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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 143107 (ALL)

ANIL KUMAR YADAV v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. DEPTT. OF HOME U.P. LKO.

BAIL/4871/2025 · 2025-05-30

Subhash Vidyarthi

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:33841 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 4871 of 2025 Applicant :- Anil Kumar Yadav Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Deptt. Of Home U.P. Lko. Counsel for Applicant :- Prashant Tiwari Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J. 1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री पशप्रान्त वतविप्रारश्री वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा परम ससुशश्री वनवकतप्रा वमशप्रा कको ससुनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा अविलकोकन वकयप्रा। 2. धिप्रारप्रा 439 ददं०प०सदं०/483 भप्रारतश्रीय नप्रागररक ससुरकप्रा सदंवहितप्रा (B.N.S.S.) मम पस्तसुत इस पप्राररनप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मसुकदमप्रा अपरप्राधि सदंख्यप्रा 277 सन 2024, अन्तगरत धिप्रारप्रा 302 भप्रा०ददं०सदं०, रप्रानप्रा-हिहजजूरपसुर, धजलप्रा-बहिरप्राइच मम जमप्रानत ककी पप्राररनप्रा ककी हिहै। 3. वदनप्रादंक 22.06.2024 कको पप्रारर्थी सवहित चप्रार व्यवकययों कके वविरुद्ध धिप्रारप्रा 156(3) ददं०प०सदं० कके अन्तगरत पस्तसुत पप्राररनप्रा पत कके आधिप्रार पर धलखप्राई गई परम सजूचनप्रा ररपकोरर मम कहिप्रा गयप्रा हिहै वक वशकप्रायतकतप्रार पप्रापाँच सगके भप्राई रके, धजनमम सके एक सहि-अवभयसुक कन्धिई लप्राल भश्री हिहै। वशकप्रायतकतप्रार कके सबसके बडके भप्राई भगकोलके कप्रा वविविप्राहि नहिहीं हिहआ रप्रा। वदनप्रादंक 22.02.2024 कको कन्धिई लप्राल अपनके पसुत कके सप्रार भगकोलके कको मकोररसप्राइवकल पर बहैठप्राकर वदन मम दको बजके कहिहीं लके गयप्रा और सप्रादंय 5 बजके ममृत अविस्रप्रा मम विप्रापस लप्राकर दप्राहि सदंस्कप्रार कर वदयप्रा। ममृतक कके वहिस्सके मम 8 बश्रीघप्रा जमश्रीन एविदं मकप्रान रप्रा, धजसककी विसश्रीयत वदनप्रादंक 22.02.2024 कको सप्रादंय 4 बजके कन्धिई लप्राल नके अपनके पसुत मसुलप्रायम धसदंहि यप्रादवि कके नप्राम करप्रा वदयप्रा एविदं पप्रारर्थी सवहित अन्य दको नप्रावमत अवभयसुकगण विसश्रीयत कके वनष्पप्रादन कके गविप्राहि रके। 4. पप्राररनप्रा-पत कके सप्रार पस्तसुत शपर-पत मम कहिप्रा गयप्रा हिहै वक पप्रारर्थी वनदर्दोष हिहै और उसकप्रा ककोई आपरप्राधधिक इवतहिप्रास नहिहीं हिहै। 5. वविविकेचनप्रा कके ददौरप्रान वशकप्रायतकतप्रार नके परम सजूचनप्रा ररपकोरर कके करनयों कप्रा समररन वकयप्रा। वविविकेचक नके वशकप्रायतकतप्रार सके पजूछप्रा वक उसनके अपनके भप्राई ककी ममृत्यसु हिकोनके पर तत्कप्राल पसुधलस कको सजूचनप्रा क्ययों नहिहीं दश्री, जबवक उसके शक रप्रा वक अवभयसुकगण नके उसकके भप्राई ककी हित्यप्रा वकयप्रा, धजस पर वविविकेचक नके कहिप्रा वक बहिन तरप्रा गप्रापाँवि कके लकोगयों दप्रारप्रा मनप्रा कर दकेनके कके कप्रारण पसुधलस कको सजूचनप्रा नहिहीं दश्री एविदं पकोस्रमप्राररम (पश्री.एम.) नहिहीं करप्रायप्रा। वशकप्रायतकतप्रार नके यहि भश्री कहिप्रा वक दप्राहि -सदंस्कप्रार वि वक्रियप्रा-कमर मम ममृतक कके सभश्री भप्राई मदौजजूद रके। कधरत विसश्रीयत ककी पवत वशकप्रायतकतप्रार वविविकेचक कको उपलब्धि नहिहीं करप्रा पप्राए। 6. कसु छ अन्य व्यवकययों नके वविविकेचक कको शपर पत दकेकर यहि कहिप्रा वक ममृतक तपकेवदक (कयरकोग) और लकविप्रा रकोग सके ग्रस्त रप्रा और बश्रीमप्रारश्री कके कप्रारण उसककी ममृत्यसु हिहई। सभश्री नके कहिप्रा वक ममृतक ककी ममृत्यसु स्विप्राभप्रावविक रूप सके हिहई हिहै तरप्रा वकसश्री कके दप्रारप्रा हित्यप्रा नहिहीं ककी गई हिहै। 7. पप्राररनप्रा-पत कके सप्रार पस्तसुत शपर-पत मम कहिप्रा गयप्रा हिहै वक पप्रारर्थी वनदर्दोष हिहै और उसकप्रा ककोई आपरप्राधधिक इवतहिप्रास नहिहीं हिहै। 8. वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा परम नके पप्राररनप्रा पत कप्रा वविरकोधि करतके हिहए कहिप्रा वक वविविकेचनप्रा मम पप्रारर्थी कके वविरुद्ध आरकोपयों ककी पसुवष्टि हिहई हिहै और वदनप्रादंक 17.03.2025 कको आरकोप पत पस्तसुत वकयप्रा जप्रा चसुकप्रा हिहै। वशकप्रायतकतप्रार कके वविदप्रान अधधिविकप्रा नके भश्री पप्राररनप्रा पत कप्रा वविरकोधि वकयप्रा। 9. इस न्यप्रायप्रालय दप्रारप्रा तश्रीन अन्य सहि-अवभयसुकयों मनकोज कसु मप्रार यप्रादवि, कन्धिई लप्राल यप्रादवि तरप्रा मसुलप्रायम धसदंहि यप्रादवि कको क्रिमशशः जमप्रानत पप्राररनप्रा -पत सदंख्यप्रा 3670 सन 2025, 2717 सन 2025 तरप्रा 3013 सन 2025 मम पप्राररत आदकेश क्रिमशशः वदनप्रादंवकत 05.05.2025, 04.04.2025 तरप्रा 10.04.2025 दप्रारप्रा वनयवमत जमप्रानत पदप्रान ककी जप्रा चसुककी हिहै। 10. उपरकोक तथ्ययों कके दृवष्टिगत , जबवक वशकप्रायतकतप्रार कके भप्राई ककी ममृत्यसु वदनप्रादंक 22.02.2024 कको हिहई तरप्रा अदंवतम सदंस्कप्रार मम स्विश्रीकमृ त रूप सके वशकप्रायतकतप्रार समममधलत हिहआ तरप्रा उसनके पसुधलस कको ककोई सजूचनप्रा नहिहीं दश्री , इसकके बप्राद परम सजूचनप्रा ररपकोरर 156(3) द०प०सदं० कके अन्तगरत वदए गए पप्राररनप्रा पत कके आधिप्रार पर वदनप्रादंक 22.06.2024 कको अदंवकत हिहई; स्वितदंत सप्रावकययों नके कहिप्रा वक ममृतक ककी ममृत्यसु बश्रीमप्रारश्री सके हिहई हिह; अन्य तश्रीनयों सहि-अवभयसुकगण कको जमप्रानत वमल चसुककी हिहै, न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हिहै वक पप्रारर्थी भश्री जमप्रानत पर ररहिप्रा वकए जप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हिहै। 11. तदनसुसप्रार, जमप्रानत पप्राररनप्रा-पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जप्रातप्रा हिहै। 12. आविकेदक अवनल कसु मप्रार यप्रादवि कको वनमनधलधखत शतर्दोदं कके अधिश्रीन सदंबदंधधित मधजस्रटकेर/न्यप्रायप्रालय ककी सदंतसुवष्टि कके अनसुसप्रार एक व्यवकगत बदंधिपत और समप्रान रप्रावश ककी दको जमप्रानतम पस्तसुत करनके पर उपरकोक मप्रामलके मम जमप्रानत पर ररहिप्रा वकयप्रा जप्राए: - (i) आविकेदक अवभयकोजन सप्राक्ष्य कके सप्रार छकेडछप्राड नहिहीं करकेगप्रा; (ii) आविकेदक अवभयकोजन पक कके सप्रावकययों पर दबप्रावि नहिहीं डप्रालकेगप्रा; (iii) आविकेदक वविचप्रारण न्यप्रायप्रालय दप्रारप्रा वनयत ककी गई पत्यकेक वतधर पर उपमस्रत हिकोगप्रा। [Subhash Vidyarthi,J.] Order Date :- 30.5.2025 Ankit Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench