रािथनी की ओर CRLR No. 803 of 2025 4 से प्रस्तुत रजनेश बनाम नेहा के िवस्तृत शपथ पत्र में यह भी उल्लेख िकया है िक उसे अन्य िकसी भी कायर्वाही में भरण पोषण का आदेश पािरत नहीं िकया गया है, न ही उसे कोई भरण पोषण प्राप्त हो रहा है। ऐसी िस्थित में प्रािथनी के द्वारा िदनांक 27.7.2019 को प्रस्तुत भरण पोषण प्राथर्ना पत्र अन्तगर्त धारा 125 दं०प्र०सं० स्वीकार िकये जाने योग्य है एवं प्रािथनी सरोज िसह अपने पित संजय िसह से भरण पोषण प्राप्त करने की अिधकािरणी है। 27- अब यहां पर यह देखा जाना है िक प्रािथनी को िवपक्षी संजय िसह से िकतनी भरण पोषण की धनरािश िदलायी जाये? िवचारणीय िबन्दु सं० 3 के िनस्तारण के समय यह पाया जा चुका है िक िवपक्षी के पास ढाई बीघा कच्चे भूिम है तथा उसके िपता के नाम लगभग 18-20 बीघा कच्चे कृ िष भूिम है। इस प्रकार स्वयं िवपक्षी के ही कथनों से यह स्पष्ट है िक िवपक्षी के पास ढाई बीघा तथा उसके िपता के पास 18-20 बीघा खेती है। चूंिक िवपक्षी ने स्वयं स्वीकार िकया है िक उसके पास ढाई बीघा व उसके िपता के नाम 18-20 बीघा खेती है। अतः यह माना जा सकता है िक िवपक्षी पयार्प्त साधनों वाला व्यिक्त है और प्रािथनी का भरण पोषण करने में सक्षम है। 28- प्रािथनी पी०डब्ल्यू 1 के रूप में अपनी िजरह में यह कहा है िक तीनो बच्चों की पढ़ाई िलखाई व भरण पोषण का खचार् मेरे पित संजय ही वहन कर रहे है। इस प्रकार यह स्पष्ट है िक प्रािथनी एवं िवपक्षी के संसगर् से उत्पन्न तीनों बचों का भरण पोषण, पढ़ाई िलखाई आिद िवपक्षी ही कर रहे है। अतः िवपक्षी की उपरोक्त आमदनी तथा मामले के समस्त तथ्यों एवं पिरिस्थितयों पर िवचार करने के उपरान्त उभय पक्ष के आिथक, शैक्षिणक एवं सामािजक पिरिस्थित को दृिष्टगत रखते हुये न्यायालय इस मत का है िक प्राथर्ना पत्र प्रस्तुत िकये जाने की ितिथ 27.7.2019 से िवपक्षी से प्रािथनी को प्रितमाह 2500/-रूपये भरण पोषण के रूप में िदलवाया जाना उिचत होगा। आदेश 29- प्रािथनी श्रीमती सरोज िसह का प्राथर्ना पत्र अन्तगर्त धारा 125 दं०प्र०सं० आंिशक रूप से स्वीकार िकया जाता है। िवपक्षी संजय िसह को आदेश िदया जाता है िक वह धारा 125 दं०प्र०स० के अन्तगर्त भरण पोषण प्राथर्ना पत्र प्रस्तुत िकए जाने की ितिथ 27.7.2019 से प्रािथनी सरोज िसह को प्रितमाह 2500/-रूपये की दर से भरण पोषण प्रदत्त िकया जाना सुिनिश्चत करे। 30- पत्रावली के अवलोकन से यह स्पष्ट है िक इसी मुकदमे में िदनांक 22.2.2024 को अन्तिरम भरण पोषण के रूप में प्रािथनी को अन्तिरम भरण पोषण के रूप में 2000/-रूपये का आदेश िदया गया है। यिद उक्त आदेश के अनुपालन में िवपक्षी द्वारा प्रािथनी को अन्तिरम भरण पोषण की कोई धनरािश पूवर् में अदा की गयी है, तो पूवर् में अदा की गयी धनरािश इस भरण पोषण के आदेश में समायोिजत की जायेगी। 31- प्राथर्ना पत्र प्रस्तुत िकये जाने की ितिथ से लेकर िनणर्य की ितिथ तक देय भरण-पोषण की धनरािश को िवपक्षी 03 माह के भीतर प्रािथनी को प्रदत्त कर सकता है। िनणर्य की ितिथ के बाद से देय भरण पोषण की धनरािश को हर महीने की 10 तारीख तक िवपक्षी संजय िसह द्वारा प्रािथनी सरोज िसह को प्रदत्त िकया जाये। दािण्डक प्रकीणर् वाद सं० 521/2019 श्रीमती सरोज िसह बनाम संजय िसह तद्नुसार िनस्तािरत की जाती है। पत्रावली िनयमानुसार दािखल अिभलेखशाला हो।" 8. On the other hand, Shri Prashant Srivastva, who appeared on behalf of the opposite party No.2, submitted that the observations/findings of the Family Court on the issue No. 4 are perfectly justified. In continuation, he has also submitted that the opposite party No.2 was examined before the Family Court as PW-1 and she was also cross- examined by the revisionist and the opposite party No.2 (PW-1) supported her case as pleaded in the application under Section 125 Cr.P.C. and thereafter, Pramod Kumar Singh (PW-2) and Balak Ram (PW-3) were also examined before the Family Court, who failed to support the case of opposite party No.2, and in the instant case the Family Court on the basis of statement of opposite party No.2 (PW-1) passed the order dated 09.05.2025. CRLR No. 803 of 2025 5 9. The statement of opposite party No.2 (PW-1) remained intact before the Family Court. According to the statement of opposite party No.2 (PW-1) she was ill treated by the revisionist and also on some occasions she was assaulted by the revisionist. Therefore, in compelling circumstances the opposite party No.2, who is the mother of three children left her matrimonial house. 10. According to Pramod Kumar Singh (PW-2) and Balak Ram (PW-3), the opposite party No.2 is legally wedded wife of revisionist and in their presence revisionist never assaulted the opposite party No.2. However, the fact remains that opposite party No.2 (PW-1), before the Family Court established/proved her case including the fact that under the compelling circumstances she left the matrimonial house. 11. It is also stated that the revisionist in the pleadings and in support thereof filed an affidavit of evidence wherein he leveled certain allegations according to which the opposite party No.2 was living with her 'Jija/brother-in-law' but the same were not proved/established and this aspect of the case proves that under the compelling circumstances, the opposite party No.2 left her matrimonial house. 12. At this stage, on being asked, after considering the meager amount awarded by the Family Court after recording the finding that under the compelling circumstances the opposite party No.2 left the matrimonial home, that if an opportunity is provided then in that eventuality can the amount awarded by the Family Court be reduced, which itself is meager, learned counsel for the revisionist has failed to reply. 13. Considered the aforesaid and also the judgments on the issue (See : Anju Garg and another vs. Deepak Kumar Garg, reported in 2022 SCC OnLine SC 1314; Sanjeev Kapoor vs. Chandana Kapoor and others, reported in (2020) 13 SCC 172; Chander Parkash Bodh Raj vs. Shila Rani Chander Prakash: 1968 SCC Online Del 52; Rajnesh vs. Neha, (2021) 2 SCC 324 : (2021) 2 SCC (Civ) 220 : 2020 SCC OnLine SC 903 347; Kulbhushan Kumar Vs. Raj Kumari, (1970) 3 SCC 129 ; Kalyan Dey Chaudhary Vs. Rita Dey Chaudhary Nee Nandy, (2017) 14 SCC 200. 14. Upon due consideration of the aforesaid including the judgments, referred above, and the meager amount awarded by the Principal Judge, Family Court, Hardoi vide order 09.05.2025, i.e. Rs.2500/- per month after recording finding based upon the statement of opposite party No.2 (PW-1), who could only prove/state the behaviour of revisionist with her and who in her cross-examination stated that it is incorrect/wrong to say that I am living with my brother-in-law on my own will and I am having illicit relation with my brother-in-law and also stated that revisionist assaulted and ill treated her on various occasions on account of non fulfillment of demand of dowry and that under compelling circumstances the opposite party No. 2 left her matrimonial home as well as the finding on financial status of the revisionist, this Court is of the view that no interference in the order impugned dated 09.05.2025 is required by this Court. CRLR No. 803 of 2025 6 15. The instant revision is accordingly dismissed. No order as to costs. 16. The amount deposited by the revisionist before this Court, shall be released in favour of the opposite party No.2, which shall be adjusted in the amount of maintenance awarded by the Principal Judge, Family Court, Hardoi. 17. The copy of the order be sent to the Court concerned forthwith. September 17, 2025 ML/- CRLR No. 803 of 2025 7 (Saurabh Lavania,J.) Digitally signed by :- MUNNA LAL High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench