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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 144628 (ALL)
UMESH TIWARI v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME LKO. AND 2 OTHERS
A482/5185/2025 · 2025-07-10
Subhash Vidyarthi
body2025
[ 2025 DAILYLAW 144628 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:39346 Court No. - 15 Case :- APPLICATION U/S 482 No. - 5185 of 2025 Applicant :- Umesh Tiwari Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Lko. And 2 Others Counsel for Applicant :- Vikas Pandey Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J.
1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री वविकप्रास पप्रापांडकेय तरप्रा वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा परम शश्री रप्राजकेश कक मप्रार धसपांह कको सकनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा अविलकोकन वकयप्रा।
2. धिप्रारप्रा 482 दण्ड पवक्रियप्रा सपांवहतप्रा कके अन्तररत पस्तकत इस पप्राररनप्रा पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके आपरप्राधधिक पकनरश्रीक्षण सपांख्यप्रा 228 सनन 2023 अन्तररत धिप्रारप्रा 397, 399 दपां०प०सपां०, रप्रानप्रा-मकोतश्रीरपांज, जनपद-रगोंडप्रा कके अनकक्रिम मम वविदप्रान अवतररक धसवविल जज (अविर खपांड) कक्ष सपांख्यप्रा 11 रगोंडप्रा दप्रारप्रा पप्रारर्थी दप्रारप्रा धिप्रारप्रा 156(3) दपां०प०सपां० कके अपांतररत पस्तकत वकए रए पप्राररनप्रा पत सपांख्यप्रा 928 सनन 2023 मम पप्राररत आदकेश वदनप्रापांक 06.06.2023 ककी विवैधितप्रा कको चकननौतश्री दश्री हवै, धजसमम न्यप्रायप्रालय नके यह कहप्रा वक मकख्य वचवकत्सप्रा अधधिकप्रारश्री ककी वविस्ततृत परश्रीक्षण आख्यप्रा सके ऐसप्रा पतश्रीत हकोतप्रा हवै वक पकरण मम परम ससूचनप्रा ररपकोरर अपांवकत वकए जप्रानके कप्रा ककोई आधिप्रार नहहीं हवै। पप्रारर्थी नके उपरकोक आदकेश कके वविरुद्ध पकनरश्रीक्षण सपांख्यप्रा 228 सनन 2023 पस्तकत वकयप्रा जको वविदप्रान सत न्यप्रायप्राधिश्रीश रगोंडप्रा नके वदनप्रापांक 17.08.2024 कको वनरस्त कर वदयप्रा तरप्रा पप्रारर्थी नके उपरकोक दकोनगों आदकेशगों ककी विवैधितप्रा कको चकननौतश्री दश्री हवै।
3.
धिप्रारप्रा 156(3) मम पप्रारर्थी नके यह कहप्रा हवै वक उसककी पत्नश्री कको पसवि पश्रीडप्रा हकोनके पर वदनप्रापांक 01.09.2022 कको एम्बकलमस सके आशप्रा बहह कके सप्रार सप्रामकदप्रावयक स्विप्रास्थ्य कम द्र धिप्रानकेपकर लके जप्रानके कको कहप्रा, वकन्तक एम्बकलमस चप्रालक उसके स्विप्रास्थ्य कम द्र नके लके जप्रा कर हकेल्द कके यर समरर मतविररयप्रा लके रयप्रा एविपां विहप्रापां पर मनौजसूद ए०एन०एम (वविपक्षश्री सपांख्यप्रा 3) नके अल्रटप्रासप्राउपांड दकेखकर कहप्रा वक बच्चप्रा उल्रप्रा हवै, पप्रारर्थी तरप्रा उसकके घर विप्रालगों नके मरश्रीज कको सप्रामकदप्रावयक
स्विप्रास्थ्य कम द्र वि धजलप्रा मवहलप्रा वचवकत्सप्रालय लके जप्रानके कप्रा अनकरकोधि वकयप्रा , वकन्तक उनककी न सकनतके हहए अपनश्री मनमप्रानश्री करतके हहए पप्रारर्थी ककी पत्नश्री कप्रा पसवि हकेल्र कके यर समरर मम हश्री करप्रा वदयप्रा रयप्रा। पसवि कके उपरप्रापांत वविपक्षश्री सपांख्यप्रा 3 नके कहप्रा वक बच्चके कको आक्सश्रीज़न ककी जरूरत हवै और उसके धिप्रानकेपकर स्विप्रास्थ्य कम द्र लके जप्रानप्रा हकोरप्रा, वकन्तक एम्बकलमस चप्रालक (वविपक्षश्री सपांख्यप्रा 2) नके स्विप्रास्थ्य कम द्र धिप्रानकेपकर लके जप्रानके सके सप्राफ मनप्रा कर वदयप्रा और रु० 2000/- ककी मप्रापांर ककी, बच्चके ककी हप्रालत वबरडतश्री दकेख तको वविपक्षश्री सपांख्यप्रा 3 नके उसके हररओम क्लश्रीवनक लके जप्रानके कको कहप्रा। पप्रारर्थी अपनश्री पत्नश्री और बच्चके कको मकोररसप्राइवकल सके हररओम क्लश्रीवनक लके रयप्रा, जहप्राहाँ डडॉक्रर नके बतप्रायप्रा वक उसकके बच्चके ककी रप्रास्तके मम मतृत्यक हको रई हवै।
4.
उक पप्राररनप्रा पत पर न्यप्रायप्रालय नके पकधलस सके ररपकोरर मप्रापांरश्री , पकधलस नके अपनश्री ररपकोरर मम कहप्रा वक पप्रारर्थी दप्रारप्रा वदए रए पप्राररनप्रा पत ककी जप्राहाँच पसूविर मम मकख्य वचवकत्सप्रा अधधिकप्रारश्री रगोंडप्रा कके दप्रारप्रा ककी रई हवै, धजन्हगोंनके आरकोपश्रीरण कको वनदर्दोष पप्रायप्रा हवै। मकख्य वचवकत्सप्रा अधधिकप्रारश्री ककी जप्राहाँच आख्यप्रा ककी पवत पकधलस आख्यप्रा कके सप्रार न्यप्रायप्रालय कके समक्ष पस्तकत ककी रई। उक आख्यप्रा मम यह अपांवकत हवै वक पप्रारर्थी, वविपक्षश्री सपांख्यप्रा 2, वविपक्षश्री सपांख्यप्रा 3 तरप्रा पप्रारर्थी ककी पत्नश्री कको अस्पतप्राल लके जप्रानके विप्रालश्री आशप्रा शश्रीमतश्री सकनश्रीतप्रा वतविप्रारश्री कके बयप्रान अपांवकत हहए। पप्रारर्थी नके अपनके बयप्रान मम स्विश्रीकप्रार वकयप्रा वक उसकके दप्रारप्रा एम्बकलमस बकलप्रानके कके धलए फकोन करनके कके लरभर 20-25 वमनर मम हश्री एम्बकलमस आ रई। उसनके कहप्रा वक पसवि कके बप्राद बच्चप्रा हप्रार पवैर वहलप्रा रहप्रा रप्रा। वविपक्षश्री सपांख्यप्रा 3 नके अपनके बयप्रान मम कहप्रा वक पससूतप्रा ककी सस्रवत दकेखतके हहए उसककी एविपां बच्चके ककी जप्रान बचप्रानके कके धलए तत्कप्राल पसवि करप्रानके कप्रा वनणरय धलयप्रा रयप्रा। पसवि कके उपरप्रापांत बच्चप्रा सप्रामप्रान्यततः सप्रापांस लके रहप्रा रप्रा। उसककी सस्रवत सप्रामप्रान्य रश्री, उसककी मप्राहाँ ककी सस्रवत भश्री सप्रामप्रान्य रश्री। पप्रारर्थी स्वियपां बप्रार -बप्रार आक्सश्रीजन मम रखके जप्रानके ककी हठधिवमरतप्रा वदखप्रा रहप्रा रप्रा और विह जबरदस्तश्री आक्सश्रीजन मम रखनके कके धलए वबनप्रा बच्चके कको दसूधि वपलविप्राए उठप्रा लके रयके। पससूतप्रा कके सप्रार जप्रानके विप्रालश्री आशप्रा शश्रीमतश्री सकनश्रीतप्रा वतविप्रारश्री नके अपनके बयप्रान मम कहप्रा वक उक कम द्र मतविररयप्रा एक क्रिके वडरकेड वडधलविरश्री प्विप्राइपांर हवै और विहप्रापां सप्रामप्रान्य पसवि ककी सभश्री सकवविधिप्राएपां उपलब्धि हह। उस उप-कम द्र पर कई आशप्रा दप्रारप्रा लप्राभप्राधररयगों कप्रा पसवि करप्रायप्रा जप्रातप्रा हवैप्रा। उप-कम द्र पर पहहहाँचनके कके एक सके डकेढ़ घपांरके बप्राद पसवि हहआ रप्रा। जन्म कके पश्चप्रात बच्चप्रा सप्रापांस लके रहप्रा रप्रा वि
सप्रामप्रान्य रूप सके हप्रार पवैर चलप्रा रहप्रा रप्रा, परन्तक लप्राभप्रारर्थी बच्चके कके एक लडकप्रा हकोनके कके कप्रारण बप्रार -बप्रार पप्राइविकेर नधसरर हकोम लके जप्रानके ककी बप्रात कर रहके रके और विह बच्चके कको मप्राहाँ सके अलर कर लकेकर चलके रयके।
5.
मकख्य वचवकत्सप्रा अधधिकप्रारश्री नके भश्री यह पप्रायप्रा वक वविपक्षश्री सपांख्यप्रा 3 पवशवक्षत रश्री एविपां मरश्रीज कके वहत मम तत्कप्रालश्रीन सस्रवत कको दकेखतके हहए उनकके दप्रारप्रा पसवि सम्पन्न करप्रानके कप्रा वनणरय धलयप्रा रयप्रा एविपां सकरवक्षत पसवि सम्पन्न करप्रायप्रा रयप्रा। पप्रारर्थी स्वियपां वबनप्रा ररफर वकए अपनश्री धजद सके बच्चके कको पप्राइविकेर वचवकत्सप्रालय लके रयप्रा। बप्राद मम वकन पररसस्रवतयगों मम बच्चके ककी मतृत्यक हहई इसकप्रा ककोई वचवकत्सककीय अवभलकेख नहहीं हवै और न हश्री बच्चके कप्रा शवि वविच्छकेदन परश्रीक्षण करप्रायप्रा रयप्रा, धजससके मतृत्यक कप्रा कप्रारण स्पष्ट हको। ऐसश्री पररसस्रवत मम उक आख्यप्रा कको ध्यप्रान मम रखतके हहए वविचप्रारण न्यप्रायप्रालय नके धिप्रारप्रा 156(3) कप्रा पप्राररनप्रा पत वनरस्त वकए जप्रानके मम ककोई अविवैधिप्रावनकतप्रा कप्राररत नहहीं ककी हवै।
6. पप्राररनप्रा पत बलहश्रीन हवै एविपां तदनकसप्रार वनरस्त वकयप्रा जप्रातप्रा हवै। Order Date :- 10.7.2025 Himanshu Digitally signed by :- HIMANSHU SHUKLA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench