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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 147496 (ALL)

CHANCHAL SINGH @ ABHAY PRATAP SINGH v. STATE OF U.P. THRU. ADDL. CHIEF SECY. HOME DEPTT. U.P. LKO. AND ANOTHER

A482/5230/2025 · 2025-07-04

Subhash Vidyarthi

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:37872 Court No. - 15 Case :- APPLICATION U/S 482 No. - 5230 of 2025 Applicant :- Chanchal Singh @ Abhay Pratap Singh Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Addl. Chief Secy. Home Deptt. U.P. Lko. And Another Counsel for Applicant :- Ambrish Kumar Singh,Manoj Kumar Gupta Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J. 1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री मननोज कक मप्रार गकपप्रा तरप्रा वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा शश्री अभय कक मप्रार धससिंह कनो सकनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा अविलनोकन वकयप्रा। 2. धिप्रारप्रा 482 दण्ड पवक्रियप्रा ससिंवहतप्रा कके असिंतगरत पस्तकत इस पप्राररनप्रा पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके वविशकेष न्यप्रायप्राधिश्रीश एस.सश्री./एस.टश्री. एक्ट पतप्रापगढ़ दप्रारप्रा सत वविचप्रारण ससिंख्यप्रा 105 सन 2017 मम पप्राररत आदकेश वदनप्रासिंक 09.07.2018 ककी विवैधितप्रा कनो चकननौतश्री दश्री हवै , धजसकके दप्रारप्रा पप्रारर्थी ककी अनकपसस्रवत कके कप्रारण उसकके वविरुद्ध गवैर जमप्रानतश्रीय विप्रारण्ट वनगरत वकयप्रा गयप्रा। 3. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा कप्रा तकर हवै वक पप्रारर्थी कनो वदनप्रासिंक 01.02.2018 कनो जमप्रानत पर ररहप्रा करनके कप्रा आदकेश हहआ रप्रा। अवभयकक दप्रारप्रा जमप्रानत करप्रानके सके यह स्पष हनोतप्रा हवै वक उसकनो अपनके वविरुद्ध जप्रारश्री आपरप्राधधिक पवक्रियप्रा कके बप्रारके मम जप्रानकप्रारश्री रश्री वकन्तक इसकके उपरप्रान्त भश्री विह वविचप्रारण न्यप्रायप्रालय कके समक्ष उपसस्रत नहहीं हहआ। ऐसश्री पररसस्रवत मम वविचप्रारण न्यप्रायप्रालय नके पप्रारर्थी कके वविरुद्ध गवैर जमप्रानतश्रीय विप्रारण्ट वनगरत करनके मम कनोई अविवैधिप्रावनकतप्रा कप्राररत नहहीं ककी हवै। 4. गवैर जमप्रानतश्रीय विप्रारण्ट वदनप्रासिंक 09.07.2018 कनो वनगरत हहआ रप्रा तरप्रा यह पप्राररनप्रा-पत वदनप्रासिंक 20.06.2025 कनो पस्तकत वकयप्रा गयप्रा जबवक आलनोच्य आदकेश मम कनोई अविवैधिप्रावनकतप्रा नहहीं हवै, इतनके वविलसिंब सके पस्तकत वकयके गयके इस पप्राररनप्रा -पत मम कनोई उवचत आधिप्रार नहहीं हवै। 5. तद्नकसप्रार यह पप्राररनप्रा-पत वनरस्त वकयप्रा जप्रातप्रा हवै। 6. यवद पप्रारर्थी वविचप्रारण न्यप्रायप्रालय कके समक्ष उपसस्रत हनोकर जमप्रानत पर ररहप्रा वकयके जप्रानके हकेतक पप्राररनप्रा-पत पस्तकत करतप्रा हवै तरप्रा विचन दकेतप्रा हवै वक विह आगके न्यप्रावयक पवक्रियप्रा मम सहयनोग करकेगप्रा तनो वविचप्रारण न्यप्रायप्रालय उक पप्राररनप्रा -पत पर उवचत आदकेश पप्राररत करकेगश्री। [Subhash Vidyarthi,J.] Order Date :- 4.7.2025/Ankit Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench