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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 147016 (ALL)
SUNIL KUMAR VERMA AND 6 OTHERS v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME LKO. AND ANOTHER
NA528/641/2025 · 2025-07-04
Subhash Vidyarthi
body2025
[ 2025 DAILYLAW 147016 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:37907 Court No. - 15 Case :- APPLICATION U/S 528 BNSS No. - 641 of 2025 Applicant :- Sunil Kumar Verma And 6 Others Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Lko. And Another Counsel for Applicant :- Santosh Kumar Shukla Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J.
1. पप्रारर्थीगण कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री ससंततोष कक मप्रार शकक्लप्रा , वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा शश्री वदिविप्राकर धससंह एविसं वविपकश्री ससंख्यप्रा 2 कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री बब्रृजकेश कक मप्रार शकक्लप्रा कतो सकनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा अविलतोकन वकयप्रा।
2. धिप्रारप्रा 482 दिण्ड पवक्रियप्रा ससंवहतप्रा कके अन्तगरत पस्तकत इस पप्राररनप्रा पत दप्रारप्रा पप्रारर्थीगण नके परम ससूचनप्रा ररपतोरर ससंख्यप्रा 508 सन 2024 अन्तगरत धिप्रारप्रा 191(2), 115(2), 352, 351(2) बश्री०एन०एस०, धिप्रारप्रा 3(1)( ), 3(1)( ) r s एविसं धिप्रारप्रा 3(2) ( ) va अनकससूवचत जप्रावत एविसं अनकससूवचत जनजप्रावत अधधिवनयम , रप्रानप्रा अकबरपकर, जनपदि अम्बकेडकरनगर कके अनकक्रिम मम पस्तकत आरतोप पत ससंख्यप्रा A-397 सन 2024 तरप्रा उक कके आधिप्रार पर सत परश्रीकण ससंख्यप्रा 5705 सन 2024 मम वविदप्रान वविशकेष न्यप्रायप्राधिश्रीश अनकससूवचत जप्रावत एविसं अनकससूवचत जनजप्रावत (नब्रृशसंसतप्रा वनविप्रारण ) अधधिवनयम, अम्बकेडकरनगर दप्रारप्रा पप्राररत आदिकेश, धजससके उक अपरप्राधि कप्रा ससंजप्रान धलयप्रा एविसं पप्रारर्थीगण कतो वविचप्रारण कके धलए तलब वकयप्रा गयप्रा, कके वनरस्तश्रीकरण ककी पप्राररनप्रा इस आधिप्रार पर ककी गई हहै वक पकक्षों कके मध्य समझझौतप्रा हतो गयप्रा हहै।
3. चसूसंवक वविपकश्री ससंख्यप्रा 2 दप्रारप्रा पस्तकत पकरण वदिनप्रासंक 14.08.2024 कतो धलखप्राई गई परम ससूचनप्रा ररपतोरर कके आधिप्रार पर ससंसस्रत हहआ धजसमम कहप्रा गयप्रा वक अवभियककगण नके पप्रारर्थी कके पकत कतो स्कसू ल सके बप्राहर वनकलनके पर वबनप्रा वविविप्रादि गप्राधलयप्रासं दिकेतके हहए लप्रात-घसूसक्षों वि डण्डके सके मप्रारप्रापश्रीरप्रा। उसकके बप्रादि ऑवफिस मम लके जप्राकर फिसर पर बहैठप्राकर जप्रावतससूचक शब्दि कप्रा पयतोग करतके हहए धिमकप्रायप्रा।
4. पकक्षों कके मध्य हहए समझझौतके मम यह कहप्रा गयप्रा हहै वक वबनप्रा वकसश्री दिबप्रावि कके एविसं अपनके स्वितसंत मसस्तष्क सके समस्त पक इस पकरण कतो समप्राप्त करनप्रा चप्राहतके हह एविसं कतोई कप्रायरविप्राहश्री नहहीं चप्राहतके हह।
5. परम ससूचनप्रा ररपतोरर कके करन कके अनकसप्रार जप्रावतससूचक शब्दि एक कमरके कके असंदिर कहके गयके रके तरप्रा ऐसप्रा कतोई करन नहहीं हहै वक विहप्राहाँ पर जनतप्रा कके व्यवक उपसस्रत रके। ऐसश्री पररसस्रवत मम जबवक पकक्षों नके आपसश्री सहमवत सके सकलह कर धलयप्रा हहै, आपरप्राधधिक पकरण ककी कप्रायरविप्राहश्री वनरस्त वकयप्रा जप्रानप्रा न्यप्रायवहत मम हतोगप्रा।
6. रप्रामप्रावितप्रार बनप्राम मध्य पदिकेश रप्राज्य, (2022) 13 एस.सश्री.सश्री.
635, मम मप्राननश्रीय उच्चतम न्यप्रायप्रालय नके अविधिप्राररत वकयप्रा हहै वक जहप्राहाँ न्यप्रायप्रालय कतो यह पतश्रीत हतोतप्रा हहै वक यद्यवप पश्नगत अपरप्राधि अनकससूवचत जप्रावत एविसं अनकससूवचत जनजप्रावत अधधिवनयम , सके आकप्रावदित हहै, तरप्रावप यह वनजश्री पकब्रृ वत कप्रा हहै अरविप्रा जहप्राहाँ अपरप्राधि पश्रीवड़ित व्यवक ककी जप्रावत कके कप्रारण कप्राररत नहहीं वकयप्रा गयप्रा हहै अरविप्रा जहप्राहाँ वविधधिक पवक्रियप्रा कप्रा जप्रारश्री रहनप्रा न्यप्रावयक पवक्रियप्रा कप्रा दिकरुपयतोग हतोगप्रा, न्यप्रायप्रालय कप्रायरविप्राहश्री कतो वनरस्त करनके ककी अपनश्री शवक कप्रा पयतोग कर सकतश्री हहै तरप्रा न्यप्रायप्रालय ककी 482 दिसं०प०ससं० कके अन्तगरत अन्तरवनवहत शवकयप्रासं मप्रात इस आधिप्रार पर पयतोग करनके सके मनप्रा नहहीं वकयप्रा जप्रा सकतप्रा हहै वक अपरप्राधि एक वविशकेष वविधधि सके आच्छप्रावदित हहै।
7. उपरतोक वविविकेचनप्रा कके आलतोक मम पप्राररनप्रा पत स्विश्रीकप्रार वकए जप्रानके यतोग्य हहै।
8. तदिनकसप्रार, पप्राररनप्रा पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जप्रातप्रा हहै। परम ससूचनप्रा ररपतोरर ससंख्यप्रा 508 सन 2024 अन्तगरत धिप्रारप्रा 191(2), 115(2), 352, 351(2) बश्री०एन०एस०, धिप्रारप्रा 3(1)( ), 3(1)( ) r s एविसं धिप्रारप्रा 3(2)( ) va अनकससूवचत जप्रावत एविसं अनकससूवचत जनजप्रावत अधधिवनयम, रप्रानप्रा अकबरपकर, जनपदि अम्बकेडकरनगर कके अनकक्रिम मम पस्तकत आरतोप पत ससंख्यप्रा -397 A सन 2024 तरप्रा उक कके आधिप्रार पर सत परश्रीकण ससंख्यप्रा 5705 सन 2024 मम वविदप्रान वविशकेष न्यप्रायप्राधिश्रीश अनकससूवचत जप्रावत एविसं अनकससूवचत जनजप्रावत (नब्रृशसंसतप्रा वनविप्रारण) अधधिवनयम, अम्बकेडकरनगर दप्रारप्रा पप्राररत आदिकेश, धजससके उक अपरप्राधि कप्रा ससंजप्रान धलयप्रा एविसं पप्रारर्थीगण कतो वविचप्रारण कके धलए तलब वकयप्रा गयप्रा, तरप्रा उपरतोक आपरप्राधधिक विप्रादि ककी ससंपसूणर कप्रायरविप्राहश्री पप्रारर्थीगण कके वविरुद्ध वनरस्त ककी जप्रातश्री हहै।
9. यवदि उत्तर पदिकेश अनकससूवचत जप्रावत एविसं अनकससूवचत जनजप्रावत अधधिवनयम 2015, कके अन्तगरत वविपकश्री कतो कतोई धिनरप्रावश पप्राप्त हहई हतो, ततो वविपकश्री सके उसककी विससूलश्री सकवनसश्चत ककी जप्राए। [Subhash Vidyarthi,J.] Order Date :- 4.7.2025 Ankit Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench