Research › Search › Judgment
Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 149877 (ALL)
AMAN JAISWAL AND 5 OTHERS v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME LKO. AND ANOTHER
A482/5541/2025 · 2025-07-11
Subhash Vidyarthi
body2025
[ 2025 DAILYLAW 149877 (ALL) · dailylaw.ai ]
[ 2025 DAILYLAW 149877 (ALL) · dailylaw.ai ]
Judgment text
Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.
Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:39731 Court No. - 15 Case :- APPLICATION U/S 482 No. - 5541 of 2025 Applicant :- Aman Jaiswal And 5 Others Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Lko. And Another Counsel for Applicant :- Amit Singh,Anil Kumar Pandey,Deepali Yadav Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J.
1. पप्रारर्थीगण कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री अवमित धससिंह, वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा शश्री मिनश्रीष वविक्रमि धससिंह एविसिं वविपकश्री ससिंख्यप्रा 2 कके वविदप्रान अधधिविकप्रा कक मिप्रारश्री दश्रीपप्रालश्री यप्रादवि कक सकनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा अविलककन वकयप्रा।
2. धिप्रारप्रा 482 दण्ड पवक्रयप्रा ससिंवहतप्रा कके अन्तगरत पस्तकत इस पप्राररनप्रा पत दप्रारप्रा पप्रारर्थीगण नके परमि ससूचनप्रा ररपकरर ससिंख्यप्रा 0452 सन 2018 असिंतगरत धिप्रारप्रा 395, 397, 427, 504, 506, 307 भप्रा०दसिं०ससिं० रप्रानप्रा वमिलएररयप्रा जनपद रप्रायबरकेलश्री कके अनकक्रमि मिम पस्तकत आरकप पत वदनप्रासिंक 09.03.2020 तरप्रा उक कके आधिप्रार पर वविदप्रान मिकख्य न्यप्रावयक मिधजस्रटकेर, रप्रायबरकेलश्री दप्रारप्रा पप्राररत आदकेश वदनप्रासिंक 23.12.2021 धजससके उक अपरप्राधि कप्रा ससिंजप्रान धलयप्रा एविसिं पप्रारर्थीगण कक वविचप्रारण कके धलए तलब वकयप्रा गयप्रा , कके वनरस्तश्रीकरण ककी पप्राररनप्रा इस आधिप्रार पर ककी गई हहै वक पकक्षों कके मिध्य वदनप्रासिंक 01.07.2025 कक समिझझौतप्रा हक गयप्रा हहै।
3. उपरकक पकरण वविपकश्री ससिंख्यप्रा 2 दप्रारप्रा वदनप्रासिंक 09.11.2018 कक पप्रारर्थीगण तरप्रा 20 अन्य अजप्रात व्यवकयक्षों कके वविरुद्ध धलखप्राई गई परमि ससूचनप्रा ररपकरर कके आधिप्रार पर ससिंसस्रत हहआ। वविपकश्री ससिंख्यप्रा 2 कके पकत धिमिरन्द्र यप्रादवि दप्रारप्रा पप्रारर्थीगण तरप्रा 20 अजप्रात व्यवकयक्षों कके वविरुद्ध धलखप्राई गई परमि ससूचनप्रा ररपकरर कके आधिप्रार पर ससिंसस्रत हहआ। धजसमिम यह कहप्रा गयप्रा वक अवभयककगण नके उसकके वपतप्रा (वविपकश्री ससिंख्यप्रा 2) पर वदनप्रासिंक 08.11.2018 कक शप्रामि 6 बजके पप्राणघप्रातक हमिलप्रा वकयप्रा। परमि ससूचनप्रा ररपकरर मिम धिप्रारदप्रार हधरयप्रार सके पहप्रार तरप्रा कटके सके गकलश्री चलप्रानके एविसिं लकहके ककी सररयक्षों सके मिप्रारनके-पश्रीरनके कप्रा आरकप लगप्रायप्रा गयप्रा।
4. पश्रीवड़ितप्रा व्यवक (वविपकश्री ससिंख्यप्रा 2) कप्रा ककई वविधधिक वचवकत्सककीय परश्रीकण नहहीं हहआ हहै तरप्रा उसकके एक्स-रके जप्रासिंच मिम तश्रीन पसधलयप्रासिं रसूरश्री हहई पप्रायश्री गयश्री।
5. ऐसश्री ककई सप्रामिगश्री वविविकेचनप्रा कके दझौरप्रान पकप्राश मिम नहहीं आयश्री धजससके धिप्रारदप्रार हधरयप्रार सके पप्राणघप्रातक चकर पहहसिंचप्रानके अरविप्रा गकलश्री चलप्रानके कके आरकपक्षों ककी पकवष्टि हक।
6.
पकरण कके लसिंवबत रहनके कके दझौरप्रान हश्री वशकप्रायतकतप्रार ककी मिमृत्यक हक गयश्री तरप्रा पश्रीवड़ित व्यवक (वविपकश्री ससिंख्यप्रा 2) नके अवभयककगण कके सप्रार वदनप्रासिंक 01.07.2025 कक एक समिझझौतप्रा कर धलयप्रा हहै, जक पप्राररनप्रा-पत कके सप्रार ससिंलग्न हहै तरप्रा धजसमिम कहप्रा गयप्रा हहै वक पकक्षों नके आपस मिम सकलह कर लश्री हहै तरप्रा अब उनमिम ककई मिनमिकरप्रावि वि लकेनदकेन नहहीं रह गयप्रा हहै एविसिं दकनक्षों पक आपरप्राधधिक पकरण ककी कप्रायरविप्राहश्री समिप्राप्त करविप्रानके कके इच्छक क हह। वविपकश्री ससिंख्यप्रा 2 नके एक लघक पवतशपर-पत पस्तकत करकके सकलहनप्रामिके कक स्विश्रीकप्रार वकयप्रा हहै एविसिं आपरप्राधधिक कप्रायरविप्राहश्री कक वनरस्त करनके कके अनकरकधि कप्रा समिररन वकयप्रा हहै।
7. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा नके डडॉ० मिकहम्मिद इबप्रावहमि तरप्रा अन्य बनप्रामि उ०प० रप्राज्य 2022 ILR 2 All 564 मिम इस न्यप्रायप्रालय नके नरकेन्द्र धससिंह बनप्रामि पसिंजप्राब रप्राज्य (2014) 6 SCC 466 तरप्रा मिध्य पदकेश रप्राज्य बनप्रामि लक्ष्मिश्री नप्रारप्रायण तरप्रा अन्य (2019) 5 SCC 688 कके कके वनणरयक्षों कप्रा आशय धलयप्रा धजसमिम यह तथ्य पवतपप्रावदत वकयप्रा गयप्रा हहै वक यद्यवप धिप्रारप्रा 307 भप्रा०दसिं०ससिं० कके असिंतगरत अपरप्राधि जघन्य तरप्रा गसिंभश्रीर अपरप्राधि ककी शकेणश्री मिम आतप्रा हहै तरप्रा यह मिप्रात एक व्यवक कके वविरुद्ध अपरप्राधि न हककर समिप्राज कके वविरुद्ध मिप्रानप्रा जप्राएगप्रा तरप्रा सप्रामिप्रान्यतययः ऐसके आपरप्राधधिक पकरण सकलह कके आधिप्रार पर समिप्राप्त नहहीं वकयके जप्रा सकतके वकन्तक मिप्रात पकरण मिम धिप्रारप्रा 307 भप्रा०दसिं०ससिं० असिंवकत कर दकेनके भर सके यह न्यप्रायप्रालय पकरण मिम यह परश्रीकण करनके सके बप्राधधित नहहीं हहै वक क्यप्रा विप्रास्तवि मिम वविविकेचनप्रा मिम धिप्रारप्रा 307 भप्रा०दसिं०ससिं० कके ससिंबसिंधि मिम ककई सप्रामिगश्री पप्राप्त हहई हहै अरविप्रा धिप्रारप्रा 307 भप्रा०दसिं०ससिं० कप्रा मिप्रात आरकप हश्री लगप्रायप्रा गयप्रा हहै। इस उदकेश्य सके यह न्यप्रायप्रालय चकरक्षों ककी पकमृ वत, पयकग वकयके गयके हधरयप्रार आवद कक दकेख सकतप्रा हहै। यह परश्रीकण वविविकेचनप्रा लसिंवबत रहनके कके दझौरप्रान नहहीं वकयप्रा जप्रानप्रा चप्रावहए तरप्रा वविविकेचनप्रा पसूणर हकनके पर तरप्रा वविविकेचनप्रा कके दझौरप्रान ससिंकधलत सप्रामिगश्री कक ध्यप्रान मिम रखतके हहए हश्री वकयप्रा जप्रानप्रा चप्रावहए।
8.
उपरकक वविधधि व्यविस्रप्रा कके आलकक मिम पश्नगत पकरण कके तथ्यक्षों कप्रा परश्रीकण करनके पर यह पतश्रीत हकतप्रा हहै वक यद्यवप परमि ससूचनप्रा ररपकरर मिम धिप्रारप्रा 307 भप्रा०दसिं०ससिं० कप्रा आरकप लगप्रायप्रा गयप्रा, पश्रीवड़ित व्यवक कप्रा वविधधिक वचवकत्सककीय परश्रीकण नहहीं वकयप्रा गयप्रा। परमि ससूचनप्रा ररपकरर मिम धिप्रारदप्रार हधरयप्रार सके पप्राणघप्रातक चकर पहहसिंचप्रानके कप्रा करन हहै वक वकन्तक ऐसश्री ककई सप्रामिगश्री अवभलकेख पर नहहीं हहै धजससके यह पतश्रीत हक वक वविपकश्री ससिंख्यप्रा 2 धिप्रारदप्रार हधरयप्रार सके ककई चकर कप्राररत हहई। परमि ससूचनप्रा ररपकरर मिम आग्नकेयप्रासक्षों सके गकलश्री चलप्रानप्रा कहप्रा गयप्रा वकन्तक वकसश्री व्यवक कक ऐसश्री ककई चकर कप्राररत नहहीं हहई हहै। वविविकेचनप्रा पसूणर हक चकककी हहै एविसिं इसकके उपरप्रान्त पश्रीवड़ित व्यवक - वविपकश्री ससिंख्यप्रा 2 नके अवभयककगण सके सकलह कर लश्री हहै। वविपकश्री ससिंख्यप्रा 2 ककी वविदप्रान अधधिविकप्रा नके न्यप्रायप्रालय मिम उपसस्रत हककर सकलहनप्रामिके कक स्विश्रीकप्रार करतके हहए पप्राररनप्रा-पत स्विश्रीकप्रार वकयके जप्रानके कके अनकरकधि कप्रा
समिररन वकयप्रा हहै।
9. पकरण कके उपरकक वविवशष्टि तथ्यक्षों और पररसस्रवतयक्षों कक ध्यप्रान मिम रखतके हहए न्यप्रायप्रालय कप्रा मित हहै वक पप्राररनप्रा-पत स्विश्रीकप्रार वकयके जप्रानके यकग्य हहै।
10. तदनकसप्रार, पप्राररनप्रा पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जप्रातप्रा हहै। तमृतश्रीय अपर सत न्यप्रायप्राधिश्रीश / त्विररत न्यप्रायप्रालय, रप्रायबरकेलश्री मिम लसिंवबत सत परश्रीकण ससिंख्यप्रा 1375 सन 2023 ककी ससिंपसूणर कप्रायरविप्राहश्री पप्रारर्थीगण कके वविरुद्ध वनरस्त ककी जप्रातश्री हहै। [Subhash Vidyarthi,J.] Order Date :- 11.7.2025 Ankit Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench