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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 146237 (ALL)
KAMLESH v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME LKO. AND ANOTHER
NA528/598/2025 · 2025-07-01
Subhash Vidyarthi
body2025
[ 2025 DAILYLAW 146237 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:37043 Court No. - 15 Case :- APPLICATION U/S 528 BNSS No. - 598 of 2025 Applicant :- Kamlesh Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Lko. And Another Counsel for Applicant :- Dilip Kumar Pandey Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J.
1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री वदिलश्रीप कक मप्रार पप्रापांडकेय तरप्रा वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा शश्री अभय कक मप्रार धसपांह कको सकनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा अविलकोकन वकयप्रा।
2. धिप्रारप्रा 528 भप्रारतश्रीय नप्रागररक सकरकप्रा सपांवहतप्रा/482 दिण्ड पवक्रियप्रा सपांवहतप्रा कके अन्तगरत पस्तकत इस पप्राररनप्रा पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मककदिमप्रा अपरप्राधि सपांख्यप्रा 202 सन 2025 अन्तगरत धिप्रारप्रा-स्विप्रापक औषधधि और मन पभप्राविश्री पदिप्रारर अधधिवनयम ककी धिप्रारप्रा 8/20, रप्रानप्रा-ऊऊँ चप्राहप्रार, जनपदि-रप्रायबरकेलश्री कके अनकक्रिम मम अपर सत न्यप्रायप्राधिश्रीश/7/वविशकेष न्यप्रायप्राधिश्रीश एन०डश्री०पश्री०एस० ककोरर दप्रारप्रा पप्राररत आदिकेश वदिनप्रापांक 28.05.2025 ककी विवैधितप्रा कको चकननौतश्री दिश्री हवै , धजसकके दप्रारप्रा पप्रारर्थी कको 14 वदिन कके धलए न्यप्रावयक अवभरकप्रा मम भकेजप्रा गयप्रा, चचऊँवक उक अविधधि पचरर हकोनके कके पश्चप्रात पप्रारर्थी कको जमप्रानत वमल चकककी हवै इसधलए पप्रारर्थी ककी न्यप्रावयक अवभरकप्रा ककी विवैधितप्रा कप्रा पश्न अब मप्रात अकप्रादिवमक मचल्य कप्रा रह गयप्रा हवै और इसकके वनधिप्राररर सके ककोई विप्रास्तवविक पभप्रावि नहहीं पडकेगप्रा , जहप्राऊँ तक आदिकेश वदिनप्रापांक 28.05.2025 कको चकननौतश्री वदिए जप्रानके कप्रा पश्न हवै , वननिःसप्रार हको चककप्रा हवै एविपां तदिनकसप्रार वनरस्त हकोनके यकोग्य हवै। पप्रारर्थी नके उपरकोक विप्रादि ककी सम्पचरर पवक्रियप्रा ककी विवैधितप्रा कको भश्री चकननौतश्री दिश्री हवै।
3.
वदिनप्रापांक 27.05.2025 कको एक पकधलस उप-वनरश्रीकक दप्रारप्रा धलखप्राई गई परम सचचनप्रा ररपकोरर मम यह कहप्रा गयप्रा हवै वक पकधलस दप्रारप्रा पप्रारर्थी कको पकडप्रा गयप्रा जको वक मककदिमप्रा अपरप्राधि सपांख्यप्रा 167/2025 अपांतगरत धिप्रारप्रा 8/20 एन०डश्री०पश्री०एस० एक्र मम विप्रापांवछित अवभयकक हवै एविपां पप्रारर्थी कको उसककी वगरफ्तप्रारश्री कप्रा कप्रारर बतप्रातके हहए वहरप्रासत मम धलयप्रा गयप्रा। वगरफ्तप्रारश्री कके समय पप्रारर्थी नके स्वियपां कके पप्रास अविवैधि गप्रापांजप्रा हकोनके ककी बप्रात बतप्राई तरप्रा इस पर पकधलस नके उसके यह बतप्रायप्रा वक विह अपनश्री जप्रामप्रा तलप्राशश्री वकसश्री रप्राजपवतत अधधिकप्रारश्री /मधजस्रटकेर कके समक दिके सकतप्रा हवै। पप्रारर्थी नके अपनश्री तलप्राशश्री रप्राजपवतत अधधिकप्रारश्री /मधजस्रटकेर कके समक करप्रानके ककी बप्रात कहश्री , धजस पर ककेतप्राधधिकप्रारश्री कको घरनप्रास्रल पर बकलप्रायप्रा गयप्रा तरप्रा उनकके दप्रारप्रा तलप्राशश्री धलए जप्रानके पर पप्रारर्थी कके दिप्रावहनके हप्रार मम धलए हहए रवैलके सके 1 वकलको 980 गप्राम अविवैधि गप्रापांजप्रा बरप्रामदि हहआ, धजसके उसश्री रवैलके मम
रखकर सश्रील मकहर वकयप्रा गयप्रा। परम सचचनप्रा ररपकोरर मम अपांवकत हवै वक तकनश्रीककी तकवर कके कप्रारर ई-सप्राक्ष्य ऐप सके विश्रीवडयको नहहीं बनप्रायप्रा जप्रा सकप्रा तरप्रा वगरफ्तप्रारश्री वि बरप्रामदिगश्री ककी विश्रीवडयकोगप्राफकी उप-वनरश्रीकक दप्रारप्रा अपनके वनजश्री मकोबप्राइल फकोन सके ककी गई, धजसकप्रा विश्रीवडयको बनप्राकर पकेन डटप्राइवि मम सपांरवकत कर धलयप्रा गयप्रा। पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा नके तकर वदियप्रा वक कधरत बरप्रामदिगश्री कके समय बरप्रामदि विस्तक कके नमचनके जप्राऊँच कके धलए नहहीं धलए गए एविपां बरप्रामदिगश्री ककी विश्रीवडयकोगप्राफकी नहहीं ककी गई हवै, धजसकके आधिप्रार पर समस्त आपप्रारप्राधधिक कप्रायरविप्राहश्री अविवैधिप्रावनक हको जप्रातश्री हवै।
4. स्विप्रापक औषधधि एविपां मननिः पभप्राविश्री पदिप्रारर अधधिवनयम कके पप्राविधिप्राननों कके अनकसप्रार बरप्रामदि विस्तक कके नमचनके मधजस्रटकेर कके समक धलए जप्रानके अवनविप्रायर हह , ऐसश्री सस्रवत मम जब मनौकके मम एक रवैलके सके बरप्रामदि पचरश्री सप्रामगश्री कको रवैलके मम हश्री सश्रील कर वदियप्रा गयप्रा , मनौकके पर नमचनप्रा अलग न करनके सके कप्रायरविप्राहश्री ककी विवैधिप्रावनकतप्रा पर ककोई पश्नवचह्न नहहीं उत्पन्न हकोतप्रा हवै , जहप्राऊँ तक विश्रीवडयको न बनप्राए जप्रानके कप्रा तकर हवै , परम सचचनप्रा ररपकोरर मम स्वियपां हश्री अपांवकत हवै वक तकनश्रीककी तकवर कके कप्रारर ई - सप्राक्ष्य ऐप सके विश्रीवडयको नहहीं बनप्रायप्रा जप्रा सकप्रा वकन्तक विश्रीवडयको उप -वनरश्रीकक दप्रारप्रा अपनके वनजश्री मकोबप्राइल सके बनप्रायप्रा गयप्रा एविपां पकेन डटप्राइवि मम सपांरवकत वकयप्रा गयप्रा हवै। अतनिः इस तकर मम भश्री बल नहहीं हवै वक वगरफ्तप्रारश्री एविपां बरप्रामदिगश्री कप्रा विश्रीवडयको नहहीं बनप्रायप्रा हवै। ऐसश्री पररसस्रवत मम आपरप्राधधिक कप्रायरविप्राहश्री कके वनरस्तश्रीकरर कप्रा ककोई विवैधिप्रावनक आधिप्रार नहहीं हवै।
5.
तदिनकसप्रार, पप्राररनप्रा पत बलहश्रीन हवै तरप्रा वनरस्त वकयप्रा जप्रातप्रा हवै। Order Date :- 1.7.2025 Himanshu Digitally signed by :- HIMANSHU SHUKLA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench