SANAT PANDEY @ SANAT KUMAR PANDEY v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME DEPTT. LKO. AND ANOTHER
/298/2025 · 2025-08-06
Saurabh Lavania
body2025
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[ 2025 DAILYLAW 146024 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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1 Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:45868 Court No. - 11 Case :- CRIMINAL REVISION DEFECTIVE No. - 298 of 2025 Revisionist :- Sanat Pandey @ Sanat Kumar Pandey Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Deptt. Lko. And Another Counsel for Revisionist :- Sunil Kumar Srivastava,Dileep Kumar Yadav,Prem Kumar Singh Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Saurabh Lavania,J. (Order on Crl. Misc.Application for Condonation of Delay/I.A. No.1 of 2025)
1. Heard Shri Prem Kumar Singh with Shri Sunil Kumar Srivastva and Shir Dileep Kumar Yadav, learned counsel for the revisionist, Shri Ajai Kumar Srivastava, learned A.G.A. for the State and perused the record. 2. As per the letter of the Chief Judicial Magistrate, Faizabad (now Ayodhya) the service upon the opposite party No.2 is sufficient. However, when the case is called out neither the opposite party No.2 nor any one on her behalf appeared. In these circumstances, the court proceeded to decide the revision with the assistance of learned counsel for the revisionist and learned A.G.A. for the State. 3. Considering the facts as indicated in the affidavit filed in support of the application for condonation of delay, the application for condonation of delay (Crl. Misc.Application for Condonation of Delay/I.A. No.1 of 2025) is allowed. The delay in filing the revision is condoned. (Order on Memo of Revision)
1. This Criminal Revision has been filed under Section 19 (4) of the Family Court Act, 1984 impeaching the judgment and order dated 04.02.2021, passed by the 'Family Court', namely Additional Principal Judge, Family Court, Faizabad (now Ayodhya) in Case No.130 of 2009 (Smt. Poonam and another Vs. Sanat Pandey) by which the revisionist has been ordered to pay Rs.5,000/- per month to the private respondents from the date of presentation of the application. By this revision the revisionist has also impeached the order dated 10.01.2025 by which the recovery warrant has been issued against the revisionist. 2
2. The order has been impeached on the ground that the opposite party No.2 is not legally wedded wife of the revisionist as such in allowing the application under Section 125 Cr.P.C. the trial court has committed error of law. 3.
For coming to the just and proper conclusion, this Court is of the view that the relevant portion of the impugned judgment and order should be referred, which reads as under :-
"पत्रावली के अवलोकन से स्पष्ट है किक आवेकिका द्वारा प्रस्तुत वा अन्तर्गत धारा 125 .प्र.सं. किवपक्षी के किवरूद्ध स्वयं एवं अपने अवयस्क पुत्र के भरण पोषण धनराशि( प्राप्त करने हेतु प्रस्तुत किकया र्गया है। आवेकिका का किवपक्षी की पत्नी होने के सम्बन्ध में आवेकिका ने वापत्र में यह कथन किकया है किक उसकी (ाी किवपक्षी के साथ किहन्ू धम(ास्व के अनुसार किनांक 16-04-2004 को जि5ला अम्बेडकरनर्गर में सम्पन्न हुआ था। आवेकिका तभी से अपने पतित के घर आयी और अपने पत्नी के ातियत्वों का किनवहन करने लर्गी। आवेकिका और किवपक्षी के संयोर्ग से एक पुत्र अनरूद्ध पैा हुआ 5बकिक इसके किवपरीत किवपक्षी ने अपने 5बाबावे में उपरोक्त तथ्यों को इंकार किकया र्गया एवं किव(ेष कथन में यह कहा र्गया किक किवपक्षी (ाी(ुा है उसकी (ाी किमथले( पाण्डेय पुत्री श्री रमा(ंकर पाण्डेय किनवासी जिसधौरा हरिंरग्टनर्गं5, जि5ला फै 5ाबा के साथ हुई है और ोनों से एक लड़का आयुष पाण्डेय है। किवपक्षी द्वारा यह भी कहा र्गया किक पूनम ने वतमान मुकमें के पूव किवपक्षी के किवरूद्ध अपने को किवपक्षी की पत्नी कहते हुए मु०अ०सं० 793/2009, अन्तर्गत धारा 498 ए, 323,504,506 भा.ं.सं. एवं धारा 3 (1) 10 एस.सी.एस.टी. एक्ट थाना कोतवाली बीकापुर, जि5ला फै 5ाबा में 5 कराया 5ो किवचारणोंउपरान्त किनांक 07-08-2012 को किनणKत हुआ। आ5 न्ययालय के समक्ष उपरोक्त मु०अ०सं० 793/2009, अन्तर्गत धारा 498 ए, 323,504,506 भा.ं.स. एवंधारा3 (1) 10 एस.सी.एस.टी.
एक्ट, थाना कोतवाली बीकापुर, जि5ला फै 5ाबा सरकार बनाम सनत कु मार पाण्डेय आकि प्रस्तुत है उक्त किनणय किनांकिकत 07-08-2012 के किनष्कष के अन्तिन्तम पैरा 27 में न्यायालय द्वारा यह उजिNखिPत किकया र्गया है किक " अशिभयो5न यह जिसद्ध
करने में असमथ रहा है किक अशिभयुक्त सनत कु मार ने वाकिनी को हे5 के खिलए मारा पीटा या प्रताकिड़त किकया और यह भी जिसद्ध करने में असमथ रहा है किक अशिभयुक्त ने वाकिनी को मारा पीटा या र्गाली किया या धमकी किया और 5ातित सूचक (ब्ों का प्रयोर्ग करके अपमाकिनत किकया
, बन्तिRक यह स्पष्ट है किक
वाकिनी का (ारीरिरक सम्बन्ध अशिभयुक्त सनत कु मार से रहा
, जि5ससे वाकिनी को एक बच्चा पैा हुआ।
" यह भी उNेPनीय है किक उपरोक्त सत्र परीक्षण की पत्रावली पर बयान अन्तर्गत धारा 313 ं.प्र.सं. उपलब्ध है जि5समें सभी मुन्तिR5मान के साथ ही सनत कु मर पाण्डेय ने भी यह स्वीकार किकया है किक मकिहला थाना में पूनम एवं सनत कु मार व उसके परिरवार वालों को बुलाया र्गया 5हां पर समझाने बुझाने पर कचेहरी आकर सनत कु मार व पूनम ने सुलहनामा तैयार किकया जि5सके उत्तर में सभी अशिभयुक्तर्गण के साथ सनत कु मार पाण्डेय ने भी कचेहरी में सुलहनामा किकया 5ाना स्वीकार किकया है। वतमान पत्रावली में कार्ग5 सं.55 ब के रूप में उपरोक्त वर्णिणत सुलहनामा की छायाप्रतित उपलब्ध है जि5स पर मुन्नी ेवी के नोटरी की मुहर लर्गी है जि5स पर तारीP 29-06-2009 अंकिकत है। पत्रावली पर उक्त मुन्नी ेवी द्वारा इस तथ्य के बाबत एक (पथ पत्र किनांकिकत 01-02-2021 किया र्गया है जि5समें मुन्नी ेवी एडवोके ट ने (पथ पर यह कहा है किक वह (ेड नं.
5 जिसकिवल कोट, फै 5ाबा में (पथायुक्त का किवतिध व्यवसाय करती है किनांक 29-06-2009 को आफताब आलम एडवोके ट ने एक (पथ पत्र उनके समक्ष प्रस्तुत किकया था जि5स पर उनके सामने पूनम व सनत कु मार पाण्डेय ने अपना अपना हस्ताक्षर बनाया था जि5से एडवोके ट आफताब आलम ने प्रमाशिणत किकया था। उक्त नोटरी उन्होनें किनांक 29-06- 2009 को तसीक किकया था जि5स पर उनकी मुहर व हस्ताक्षर अंकिकत है। उपरोक्त सुलहनामा के (ुरूआत में ही यह उजिNखिPत है किक " मैं किक सनत कु मार पुत्र पुरूषोत्तम किनवासी सराय सूरा, थाना बीकापुर, जि5ला फै 5ाबा व श्रीमती पूनम पुत्री रमापतित पत्नी सनत कु मार किनवासी रामपुर भर्गन, थाना तारून, जि5ला फै 5ाबा 5ो आपस में साथ साथ रहते थे जि5ससे हम लोर्गों के मध्य एक लड़का जि5सका नाम कुं वर अकिनरूद्ध प्रताप जि5सकी उम्र आठ माह होर्गी पैा हुआ है। हम लोर्गों के मध्य आपस में हुए र्गलत फहमी की व5ह से किववा हो र्गया था 5ो अब सुलह समझौते के माध्यम से समाप्त हो र्गया है। पत्रावली पर सनत कु मार पाण्डेय द्वारा कार्ग5 सं.
57 ब प्राथना पत्र किया र्गया जि5समें सुलहनामा कार्ग5 सं.55 ब/2 ता 3 किनांकिकत 29-06-2009 को फ5K एवं कू ट रतिचत कहा र्गया उक्त आवेन पर आे( किनांकिकत 27-07-2019 में न्यायालय ने यह कहा किक उपरोक्त सुलहनामा पर किवपक्षी सनत कु मार को साक्ष्य प्रस्तुत करने का पूण अवसर उपलब्ध रहेर्गा इसी स्तर पर सुलहनामा को फ5K व कू ट रतिचत होना नहीं कहा 5ा सकता।" पत्रावली पर उपरोक्त मु०अ०सं० 793/2009 में सनत कु मार पाण्डेय का 5मानत प्राथना पत्र संख्या 1011/2009 के आे( की प्रतितखिलकिप कार्ग5 सं.74 ब/3 भी ाखिPल की र्गयी है जि5सके पे5 संख्य 2 पर पीठासीन अतिधकारी द्वारा यड उजिNखिPत किकया र्गया है किक "पत्रावली का अवलोकन किकया।
3 किववेचक द्वारा संकखिलत साक्ष्यों के अवलोकन से प्रतीत होता है किक वाकिनी द्वारा अशिभयुक्त से प्रेम किववाह किकया र्गया था जि5सके खिलए वाकिनी को अपना घर भी छोड़ना पड़ा। किववेचक द्वारा संकखिलत साक्ष्यों में ो फोटोग्राफ भी है जि5समें से एक फोटोग्राफ में वाकिनी की मांर्ग में सिंसूर भरा 5ा रहा है 5ब किक ूसरे में वाकिनी व अशिभयुक्त एक साथ अर्गल बर्गल Pड़े हैं। किववेचक द्वारा संकखिलत साक्ष्यों में एक नोटरी (पथ श्री जि5समें प्रीतित अशिभयुक्त के मध्य एक पुत्र होने की बात कही र्गयी है तथा आपसी मतभे के सुलह समझौते द्वारा समाप्त किकये 5ाने की बात कही र्गयी है। मेरे किवचार से यह धृष्टता की पराकाष्टा है किक जि5स मकिहला ने अशिभयुक्त के खिलए अपना घर परिरवार छोड़ किया उसके साथ कु छ समय किबता कर अशिभयुक्त उसे छोड़ कर ूसरा किववाह कर ले और उसे पहचानने से भी इंकार कर े। " उपरोक्त 5मानत प्राथना पत्र किनरस्त किकया र्गया है। पत्रावली पर 5च्चा बच्चा रक्षा काड कार्ग5 सं.74 ब/4 क्रम सं. 9014 ाखिPल है जि5समें शि((ु का नाम अकिनरूद्ध 5न्म तितशिथ 31-10-2008 एवं पतित का नाम सनत पाण्डेय अंकिकत है। पत्रावली पर य(लोक हान्तिस्पटल ेवकाली रोड, फै 5ाबा द्वारा 5ारी तिडस्चा5 न्तिस्लप कार्ग5 सं. 744/5 ाखिPल की र्गयी है जि5समें पूनम पत्नी सनत पाण्डेय उजिNखिPत है। पत्रावली पर मृतक अकिनरूद्ध पाण्डेय की मृत्यु प्रमाण पत्र कार्ग5 सं.74 ब/14 भी मूल रूप से ाखिPल है जि5समें मृत्यु की तितशिथ 14-03-2020 उजिNखिPत है मृतक की उम्र 12 वष उजिNखिPत है माता का नाम पूनम पाण्डेय एवं किपता का नाम सनत पाण्डेय अंकिकत है। पत्रावली पर सनत पाण्डेय का हाई स्कू ल अंकपत्र मूल कार्ग5 सं .74 ब/15, इण्टरमीडियट प्रमाण पत्र कागज संडयट प्रमाण पत्र कार्ग5 स. 74 ब/16 एवं एम.ए.पूवाद्ध अंकपत्र मूल कार्ग5 सं.
74 ब/18, चरिरत्र प्रमाण पत्र मूल कार्ग5 सं. 74 ब/19, स्थायी निवास प्रमाण पत्र कागज संनवास प्रमाण पत्र कार्ग5 स . 74 ब/20 मूलरूप से प्रस्तुत किकया र्गया है जि5सके बारे में आवेकिका का कहना है किक सनत कु मार पाण्डेय के उपरोक्त मूल प्रपत्र उसके पास पत्नी की हैजिसयत से उपलब्ध है। उपरोक्त सम्पूण तथ्यों से यह स्पष्टता साकिबत हो रहा है किक आवेकिका एवं किवपक्षी के बीच पतित-पत्नी 5ैसे र्गम्भीर (ारीरिरक सम्बन्ध थे जि5ससे अकिनरूद्ध नामक एक पुत्र भी पैा हुआ । उपरोक्त के सन्भ में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा खिलव -इन-रिरले(नशि(प को भी किववाह के रूप में मान्यता ी र्गयी है (ए.आई.आर. 2010 एस.सी. पृष्ठ 2933) इसके अतितरिरक्त ए.एल.आर.2010 (78) (एन.ओ.सी.नं. 16) पृष्ठ सं.9 पर भी यह व्यवस्था ी र्गयी है किक यकि एक पुरुष और स्त्री एक साथ लम्बे समय तक रहते रहे हो और बतौर पतित पत्नी के सामाजि5क मान्यता किमली हो वह भी बैध किववाह की श्रेणी में आयेर्गा तथा 5ो भी पक्ष किववाह के किबन्ु को अस्वीकार कर रहा है उसे जिसद्ध करने का भार उसी व्यकिक्त के ऊपर है। एक अन्य न्यातियक व्यवस्था (ए.आई.आर. 2003 कनाटक पृष्ठ 54 के पैरा 6 में) माननीय न्यायालय ने साक्ष्य अतिधकिनयम की धारा 56,57 एवं 112 को संज्ञान में लेते हुए यह व्यवस्था ी किक मानवीय अनुभव यह स्थाकिपत करता है किक कोई भी स्वी अपने बच्चे के साथ किकसी व्यकिक्त की पत्नी होने का ावा नहीं करेर्गी 5ो उसका पतित न हो। अद्यतन किवतिध व्यवस्था इन्तिन्रा (मा बनाम वी.के .वी. (मा (2013) 15 एस.सी.सी.पे5 755 किनणKत किनांकिकत 26-11-2013 में माननीय उच्चतम न्यायालय ने खिलव-इन रिरले(नशि(प के बारे में र्गाइड लाइन किनधारिरत किकया जि5सके अनुसार पक्षकारों के बीच उनके साथ से बच्चा पैा होना वैवाकिहक सम्बन्धों की प्रकृ तित का सम्बन्ध होने का प्रबल प्रमाण होता है। उक्त संपूण किववेचना से स्पष्ट है किक पूनम एवं सनत कु मार पांडे के बीच वैवाकिहक स्तर का (ारीरिरक संबंध स्थाकिपत है। 5हां तक सनत कु मार द्वारा पूनम को परिरत्यक्त किकये 5ाने का सम्बन्ध है यह स्पष्ट है किक वतमान वा पूनम द्वारा अन्तर्गत धारा 125 ं.प्र.सं. के क तहत भरण पोषण के खिलए अर्गस्त, 2009 में ाखिPल किकया र्गया है जि5समें किनांक 18-07-2011 को एकपक्षीय किनणय पूनम के पक्ष में सुनया र्गया तत्पश्चात् किवपक्षी का रिरकाल प्राथना पत्र स०प्र० वा सं.
42/2012 स्वीकार होकर पत्रावली अपने मूल नम्बर पर 5 हुई । किवपक्षी द्वारा पूरी पत्रावली पर आवेकिका पूनम को अपनी पत्नी व अकिनरूद्ध को पुत्र होने से इंकार किकया र्गया है । उपरोक्त तथ्य पूनम के अलर्ग रहने का पयाप्त युकिक्तयुक्त कारण है।"
4. It would be apt to indicate, from the above quoted portion of the impugned
judgment and order, that for the purposes of passing the order dated 04.02.2021 the trial court took note of the specific finding recorded by the trial court in the judgment passed on 07.08.2012, in the case arising out of Case Crime No.793 of 2009, under Sections 498-A, 323, 504, 506 I.P.C. and Section 3 (1)(X) of the SC/ST Act, Police Station - Bikapur, District - Faizabad, according to which the revisionist and the opposite party No.2 were living as husband and wife and out of this relationship one child was born. The relevant portion of the judgment is extracted herein under :-
"आ5 न्ययालय के समक्ष उपरोक्त मु०अ०सं० 793/2009, अन्तर्गत धारा 498 ए, 323,504,506 भा.ं.स. एवंधारा3 (1) 10 एस.सी.एस.टी. एक्ट, थाना कोतवाली बीकापुर, जि5ला फै 5ाबा सरकार बनाम सनत कु मार पाण्डेय आकि प्रस्तुत है उक्त किनणय किनांकिकत 07-08-2012 के किनष्कष के अन्तिन्तम
4 पैरा 27 में न्यायालय द्वारा यह उजिNखिPत किकया र्गया है किक "अशिभयो5न यह जिसद्ध करने में असमथ रहा है किक अशिभयुक्त सनत कु मार ने वाकिनी को हे5 के खिलए मारा पीटा या प्रताकिड़त किकया और यह भी जिसद्ध करने में असमथ रहा है किक अशिभयुक्त ने वाकिनी को मारा पीटा या र्गाली किया या धमकी किया और 5ातित सूचक (ब्ों का प्रयोर्ग करके अपमाकिनत किकया, बन्तिRक यह स्पष्ट है किक वाकिनी का (ारीरिरक सम्बन्ध अशिभयुक्त सनत कु मार से रहा
, जि5ससे वाकिनी को एक बच्चा पैा हुआ।
"
5. This court also took note of various pronouncements on the aforesaid aspect of the case including the judgment(s) of Hon'ble Apex Court passed in the case of Chanmuniya Vs. Virendra Kumar Singh Kushwaha and another (2011) 1 SCC 141, Indra Sarma Vs. V.K.V. Sarma (2013) 15 SCC 755, Kamla and others Vs. M.R. Mohan Kumar (2019) 11 SCC 491, D. Velusamy Vs. D.Patchaiammal (2010) 10 SCC 469 and Smt. N. Usha Rani Vs. Moodudulda Sriniwas2025 SCC OnLine SC 225, which are related to grant of maintenance to a female in live-in relationship.
6. Upon due consideration of aforesaid, this court does not find any force in the revision. It is accordingly dismissed. No order as to costs.
Order Date :- 6.8.2025 ML/- Digitally signed by :- MUNNA LAL High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench