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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 141406 (ALL)
MOHIT PAL v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME LKO.
NABAIL/522/2025 · 2025-05-28
Subhash Vidyarthi
body2025
[ 2025 DAILYLAW 141406 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:32045 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC. ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 482 BNSS No. - 522 of 2025 Applicant :- Mohit Pal Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Lko. Counsel for Applicant :- Dheeraj Awasthi,Shailendra Kumar Mishra Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J.
1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री धिश्रीरज अविस्रश्री तरप्रा वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा शश्री आललोक कक मप्रार वतविप्रारश्री कलो सकनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा अविललोकन वकयप्रा।
2. धिप्रारप्रा 438 ददं०प०सदं० दप्रारप्रा पस्तकत पप्राररनप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मककदमप्रा अपरप्राधि सदंख्यप्रा 224 सन 2024 अन्तररत धिप्रारप्रा 69, 352, 351(4) भप्रा०द०ववि० रप्रानप्रा बश्रीघप्रापकर धजलप्रा उनप्रावि मम अवग्रिम जमप्रानत ककी पप्राररनप्रा ककी हहै।
3. वदनप्रादंक 10.11.2024 कलो धलखप्राई रई परम ससूचनप्रा ररपलोरर मम वशकप्रायतकतर्थी नके कहप्रा वक कक छ समय पसूविर सके शप्रादश्री कप्रा झप्रादंसप्रा दकेकर पप्रारर्थी उसकप्रा शप्रारश्रीररक शलोषण करतप्रा रहप्रा एविदं अदंतततः उसनके शप्रादश्री करनके सके अस्विश्रीकप्रार कर वदयप्रा।
4. पप्राररनप्रा-पत कके सप्रार पस्तकत शपर-पत मम कहप्रा रयप्रा वक पप्रारर्थी वनदर्दोष हहै और उसकप्रा कलोई आपरप्राधधिक इवतहप्रास नहहीं हहै। पप्रारर्थी भप्रारतश्रीय रल सकेनप्रा मम लप्रादंस नप्रायक कके पद पर कप्रायररत हहै। वशकप्रायतकतर्थी उसकलो वविवभन मप्राध्यममों सके अश्लश्रील विश्रीवडियलो भकेजकर उससके 10 लप्राख रुपयके ककी मप्रादंर कर रहश्री हहै।
5. पप्रारर्थी नके इस सदंबदंधि मम जन सकनविप्राई पलोररल पर एक वशकप्रायत ककी धजसमम जप्रादंच कके उपरप्रान्त उपवनरश्रीक्षक नके यह आख्यप्रा दश्री वक वशकप्रायतकतर्थी पप्रारर्थी सके शप्रादश्री करनप्रा चप्राहतश्री हहै जबवक पप्रारर्थी उससके शप्रादश्री नहहीं करनप्रा चप्राहतप्रा हहै तरप्रा इस कप्रारण दलोनमों पक्ष एक -दसूसरके पर आरलोप-पत्यप्रारलोप लरप्रातके रहतके हह।
6. वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा नके पप्राररनप्रा -पत कप्रा वविरलोधि करतके हहए कहप्रा वक पकरण मम वविविकेचनप्रा अभश्री पचधलत हहै। उन्हमोंनके कके स डिप्रायरश्री कके सदंरत अदंश न्यप्रायप्रालय कके समक्ष पस्तकत वकयके धजससके यह पतश्रीत हलोतप्रा हहै वक वशकप्रायतकतर्थी ककी आयक 19 विषर हहै तरप्रा उसनके परम ससूचनप्रा ररपलोरर कके करनमों कप्रा समररन वकयप्रा हहै।
7. वशकयतकतर्थी नके अपनप्रा आदंतररक वचवकत्सककीय परश्रीक्षण करप्रानके सके इदंकप्रार कर वदयप्रा।
8. शहैवक्षक पमप्राण-पत कके अनकसप्रार वशकप्रायतकतर्थी ककी जन्मवतधर वदनप्रादंक 06.10.2005 हहै।
9. उपरलोक तथ्यमों कलो दृवष्टिरत रखतके हहए , जबवक वशकप्रायतकतर्थी बप्राधलर हहै, शप्रारश्रीररक सदंबदंधि बनप्रानके कप्रा करन वचवकत्सककीय परश्रीक्षण मम पकष्टि नहहीं हलो पप्राए क्यमोंवक वशकप्रायतकतर्थी नके स्वियदं वचवकत्सककीय परश्रीक्षण करप्रानके सके इदंकप्रार कर वदयप्रा; पप्रारर्थी भप्रारतश्रीय रल सकेनप्रा मम मम कप्रायररत हहै तरप्रा उसकके न्यप्रावयक पवक्रियप्रा सके भप्रारनके ककी कलोई सदंभप्राविनप्रा नहहीं हहै , न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हहै वक पप्रारर्थी अवग्रिम जमप्रानत पप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हहै।
10.
तद्नकसप्रार अवग्रिम जमप्रानत पप्राररनप्रा-पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जप्रातप्रा हहै।
11. उपरलोक मककदमप्रा अपरप्राधि सदंख्यप्रा मम आविकेदक ककी वररफ्तप्रारश्री /न्यप्रायप्रालय कके समक्ष उपसस्रवत ककी दशप्रा मम , उसके सदंबदंधधित रप्रानके कके भप्रारसप्राधिक अधधिकप्रारश्री /न्यप्रायप्रालय ककी सदंतकवष्टि कके अनकसप्रार व्यवकरत बदंधि पत एविदं दलो पवतभसू पस्तकत करनके पर परश्रीक्षण कके अदंवतम रूप सके वनस्तप्रारण तक, वनम्न शतर्दोदं कके अधिश्रीन अवग्रिम जमप्रानत पर ररहप्रा वकयप्रा जप्राएरप्रातः- क- आविकेदक, यवद आविश्यक हलोरप्रा तलो पकधलस अधधिकप्रारश्री दप्रारप्रा जजॉच हकेतक अपकेवक्षत समय पर उपसस्रत हलोरप्रा। ख- आविकेदक मप्रामलके कके तथ्यमों सके पररवचत वकसश्री व्यवक यप्रा पकधलस अधधिकप्राररयमों कलो पत्यक्ष यप्रा परलोक्ष रूप सके कलोई धिमककी , विप्रादप्रा यप्रा पललोभन नहहीं दकेरप्रा धजससके वक विह ऐसके तथ्य कलो न्यप्रायप्रालय कके समक्ष यप्रा वकसश्री पकधलस अधधिकप्रारश्री कके समक्ष पकर न करनके पर मप्रान जप्राए। र- आविकेदक अदप्रालत ककी पसूविर अनकमवत कके वबनप्रा भप्रारत नहहीं छलोडकेरप्रा; घ- आविकेदक कलो पत्यकेक वनधिप्रारररत वतधर पर रटप्रायल कलोरर कके समक्ष उपसस्रत हलोनप्रा हलोरप्रा, जब तक वक व्यवकरत उपसस्रवत सके छसू र न दश्री रयश्री हलो; ङ- आविकेदक अवभयलोजन पक्ष कके रविप्राह पर दबप्रावि नहहीं डिप्रालकेरप्रा / धिमककी नहहीं दकेरप्रा। च- आविकेदक वविविकेचनप्रा एविदं वविचप्रारण कके ददौरप्रान सहयलोर करमरके और जमप्रानत ककी स्वितदंततप्रा कप्रा दकरुपयलोर नहहीं करकेरप्रा। [Subhash Vidyarthi,J.] Order Date :- 28.5.2025/Ankit Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench