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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 139890 (ALL)
Ashok v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME DEPARTMENT, LUCKNOW AND ANOTHER
ABAIL/521/2025 · 2025-05-15
Subhash Vidyarthi
body2025
[ 2025 DAILYLAW 139890 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:28367 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 438 CR.P.C. No. - 521 of 2025 Applicant :- Ashok Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Department, Lucknow And Another Counsel for Applicant :- Ashok Kumar,Chandra Prakash Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J.
1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री अशशोक कक मप्रार तरप्रा वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा परम शश्री रप्राजश्रीवि कक मप्रार विमप्रार्मा कशो सकनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा अविलशोकन वकयप्रा।
2. धिप्रारप्रा 438 ददं०प०सदं० दप्रारप्रा पस्तकत पप्रारर्मानप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मककदमप्रा अपरप्राधि सदंख्यप्रा 143 सन 2025 अन्तरर्मात धिप्रारप्रा 108 भप्रा०द०ववि० रप्रानप्रा खमररयप्रा धजलप्रा लखश्रीमपकर खश्रीरश्री मम अवग्रिम जमप्रानत ककी पप्रारर्मानप्रा ककी हहै।
3. वदनप्रादंक 06.04.2025 कशो पप्रारर्थी, उसककी पत्नश्री तरप्रा पकत वविवपन भप्रारर्मावि कके वविरुद धलखप्राई रई परम ससूचनप्रा ररपशोरर्मा मम वशकप्रायतकतप्रार्मा नके कहप्रा वक उसनके अपनश्री 18 विरर्थीयप्रा पकतश्री कप्रा वविविप्राह वदनप्रादंक 11.05.2025 कशो करनप्रा तय वकयप्रा रप्रा वकन्तक पप्रारर्थी कप्रा पकत सह-अवभयकक वविवपन भप्रारर्मावि आए वदन वशकप्रायतकतप्रार्मा ककी पकतश्री कशो परकेशप्रान करतप्रा रप्रा धजससके तदंर आकर उसनके वदनप्रादंक 06.04.2025 ककी सकबह करश्रीब 2 बजके जहर खप्राकर आत्महत्यप्रा कर लश्री। परम ससूचनप्रा मम यह भश्री कहप्रा रयप्रा हहै वक पप्रारर्थी कके पकत कके आचरण ककी वशकप्रायत वशकप्रायतकतप्रार्मा नके पप्रारर्थी एविदं उसककी पत्नश्री सके वकयप्रा रप्रा परन्तक वफिर भश्री उन्हहोंनके अपनके पकत कशो बढप्राविप्रा वदयप्रा।
4. पप्रारर्मानप्रा-पत कके पस्तकत शपर-पत मम कहप्रा रयप्रा हहै वक वदनप्रादंक 03.04.2025 कशो वशकप्रायतकतप्रार्मा ककी पकतश्री नके पकधलस कशो एक पप्रारर्मानप्रा -पत दकेकर कहप्रा रप्रा वक उसककी आयक 17 विरर्मा 6 मप्राह हहै, विह अवियस्क हहै तरप्रा उसककी मजर्थी कके वविरुद उसकके मप्रातप्रा -वपतप्रा अन्यत उसककी शप्रादश्री करनप्रा चप्राह रहके हह। वविरशोधि करनके पर उसकशो मप्रारप्रा -वपतप्रा वि डरप्रायप्रा धिमकप्रायप्रा जप्रा रहप्रा हहै। पश्रीवड़ितप्रा नके कहप्रा वक विह शप्रादश्री नहहीं करनप्रा चप्राहतश्री हहै , विह पढप्राई करनप्रा चप्राहतश्री हहै तरप्रा 18 विरर्मा ककी आयक हशोनके कके पश्चप्रात अपनश्री मजर्थी सके शप्रादश्री करकेरश्री वकन्तक उसकके मप्रातप्रा-वपतप्रा उसकशो धिमकप्रा रहके हह वक शप्रादश्री कके धलए हप्राहाँ कर दके अन्यरप्रा उसकशो जप्रान सके मप्रार दमरके।
5. शवि वविच्छकेदन आख्यप्रा मम शवि पर चशोर कप्रा कशोई वचह्न नहहीं पप्रायप्रा रयप्रा तरप्रा वविसरप्रा परश्रीक्षण जप्रादंच आख्यप्रा अभश्री पप्राप्त नहहीं हहई हहै।
6. पप्रारर्मानप्रा-पत कके सप्रार पस्तकत शपर-पत मम कहप्रा रयप्रा वक पप्रारर्थी वनदर्दोर हहै और उसकप्रा कशोई आपरप्राधधिक इवतहप्रास नहहीं हहै।
7.
एक पसूरक शपर-पत कके मप्राध्यम सके धिप्रारप्रा 138 भप्रारतश्रीय वविदकत अधधिवनयम कके पकरण मम पप्रारर्थी ककी सदंधलप्ततप्रा दशप्रार्मायश्री रयश्री हहै, धजसमम पप्रारर्थी नके शमन शकल्क वि अरर्मादण्ड जमप्रा कर वदयप्रा हहै।
8. पप्रारर्मानप्रा-पत कप्रा वविरशोधि करतके हहए वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा परम नके कहप्रा वक वविविकेचनप्रा अभश्री पचधलत हहै तरप्रा पप्रारर्थी वविविकेचनप्रा मम सहयशोर नहहीं कर रहप्रा हहै।
9. उपरशोक तथ्यहों क दृवष्टिरत रखतके हहए,जबवक पश्रीवड़ितप्रा नके स्वियदं हश्री पकधलस कशो पप्रारर्मानप्रा- पत दकेकर यह कहप्रा रप्रा वक विह अवियस्क हहै एविदं उसकके मप्रातप्रा -वपतप्रा उसककी इच्छप्रा कके वविरुद बलपसूविर्माक उसकप्रा वविविप्राह करप्रा रहके हह एविदं वविविप्राह कके धलए रप्राजश्री न हशोनके ककी सस्रवत मम मप्रारनके ककी धिमककी दके रहके हह ; परम ससूचनप्रा ररपशोरर्मा मम पप्रारर्थी कके पकत दप्रारप्रा पश्रीवड़ितप्रा कशो परकेशप्रान वकयप्रा जप्रानप्रा कहप्रा रयप्रा हहै तरप्रा पप्रारर्थी नके पश्रीवड़ितप्रा सके कशोई भश्री बप्रात कहश्री हशो ऐसप्रा करन नहहीं हहै, न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हहै वक पप्रारर्थी अवग्रिम जमप्रानत पप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हहै।
10.
उपरशोक मककदमप्रा अपरप्राधि सदंख्यप्रा मम आविकेदक ककी वररफ्तप्रारश्री /न्यप्रायप्रालय कके समक्ष उपसस्रवत ककी दशप्रा मम , उसके सदंबदंधधित रप्रानके कके भप्रारसप्राधिक अधधिकप्रारश्री /न्यप्रायप्रालय ककी सदंतकवष्टि कके अनकसप्रार व्यवकरत बदंधि पत एविदं दशो पवतभसू पस्तकत करनके पर परश्रीक्षण कके अदंवतम रूप सके वनस्तप्रारण तक, वनम्न शतर्दोदं कके अधिश्रीन अवग्रिम जमप्रानत पर ररहप्रा वकयप्रा जप्राएरप्राग- क- आविकेदक, यवद आविश्यक हशोरप्रा तशो पकधलस अधधिकप्रारश्री दप्रारप्रा जजॉच हकेतक अपकेवक्षत समय पर उपसस्रत हशोरप्रा; ख- आविकेदक मप्रामलके कके तथ्यहों सके पररवचत वकसश्री व्यवक यप्रा पकधलस अधधिकप्राररयहों कशो पत्यक्ष यप्रा परशोक्ष रूप सके कशोई धिमककी , विप्रादप्रा यप्रा पलशोभन नहहीं दकेरप्रा धजससके वक विह ऐसके तथ्य कशो न्यप्रायप्रालय कके समक्ष यप्रा वकसश्री पकधलस अधधिकप्रारश्री कके समक्ष पकर न करनके पर मप्रान जप्राए; र- आविकेदक अदप्रालत ककी पसूविर्मा अनकमवत कके वबनप्रा भप्रारत नहहीं छशोड़िकेरप्रा; घ- आविकेदक कशो पत्यकेक वनधिप्रार्माररत वतधर पर रटप्रायल कशोरर्मा कके समक्ष उपसस्रत हशोनप्रा हशोरप्रा, जब तक वक व्यवकरत उपसस्रवत सके छसू र न दश्री रयश्री हशो;
ङ- आविकेदक अवभयशोजन पक्ष कके रविप्राह पर दबप्रावि नहहीं डप्रालकेरप्रा / धिमककी नहहीं दकेरप्रा; च- आविकेदक वविविकेचनप्रा एविदं वविचप्रारण कके ददौरप्रान सहयशोर करमरके और जमप्रानत ककी स्वितदंततप्रा कप्रा दकरुपयशोर नहहीं करकेरप्रा। [Subhash Vidyarthi,J.] Order Date :- 15.5.2025 Ankit Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench