Research › Search › Judgment

Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 149448 (ALL)

MOHD. VASEEM v. STATE OF U.P. THRU. SECY. HOME DEPTT. LKO. AND 3 OTHERS

A482/5476/2025 · 2025-07-16

Subhash Vidyarthi

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:40659 Court No. - 15 Case :- APPLICATION U/S 482 No. - 5476 of 2025 Applicant :- Mohd. Vaseem Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Secy. Home Deptt. Lko. And 3 Others Counsel for Applicant :- Sukh Deo Singh,Paritosh Shukla Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J. 1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री पररिततोष शशुक्लप्रा तरप्रा वविदप्रान अवतररिक शप्रासककीय अधधिविकप्रा परम शश्री रिप्राजकेश कशु मप्रारि धससिंह कतो सशुनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा अविलतोकन वकयप्रा। 2. धिप्रारिप्रा 482 दण्ड पवक्रियप्रा ससिंवहतप्रा कके अन्तररत पस्तशुत इस पप्राररनप्रा पत दप्रारिप्रा पप्रारर्थी नके परम ससूचनप्रा ररिपतोरर ससिंख्यप्रा 403 सन 2017 अन्तररत धिप्रारिप्रा 354A, 504, 506 भप्रा०दसिं०ससिं० एविसिं 7/8 पपॉक्सतो एक्र तरप्रा 3(2)(V) एस०सश्री०/एस०रश्री० एक्र, रप्रानप्रा कमरिरौलश्री, जनपद अमकेठश्री, कके अनशुक्रिम मम वविदप्रान वविशकेष न्यप्रायप्राधिश्रीश , पपॉक्सतो एक्र, कक्ष ससिंख्यप्रा 12, सशुल्तप्रानपशुरि दप्रारिप्रा पप्राररित आदकेश वदनप्रासिंक 28.05.2025 ककी विवैधितप्रा कतो चशुनरौतश्री दश्री हवै , धजसकके दप्रारिप्रा पप्रारर्थी दप्रारिप्रा धिप्रारिप्रा 233(3) दसिं०प०ससिं० कके असिंतररत पस्तशुत पप्राररनप्रा पत 63(ख) वनरिस्त करि वदयप्रा रयप्रा। 3. वविचप्रारिण न्यप्रायप्रालय नके वदनप्रासिंक 13.05.2025 कतो अवभयतोजन सप्राक्षश्री ससिंख्यप्रा 2 कप्रा बयप्रान असिंवकत वकयप्रा तरप्रा पप्रारर्थी ककी पवत-परिश्रीक्षप्रा कप्रा अविसरि समप्राप्त वकयप्रा रयप्रा। वदनप्रासिंक 22.05.2025 कतो मप्रात 28.05.2025 अरलश्री वतधर बहस कके धलए वनयत ककी रई। बहस कके धलए वनयत पहलश्री वतधर 28.05.2025 कतो पप्रारर्थी दप्रारिप्रा धिप्रारिप्रा 233(3) दसिं०प०ससिं० कके असिंतररत एक पप्राररनप्रा पत पस्तशुत करिकके यह कहप्रा रयप्रा वक पप्रारर्थी अपनश्री रिक्षप्रा मम सप्राक्ष्य कके रूप मम एक सप्राक्षश्री कके रूप मम पस्तशुत करिनप्रा चप्राहतप्रा हवै। उसश्री वतधर कतो वविचप्रारिण न्यप्रायप्रालय नके वनम्नधलधखत आदकेश सके पप्राररनप्रा पत असिंतररत धिप्रारिप्रा 233(3) वनरिस्त करि वदयप्रा रयप्रा;"पशुकप्रारि परि अवभयशुक मशु०विसश्रीम उपसस्रत 63-ख पप्राररनप्रा पत असिंतररत धिप्रारिप्रा 233(3) CRPC पस्तशुत/सशुनप्रा/वनरिस्त/अवभलकेखश्रीय सफप्राई सप्राक्ष्य पस्तशुत। K.O.F. वदनप्रासिंक 03.06.2025 कतो बहस हकेतशु पकेश हतो।" 4. धिप्रारिप्रा 233(3) दसिं०प०ससिं० यह पप्रावविधिप्रावनत करितश्री हवै वकक -"यवद अवभयशुक वकसश्री सप्राक्षश्री कके हप्राधजरि हतोनके यप्रा कतोई दस्तप्राविकेज यप्रा चश्रीज पकेश करिनके कतो वविविश करिनके कके धलए कतोई आदकेवशकप्रा जप्रारिश्री करिनके कके धलए आविकेदन करितप्रा हवै ततो न्यप्रायप्राधिश्रीश ऐसश्री आदकेवशकप्रा कतो जप्रारिश्री करिकेरप्रा , जब-तक उसकप्रा ऐसके कप्रारिणणों सके, जतो लकेखबद्ध वकए जप्राएसिंरके, यह वविचप्रारि न हतो वक आविकेदन इस आधिप्रारि परि नप्रामसिंजसूजू़रि करि वदयप्रा जप्रानप्रा चप्रावहए वक विह तसिंर करिनके यप्रा वविलसिंब करिनके यप्रा न्यप्राय कके उदकेश्यणों कतो वविफल करिनके कके पयतोजन सके वकयप्रा रयप्रा हवै।" 5. धिप्रारिप्रा 233(3) दसिं०प०ससिं० कतो दकेखनके सके यह स्पष्ट हतोतप्रा हवै वक सप्रामप्रान्य पक्रिम मम अवभयशुक दप्रारिप्रा सप्राक्षश्री कतो बतोलनके कके धलए आदकेवशकप्रा वनररत करिनके कप्रा आविकेदन स्विश्रीकप्रारि हश्री वकयप्रा जप्रानप्रा चप्रावहए, जब-तक वक धिप्रारिप्रा 233(3) दसिं०प०ससिं० मम धलखके रए वकसश्री वविशकेष कप्रारिण सके न्यप्रायप्रालय इस अवभमत परि न पहहहुँचके वक पप्राररनप्रा पत वनरिस्त वकए जप्रानके यतोग्य हवै तरप्रा ऐसश्री सस्रवत मम न्यप्रायप्रालय कतो पप्राररनप्रा पत वनरिस्तश्रीकरिण कप्रा कप्रारिण अपनके आदकेश मम असिंवकत करिनप्रा अवनविप्रायर हवै। पप्राकक वतक न्यप्राय कके धसद्धप्रासिंतणों कके अनशुसप्रारि भश्री वकसश्री अवभयशुक कतो वविचप्रारिण मम अपनके बचप्रावि कप्रा समशुवचत अविसरि दकेनप्रा न्यप्रायवहत मम अवनविप्रायर हवै। 6. चसूहुँवक आलतोच्य आदकेश वदनप्रासिंक 28.05.2025 दप्रारिप्रा वविचप्रारिण न्यप्रायप्रालय नके वबनप्रा कतोई कप्रारिण दशप्रारए हहए पप्रारर्थी कप्रा पप्राररनप्रा पत असिंतररत धिप्रारिप्रा धिप्रारिप्रा 233(3) दसिं०प०ससिं० वनरिस्त करि वदयप्रा हवै। उपरितोक आदकेश वविधधि मम ससिंधिप्रायर नहहीं हवै तरप्रा वनरिस्त वकए जप्रानके यतोग्य हवै। 7. उपरितोक समश्रीक्षप्रा कके आलतोक मम यह पप्राररनप्रा पत स्विश्रीकप्रारि वकयप्रा जप्रातप्रा हवै। परम ससूचनप्रा ररिपतोरर ससिंख्यप्रा 403 सन 2017 अन्तररत धिप्रारिप्रा 354A, 504, 506 भप्रा०दसिं०ससिं० एविसिं 7/8 पपॉक्सतो एक्र तरप्रा 3(2)(V) एस०सश्री०/एस०रश्री० एक्र, रप्रानप्रा कमरिरौलश्री, जनपद अमकेठश्री, कके अनशुक्रिम मम वविदप्रान वविशकेष न्यप्रायप्राधिश्रीश , पपॉक्सतो एक्र, कक्ष ससिंख्यप्रा 12, सशुल्तप्रानपशुरि दप्रारिप्रा पप्राररित आदकेश वदनप्रासिंक 28.05.2025, धजसकके दप्रारिप्रा पप्रारर्थी कप्रा पप्राररनप्रा पत 63-ख असिंतररत धिप्रारिप्रा 233(3) दसिं०प०ससिं० वनरिस्त वकयप्रा रयप्रा, अपप्रास्त वकयप्रा जप्रातप्रा हवै। 8. पकरिण वविचप्रारिण न्यप्रायप्रालय कतो इस वनदरश कके सप्रार पवत-पकेवषत वकयप्रा जप्रातप्रा हवै वक पप्रारर्थी कके पप्राररनप्रा पत असिंतररत धिप्रारिप्रा 233(3) दसिं०प०ससिं० 63(ख) परि उपरितोक समश्रीक्षप्रा कतो ध्यप्रान मम रिखतके हहए वविधधिनशुसप्रारि शश्रीघ्रतप्रापसूविरक नविश्रीन आदकेश पप्राररित करिम। Order Date :- 16.7.2025 Himanshu Digitally signed by :- HIMANSHU SHUKLA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench