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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 152735 (ALL)
SUNIL SINGH v. STATE OF U.P. THRU. CHIEF SECY. HOME DEPTT. LKO. AND 2 OTHERS
A482/5880/2025 · 2025-08-01
Subhash Vidyarthi
body2025
[ 2025 DAILYLAW 152735 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:44690 Court No. - 15 Case :- APPLICATION U/S 482 No. - 5880 of 2025 Applicant :- Sunil Singh Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Chief Secy. Home Deptt. Lko. And 2 Others Counsel for Applicant :- Nagendra Pratap Singh Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J.
1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री नप्रागकेन्द्र पतप्राप धससिंह, वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा शश्री हकेमरप्राज विमप्रार्मा एविसिं वविपकश्री ससिंख्यप्रा 2 तरप्रा 3 कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री गगौरवि वनगम कक ससुनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा अविलककन वकयप्रा।
2. धिप्रारप्रा 482 दण्ड पवक्रियप्रा ससिंवहतप्रा कके अन्तगर्मात पस्तसुत इस पप्रारर्मानप्रा पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके परम ससूचनप्रा ररपकरर्मा ससिंख्यप्रा 08 सन 2013 अन्तगर्मात धिप्रारप्रा 363, 366, 376 भप्रा०दसिं०ससिं०, रप्रानप्रा उमरश्रीबकेगमगसिंज, जनपद गकण्डप्रा कके अनसुक्रिम मम पस्तसुत आरकप पत वदनप्रासिंक 22.05.2013 तरप्रा उक कके आधिप्रार पर आपरप्राधधिक विप्राद ससिंख्यप्रा 495 सन 2015 मम वविदप्रान वविचप्रारण न्यप्रायप्रालय दप्रारप्रा पप्राररत आदकेश वदनप्रासिंक 20.07.2015 धजससके उक अपरप्राधि कप्रा ससिंजप्रान धलयप्रा एविसिं पप्रारर्थी कक वविचप्रारण कके धलए तलब वकयप्रा गयप्रा , कके वनरस्तश्रीकरण ककी पप्रारर्मानप्रा इस आधिप्रार पर ककी गई हहै वक पकक्षों कके मध्य वदनप्रासिंक 22.05.2025 समझगौतप्रा हक गयप्रा हहै।
3. उपरकक पकरण वविपकश्री ससिंख्यप्रा 2 दप्रारप्रा वदनप्रासिंक 13.02.2013 कक धलखप्राई गई परम ससूचनप्रा ररपकरर्मा कके आधिप्रार पर ससिंसस्रत हहआ धजसमम कहप्रा गयप्रा वक पप्रारर्थी वशकप्रायतकतप्रार्मा ककी पसुतश्री कक भगप्रा लके गयप्रा।
4. वविविकेचनप्रा कके उपरप्रान्त वविविकेचक नके वदनप्रासिंक 22.05.2013 कक आरकप-पत पस्तसुत वकयप्रा तरप्रा वविचप्रारण न्यप्रायप्रालय नके धिप्रारप्रा 363, 366, 376 भप्रा०दसिं०ससिं० कके अपरप्राधिक्षों कके ससिंबसिंधि मम आरकप-पत पस्तसुत वकयप्रा तरप्रा वविचप्रारण न्यप्रायप्रालय नके वदनप्रासिंक 20.07.2015 कक अपरप्राधिक्षों कप्रा ससिंजप्रान धलयप्रा।
5. पप्रारर्मानप्रा-पत कके सप्रार पस्तसुत शपर-पत मम कहप्रा गयप्रा हहै वक पकक्षों कके मध्य वदनप्रासिंक 22.05.2025 कक एक समझगौतप्रा हक गयप्रा हहै धजसमम यह कहप्रा गयप्रा हहै वक वशकप्रायतकतप्रार्मा नके अपनश्री पसुतश्री (वविपकश्री ससिंख्यप्रा 3) कप्रा वविविप्राह वकसश्री अन्य व्यवक कके सप्रार विरर्मा 2013 मम कर वदयप्रा रप्रा और वविपकश्री ससिंख्यप्रा 3 अपनके पवत कके सप्रार ससुखमय जश्रीविन व्यतश्रीत कर रहश्री हहै तरप्रा उसकप्रा एक पसुत एविसिं एक पसुतश्री भश्री हहै। पश्नगत आपरप्राधधिक कप्रायर्माविप्राहश्री जप्रारश्री रहनके
सके पश्रीवड़ितप्रा कके दप्राम्पत्य जश्रीविन मम तनप्रावि उत्पन्न हक सकतप्रा हहै तरप्रा इस कप्रारण सके पश्रीवड़ितप्रा तरप्रा वशकप्रायतकतप्रार्मा वविविप्राद कक आगके नहहीं बढप्रानप्रा चप्राहतके हह।
6.
एक पसूरक शपर-पत कके मप्राध्यम सके पश्रीवड़ितप्रा दप्रारप्रा धिप्रारप्रा 161 एविसिं धिप्रारप्रा 164 दसिं०प०ससिं० कके असिंतगर्मात वदयके गयके बयप्रानक्षों ककी पवतयप्रासिं पस्तसुत ककी गयश्री हह धजसमम उसनके यह कहप्रा हहै वक विह अपनश्री मजर्थी सके पप्रारर्थी कके सप्रार गयश्री रश्री क्यक्षोंवक विह उससके पकेम करतश्री रश्री। पश्रीवड़ितप्रा नके यह कहप्रा रप्रा वक पप्रारर्थी नके उसके भगप्रायप्रा नहहीं रप्रा।
7. पश्रीवड़ितप्रा कके वचवकत्सककीय परश्रीकण मम विह बप्राधलग पप्रायश्री गयश्री तरप्रा वचवकत्सककीय परश्रीकण एविसिं पहैरप्राललॉधजकल परश्रीकण आख्यप्रा सके ककई तथ्य पकप्राश मम नहहीं आयप्रा जक बलप्रात्कप्रार कके आरकपक्षों ककी पसुवष्टि करके।
8. वविपकश्री ससिंख्यप्रा 2 तरप्रा 3 नके एक पवतशपर-पत पस्तसुत करकके पप्रारर्मानप्रा-पत कप्रा समरर्मान वकयप्रा हहै। 9 बहकरश्री लप्राल बनप्राम उत्तर पदकेश रप्राज्य और अन्य; 2024 एससश्रीसश्री ऑनलप्राइन इलप्राहप्राबद 4596 मम इस न्यप्रायप्रालय नके धिप्रारप्रा 482 दण्ड पवक्रियप्रा ससिंवहतप्रा ककी व्यप्रापकतप्रा ककी जप्रासिंच करतके हहए मप्राननश्रीय सविर्वोच्च न्यप्रायप्रालय दप्रारप्रा दक्सप्राबकेन बनप्राम गसुजरप्रात रप्राज्य 2022 एससश्रीसश्री ऑनलप्राइन एससश्री 936, पश्री. रप्रामचसिंद्र रप्रावि बनप्राम कनप्रार्मारक रप्राज्य, (2002) 4 एससश्रीसश्री 578, नररसिंदर धससिंह बनप्राम पसिंजप्राब रप्राज्य, (2014) 6 एससश्रीसश्री 466, परबतभप्राई अहश्रीर बनप्राम गसुजरप्रात रप्राज्य, (2017) 9 एससश्रीसश्री 641, पश्री.
धिमर्मारप्राज बनप्राम रणमसुगम, 2022 एससश्रीसश्री ऑनलप्राइन एससश्री 1186, मध्य पदकेश रप्राज्य बनप्राम लक्ष्मश्री नप्रारप्रायण, (2019) 5 एससश्रीसश्री 688, रप्रामगकपप्राल बनप्राम मध्य पदकेश रप्राज्य, (2022) 14 एससश्रीसश्री 531, रप्रामप्रावितप्रार बनप्राम मध्य पदकेश रप्राज्य, (2022) 13 एससश्रीसश्री 635 और कवपल गसुपप्रा बनप्राम रप्राज्य (वदलश्री एनसश्रीरश्री), 2022 एससश्रीसश्री ऑनलप्राइन एससश्री 1030 कके वनणर्मायक्षों कप्रा अविलककन वकयप्रा हहै और उन वनणर्मायक्षों सके यह धसदप्रासिंत वनकप्रालके हह वक धिप्रारप्रा 482 दसिं०प०ससिं० दप्रारप्रा मप्रान्यतप्रा पप्राप उच्च न्यप्रायप्रालयक्षों ककी अन्तवनर्मावहत शवकयप्रासिं व्यप्रापक हह तरप्रा विके लगभग सभश्री सस्रवतयक्षों कप्रा ध्यप्रान रख सकतश्री हह , जहप्रासिं वकसश्री परश्रीकण, जप्रासिंच यप्रा कप्रायर्माविप्राहश्री मम उच्च न्यप्रायप्रालय दप्रारप्रा हस्तककेप आविश्यक हक जप्रातप्रा हहै, वकन्तसु इस शवक कप्रा पयकग वविविकेकपसूणर्मा तरप्रा सचकेत रूप सके वकयप्रा जप्रानप्रा चप्रावहए। उच्च न्यप्रायप्रालय धिप्रारप्रा 482 दसिं०प०ससिं० कके असिंतगर्मात अपनके अधधिकप्रार ककेत कप्रा पयकग कर परम ससूचनप्रा ररपकरर्मा और वविविकेचनप्रा कक रद कर सकतके हह तरप्रा यवद न्यप्रावयक पवक्रियप्रा कके दसुरुपयकग कप्रा मप्रामलप्रा स्पष्टि रूप सके बनतप्रा हहै तक आपरप्राधधिक कप्रायर्माविप्राहश्री कक समप्राप कर सकतके हह। आपरप्राधधिक कप्रायर्माविप्राहश्री कक रद्द करनके कके ससिंदभर्मा मम ऐसश्री शवकयक्षों कप्रा पयकग सप्राविधिप्रानश्री सके वकयप्रा जप्रानप्रा चप्रावहए, धजसमम समप्राज ककी
अन्तश्चकेतनप्रा पर अपरप्राधि ककी पकक वत और पभप्रावि ; चकर ककी गसिंभश्रीरतप्रा, अवभयसुक और पश्रीवड़ित कके बश्रीच समझगौतके ककी स्विहैसच्च्छिक पकक वत , अवभयसुक व्यवकयक्षों कप्रा आचरण और अन्य पप्राससिंवगक वविचप्रार शप्रावमल हक्षों। यद्यवप न्यप्रायप्रालयक्षों कक जघन्य और गसिंभश्रीर अपरप्राधिक्षों सके ससिंबसिंधधित कप्रायर्माविप्राहश्री कक रद्द करनके कप्रा कप्रायर्मा सप्राविधिप्रानश्री सके करनप्रा चप्रावहए , लकेवकन उच्च न्यप्रायप्रालय कक यह जप्रासिंच करनके सके नहहीं रककप्रा जप्रा सकतप्रा हहै वक क्यप्रा पयप्रार्माप सप्राक्ष्य हह जक आरकपक्षों कक धसद करनके मम सहप्रायक हक सकतके हह। उच्च न्यप्रायप्रालय उन मप्रामलक्षों मम भश्री कप्रायर्माविप्राहश्री कक रद कर सकतप्रा हहै जहप्रासिं पकक्षों नके आजश्रीविन कप्रारप्राविप्रास ककी अधधिकतम सजप्रा विप्रालके जघन्य अपरप्राधि कके धलए दकरधसद कके बप्राद समझगौतप्रा कर धलयप्रा हहै। धिप्रारप्रा 482 दसिं०प०ससिं० कके असिंतगर्मात अन्तवनर्मावहत शवकयक्षों कप्रा पयकग करनके ककी उद्दकेश्य न्यप्राय कके उद्दश्यक्षों कक ससुरवकत करनप्रा हकगप्रा। उच्च न्यप्रायप्रालय ककी पयप्रार्माप न्यप्राय करनके ककी शवकयक्षों कक पवतबसिंधधित करनके विप्रालप्रा ककई पवतबसिंधिक वनयम नहहीं हक सकतप्रा हहै , क्यक्षोंवक धिप्रारप्रा 482 दसिं०प०ससिं० कके तहत वनवहत शवकयक्षों कप्रा पवतबसिंधिप्रात्मक वनविर्माचन गसिंभश्रीर अन्यप्राय कप्रा कप्रारण बन सकतप्रा हहै।
10. कके .
कके . धिसिंदप्रापप्रानश्री बनप्राम रप्राज्य, 2022 एससश्रीसश्री ऑनलप्राइन एससश्री 1056 कके मप्रामलके मम, यगौन अपरप्राधिक्षों सके बप्रालकक्षों कप्रा ससिंरकण (पकक्सक) अधधिवनयम, 2012 ककी धिप्रारप्रा 5(जके) ( ) ii सहपवठित धिप्रारप्रा 6, 5(आई) सहपवठित धिप्रारप्रा 6 और 5(एन) सहपवठित धिप्रारप्रा 6 कके असिंतगर्मात एक पप्रारवमककी दजर्मा ककी गई रश्री, धजसमम आरकप लगप्रायप्रा गयप्रा रप्रा वक अपश्रीलकतप्रार्मा, जक पश्रीवड़ितप्रा कप्रा मप्रामप्रा हहै , नके पश्रीवड़ितप्रा सके वविविप्राह कप्रा विप्रादप्रा करकके उसकके सप्रार शप्रारश्रीररक ससिंबसिंधि बनप्राए, जक बलप्रात्कप्रार कके समप्रान रप्रा। सत न्यप्रायप्राधिश्रीश नके उसके दकरश्री ठिहरप्रायप्रा और 10 विरर्मा कके कठिकर कप्रारप्राविप्रास ककी सजप्रा ससुनप्राई। उच्च न्यप्रायप्रालय नके दकरधसवद और सजप्रा कक बरकरप्रार रखप्रा रप्रा। मप्राननश्रीय सविर्वोच्च न्यप्रायप्रालय कके समक अपश्रील मम , यह पस्तसुत वकयप्रा गयप्रा रप्रा वक अपश्रीलकतप्रार्मा कके धखलप्राफ आरकप यह हहै वक उसनके पश्रीवड़ितप्रा सके शप्रादश्री करनके कके विप्रादके पर उसकके सप्रार शप्रारश्रीररक ससिंबसिंधि बनप्राए रके , जबवक विप्रास्तवि मम उसनके पश्रीवड़ितप्रा सके शप्रादश्री ककी रश्री और उनकके दक बच्चके रके और उनककी दकेखभप्राल अपश्रीलकतप्रार्मा दप्रारप्रा ककी जप्रा रहश्री रश्री और विह एक ससुखश्री विहैविप्रावहक जश्रीविन जश्री रहश्री रश्री। पश्रीवड़ितप्रा अपरप्राधि ककी वतधर कक 14 विरर्मा ककी रश्री और उसनके 15 विरर्मा ककी आयसु मम पहलके बच्चके कक जन्म वदयप्रा और 17 विरर्मा ककी आयसु मम दसूसरके बच्चके कप्रा जन्म हहआ। इन तथ्यक्षों पर वविचप्रार करनके कके बप्राद, मप्राननश्रीय उच्च न्यप्रायप्रालय नके बप्राद ककी घरनप्राओसिं कके मद्दकेनजर अपश्रीलकतप्रार्मा ककी दकरधसवद और सजप्रा कक यह कहतके हहए रद्द कर वदयप्रा वक
"यह न्यप्रायप्रालय जमश्रीनश्री हककीकत सके अपनश्री आआँखम बसिंद नहहीं कर सकतप्रा और अपश्रीलकतप्रार्मा और पश्रीवड़ितप्रा कके ससुखश्री पप्राररविप्राररक जश्रीविन कक परकेशप्रान नहहीं कर सकतप्रा।" हप्रालप्राआँवक, मप्राननश्रीय सविर्वोच्च न्यप्रायप्रालय नके यह भश्री व्यक वकयप्रा रप्रा वक आदकेश कक एक वमसप्राल कके रूप मम नहहीं मप्रानप्रा जप्राएगप्रा।
11. पस्तसुत पकरण मम परम ससूचनप्रा ररपकरर्मा मम बलप्रात्कप्रार कप्रा आरकप नहहीं लगप्रायप्रा गयप्रा रप्रा। पश्रीवड़ितप्रा नके अपनके बयप्रानक्षों मम पप्रारर्थी कके सप्रार अपनश्री मजर्थी सके जप्रानके कप्रा करन वकयप्रा। यद्यवप उसनके शप्रारश्रीररक ससिंबसिंधि बनप्रानके कप्रा करन वकयप्रा ; वचवकत्सककीय परश्रीकण पश्रीवड़ितप्रा वियस्क पप्रायश्री गयश्री तरप्रा बलप्रात्कप्रार कप्रा ककई वचह्न पकप्राश मम नहहीं आयप्रा ; पश्रीवड़ितप्रा कप्रा वविविप्राह अन्यत विरर्मा 2013 मम हक गयप्रा हहै, उसकक एक पसुत तरप्रा एक पसुतश्री हहै तरप्रा पश्रीवड़ितप्रा कप्रा कहनप्रा हहै वक पस्तसुत कप्रायर्माविप्राहश्री कके जप्रारश्री रहनके सके उसकके शप्रासिंवतपसूणर्मा विहैविप्रावहक जश्रीविन मम बप्राधिप्रा पड़ि सकतश्री हहै।
12.
उपरकक वविवशष्टि पररसस्रवतयक्षों कके पकप्राश मम न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हहै वक पस्तसुत पकरण मम आपरप्राधधिक कप्रायर्माविप्राहश्री ककी वनरन्तरतप्रा न्यप्रायवहत कके उद्दकेश्यक्षों कक वविफल करकेगश्री अतत ऐसश्री पररसस्रवत मम आपरप्राधधिक कप्रायर्माविप्राहश्री वनरस्त वकयप्रा जप्रानप्रा उवचत हहै।
13. तदनसुसप्रार, पप्रारर्मानप्रा पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जप्रातप्रा हहै। परम ससूचनप्रा ररपकरर्मा ससिंख्यप्रा 08 सन 2013 अन्तगर्मात धिप्रारप्रा 363, 366, 376 भप्रा०दसिं०ससिं०, रप्रानप्रा उमरश्रीबकेगमगसिंज, जनपद गकण्डप्रा कके अनसुक्रिम मम पस्तसुत आरकप पत वदनप्रासिंक 22.05.2013 तरप्रा उक कके आधिप्रार पर आपरप्राधधिक विप्राद ससिंख्यप्रा 495 सन 2015 मम वविदप्रान वविचप्रारण न्यप्रायप्रालय दप्रारप्रा पप्राररत आदकेश वदनप्रासिंक 20.07.2015 धजससके उक अपरप्राधि कप्रा ससिंजप्रान धलयप्रा एविसिं पप्रारर्थी कक वविचप्रारण कके धलए तलब वकयप्रा गयप्रा तरप्रा उपरकक आपरप्राधधिक विप्राद ककी ससिंपसूणर्मा कप्रायर्माविप्राहश्री पप्रारर्थी कके वविरुद वनरस्त ककी जप्रातश्री हहै। [Subhash Vidyarthi,J.] Order Date :- 1.8.2025 Ankit Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench