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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 140910 (ALL)

RAJENDRA KUMAR v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME DEPTT. LKO.

BAIL/4410/2025 · 2025-05-21

Subhash Vidyarthi

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:30080 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 4410 of 2025 Applicant :- Rajendra Kumar Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Deptt. Lko. Counsel for Applicant :- Ashok Kumar Singh,Ashish Kumar Tiwari Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J. 1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री अशशोक कक मप्रार धससिंह तरप्रा वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा परम शश्री रप्राजश्रीवि कक मप्रार विमप्रार्मा कशो सकनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा पररशश्रीलन वकयप्रा। 2. धिप्रारप्रा 483 भप्रारतश्रीय नप्रागररक सकरकप्रा ससिंवहतप्रा कके असिंतगर्मात पस्तकत इस पप्रारर्मानप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मककदमप्रा अपरप्राधि ससिंख्यप्रा 396 सन 2024 अन्तगर्मात धिप्रारप्रा 103(1), 3(5) बश्री०एन०एस० रप्रानप्रा असन्द्र धजलप्रा बप्रारप्राबसिंककी मम जमप्रानत ककी पप्रारर्मानप्रा ककी हहै। 3. वदनप्रासिंक 10.10.2024 कशो धलखप्राई गई परम ससूचनप्रा ररपशोरर्मा मम वशकप्रायतकतप्रार्मा नके कहप्रा वक जब उसककी पत्नश्री वदनप्रासिंक 09.10.2024 कशो रप्रात मम घर कके पश्रीछके शशौच कके धलए गयश्री रश्री, अजप्रात व्यवकययों नके उसककी हत्यप्रा कर दश्री तरप्रा उसकप्रा शवि उड़द कके एक खकेत मम खसून सके लरपर पड़प्रा वमलप्रा। 4. वविविकेचनप्रा कके दशौरप्रान एक मकखवबर सके पप्राप्त ससूचनप्रा कके आधिप्रार पर पकधलस नके पप्रारर्थी तरप्रा शविण कक मप्रार कशो वगरफ्तप्रार वकयप्रा। सह-अवभयकक शविण कक मप्रार ककी वनशप्रानदकेहश्री पर एक खकलके स्रप्रान सके एक चप्राकसू बरप्रामद हहआ। 5. धिप्रारप्रा 180 भप्रारतश्रीय नप्रागररक सकरकप्रा ससिंवहतप्रा कके असिंतगर्मात असिंवकत अपनके बयप्रान मम वशकप्रायतकतप्रार्मा नके परम ससूचनप्रा ररपशोरर्मा कके करनयों कप्रा समरर्मान वकयप्रा वकन्तक अपनके अवतररक बयप्रान मम उसनके कहप्रा वक सह -अवभयकक शविण और उसककी पत्नश्री मम अविहैधि ससिंबसिंधि रके धजसकके कप्रारण उसककी पत्नश्री ककी हत्यप्रा अवभयककगण नके ककी। ऐसप्रा हश्री बयप्रान ममृतकप्रा कके पकत एविसिं पकतश्री नके भश्री वदयप्रा। 6. पप्रारर्मानप्रा-पत कके सप्रार पस्तकत शपर-पत मम कहप्रा गयप्रा हहै वक पप्रारर्थी वनदर्दोष हहै और उसकप्रा कशोई आपरप्राधधिक इवतहप्रास नहहीं हहै। 7. वविचप्रारण न्यप्रायप्रालय नके वशकप्रायतकतप्रार्मा कप्रा बयप्रान असिंवकत कर धलयप्रा हहै तरप्रा उसनके अपनश्री मकख्य परश्रीकप्रा मम पप्रारर्थी कके बप्रारके मम कशोई करन नहहीं वकयप्रा तरप्रा अपनश्री पवतपरश्रीकप्रा मम अपनश्री पत्नश्री कके वकसश्री भश्री व्यवक सके अविहैधि ससिंबसिंधि हशोनके सके इसिंकप्रार वकयप्रा। 8. वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा नके पप्रारर्मानप्रा-पत कप्रा वविरशोधि करतके हहए कहप्रा वक सह - अवभयकक ककी वनशप्रानदकेहश्री सके बरप्रामद चप्राकसू कप्रा वविधधि वविजप्रान पयशोगशप्रालप्रा मम परश्रीकण हहआ और चप्राकसू पर मप्रानवि रक पप्रायप्रा गयप्रा। 9. उपरशोक तथ्ययों कशो दृवष्टिगत रखतके हहए, जबवक परम ससूचनप्रा ररपशोरर्मा अजप्रात व्यवकययों कके वविरुद्ध धलखप्राई गई हहै; घरनप्रा कप्रा कशोई चश्मदश्रीद सप्राकश्री नहहीं हहै ; पप्रारर्थी कशो मप्रात मकखवबर सके पप्राप्त ससूचनप्रा कके आधिप्रार पर वगरफ्तप्रार वकयप्रा गयप्रा हहै ; पप्रारर्थी सके कशोई भश्री आपधत्तिजनक विस्तक बरप्रामद नहहीं हहई हहै तरप्रा यद्यवप वविविकेचक कशो वदयके गयके बयप्रानयों मम कक छ व्यवकययों नम ममृतकप्रा कप्रा सह-अवभयकक सके अविहैधि ससिंबसिंधि हशोनके कप्रा करन वकयप्रा रप्रा , न्यप्रायप्रालय मम वदयके गयके बयप्रान मम वशकप्रायतकतप्रार्मा नके इससके स्पष्टि अस्विश्रीकप्रार वकयप्रा हहै तरप्रा इस बयप्रान मम उसनके पप्रारर्थी कके वविरुद्ध कशोई करन नहहीं वकयप्रा हहै ; पप्रारर्थी कप्रा कशोई आपरप्राधधिक इवतहप्रास नहहीं हहै विह वदनप्रासिंक 17.10.2024 सके न्यप्रावयक अवभरकप्रा मम हहै, न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हहै वक पप्रारर्थी जमप्रानत पर ररहप्रा वकयके जप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हहै। 10. तद्नकसप्रार, जमप्रानत पप्रारर्मानप्रा-पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जप्रातप्रा हहै। 11. आविकेदक रप्राजकेन्द्र कक मप्रार कशो वनम्नधलधखत शतर्दोसिं कके अधिश्रीन ससिंबसिंधधित मधजस्रटकेर / न्यप्रायप्रालय ककी ससिंतकवष्टि कके अनकसप्रार एक व्यवकगत बसिंधिपत और समप्रान रप्रावश ककी दशो जमप्रानतम पस्तकत करनके पर उपरशोक मप्रामलके मम जमप्रानत पर ररहप्रा वकयप्रा जप्राए: - (i) आविकेदक अवभयशोजन सप्राक्ष्य कके सप्रार छकेड़छप्राड़ नहहीं करकेगप्रा; (ii) आविकेदक अवभयशोजन पक कके गविप्राहयों पर दबप्रावि नहहीं डप्रालकेगप्रा; (iii) आविकेदक रटप्रायल कशोरर्मा दप्रारप्रा तय ककी गई पत्यकेक तप्रारश्रीख पर उपसस्रत हशोगप्रा। [Subhash Vidyarthi,J.] Order Date :- 21.5.2025 Ankit Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench