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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 151755 (ALL)
PAWAN KUMAR AND ANOTHER v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME LKO. AND 3 OTHERS
NA528/816/2025 · 2025-07-25
Subhash Vidyarthi
body2025
[ 2025 DAILYLAW 151755 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:43081 Court No. - 15 Case :- APPLICATION U/S 528 BNSS No. - 816 of 2025 Applicant :- Pawan Kumar And Another Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Lko. And 3 Others Counsel for Applicant :- Piyush Pathak,Om Prakash Prajapati Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J.
1. पप्रारर्थीगण कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री पश्रीययष पप्राठक तरप्रा वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा परम शश्री वदिविप्राकर धससिंह कको ससुनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा अविलकोकन वकयप्रा।
2. धिप्रारप्रा 528 भप्रारतश्रीय नप्रागररक ससुरकप्रा ससिंवहतप्रा कके अन्तगरत पस्तसुत इस पप्राररनप्रा पत दप्रारप्रा मसुकदिमप्रा अपरप्राधि ससिंख्यप्रा 0202 सन 2025 अन्तगरत धिप्रारप्रा-74, 352, 351(3) बश्री०एन०एस०एस० तरप्रा 7/8 पपॉक्सको एक्ट एविसिं 3(2)(va), 3(1)(दि), 3(1)(धि) एस०सश्री०/एस०टश्री० एक्ट, रप्रानप्रा-मकोतश्रीपसुर,जनपदि-बहरप्राइच कके अनसुक्रम मम पस्तसुत आरकोप पत वदिनप्रासिंवकत 07.05.2025 मम वविदप्रान धजलप्रा एविसिं सत न्यप्रायप्राधिश्रीश /वविशकेष न्यप्रायप्राधिश्रीश (पकोक्सको अधधिवनयम) दप्रारप्रा पप्राररत आदिकेश वदिनप्रासिंक 19.05.2025,धजसकके दप्रारप्रा उपरकोक अपरप्राधि कप्रा ससिंजप्रान धलयप्रा तरप्रा पप्रारर्थीगण कको वविचप्रारण हकेतसु तलब वकयप्रा तरप्रा जमप्रानतश्री विप्रारसिंट वदिनप्रासिंक 19.06.2025, ककी विवैधितप्रा कको चसुननौतश्री दिश्री गयश्री हवै।
3. वविपकश्री ससिंख्यप्रा 2 दप्रारप्रा पप्रारर्थीगण कके वविरुद्ध वदिनप्रासिंक 03.12.2024 कको धिप्रारप्रा 173(4) बश्री०एन०एस०एस० कके अन्तगरत धलखप्राई गई पप्राररनप्रा पत कके आधिप्रार पर पसिंजश्रीकक त परम सयचनप्रा ररपकोटर वदिनप्रासिंक 29.03.2025 कको ससिंसस्रत हहआ, धजसमम कहप्रा गयप्रा हवै वक , जब वविपकश्री ससिंख्यप्रा 2 ककी 14 विषर्थीय पसुतश्री वदिनप्रासिंक 17.08.2024 कको सप्रासिंय करश्रीब 8 बजके शनौच कके धलए गप्रागाँवि कके बप्राहर गई रश्री, अवभयसुकगण नके छकेड़छप्राड़ करतके हहए बलप्रात्कप्रार कप्रा पयप्रास वकयप्रा।
4. धिप्रारप्रा 180 बश्री०एन०एस०एस० कके अन्तगरत असिंवकत अपनके बयप्रान मम वशकप्रायतकतर्थी नके मप्रात बदिनश्रीयतश्री सके छकेड़खप्रानश्री करनके एविसिं धिमककी दिकेनके कप्रा आरकोप लगप्रायप्रा तरप्रा बलप्रात्कप्रार कके पयप्रास कप्रा भश्री करन नहहीं वकयप्रा।
5. वविविकेचक दप्रारप्रा पयछके गए पश्न कके उत्तर मम वशकप्रायतकतर्थी नके कहप्रा वक उसकके पसुतश्री कके सप्रार कके विल पविन कसु मप्रार नके छकेड़खप्रानश्री ककी रश्री तरप्रा बलप्रात्कप्रार करनके कके पयप्रास ककी बप्रात गलत हवै तरप्रा यह विककील सप्राहब नके बढप्रा-चढप्राकर धलखप्रा वदियप्रा हवै। पश्रीवड़त नके भश्री वविविकेचक कको मप्रात पप्रारर्थी ससिंख्यप्रा 1
दप्रारप्रा छकेड़खप्रानश्री करनके कप्रा आरकोप लगप्रायप्रा तरप्रा उसनके कहप्रा वक उसकके सप्रार ककोई गलत कप्राम नहहीं हहआ हवै।
6. पश्रीवड़तप्रा नके अपनके वचवकत्सककीय परश्रीकण ककी सहमवत नहहीं दिश्री।
7. धिप्रारप्रा 183 बश्री०एन०एस०एस० कके अन्तगरत असिंवकत अपनके बयप्रान मम पश्रीवड़तप्रा नके मप्रात छकेड़छप्राड़ करनके ककी ककोवशश करनके कप्रा आरकोप लगप्रायप्रा।
8.
वविविकेचनप्रा कके उपरप्रासिंत वविविकेचक नके धिप्रारप्रा 74, 352, 351(3) बश्री०एन०एस०एस० तरप्रा 7/8 ललवगक अपरप्राधिधों सके बप्रालकधों कप्रा ससिंरकण अधधिवनयम एविसिं 3(2)(va), 3(1)(दि), 3(1)(धि) एस०सश्री०/एस०टश्री० एक्ट कके अपरप्राधिधों कके ससिंबसिंधि मम आरकोप पत पस्तसुत वकयप्रा।
9. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा नके तकर वदियप्रा वक परम सयचनप्रा ररपकोटर अरविप्रा वकसश्री भश्री बयप्रान मम ऐसप्रा ककोई करन नहहीं हवै, धजससके धिप्रारप्रा 7 ललवगक अपरप्राधिधों सके बप्रालकधों कप्रा ससिंरकण अधधिवनयम कप्रा अपरप्राधि हकोनप्रा पतश्रीत हको। उन्हकोनके यह भश्री कहप्रा वक गप्रागाँवि ककी पप्राटर्थीबन्दिश्री कके कप्रारण झयठप्रा करनधों पर परम सयचनप्रा ररपकोटर धलखप्राई गई हवै।
10. धिप्रारप्रा 528 बश्री०एन०एस०एस० कके अन्तगरत अन्तवनरवहत शवकयधों कप्रा पयकोग करतके हहए आरकोप पत तरप्रा ससिंजप्रान आदिकेश ककी विवैधितप्रा कप्रा परश्रीकण करतके समय इस न्यप्रायप्रालय कको आरकोपधों ककी सत्यतप्रा ककी जप्रागाँच नहहीं करनश्री हकोतश्री हवै तरप्रा मप्रात यह दिकेखनप्रा हकोतप्रा हवै वक परम सयचनप्रा ररपकोटर कके करनधों एविसिं वविविकेचनप्रा मम ससिंकधलत सप्रामगश्री सके क्यप्रा पप्रारर्थी कके वविरुद्ध वकसश्री ससिंजकेय अपरप्राधि कप्राररत करनके कप्रा पकरण बनतप्रा हवै अरविप्रा नहहीं। यद्यवप परम सयचनप्रा ररपकोटर एविसिं वविविकेचनप्रा मम ससिंकधलत सप्रामगश्री सके पप्रारर्थी कके वविरुद्ध धिप्रारप्रा 7 तरप्रा 8 पपॉक्सको एक्ट कप्रा अपरप्राधि कप्राररत हकोनप्रा नहहीं पप्रायप्रा जप्रातप्रा हवै, वकन्तसु अन्य करनधों सके ससिंजकेय अपरप्राधि कप्राररत हकोनप्रा पतश्रीत हकोतप्रा हवै। ऐसश्री पररसस्रवत मम पप्रारर्थी कके वविरुद्ध आपरप्राधधिक कप्रायरविप्राहश्री कके वनरस्तश्रीकरण कप्रा समसुवचत आधिप्रार नहहीं हवै।
11. वविदप्रान अवतररक शप्रासककीय अधधिविकप्रा नके उपरकोक पप्राररनप्रा -पत कप्रा वविरकोधि इस आधिप्रार पर वकयप्रा हवै वक धिप्रारप्रा 528 भप्रारतश्रीय नप्रागररक ससुरकप्रा ससिंवहतप्रा कके असिंतगरत ककेतप्राधधिकप्रार कप्रा उपयकोग करतके हहए न्यप्रायप्रालय पप्रारर्थीगण पर लगप्रायके गयके आरकोपधों ककी सत्यतप्रा कको नहहीं दिकेख सकतश्री हवै। न्यप्रायप्रालय कको कके विल यह दिकेखनप्रा हवै वक पतप्राविलश्री पर उपलब्धि पपतधों तरप्रा जप्रासिंच मम ससिंकधलत सप्राक्ष्यधों कके आधिप्रार पर पप्रारर्थीगण कके वविरुद्ध परम दृष्टयप्रा अपरप्राधि बनतप्रा हवै यप्रा नहहीं।
12.
उपरकोक आदिकेश ककी विवैधितप्रा कको चसुननौतश्री इस आधिप्रार पर दिश्री गयश्री हवै वक पप्रारर्थीगण कके वविरुद्ध
लगप्रायके गयके आरकोप असत्य हल। मप्राननश्रीय सविर्वोच्च न्यप्रायप्रालय कके वनणरय कम दश्रीय जप्रासिंच ब्ययरको बनप्राम आयरन धससिंह आवदि, 2023 एससश्रीसश्री ऑनलप्राइन एससश्री 379 मम अविधिप्राररत हवै वक धिप्रारप्रा 482 दिसिं०प०ससिं० कके असिंतगरत शवकयधों कप्रा उपयकोग करतके हहए न्यप्रायप्रालय कको लघसु वविचप्रारण (वमनश्री टटप्रायल) करनके ककी आविश्यकतप्रा नहहीं हवै। इसमम अवभयकोजन / जप्रासिंच एजमसश्री कको आरकोपधों कको सप्रावबत करनके ककी आविश्यकतप्रा नहहीं हवै। दिसिं०प०ससिं० ककी धिप्रारप्रा 482 कके असिंतगरत शवकयधों कप्रा उपयकोग करतके समय न्यप्रायप्रालय कके पप्रास बहहत सश्रीवमत अधधिकप्रार ककेत हवै और मप्रात यह वविचप्रार करनके ककी आविश्यकतप्रा हवै वक "क्यप्रा आरकोपश्री कके वविरुद्ध आगके बढनके कके धलए ककोई पयप्रारप्त सप्रामगश्री उपलब्धि हवै, धजसकके धलए आरकोपश्री पर मसुकदिमप्रा चलप्रानके ककी आविश्यकतप्रा हवै यप्रा नहहीं"।
13. यह पप्राररनप्रा-पत इस वनदिरश कके सप्रार वनस्तप्राररत वकयप्रा जप्रातप्रा हवै वक यवदि पप्रारर्थीगण वविचप्रारण न्यप्रायलय कके समक उपसस्रत हकोकर जमप्रानत/अवगम जमप्रानत पर ररहप्राई हकेतसु पप्राररनप्रा पत दिकेतके हल तको उसके मप्राननश्रीय उच्चतम न्यप्रायप्रालय दप्रारप्रा सतमदिर कसु मप्रार असिंवतल बनप्राम सश्री.बश्री.आई., (2021) 10 एससश्रीसश्री 773 मम अविधिप्राररत वविधधिक धसद्धप्रासिंतधों कके आलकोक मम शश्रीघ्रतप्रापयविरक वनणर्थीत वकयप्रा जप्रायकेगप्रा।
14. तदिनसुसप्रार, पप्राररनप्रा-पत वनस्तप्राररत वकयप्रा जप्रातप्रा हवै। Order Date :- 25.7.2025 Himanshu Digitally signed by :- HIMANSHU SHUKLA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench