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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 150685 (ALL)
CHHOTE KHAN @ CHOTE THEKEDAR v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME DEPTT. LKO. AND ANOTHER
A482/5593/2025 · 2025-07-11
Subhash Vidyarthi
body2025
[ 2025 DAILYLAW 150685 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.
Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:39867
Court No. - 15 Case :- APPLICATION U/S 482 No. - 5593 of 2025 Applicant :- Chhote Khan @ Chote Thekedar Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Deptt. Lko. And Another Counsel for Applicant :- Shujat Kidwai Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J.
1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश ससुजप्रात वकदविप्राई तरप्रा वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा शश वदविप्राकर धससिंह कको ससुनप्रा तरप्रा पतप्राविलश कप्रा अविलकोकन वकयप्रा।
2. धिप्रारप्रा 482 दण्ड पवक्रियप्रा ससिंवहतप्रा कके असिंतररत पस्तसुत इस पप्राररनप्रा पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके वविशकेष मसुख्य न्यप्रावयक मधजस्टटकेट (कस्टम) लखनऊ दप्रारप्रा विप्राद ससिंख्यप्रा 189 सन 1998 रप्रानप्रा रप्राजशपसुर, जनपद लखनऊ मम पप्राररत आदकेश वदनप्रासिंक 02.05.2025 ककी विवैधितप्रा कको चसुननौतश दश हवै धजसकके दप्रारप्रा पप्रारर्थी कके वविरुद्ध रवैर जमप्रानतश विप्रारण्ट वनररत कर वदयप्रा रयप्रा रप्रा।
3. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा कप्रा करन हवै वक उपरकोक आपरप्राधधिक पकरण वदनप्रासिंक 24.04.1998 कको धलखप्राई रई परम ससूचनप्रा ररपकोटर कके आधिप्रार पर ससिंसस्रत हहआ। वदनप्रासिंक 17.11.1998 कको पप्रारर्थी कके वविरुद्ध आरकोप-पत पस्तसुत हहआ। पप्रारर्थी पर लरप्रायके रयके सभश आरकोप 7 विषर सके कम अविधधि कके कप्रारप्राविप्रास सके दण्डनशय हह। पप्रारर्थी कको वदनप्रासिंक 21.05.1999 कको जमप्रानत पर ररहप्रा करनके कप्रा आदकेश हको रयप्रा रप्रा। आपरप्राधधिक पकरण ककी कप्रायरविप्राहश अभश तक लसिंवबित हवै। इतनश अविधधि बिशतनके कके सप्रार अबि पप्रारर्थी 64 विषर ककी अविस्रप्रा कप्रा हको रयप्रा हवै।
4. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा नके कहप्रा वक पप्रारर्थी एक विररष्ठ नप्रारररक हवै एविसिं अपनश आयसु एविसिं बिशमप्राररययों कके कप्रारण विह वविचप्रारण न्यप्रायप्रालय कके समक्ष उपसस्रत नहहीं हको सकप्रा। वविदप्रान अधधिविकप्रा नके कहप्रा वक पप्रारर्थी कप्रा ककोई पसूविर आपरप्राधधिक इवतहप्रास भश नहहीं हवै। उन्हयोंनके कहप्रा वक पप्रारर्थी वविचप्रारण न्यप्रायप्रालय कके समक्ष उपसस्रत हकोकर वविचप्रारण मम सहयकोर करनके कप्रा इच्छसु क हवै वकन्तसु उसके यह भय हवै वक उसके अवभरक्षप्रा मम न लके धलयप्रा जप्राय।
5. पप्रारर्थी अनसुपसस्रवत कके कप्रारण उसकके वविरुद्ध रवैर जमप्रानतश विप्राण्ट वनररत करनके मम वविचप्रारण न्यप्रायप्रालय नके ककोई अविवैधिप्रावनकतप्रा नहहीं कप्राररत ककी तरप्रा इस कप्रारण सके उक आदकेश मम यह न्यप्रायप्रालय हस्तक्षकेप करनके कप्रा ककोई उवचत आदकेश नहहीं पप्राररत करकेरश।
6. पप्रारर्थी कको वविचप्रारण न्यप्रायप्रालय कके समक्ष हश उपसस्रत हकोकर अपनके वविरुद्ध वनररत रवैर जमप्रानतश विप्रारण्ट कको वनरस्त करप्रानके कप्रा पप्राररनप्रा-पत पस्तसुत करनप्रा चप्रावहए।
7.
यवद पप्रारर्थी ऐसप्रा पप्राररनप्रा -पत आज सके एक सपप्राह कके असिंदर पस्तसुत करतप्रा हवै तको उसकको वविचप्रारण न्यप्रायप्रालय पप्रारर्थी ककी आयसु , कधरत अपरप्राधियों ककी पकक वत तरप्रा उसमम पप्राररत हको सकनके विप्रालके अधधिकतम दण्डप्रादकेश आवद कको ध्यप्रान मम रखतके हहए सहप्रानसुभसूवतपसूविरक वनस्तप्राररत वकयप्रा जप्राय। [Subhash Vidyarthi,J.] Order Date :- 11.7.2025 Ankit Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench