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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 141041 (ALL)
TARA v. STATE OF U.P. THRU. SECY. HOME LKO.
NABAIL/491/2025 · 2025-05-21
Subhash Vidyarthi
body2025
[ 2025 DAILYLAW 141041 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:29995 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC. ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 482 BNSS No. - 491 of 2025 Applicant :- Tara Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Secy. Home Lko. Counsel for Applicant :- Narendra Gupta Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J.
1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री नरकेन्द्र गगुपप्रा तरप्रा वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा शश्री वदिविप्राकर धससिंह कको सगुनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा अविलकोकन वकयप्रा।
2. धिप्रारप्रा 482 भप्रारतश्रीय नप्रागररक सगुरकप्रा ससिंवहतप्रा कके दप्रारप्रा पस्तगुत पप्राररनप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मगुकदिमप्रा अपरप्राधि ससिंख्यप्रा 157 सन 2025 अन्तगरत धिप्रारप्रा 64(1) बश्री०एन०एस० रप्रानप्रा रकेउसप्रा धजिलप्रा सश्रीतप्रापगुर मम अवग्रिम जिमप्रानत ककी पप्राररनप्रा ककी हहै।
3. वदिनप्रासिंक 27.11.2024 कको पप्रारर्थी ककी बहह दप्रारप्रा धिप्रारप्रा 173(4) भप्रारतश्रीय नप्रागररक सगुरकप्रा ससिंवहतप्रा कके असिंतगरत वदियके गयके पप्राररनप्रा -पत कके आधिप्रार पर वदिनप्रासिंक 18.04.2025 कको धलखप्राई गई परम ससूचनप्रा ररपकोरर मम वशकप्रायतकतर्थी नके कहप्रा वक पप्रारर्थी उसकप्रा ससगुर हहै तरप्रा वदिनप्रासिंक 29.08.2024 कको रप्रात एक बजिके पप्रारर्थी नके उसकके सप्रार दिगुरप्राचप्रार वकयप्रा।
4. धिप्रारप्रा 180 भप्रारतश्रीय नप्रागररक सगुरकप्रा ससिंवहतप्रा कके असिंतगरत असिंवकत अपनके बयप्रान मम पश्रीवड़ितप्रा नके अपनके पसूविर करननों कप्रा समररन वकयप्रा तरप्रा धिप्रारप्रा 183 भप्रारतश्रीय नप्रागररक सगुरकप्रा ससिंवहतप्रा कके असिंतगरत असिंवकत अपनके बयप्रान मम पश्रीवड़ितप्रा नके बन्दिसूक वदिखप्राकर डरप्रानके कप्रा आरकोप भश्री जिकोड़ि वदियप्रा।
5. पप्राररनप्रा-पत कके सप्रार पस्तगुत शपर -पत मम कहप्रा गयप्रा वक पप्रारर्थी एक 75 विरर्थीय वनदिर्दोर विवृद्ध व्यवक हहै और उसकप्रा ककोई आपरप्राधधिक इवतहप्रास नहहीं हहै। पश्रीवड़ितप्रा तरप्रा उसकके पवत (पप्रारर्थी कप्रा पगुत) कप्रा वविविप्रादि चल रहप्रा हहै धजिसकके ससिंबसिंधि मम पप्रारर्थी कके पगुत नके पधिप्रान न्यप्रायप्राधिश्रीश पप्राररविप्राररक न्यप्रायप्रालय, सश्रीतप्रापगुर कके समक एक दिश्रीविप्रानश्री विप्रादि ससिंख्यप्रा 1246 सन 2024 रुखसतश्री हकेतगु पस्तगुत वकयप्रा हहआ हहै। इसश्री कप्रारण सके वशकप्रायतकतर्थी नके पप्रारर्थी कके वविरुद्ध झसूठके करननों कके आधिप्रार पर परम ससूचनप्रा ररपकोरर धलखप्राई हहै।
6. वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा नके पप्राररनप्रा -पत कप्रा वविरकोधि करतके हहए कहप्रा वक वविविकेचनप्रा अभश्री पचधलत हहै।
7. उपरकोक तथ्यनों कको दृवष्टिगत रखतके हहए , जिबवक पप्रारर्थी एक 75 विरर्थीय विवृद्ध व्यवक हहै धजिसकप्रा ककोई आपरप्राधधिक इवतहप्रास नहहीं हहै; वशकप्रायतकतर्थी पप्रारर्थी ककी बहह हहै तरप्रा उसकके और उसकके पवत कके बश्रीच मम पप्राररविप्राररक न्यप्रायप्रालय मम वविविप्रादि लसिंवबत हहै; वशकप्रायतकतर्थी कके करननों अवतररक लगप्रायके गयके आरकोपनों ककी पगुवष्टि करनके कके धलए ककोई अन्य सप्रामग्रिश्री पतप्राविलश्री पर उपलब्धि नहहीं हहै, न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हहै वक पप्रारर्थी अवग्रिम जिमप्रानत पप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हहै।
8. तद्नगुसप्रार अवग्रिम जिमप्रानत पप्राररनप्रा-पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जिप्रातप्रा हहै।
9.
उपरकोक मगुकदिमप्रा अपरप्राधि ससिंख्यप्रा मम आविकेदिक ककी वगरफ्तप्रारश्री /न्यप्रायप्रालय कके समक उपसस्रवत ककी दिशप्रा मम , उसके ससिंबसिंधधित रप्रानके कके भप्रारसप्राधिक अधधिकप्रारश्री /न्यप्रायप्रालय ककी ससिंतगुवष्टि कके अनगुसप्रार व्यवकगत बसिंधि पत एविसिं दिको पवतभसू पस्तगुत करनके पर परश्रीकण कके असिंवतम रूप सके वनस्तप्रारण तक, वनम्न शतर्दोसिं कके अधिश्रीन अवग्रिम जिमप्रानत पर ररहप्रा वकयप्रा जिप्राएगप्राग- क- आविकेदिक, यवदि आविश्यक हकोगप्रा तको पगुधलस अधधिकप्रारश्री दप्रारप्रा जिजॉच हकेतगु अपकेवकत समय पर उपसस्रत हकोगप्रा; ख- आविकेदिक मप्रामलके कके तथ्यनों सके पररवचत वकसश्री व्यवक यप्रा पगुधलस अधधिकप्राररयनों कको पत्यक यप्रा परकोक रूप सके ककोई धिमककी , विप्रादिप्रा यप्रा पलकोभन नहहीं दिकेगप्रा धजिससके वक विह ऐसके तथ्य कको न्यप्रायप्रालय कके समक यप्रा वकसश्री पगुधलस अधधिकप्रारश्री कके समक पकर न करनके पर मप्रान जिप्राए; ग- आविकेदिक अदिप्रालत ककी पसूविर अनगुमवत कके वबनप्रा भप्रारत नहहीं छकोड़िकेगप्रा; घ- आविकेदिक कको पत्यकेक वनधिप्रारररत वतधर पर रटप्रायल ककोरर कके समक उपसस्रत हकोनप्रा हकोगप्रा, जिब तक वक व्यवकगत उपसस्रवत सके छसू र न दिश्री गयश्री हको; ङ- आविकेदिक अवभयकोजिन पक कके गविप्राह पर दिबप्रावि नहहीं डप्रालकेगप्रा / धिमककी नहहीं दिकेगप्रा; च- आविकेदिक वविविकेचनप्रा एविसिं वविचप्रारण कके दिदौरप्रान सहयकोग करमगके और जिमप्रानत ककी स्वितसिंततप्रा कप्रा दिगुरुपयकोग नहहीं करकेगप्रा। [Subhash Vidyarthi,J.] Order Date :- 21.5.2025 Ankit Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench