Research › Search › Judgment
Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 150859 (ALL)
CHANDRA PRAKASH PANDEY @ GUDDU v. STATE OF U.P. THRU. ADDL. PRIN. SECY. HOME LKO. AND ANOTHER
A482/5618/2025 · 2025-07-17
Subhash Vidyarthi
body2025
[ 2025 DAILYLAW 150859 (ALL) · dailylaw.ai ]
[ 2025 DAILYLAW 150859 (ALL) · dailylaw.ai ]
Judgment text
Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.
Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:40710 Court No. - 15 Case :- APPLICATION U/S 482 No. - 5618 of 2025 Applicant :- Chandra Prakash Pandey @ Guddu Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Addl. Prin. Secy. Home Lko. And Another Counsel for Applicant :- Arpan Prakash Srivastava,Prashant Ranjan Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J.
1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री अररण पकप्राश शश्रीविप्रास्तवि तरप्रा वविदप्रान अरर शप्रासककीय अधधिविकप्रा परम शश्री रप्राजकेश कक मप्रार धससिंह कको सकनप्रा तरप्रा रतप्राविलश्री कप्रा अविलकोकन वकयप्रा।
2. धिप्रारप्रा 528 भप्रारतश्रीय नप्रागररक सकरकप्रा ससिंवहतप्रा कके असिंतगरत पस्तकत इस पप्राररनप्रा-रत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मकख्य न्यप्रावयक मधजस्टटकेट, अयकोध्यप्रा दप्रारप्रा दप्राणणण्डिक विप्राद ससिंख्यप्रा 10 सन 2024 मम रप्राररत आदकेश वदनप्रासिंक 25.04.2025 ककी विवैधितप्रा कको चकननौतश्री दश्री हवै, धजसकके दप्रारप्रा पप्रारर्थी कप्रा उन्मकोचन पप्राररनप्रा-रत वनरस्त वकयप्रा गयप्रा।
3. वविदप्रान अरर शप्रासककीय अधधिविकप्रा नके कहप्रा वक पप्रारर्थी कको उक आदकेश कके वविरुद्ध सत न्यप्रायप्रालय, अयकोध्यप्रा कके समक रकनरश्रीकण यप्रावचकप्रा पस्तकत करनके कप्रा अविसर उरलब्धि हवै।
4. उररकोक आरधत्ति कके उत्तिर मम पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा नके कहप्रा वक विह इस पप्राररनप्रा - रत रर बल नहहीं दकेनके कके धलए एक पप्राररनप्रा-रत पस्तकत करमगके।
5. तद्नकसप्रार, यह पप्राररनप्रा-रत बल न वदयके जप्रानके कके आधिप्रार रर वनरस्त वकयप्रा जप्रातप्रा हवै।
6. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा कको पप्राररनप्रा -रत कके सप्रार ससिंलग्न पमप्रावणत अवभलकेखखों ककी छप्रायप्रापवतयप्रासिं रतप्राविलश्री रर रखतके हहए विप्रारस कर दश्री जप्राय।
7. यवद रकनरश्रीकण कके सप्रार वविलसिंब कमप्रा हकेतक पप्राररनप्रा -रत पस्तकत वकयप्रा जप्रातप्रा हवै तको सत न्यप्रायप्रालय इस तथ्य कको ध्यप्रान मम रखतके हहए उसके वनणर्थीत करकेगश्री वक पप्रारर्थी दप्रारप्रा इस न्यप्रायप्रालय कके समक पप्राररनप्रा-रत पस्तकत करनके मम जको समय व्यतश्रीत हहआ हवै, विह भश्री वविलसिंब कप्रा कप्रारण बनप्रा हवै। [Subhash Vidyarthi,J.] Order Date :- 17.7.2025 Ankit Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench