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1 Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:49538 Court No. - 11 Case :- CRIMINAL REVISION No. - 186 of 2018 Revisionist :- Kiran And 2 Others Opposite Party :- State Of U.P. And Anr. Counsel for Revisionist :- Ram Singh Counsel for Opposite Party :- Govt. Advocate Hon'ble Saurabh Lavania,J.
1. Heard learned counsel for the revisionist, learned AGA for the State and perused the record. 2. The present criminal revision has been filed seeking the following main relief(s):-
"WHEREFORE, it is most respectfully prayed that this Hon'ble Court may be pleased to call for and examine the record of learned court below and set-aside the judgment and order so far it is against the revisionist No. 1 and allow the application under section 125 Cr.P.C. in respect of all the revisionists in toto with cost throughout and direct the opposite party No. 2 to provide Rs.5,000/- each per month to the revisionists as maintenance, in the interest of justice."
3. Vide order dated 12.12.2017, under challenged, the Principal Judge, Family Court, Ambedkar Nagar (in short"Family Court") declined to award maintenance to the revisionist No.1 w/o of opposite party No.2 and awarded the maintenance to the minors (children of opposite party No.2). The operative portion of the order dated 12.12.2017 reads as under :-
"पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्य की विववेचना से न्यायालय का मत है विक प्रार्थिया व विवपक्षी के संसर्ग से उत्पन्न प्रा#र्गण सं० 2 व 3 है। वे अभी अवयस्क है ता अपना भरण पोषण करने में असम है। प्रार्थिया द्वारा अपने प्रा ना पत्र में भरण पोषण की धनराशि/ के रूप में विवपक्षी सं . 2 को 5000/- रूपया व विवपक्षी सं० 3 को 5000 / कु ल मु.
10000/- रूपया प्रतितमाह की मांर्ग की है। प्रार्थिनी द्वारा पत्रावली पर विवपक्षी के अपने विपता के हार्ड वेयर की दुकान को चलाने व उससे आय के संबंध में मौखि9क साक्ष्य विदया है ता दुकान से संबंतिधत फोटोग्राफस आविद प्रपत्र दाखि9ल विकये हैं जि?ससे विवपक्षी की प्र्याप्त आमदनी प्रतीत होती है। चूंविक विववाद्यक संख्या 2 के परिरप्रेक्ष्य में न्यायालय द्वारा यह पाया र्गया है विक प्रार्थिया सं० 1 विवपक्षी से विबना विकसी उतिचत व प्र्याप्त कारण के अलर्ग रह रही है। अतः उसके संबंध में प्रा ना पत्र विनरस्त विकये ?ाने योग्य है परन्तु प्रा#र्गण सं० 2 व 3 नाबाखिलर्ग पुत्र व पुत्री है, ?ो विक अपनी माता के सा नविनहाल में रह रहे हैं। अतः प्रा#र्गण सं० 2 व 3 अपने विपता से भरणं पोषण भत्ता वयस्क
2 होने तक पाने के अतिधकारी हैं। विवपक्षी द्वारा भी अपनी आपखित्त में प्रार्थिनी की माजिसक आमदनी विकतनी है, के सम्बंध में विकसी धनराशि/ का उल्ले9 नहीं विकया है न ही आमदनी के संबंध में कोई दस्तावे? दाखि9ल विकया है। ऐसी स्थिस्तित में पक्षकारों की सामाजि?क व आर्थिक स्थिस्तित को दे9ते हुए प्रार्थिया सं० 2-मविहमा व प्रा# सं० अतिQनी कम/ः 2500/-, 2500/-रूपये प्रतितमाह उनके वयस्क होने तक भरण पोषण के रूप में पाने के अतिधकारी है। तदानुसार यातिचका प्रार्थिया सं० 1 के संबंध में विनरस्त विकये ?ाने योग्य है एवं प्रा#र्गण सं0 2 व -3 के सम्बंध में प्रा ना पत्र स्वीकार विकये ?ाने योग्य है। आदे/ तदानुसार प्रार्थिया संख्या-1 विकरन के सम्बंध में प्रा ना पत्र विनरस्त विकया ?ाता है ता प्रा#र्गण संख्या-2 व 3 कम/ः मविहमा व अतिQनी के सम्बंध में प्रा ना पत्र स्वीकृ त विकया ?ाता है। विवपक्षी आ/ीष कु मार को आदेशि/त विकया ?ाता है विक वह आदे/ की तितशि से अपने बच्चों कम/ः प्रार्थिया सं० 2 मविहमा को 2500/-रूपये एवं प्रा# सं० 3 अतिQनी को 2500/-रूपये प्रतितमाह र्गु?ारा भत्ता उनके वयस्क होने तक प्रत्येक माह की 07 तारी9 तक अदा करे।"
4.
For not providing maintenance to the revisionist No.1, the Family Court decided the Issue No.2 against the revisionist No.2, which reads as under:-
"विद्वतीय विनधा रण विबन्दु यह है विक क्या प्रार्थिया विबना विकसी युविU
- युU कारण
के विवपक्षी से अलर्ग रह रही है
? प्रार्थिया ने अपनी यातिचका में विवपक्षी से अलर्ग रहने का कारण यातिचका की धारा 2 ता 7 में वण न विकया है और बल विदया है विक विवपक्षी व उसके परिर?नों द्वारा अतितरिरU दहे? के रूप में 10 ला9 रूपये रो?र्गार हेतु मांर्ग विवदायी से पूव की र्गयी जि?से पूरा न करने के कारण वह नारा? हो र्गयी लेविकन जि?म्मेदार व्यविUयों के बीच में पड़ने के कारण प्रार्थिनी की विवदाई हो सकी। विवपक्षी व उसके परिर?न प्रार्थिनी के विपता द्वारा विदये र्गये दान दहे? से 9ु/ नहीं े और अतितरिरU दहे? के खिलए ताना देकर प्रताड़ना करते रहे। प्रार्थिया यह सोचकर बदा श्त करती रही विक भविवष्य में सब ठीक हो ?ायेर्गा लेविकन विवपक्षी का रवैया 9राब होता चला र्गया। विवपक्षी ने प्रार्थिया को 2 बार विमटटी का तेल शि\ड़कर मार र्डालने का प्रयास विकया र्गया जि?ससे दोनों के बीच कटुता और हो र्गयी। इसके पूव विवपक्षी ने प्रार्थिया के विवरूद्ध पारिरवारिरक न्यायालय में एक वाद प्रस्तुत विकया जि?समें विदनांक 27.11.09 को सुलह हुई और उU में विवपक्षी ने यह खिलखि9त कन विकया विक वह अब प्रार्थिया को कभी भी मानजिसक व /ारीरिरक प्रताड़ना नहीं देर्गा लेविकन ?ब प्रार्थिया विवदा होकर उसके घर र्गयी तो विवपक्षी ने उसे र्गाखिलयां दी वा मारापीटा और प्रार्थिनी का सारा ?ेवर कपड़ा आविद लेकर एक र्गाड़ी में बैठाकर यह कहते हुए विक उसकी विपता दृघ टना में घायल हो र्गये हैं, विदनांक 14.6.14 को दोपहर 12 ब?े पदुमपुर बा?ार के दतिक्षण सुनसान ?र्गह पर प्रार्थिया व उसके बच्चों को उतार विदये और धमकी विदये विक अतितरिरU दहे?
की धनराशि/ 10 ला9 रूपये लेकर ही आये। प्रार्थिया अपने बच्चों के सा रोते हुए अपने विपता के घर पहुंची। विवपक्षी ने अपनी खिलखि9त आपखित्त में यातिचका में वर्थिणत उपरोU बातों को र्गलत बताया और बल विदया विक प्रार्थिया विवपक्षी के संयुU परिरवार में नहीं रहना चाहती है और अपने मायके वालों को बुलाकर अपने घर चली ?ाती है ता प्रार्थिया को अपमाविनत करती है। विवपक्षी ने कई बार पंचायत
3 करके उसकी विवदाई का प्रयास विकया परन्तु वह तैयार नहीं हुई। ?ब विवपक्षी ने पारिरवारिरक न्यायालय आ?मर्गढ़ में एक याद प्रस्तुत विकया जि?सकी नोविटस के उपरांत प्रार्थिया ने झूठे कनों के आधार पर विवपक्षी के विवरूद्ध घरेलू हिंहसा व दहे? उत्पीड़न का याद प्रस्तुत विकया। बहस के अनुक्रम में विवपक्षी के विवद्वान अतिधवUा द्वारा प्रार्थिया व उसके र्गवाहान के बयानों के आधार पर बल विदया है विक प्रार्थिनी विबना विकसी उतिचत व पया प्त कारण के विवपक्षी से अलर्ग रह रही है। विवतिधअनुसार विकसी साक्षी का बयान एकरूपेण पढ़ा ?ाता है। मात्र एक अं/ या वाक्य से सम्पूण अ नहीं विनकाला ?ाता है। प्रार्थिनी ने पी.र्डब्लू, 1 के रूप में अपनी मुख्य परीक्षा में वाद कनों का दोहराई है जि?से पुनः अंविकत करने की आवश्यकता नहीं है। प्रार्थिया ने साक्ष्य में विवपक्षी के विवरूद्ध /ादी के विदन से ही प्रार्थिया व उसके विपता से अपने व्यवसाय हेतु 10 ला9 अतितरिरU दहे? की मांर्ग करने की बात कही है और उसी के परिरप्रेक्ष्य में /ारीरिरक व मानजिसक प्रताड़ना देना कहा है। ऐसी स्थिस्तित में अपनी जि?रह में बल विदया है विक मेरी /ादी हम लोर्गों के परिरवार वालों ने दे9कर समझकर तय विकया ा। /ादी की बातचीत होने के लर्गभर्ग र्डेढ़ माह बाद विववाद हुआ। इस र्डेढ़ माह के बीच में मेरे मायके वालों व ससुराल वालो के बीच बातचीत होती ी। विववाह के पूव ससुराल वालों व मेरे मायके वालो के बीच ?ो लेन देन तय हुआ ा वह मेरे मायके वालों ने विदया ा। विववाह के समय मेरी ससुराल व मेरे मायके वालों के बीच कोई दान दहे?
का विववाद नहीं हुआ ा। मैं विववाह में विवदा होकर र्गयी तो मैं पहली बार
3 माह तक रही। पहली विवदाई में अपने पतित व ससुराल वालों के
सा हंसी9ु/ी रही। इसके बाद मायके आयी और एक माह रहने के बाद पुनः ससुराल र्गयी और लर्गभर्ग
8, 9
माह ससुराल में रही। इस बीच मुझे र्गभ
आ र्गया ा। मेरी ससुराल में संयुU परिरवार है। मेरी ससुराल में मविहलाओं में मेरी सास व
2 नन्दें घर में रहती हैं। /ादी के बाद मैं अपनी ससुराल कई
बार आयी र्गयी हूं। मैं जि?तनी बार आई र्गई हूं रीतित रिरवा? के अनुसार आई र्गई हूं। मेरी ससुराल में सबके बेर्डरूम अलर्ग अलर्ग है। मेरे पतित ने आ?मर्गढ़ में विवदाई का एक मुकदमा सन
2009
में विकया ा। इस मुकदमे में आ?मर्गढ
के न्यायालय में हम लोर्गों के बीच सुलह हो र्गयी ी। हम लोर्गों ने /प पत्र दाखि9ल विकया है। मेरी सभी आवश्यकताओं को मेरी पतित पूरा करते े। मैं संयुU परिरवार में नहीं रहना चाहती है। यविद मेरे पतित अलर्ग लेकर रहें तो मैं उनके सा ?ाने को तैयार हूं। मेरे पतित अपने मां बाप से अलर्ग नहीं रहना चाहते ?ो सुलहनामा आ?मर्गढ़ में दाखि9ल है उसमें दान दहे? मांर्गने की बात नहीं कही र्गयी है। मैं अपने मायके में
4 साल से बैठी हूं। मैं अंतितम बार
ससुराल से अपने भाई के सा मायके आयी ी। प्रार्थिनी के अन्य साक्षी उसका भाई के /व प्रसाद पी.र्डब्लू. 2 के रूप में अपनी मुख्य परीक्षा में विवपक्षी पर 10 ला9 अतितरिरU दहे? के खिलए अपनी बहन के सा /ारीरिरक व मानजिसक प्रताड़ना देना बताया है। साक्षी ने जि?रह में बल विदया है विक विवपक्षी का परिरवार संयुU परिरवार है। आ/ीष के विपता की हार्ड वेयर की दुकान है। आ/ीष के यहां मेरी बहन का कमरा सेप्रेट है। साक्षी ने जि?रह के पृष्ठ सं० 3 पर बल विदया है विक घर से ही दान दहे? मांर्गने की बात /ुरू हुई ी। मेरी बहन को तलाक की नोविटस 2014 में विमली है। यविद मेरी बहन ने अपनी जि?रह के पे? 3 पर यह कहा है विक मैं अंतितम बार अपनी ससुराल से अपने भाई के सा मायके आयी ी तो उU कन र्गलत होर्गा। ऐसा नहीं है विक मेरी बहन अपनी सुराल में संयुU परिरवार में नहीं रहना चाहती है बस्थिhक अलर्ग रहना चाहती है। विवपक्षी ने र्डी.र्डब्लू.
1 के रूप में अपने बयान में बल विदया है विक मेरा संयुU परिरवार है। मेरी पत्नी संयुU परिरवार में नहीं रहना चाहती ?बविक मैं
4 संयुU परिरवार में र9ना चाहता हूं। इन्हीं बातों को लेकर झर्गड़ा झंझट करती ी। उसके बाद अक्सर अपने भाई को बुलाकर 15, 20 विदन में चली ?ाती ी। मैं व मेरे परिरवार वाले र9ना चाहते हैं परन्तु वह सा में नहीं रहना चाहती है। मैं व मेरे विपता ने कई बार विकरन के घर ?ाकर सुलह समझौता करके विवदाई कराना चाहा परन्तु मेरी पत्नी संयुU परिरवार में न रहने की जि?द पर अड़ी रही। साक्षी से विवस्तृत जि?रह की र्गयी है जि?समें उसने स्पष्ट रूप से यह बल विदया है विक यविद विकरन मेरे सा ?ाना चाहे तो मैं उसे अपने सा ले ?ाने के खिलए तैयार हूं। उसके द्वारा यह भी बल विदया र्गया विक इस संबंध में ऐसी स्थिस्तित में मैं तलाक चाह रहा हूं। इस समय तलाक का मुकदमा चल रहा है। विवपक्षी के विद्वतीय साक्षी र्डी. र्डब्लू, 1 ने भी अपने बयानों में विवपक्षी के कनों का सम न विकया है। पत्रावली पर उपलब्ध खिलखि9त व मौखि9क साक्ष्य से यह स्पष्ट है विक प्रार्थिया ने अपनी यातिचका में विववाह के समय ही विवपक्षी द्वारा 10 ला9 रूपये अतितरिरU दहे? के रूप में मांर्गने के परिरप्रेक्ष्य में /ारीरिरक व मानजिसक प्रताड़ना देने और उसको बच्चों के सा परसनपुर बा?ार के दतिक्षण सुनसान ?र्गह पर \ोड़ देने की बात कही है। विकन्तु उसने अपने जि?रह में यह स्वीकार विकया है विक विववाह के समय उसकी ससुराल वाले और मायके वालों के बीच में दान दहे?
का कोई विववाद नहीं ा। उसने यह भी स्वीकार विकया है विक यह विवदा होकर ससुराल र्गयी और
3 माह रही। वहां उसके पतित
व ससुराल वाले हंसी 9ु/ी से रहे। साक्षी ने यह बल विदया है विक विवपक्षी उसकी सभी आवश्यकताओं को पूरा करता ा लेविकन वह संयुU परिरवार में नहीं रहना चाहती है। यविद उसके पतित अलर्ग लेकर रहें तो उसके सा ?ाने को तैयार हूं। साक्षी ने यह भी स्वीकार विकया है विक मैं अंतितम बार अपने ससुराल से अपने भाई के सा मायके आयी ी। पत्रावली पर प्रार्थिनी की ओर प्रस्तुत सूची के माध्यम से दाखि9ल कार्ग?ात के अवलोकन से प्रतीत होता है विक पारिरवारिरक न्यायालय आ?मर्गढ़ में अ/ीष कु मार विवपक्षी द्वारा विवदाई का वाद विकरन के विवरूद्ध योजि?त विकया ा जि?समें पक्षकारों के बीच समझौता हुआ ा
, जि?सकी सत्याविपत प्रतितखिलविप पत्रावली पर उपलब्ध है।
सुलहनामा विदनांक
27.11.2009
में ऐसा कोई तथ्य नहीं खिल9ा है जि?ससे
यह प्रतीत होता हो विक विवपक्षी द्वारा प्रार्थिया को अतितरिरU दहे? के संबंध में /ारीरिरक व मानजिसक प्रताड़ना दी र्गयी हो। उपरोU संतिधपत्र से विवपक्षी द्वारा प्रार्थिनी को /ारीरिरक व मानजिसक प्रतार्डना देने का तथ्य जिसद्ध नहीं होता है। अन्य प्रपत्रों से यह प्रतीत होता है विक पक्षकारों के बीच में घरेलू हिंहसा व दहे?
प्रताड़ना से संबंतिधत वाद भी लस्थिम्बत है। विवपक्षी के बयान से यह प्रतीत होता है विक वत मान में उसके द्वारा प्रार्थिया सं० 1 के विवरूद्ध विववाह विवच्\ेद का मुकदमा दाखि9ल विकया है ?ो अभी लस्थिम्बत है। विवपक्षी ने अपनी जि?रह में यह भी स्वीकार विकया है विक वह अब अपनी पत्नी के सा नहीं रहना चाहता और तलाक चाहता है। प्रार्थिनी व उसके र्गवाह उसके भाई के /व प्रसाद ने अपने बयान में यह स्वीकार विकया है विक विवपक्षी का एक संयुU परिरवार है जि?सके परिरवार में उसके माता विपता व 2 बहने, भाई व उसकी पत्नी रहती है। स्वयं प्रार्थिनी ने यह भी स्वीकार विकया है विक विवपक्षी उसकी हर आवश्यकताओं की पूर्तित करता ा लेविकन वह उसके सा संयुU परिरवार में नहीं रहना चाहती। यविद उसका पतित उसे अलर्ग लेकर रहे तो वह सा रहने को तैयार है। पत्रावली पर उपलब्ध प्रार्थिनी के बयान में आयी हुई स्वीकारोविU के परिरप्रेक्ष्य में उसका यह तथ्य पुष्ट नहीं होता है विक विवपक्षी द्वारा विववाह के समय प्रार्थिया व उसके पतित से 10 ला9 रूपये की मांर्ग की र्गयी और इसी के कारण पक्षकारों के बीच विववाद हुआ। उसकी स्वीकारोविU से यह भी जिसद्ध है विक वह अंतितम बार अपनी ससुराल से अपने भाई के सा
5 अपने मायके आयी जि?ससे यह तथ्य पुष्ट नहीं होता विक विवपक्षी द्वारा उसे मारपीटकर विदनांक 14.09.2016 को दोपहर 12 ब?े पदुमपुर बा?ार के दतिक्षण सुनसान ?र्गह पर \ोड़ विदये। पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य से यह जिसद्ध है विक विवपक्षी का एक संयुU परिरवार है और प्रार्थिया विवपक्षी के सा अलर्ग रहना चाहती है। विवपक्षी अपने परिरवार से अलर्ग नहीं रहना चाहता। अतः पत्रावली पर उजिल्लखि9त मौखि9क साक्ष्य से स्पष्ट है विक प्रार्थिनी विबना विकसी युविU युU कारण के विवपक्षी से अलर्ग रह रही है। वत मान यौतिचका विवपक्षी संख्या 2 व 3 के संबंध में यातिचत की र्गयी है विक विवपक्षी उनका विपता है। पक्षकारों के बीच यह तथ्य अविववाविदत है विक विवपक्षी द्वारा अपने बच्चों को कभी कोई भरण पोषण धनराशि/ दी हो। यह उन्हें अपने अशिभरक्षा में लेने का प्रयास विकया हो। प्रा# सं० 2 व 3 प्रार्थिया सं० 1 के सा अपने नविनहाल में रह रहे है। ऐसी स्थिस्तित में प्रा#र्गण सं० 2 व 3 विवपक्षी से भरण पोषण पाने का युविU युU कारण मौ?ूद है।"
5.
Upon perusal of the record including the above quoted part of impugned order dated 12.12.2017 i.e. the decision on Issue No.2, this Court finds that the finding on the Issue No.2 recorded by the Family Court is justified for the reason that the revisionist No.1 failed to establish that under compelling circumstances she left the matrimonial home. 6. Accordingly, the criminal revision is dismissed. Order Date :- 22.8.2025 ML/- Digitally signed by :- MUNNA LAL High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench