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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 139810 (ALL)

RAM PRATAP v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME LKO.

BAIL/4173/2025 · 2025-05-15

Subhash Vidyarthi

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:28681 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 4173 of 2025 Applicant :- Ram Pratap Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Lko. Counsel for Applicant :- Sudhaker Prakash Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J. 1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा नके एक पपूरक शपर पत्र पस्ततुत वकयप्रा , धजिसके अवभिलकेख पर धलयप्रा जिप्रातप्रा हहै। 2. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री सतुधिप्राकर पकप्राश तरप्रा वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा परम शश्री आललोक कतु मप्रार वतविप्रारश्री कलो सतुनप्रा तरप्रा पत्रप्राविलश्री कप्रा अविललोकन वकयप्रा। 3. धिप्रारप्रा 483 भिप्रारतश्रीय नप्रागररक सतुरकप्रा ससंवहतप्रा (B.N.S.S.) मम पस्ततुत इस पप्राररनप्रा-पत्र दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मतुकदमप्रा अपरप्राधि ससंख्यप्रा 25 सन 2025, अन्तगरत धिप्रारप्रा 80(2), 85, 115 (2) बश्री०एन०एस एविसं 3/4 दहकेजि पवतषकेधि अधधिवनयम, रप्रानप्रा-रप्रानगप्रासंवि, धजिलप्रा-सश्रीतप्रापतुर मम जिमप्रानत ककी पप्राररनप्रा ककी हहै। 4. वदनप्रासंक 22.02.2025 कलो पप्रारर्थी तरप्रा उसकके भिप्राई वि मप्रासं कके वविरुद्ध धलखप्राई गई परम सपूचनप्रा ररपलोरर मम कहप्रा गयप्रा हहै वक वशकप्रायतकतप्रार नके अपनश्री पतुत्रश्री कप्रा वविविप्राह पप्रारर्थी कके भिप्राई सह-अवभियतुक रप्रामस्विरूप कके सप्रार लगभिग चप्रार विषर पपूविर वकयप्रा रप्रा, सभिश्री अवभियतुकगण उसके दहकेजि कके धलए पतप्रावड़ित करतके रके तरप्रा वदनप्रासंक 22.02.2025 कलो उसककी ममृत्यतु ककी सपूचनप्रा वमलश्री। 5. शवि वविच्छकेदन आख्यप्रा मम गलके कके चप्राररों ओर लरकनके कप्रा वचन्ह , धजिसमम दप्रावहनश्री ओर 6.5 सके.मश्री. कप्रा ररक स्रप्रान रप्रा, बतप्रायप्रा गयप्रा तरप्रा ममृत्यतु कप्रा कप्रारण लरकनके कके कप्रारण दम घतुरनप्रा बतप्रायप्रा गयप्रा। 6. पप्राररनप्रा पत्र कके सप्रार पस्ततुत शपर पत्र मम कहप्रा गयप्रा हहै वक पप्रारर्थी एक 23 विषर्थीय वनदर्दोष नवियतुविक हहै, धजिसकप्रा कलोई आपरप्राधधिक इवतहप्रास नहहीं हहै। 7. एक पपूरक शपर पत्र कके मप्राध्यम सके पसंचप्रायतनप्रामप्रा तरप्रा वविविकेचक दप्रारप्रा असंवकत वकए गए बयप्रानरों ककी पवतयप्रासं पस्ततुत ककी गई हह। बयप्रानरों मम कहप्रा गयप्रा हहै वक पश्रीवड़ितप्रा वदनप्रासंक 22.02.2025 कलो दलोपहर समय लगभिग 2 बजिके खकेतरों ककी तरफ शशौच करनके गई रश्री तरप्रा लगभिग 2:30 बजिके गप्रागाँवि मम हलप्रा मचप्रा वक उसनके खकेत मम लगके आम कके पकेड़ि मम फप्रासंसश्री लगप्रा लश्री। 8. इस न्यप्रायप्रालय दप्रारप्रा एक अन्य सह-अवभियतुकप्रा रश्रीतप्रा कलो जिमप्रानत पप्राररनप्रा-पत्र ससंख्यप्रा 3966 सन 2025 दप्रारप्रा वदनप्रासंक 08.05.2025 कलो वनयवमत जिमप्रानत पदप्रान ककी जिप्रा चतुककी हहै। 9. वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा नके पप्राररनप्रा पत्र कप्रा वविरलोधि करतके हहए कहप्रा वक वविविकेचनप्रा मम पप्रारर्थी कके वविरुद्ध आरलोपरों ककी पतुवष्टि हहई हहै और वदनप्रासंक 30.03.2025 कलो आरलोप पत्र पस्ततुत वकयप्रा जिप्रा चतुकप्रा हहै। वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा नके यह भिश्री सपूवचत वकयप्रा वक जिप्रागाँच कके धलए वविसरप्रा सतुरवकत रखप्रा गयप्रा हहै, धजिसककी जिप्रागाँच ररपलोरर अभिश्री तक नहहीं आई हहै। 10. उपरलोक तथ्यरों कके दृवष्टिगत, जिबवक पश्रीवड़ितप्रा नके अपनके वविविप्राह कके चप्रार विषर पश्चप्रात घर सके बप्राहर एक खकेत मम लगके आम कके पकेड़ि मम फप्रासंसश्री लगप्राकर आत्महत्यप्रा कर लश्री तरप्रा शवि पर लरकनके कके अवतररक चलोर कप्रा कलोई वचन्ह नहहीं रप्रा ; परम सपूचनप्रा ररपलोरर मम सप्रामप्रान्य पकमृ वत कके आरलोप लगप्राए गए हह तरप्रा पप्रारर्थी कके वविरुद्ध कलोई वविशकेष करन नहहीं वकयप्रा गयप्रा हहै, पप्रारर्थी एक 23 विषर्थीय नवियतुविक हहै धजिसकप्रा कलोई आपरप्राधधिक इवतहप्रास नहहीं हहै विह वदनप्रासंक 23.02.2025 सके जिकेल मम वनरुद्ध हहै तरप्रा एक सह -अवभियतुक कलो जिमप्रानत दश्री जिप्रा चतुककी हहै; वविविकेचनप्रा पपूणर हलो चतुककी हहै, न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हहै वक पप्रारर्थी भिश्री जिमप्रानत पर ररहप्रा वकए जिप्रानके ककी अधधिकप्रारश्री हहै। 11. तदनतुसप्रार, जिमप्रानत पप्राररनप्रा-पत्र स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जिप्रातप्रा हहै। 12. आविकेदक रप्राम पतप्राप कलो वनम्नधलधखत शतर्दोसं कके अधिश्रीन ससंबसंधधित मधजिस्रटकेर / न्यप्रायप्रालय ककी ससंततुवष्टि कके अनतुसप्रार एक व्यवकगत बसंधिपत्र और समप्रान रप्रावश ककी दलो जिमप्रानतम पस्ततुत करनके पर उपरलोक मप्रामलके मम जिमप्रानत पर ररहप्रा वकयप्रा जिप्राए: - (i) आविकेदक अवभियलोजिन सप्राक्ष्य कके सप्रार छकेड़िछप्राड़ि नहहीं करकेगप्रा; (ii) आविकेदक अवभियलोजिन पक कके गविप्राहरों पर दबप्रावि नहहीं डप्रालकेगप्रा; (iii) आविकेदक रटप्रायल कलोरर दप्रारप्रा तय ककी गई पत्यकेक तप्रारश्रीख पर उपसस्रत हलोगप्रा। [Subhash Vidyarthi,J.] Order Date :- 15.5.2025/Ankit Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench