Research › Search › Judgment

Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 140911 (ALL)

KRISHNA GUPTA v. STATE OF U.P. THRU. THE PRIN. SECY. HOME DEPTT. LKO. AND 3 OTHERS

BAIL/4418/2025 · 2025-05-21

Subhash Vidyarthi

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:29987 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 4418 of 2025 Applicant :- Krishna Gupta Opposite Party :- State Of U.P. Thru. The Prin. Secy. Home Deptt. Lko. And 3 Others Counsel for Applicant :- Virendra Kumar Mishra Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J. 1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री विश्रीरकेन्द्र कक मप्रार वमशप्रा तरप्रा वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा शश्री अरवविन्द कक मप्रार पप्राण्डकेय कको सकनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा पररशश्रीलन वकयप्रा। 2. धिप्रारप्रा 483 भप्रारतश्रीय नप्रागररक सकरकप्रा ससंवहितप्रा कके असंतगरत पस्तकत इस पप्राररनप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मककदमप्रा अपरप्राधि ससंख्यप्रा 15 सन 2025 अन्तगरत धिप्रारप्रा 64(1), 352, 351(2), 351( ) B बश्री०एन०एस०, धिप्रारप्रा 3/4 ललवगक अपरप्राधिधों सके बप्रालकधों कप्रा ससंरकण अधधिवनयम एविसं धिप्रारप्रा 3(2)( VA) अनकससूवचित जप्रावत एविसं अनकससूवचित जनजप्रावत वनविप्रारण अधधिवनयम रप्रानप्रा इटटौंजप्रा धजलप्रा लखनऊ मम जमप्रानत ककी पप्राररनप्रा ककी हिहै। 3. वदनप्रासंक 27.01.2025 कको धलखप्राई गई परम ससूचिनप्रा ररपकोटर मम वशकप्रायतकतप्रार नके कहिप्रा वक जब उसककी अवियस्क बहिन वदनप्रासंक 30.12.2024 कको घर पर अकके लश्री रश्री, वदन कके दको बजके घर मम घकसकर पप्रारर्थी नके उसकके सप्रार जबरदस्तश्री शप्रारश्रीररक ससंबसंधि बनप्रायप्रा। शप्राम कको 3 बजके घरविप्रालधों कके आनके पर पश्रीवड़ितप्रा नके सप्रारश्री बप्रात बतप्रायश्री तको 112 नसंबर पर फकोन कर पकधलस बकलप्रायश्री गयश्री। पकधलस पप्रारर्थी एविसं रप्राजप्रा गकपप्रा कको गप्राड़िश्री मम बहैठप्राकर लके गयश्री वकन्तक उसकके बप्राद छकोड़ि वदयप्रा। 4. धिप्रारप्रा 180 भप्रारतश्रीय नप्रागररक सकरकप्रा ससंवहितप्रा कके असंतगरत असंवकत अपनके बयप्रान मम पश्रीवड़ितप्रा नके परम ससूचिनप्रा ररपकोटर कके करनधों कको दकोहिरप्रायप्रा। 5. पश्रीवड़ितप्रा कप्रा वचिकत्सककीय परश्रीकण वदनप्रासंक 31.01.2025 कको हिहआ तरप्रा उसकके सश्रीनके पर खरधोंचि ककी पकरप्रानश्री चिकोट पप्रायश्री गयश्री। इसकके अवतररक पश्रीवड़ितप्रा कके शरश्रीर पर ककोई अन्य चिकोट नहिहीं पप्रायश्री गयश्री। 6. धिप्रारप्रा 183 भप्रारतश्रीय नप्रागररक सकरकप्रा ससंवहितप्रा कके असंतगरत असंवकत अपनके बयप्रान मम पश्रीवड़ितप्रा नके अपनके पसूविर करनधों कको हिश्री दकोहिरप्रायप्रा। 7. वविविकेचिनप्रा कके उपरप्रान्त वदनप्रासंक 12.03.2025 कको पप्रारर्थी कके वविरुद्ध आरकोप -पत पस्तकत कर वदयप्रा गयप्रा। 8. पप्राररनप्रा-पत कके सप्रार पस्तकत शपर-पत मम कहिप्रा गयप्रा हिहै वक पप्रारर्थी वनदर्दोष हिहै और उसकप्रा ककोई आपरप्राधधिक इवतहिप्रास नहिहीं हिहै। 9. वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा नके पप्राररनप्रा -पत कप्रा वविरकोधि करतके हिहए कहिप्रा वक वविविकेचिनप्रा मम आरकोपधों ककी पकवष्टि हिहई हिहै अततः पप्रारर्थी जमप्रानत पर ररहिप्रा वकयके जप्रानके यकोग्य नहिहीं हिहै। 10. उपरकोक तथ्यधों कको दृवष्टिगत रखतके हिहए , जबवक घटनप्रा वदनप्रासंक 30.12.2024 कको वदन मम हिहई, कधरत रूप सके घटनप्रा ककी ससूचिनप्रा पकधलस कको उसश्री वदन दश्री गयश्री वकन्तक पकधलस नके वशकप्रायत मम ककोई सप्रार न पप्रातके हिहए ककोई कप्रायरविप्राहिश्री नहिहीं ककी ; परम ससूचिनप्रा ररपकोटर वदनप्रासंक 27.01.2025 कको लगभग 28 वदन कके वविलसंब सके धलखप्राई गई हिहै; पश्रीवड़ितप्रा कप्रा वचिवकत्सककीय परश्रीकण वदनप्रासंक 31.01.2025 कको हिहआ हिहै और उसकके सश्रीनके पर खरधोंचि कप्रा एक वचिह्न हिहै वकन्तक वचिवकत्सककीय परश्रीकण मम यहि असंवकत नहिहीं हिहै वक विहि चिकोट लगभग वकतनश्री पकरप्रानश्री हिको सकतश्री हिहै ; पश्रीवड़ितप्रा कके करन कके अवतररक ऐसश्री ककोई सप्रामगश्री नहिहीं हिहै जको बलप्रात्कप्रार कके आरकोपधों कको परम दृष्टियप्रा धसद्ध करके ; पप्रारर्थी कप्रा ककोई आपरप्राधधिक इवतहिप्रास नहिहीं हिहै, विहि वदनप्रासंक 09.02.2025 सके न्यप्रावयक अवभरकप्रा मम हिहै; वविविकेचिनप्रा पसूणर हिको चिकककी हिहै, न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हिहै वक पप्रारर्थी जमप्रानत पर ररहिप्रा वकयके जप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हिहै। 11. तद्नकसप्रार, जमप्रानत पप्राररनप्रा-पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जप्रातप्रा हिहै। 12. आविकेदक कक ष्णप्रा गकपप्रा कको वनम्नधलधखत शतर्दोसं कके अधिश्रीन ससंबसंधधित मधजस्टटकेट / न्यप्रायप्रालय ककी ससंतकवष्टि कके अनकसप्रार एक व्यवकगत बसंधिपत और समप्रान रप्रावश ककी दको जमप्रानतम पस्तकत करनके पर उपरकोक मप्रामलके मम जमप्रानत पर ररहिप्रा वकयप्रा जप्राए: - (i) आविकेदक अवभयकोजन सप्राक्ष्य कके सप्रार छकेड़िछप्राड़ि नहिहीं करकेगप्रा; (ii) आविकेदक अवभयकोजन पक कके गविप्राहिधों पर दबप्रावि नहिहीं डप्रालकेगप्रा; (iii) आविकेदक टटप्रायल ककोटर दप्रारप्रा तय ककी गई पत्यकेक तप्रारश्रीख पर उपसस्रत हिकोगप्रा। [Subhash Vidyarthi,J.] Order Date :- 21.5.2025 Ankit Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench