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2025:CGHC:13731
अ्ቚतिवे्ቕ छ्ቈीसगढ़ उ्ሴ न्यायालय
, बि)लासपुर
दाቄኌ/0क अपील ्ቅमांक
-526
/2009
1. कमल सेन बिपा-परमानंद सेन, उ्-लगभग 24 व्ቧ:, पेशा-नाई, बिनवासी-्ቇाम )ोरझरा, थाना-भखारा, जिCला-धमरी, छ्ቈीसगढ़ -----अपीलाथE बिवरू्ሾ छ्ቈीसगढ़ शासन, ्ቛारा थाना-भखारा, जिCला-धमरी, छ्ቈीसगढ़ -----उ्ቈरवादी अपीलाथE ्ቛारा : ्ቦी अबिम कु मार साहू, अतिधव्ሹा । शासन/उ्ቈरवादी ्ቛारा : ्ቦी एच.ए.पी.एस. भाबिQया, पैनल अतिधव्ሹा । माननीय न्यायमूቔኌ ्ቦी संCय कु मार Cायसवाल !! पीठ पर बिन्ቓ:य !! 21/03/2025
1. द/0 ्ቚबि्ቅया संबिहा, 1973 की धारा-374 (2) के ह ्ቚस्ु इस दाቄኌ/0क अपील में बिवचार्ቓ न्यायालय-बिवशे्ቧ न्यायाधीश {अनुसूतिच Cाति एवं अनुसूतिच CनCाति (अत्याचार बिनवार्ቓ) अतिधबिनयम, 1989 के अंग: ्ቚातिधकृ }, धमरी, छ्ቈीसगढ़ ्ቛारा बिवशे्ቧ स्ቔ ्ቚकर्ቓ ्ቅमांक-13/2009 “छ्ቈीसगढ़ शासन बिवरू्ሾ POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2025.03.22 15:26:33 +0530
2 / 7 {Cr. A. No.-526 of 2009} कमल सेन” में पारिर बिन्ቓ:य बिदनांक-21/07/2009 को चुनौी दी गई है । जिCसके ह अपीलाथE को बिनम्नानुसार दो्ቧजिस्ቍ कर दቄኌ/0 बिकया गया है । जिCसे आगे सं्ቌेप में “्ቚ्ाधीन बिन्ቓ:य” से सम्)ोतिध बिकया Cा रहा हैः- दो्ቧजिसति्ቍ द/0ादेश धारा-376 (1) भारीय द/0 संबिहा, 1860 04 व्ቧ: का स्ቦम कारावास एवं 5,000/- रूपये का अथ:द/0 था अथ:द/0 राशिश अदा न करने की दशा में 06 माह के अतिरिर्ሹ स्ቦम कारावास की सCा से दቄኌ/0 बिकया गया । धारा-506 ()) भारीय द/0 संबिहा, 1860 04 माह का स्ቦम कारावास एवं 1,000/- रूपये का अथ:द/0 था अथ:द/0 राशिश अदा न करने की दशा में 01 माह के अतिरिर्ሹ स्ቦम कारावास की सCा से दቄኌ/0 बिकया गया । दोनों मूल सCायें साथ-साथ चलेंगी ।
2. यह उ्ቤेखनीय थ्य है बिक “्ቚ्ाधीन बिन्ቓ:य” के ह अपीलाथE को बिवचार्ቓ न्यायालय ्ቛारा धारा-3(1)(xii) अनुसूतिच Cाति एवं अनुसूतिच CनCाति (अत्याचार बिनवार्ቓ) अतिधबिनयम, 1989 के अपराध से दो्ቧमु्ሹ बिकया गया है ।
3. अशिभयोCन मामला सं्ቌेप में इस ्ቚकार है बिक 17 व्ቧEय पीबिrा (अ०सा०-5) माह )ैसाख, व्ቧ:-2008 में C) घर पर अके ली थी, उसके परिरCन गमE की फसल धान लगे खे में काम करने गये थे । ) बिदन में करी) 11:00 )Cे अपीलाथE Qी०व्ही० सुधारने के )हाने आया और Qी०व्ही० की आवाC ेC करके पीबिrा (अ०सा०- 5) के साथ C)रन )लात्संग बिकया । तिच्ቤाने पर चाकू से मारने की धमकी बिदया, जिCससे पीबिrा (अ०सा०-5) 0र गई, इसलिलए उसने परिरCनों को घQना की
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4. अशिभयोCन की ओर से अपने प्ቌ समथ:न में कु ल-14 साति्ቌयों का परी्ቌ्ቓ था 16 दस्ावेC ्ቚदश: तिचन्हांबिक करवाये गये । धारा-313 द/0 ्ቚबि्ቅया संबिहा के ह )यान में अपीलाथE ने अपने बिवपरी साति्ቌयों के कथनों को इन्कार करे हुए स्वयं को बिनदƒ्ቧ होना )ाे हुए कहा है बिक उसे पैसे के लालच में झूठा फं साया गया है, वह कभी-भी पीबिrा (अ०सा०-5) के घर नहीं गया है । अपीलाथE ने )चाव में कु ल-02 साति्ቌयों का परी्ቌ्ቓ करवाया गया । उभयप्ቌ काे सुना Cाकर बिवचार्ቓ
4 / 7 {Cr. A. No.-526 of 2009} न्यायालय ्ቛारा अपीलाथE को इस बिन्ቓ:य की कቄኌ/0का-1 के अनुसार दो्ቧजिस्ቍ कर दቄኌ/0 बिकया गया है । जिCसे इस अपील में चुनौी दी गई है ।
5.
अपीलाथE प्ቌ के बिव्ቛान अतिधव्ሹा का क: है बिक घQना की रिरपोQ: अत्यतिधक बिवलम्) से करी) 08 माह प्ቐा की गई है । इस )ा) कोई तिचबिकत्सीय या अन्य साቌኚय ्ቚस्ु नहीं है बिक पीबिrा (अ०सा०-5) का Cो गभ: )ाया गया है वह अपीलाथE का हो । पीबिrा एक व्यस्क मबिहला रही है, उसके )ावCूद उसके ्ቛारा घQना की Cानकारी लम्)े समय क अपने माा-बिपा को भी नहीं दी गई है । इस ्ቚकार, बिवचार्ቓ न्यायालय ्ቛारा साቌኚय की उतिच रूप से समी्ቌा न करे हुए अपीलाथE को दो्ቧजिस्ቍ कर दቄኌ/0 बिकया गया है । अपीलाथE की दो्ቧजिसति्ቍ संदेह से परे स्प्ቖ, पया:् और बिव्ቫसनीय साቌኚय पर आधारिर नहीं है । “्ቚ्ाधीन बिन्ቓ:य” ቄኌस्थर रखे Cाने योग्य नहीं है । अः अपील स्वीकार कर उसे दो्ቧमु्ሹ बिकया Cाये ।
6. उ्ቈरवादी/शासन प्ቌ की ओर से उपቄኌस्थ बिव्ቛान अतिधव्ሹा ने इस अपील का बिवरोध करे हुए क: बिकया है बिक अशिभयोCन साति्ቌयों ने पू्ቓ: रूप से अशिभयोCन मामले का समथ:न बिकया है जिCनपर अबिव्ቫास बिकये Cाने का कोई कार्ቓ नहीं है । बिवचार्ቓ न्यायालय का “्ቚ्ाधीन बिन्ቓ:य” साቌኚय की उतिच समी्ቌा पर आधारिर है । अशिभयोCन ने अपीलाथE के बिवरू्ሾ अपना मामला संदेह से परे ्ቚमाशि्ቓ बिकया है । अपीलाथE प्ቌ ्ቛारा अपील में उठाये गये क: स्वीकार योग्य नहीं है । अः अपील खारिरC बिकया Cाये ।
7. उभयप्ቌ का क: सुना गया और अशिभलेख का सूቌኚमापूव:क परिरशीलन बिकया गया ।
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8. अशिभलेख के परिरशीलन से यह ቄኌस्थति स्प्ቖ होी है बिक ्ቚथम सूचना प्ቔ ्ቚदश: पी-2 के अनुसार घQना माह-)ैसाख, व्ቧ:-2008 की )ायी गयी है, Cो अनुमाबिन अ्ቚैल माह का समय होा है । अपीलाथE के बिवरू्ሾ नामCद रिरपोQ: बिदनांक-29/01/2009 को अथा: करी) 08 माह प्ቐा की गई है, ) पीबिrा (अ०सा०-5) का 0ॉक्Qरी परी्ቌ्ቓ करवाया गया है ।
9. 0ॉक्Qर वंदना व्यास (अ०सा०-10) ने बिदनांक-30/01/2009 को पीबिrा (अ०सा०-5) का 0ॉक्Qरी परी्ቌ्ቓ कर ्ቚतिवेदन ्ቚदश: पी-10 बिदया है, जिCसके अनुसार उस समय पीबिrा के गभ: में 30-32 स्ाह का गभ: मौCूद था, जिCसकी धrकन भी चल रही थी ।
10.
अशिभयोCन साቌኚय के अनुसार पीबिrा (अ०सा०-5) ने बिदनांक-07/04/2009 को एक )्ሴे को Cन्म बिदया था । बिवतिधक उपधार्ቓा के अनुसार 280 बिदन में )्ሴे का Cन्म माने ो पीबिrा (अ०सा०-5) का गभ: धार्ቓ माह-Cून, 2008 में होना चाबिहए । C)बिक, घQना Cून-2008 की नहीं )ायी गयी है ।
11. दूसरी महत्वपू्ቓ: )ा यह है बिक घQना व्ቧ:-2008 की है । भारीय द/0 संबिहा में व्ቧ:-2013 में हुए संसोधन से पूव:, यबिद बिकसी मबिहला जिCसकी उ् 16 व्ቧ: से कम हो, यबिद उसकी इच्छा या सहमति के साथ भी )लात्संग बिकया Cाा है, ो वह अपराध की ्ቦे्ቓी में आा था । इस मामले में घQना व्ቧ:-2008 की है, जिCसमें पीबिrा (अ०सा०-5) की उ् 16 व्ቧ: से अतिधक )ायी गयी है । इसलिलए पीबिrा (अ०सा०-5) की सहमति भी अपराध के बिनधा:र्ቓ में आवश्यक त्व रहा है ।
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12. इस अवस्था में, C) करी) 07 माह के गभ: धार्ቓ के प्ቐा परिरCनों को Cानकारी दी गई है । C) घQना कारिर हुई थी, ) परिरCनों को भी कोई Cानकारी नहीं दी गई थी और न ही आस-पrोस या समाC-पंचाय में इस )ा की Cानकारी थी बिक पीबिrा (अ०सा०-5) का गभ: अपीलाथE का है । पीबिrा (अ०सा०-5) के )यान के अलावा इस )ा) कोई पुबि्ቖकारक साቌኚय नहीं है जिCससे माना Cा सके बिक पीबिrा का गभ: अपीलाथE का ही था । करी) 07 माह के बिवलम्) से लिलखवायी गई रिरपोQ: को संदेह से परे नहीं देखा Cा सका । ऐसी दशा में, पीबिrा (अ०सा०- 5) का यह )यान संदेह से परे ्ቚमाशि्ቓ नहीं पाया Cाा बिक उसे Cो गभ: था वह अपीलाथE के )लात्संग से हुआ था ।
13. उ्ሹ अवस्था में, अपीलाथE की दो्ቧजिसति्ቍ स्प्ቖ, पया:् और बिव्ቫसनीय साቌኚय पर आधारिर नहीं है । अपीलाथE के बिवरू्ሾ अशिभयोCन अपना मामला संदेह से परे ्ቚमाशि्ቓ करने में असफल रहा है । ऐसी दशा में, “्ቚ्ाधीन बिन्ቓ:य” ቄኌस्थर रखे Cाने योग्य नहीं पाया Cाा ।
14. अः अपील स्वीकार की Cाी है । “्ቚ्ाधीन बिन्ቓ:य” अपास् बिकया Cाा है था अपीलाथE को संदेह का लाभ देे हुए आरोबिप अपराध से दो्ቧमु्ሹ बिकया Cाा है ।
15.
अपीलाथE को Cमान पर )ाया गया है । द/0 ्ቚबि्ቅया संबिहा, 1973 की धारा-437 (क) के ह उसका Cमान-मुचलका और 06 माह के लिलए ्ቚभावशील रहेगा त्प्ቐा् अन्य न्यायालय में उपቄኌस्थ होने की आवश्यका न रहने पर मु्ሹ समझा Cायेगा ।
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16. बिन्ቓ:य की ्ቚति के साथ बिवचार्ቓ न्यायालय को मूल अशिभलेख आवश्यक काय:वाही हेु सूचनाथ: एवं पालनाथ: शी्ቈापूव:क वापस ्ቚेबि्ቧ हो । सही/- (संCय कु मार Cायसवाल) न्यायाधीश पोमन