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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 139836 (ALL)

RAJU RAJPOOT v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME DEPTT. LKO.

BAIL/4149/2025 · 2025-05-15

Subhash Vidyarthi

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:28586 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 4149 of 2025 Applicant :- Raju Rajpoot Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Deptt. Lko. Counsel for Applicant :- Kaushal Kishore Tewari,Shakti Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J. 1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री ककौशल वकशशोर वतिविप्रारश्री तिरप्रा वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा शश्री अंशशुमप्रान विमप्रार्मा कशो सशुनप्रा तिरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा पररशश्रीलन वकयप्रा। 2. धिप्रारप्रा 483 भप्रारतिश्रीय नप्रागररक सशुरकप्रा सअंवहितिप्रा कके अंतिगर्माति पस्तिशुति इस पप्रारर्मानप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मशुकदमप्रा अपरप्राधि सअंख्यप्रा 93 सन 2025 अन्तिगर्माति धिप्रारप्रा 69, 115(2), 351(2) बश्री०एन०एस० रप्रानप्रा वनघप्रासन धजिलप्रा लखश्रीमपशुर खश्रीरश्री मम जिमप्रानति ककी पप्रारर्मानप्रा ककी हिहै। 3. वदनप्राअंक 17.04.2025 पप्रारर्थी तिरप्रा उसकके फशु फके रके भप्राई आवदत्य कके वविरुद्ध धलखप्राई गई परम ससूचनप्रा ररपशोरर्मा मम वशकप्रायतिकतिर्थी नके कहिप्रा वक उसककी आयशु 19 विरर्मा हिहै, जिब विहि ककप्रा 10 मम पढ़तिश्री रश्री तिब उसककी मशुलप्राकप्राति पप्रारर्थी सके हिहई जिशो विनरकक कके पद पर कप्रायर्मारति रप्रा तिरप्रा दशोननों मम आपस मम फशोन पर बप्रातिचश्रीति हिशोनके लगश्री तिरप्रा दशोननों आपस मम वमलनके भश्री लगके। वशकप्रायतिकतिर्थी नके शप्रादश्री कप्रा झप्राअंसप्रा दकेकर पप्रारर्थी दप्रारप्रा उसकके सप्रार कई बप्रार शप्रारश्रीररक सअंबअंधि बनप्रानके कप्रा करन वकयप्रा गयप्रा तिरप्रा यहि कहिप्रा वक उसकके बप्राद पप्रारर्थी नके शप्रादश्री करनके सके मनप्रा कर वदयप्रा। 4. धिप्रारप्रा 180 भप्रारतिश्रीय नप्रागररक सशुरकप्रा सअंवहितिप्रा कके अंतिगर्माति अंवकति अपनके बयप्रान मम भश्री पश्रीवड़ितिप्रा नके ऐसप्रा हिश्री करन वकयप्रा हिहै। 5. वचकत्सककीय परश्रीकण ररपशोरर्मा मम पश्रीवड़ितिप्रा कके शरश्रीर पर कशोई चशोर अरविप्रा बल पयशोग कप्रा कशोई वचह्न नहिहीं पप्रायप्रा गयप्रा। वचवकत्सककीय परश्रीकण मम यकौन अपरप्राधि कके वविविरण कके सअंबअंधधिति सभश्री पश्ननों कके उत्तर मम पश्रीवड़ितिप्रा नके नकप्रारप्रात्मक उत्तर वदयप्रा हिहै। 6. धिप्रारप्रा 183 भप्रारतिश्रीय नप्रागररक सशुरकप्रा सअंवहितिप्रा कके अंतिगर्माति अंवकति अपनके बयप्रान मम विरर्मा 2022 मम पप्रारर्थी दप्रारप्रा उसकशो अपनके गप्राअंवि मम घशुमप्रानके कके बहिप्रानके लके जिप्राकर शप्रारश्रीररक सअंबअंधि बनप्रानके कप्रा आरशोप लगप्रायप्रा हिहै तिरप्रा उसकके पश्चप्राति ऐसप्रा तिश्रीन बप्रार करनके कप्रा करन वकयप्रा एविअं अंतितितः पप्रारर्थी दप्रारप्रा शप्रादश्री करनके सके मनप्रा करनके कप्रा करन वकयप्रा। 7. पप्रारर्मानप्रा-पत कके सप्रार पस्तिशुति शपर-पत मम कहिप्रा गयप्रा हिहै वक पप्रारर्थी वनदर्दोर हिहै और उसकप्रा कशोई आपरप्राधधिक इवतिहिप्रास नहिहीं हिहै। 8. वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा नके पप्रारर्मानप्रा -पत कप्रा वविरशोधि करतिके हिहए कहिप्रा वक वविविकेचनप्रा मम आरशोपनों ककी पशुवष्टि हिहई हिहै तिरप्रा आरशोप-पत वदनप्राअंक 12.05.2025 कशो पस्तिशुति वकयप्रा जिप्रा चशुकप्रा हिहै। 9. उपरशोक तिथ्यनों कशो दृवष्टिगति रखतिके हिहए, जिबवक पश्रीवड़ितिप्रा नके स्वियअं कशो बप्राधलग हिशोनप्रा कहिप्रा हिहै तिरप्रा पप्रारर्थी कके सप्रार एक लअंबके समय तिक सअंबअंधि हिशोनप्रा एविअं शप्रारश्रीररक सअंबअंधि बनप्रानके कप्रा करन वकयप्रा हिहै; ऐसश्री कशोई सप्रामगश्री पकप्राश मम नहिहीं आयश्री हिहै धजिससके परम दृष्टियप्रा यहि पतिश्रीति हिशो वक पप्रारर्थी कप्रा आशय पप्रारअंभ सके हिश्री वशकप्रायतिकतिर्थी कशो धिशोखप्रा दकेनके कप्रा रप्रा ; पप्रारर्थी एक सरकप्रारश्री कमर्माचप्रारश्री हिहै धजिसकप्रा कशोई आपरप्राधधिक इवतिहिप्रास नहिहीं हिहै विहि वदनप्राअंक 18.04.2025 सके न्यप्रावयक अवभरकप्रा मम हिहै ; वविविकेचनप्रा पसूणर्मा हिशो चशुककी हिहै , न्यप्रायप्रालय कप्रा मति हिहै वक पप्रारर्थी जिमप्रानति पर ररहिप्रा वकयके जिप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हिहै। 10. तिद्नशुसप्रार, जिमप्रानति पप्रारर्मानप्रा-पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जिप्रातिप्रा हिहै। 11. आविकेदक रप्राजिसू रप्राजिपसूति कशो वनम्नधलधखति शतिर्दोअं कके अधिश्रीन सअंबअंधधिति मधजिस्रटकेर / न्यप्रायप्रालय ककी सअंतिशुवष्टि कके अनशुसप्रार एक व्यवकगति बअंधिपत और समप्रान रप्रावश ककी दशो जिमप्रानतिम पस्तिशुति करनके पर उपरशोक मप्रामलके मम जिमप्रानति पर ररहिप्रा वकयप्रा जिप्राए: - (i) आविकेदक अवभयशोजिन सप्राक्ष्य कके सप्रार छकेड़िछप्राड़ि नहिहीं करकेगप्रा; (ii) आविकेदक अवभयशोजिन पक कके गविप्राहिनों पर दबप्रावि नहिहीं डप्रालकेगप्रा; (iii) आविकेदक रटप्रायल कशोरर्मा दप्रारप्रा तिय ककी गई पत्यकेक तिप्रारश्रीख पर उपसस्रति हिशोगप्रा। [Subhash Vidyarthi,J.] Order Date :- 15.5.2025 Ankit Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench