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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 139786 (ALL)

PUNEET KASHYAP @ ABHISHEK KASHYAP v. STATE OF U.P.

BAIL/4156/2025 · 2025-05-15

Subhash Vidyarthi

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:28650 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 4156 of 2025 Applicant :- Puneet Kashyap @ Abhishek Kashyap Opposite Party :- State of U.P. Counsel for Applicant :- Gyan Prakash Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J. 1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री जप्रान पकप्राश तरप्रा वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा परम शश्री अननुरप्राग विमप्रार्मा कको सनुनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा पररशश्रीलन वकयप्रा। 2. धिप्रारप्रा 483 भप्रारतश्रीय नप्रागररक सनुरकप्रा ससंवहितप्रा कके असंतगर्मात पस्तनुत इस पप्रारर्मानप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मनुकदमप्रा अपरप्राधि ससंख्यप्रा 042 सन 2025 अन्तगर्मात धिप्रारप्रा 105, 308(2), 115(2), 352, 351(2) बश्री०एन०एस० रप्रानप्रा वविकप्रासनगर धजिलप्रा लखनऊ मम जिमप्रानत ककी पप्रारर्मानप्रा ककी हिहै। 3. वदनप्रासंक 12.03.2025 कको समय 23:30 बजिके पप्रारर्थी तरप्रा चप्रासंदबप्राबबू कके वविरुद धलखप्राई गई परम सबूचनप्रा ररपकोरर्मा मम वशकप्रायतकतर्थी नके कहिप्रा गयप्रा हिहै वक वदनप्रासंक 12.03.2025 कको दकोपहिर एक बजिके अवभयनुकगण हिकोधलकप्रा दहिन कप्रा चसंदप्रा मप्रासंगतके हिहए उसकके पवत कके सप्रार गप्रालश्री -गललौजि और झगडप्रा करनके तरप्रा दकोननों नके वमलकर सर पर वकसश्री धिप्रारदप्रार हिधरयप्रार सके विप्रार कर वदयप्रा धजिससके उसकके पवत जिमश्रीन पर वगर गयके। जिब विहि बचप्रानके कके धलए पहिहसंचश्री तको उसकके कपडके फप्राड वदयके और हिप्रार मकोडकर जिमश्रीन पर धिक्कप्रा दके वदयप्रा। 4. घरनप्रा कके बप्राद पश्रीवडत पक ररपकोरर्मा धलखविप्रानके रप्रानके गयके तरप्रा उसकके बप्राद वशकप्रायतकतर्थी ककी पवत तवबयत वबगडनके पर उन्हिम अस्पतप्राल लके जिप्रायप्रा गयप्रा एविसं दबूसरके अस्पतप्राल लके जिप्रातके समय वशकप्रायतकतर्थी कके पवत नके दम तकोड वदयप्रा। 5. पसंचप्रायतनप्रामके ककी कप्रायर्माविप्राहिश्री कके गविप्राहिनों नके कहिप्रा वक वशकप्रायतकतर्थी कके पवत ककी ममृत्यनु वविविप्राद कके बप्राद अचप्रानक तवबयत वबगडनके पर इलप्राजि कके दलौरप्रान हिकोनप्रा पतश्रीत हिको रहिश्री हिहै। 6. शवि वविच्छकेदन आख्यप्रा मम शरश्रीर पर चकोर कप्रा ककोई वचह्न नहिहीं पप्राप्त हिहआ तरप्रा ममृत्यनु कप्रा कप्रारण सनुवनशशचत नहिहीं वकयप्रा जिप्रा सकप्रा। यद्यवप जिप्रासंच हिकेतनु वविसरप्रा भकेजिप्रा गयप्रा रप्रा वकन्तनु जिप्रासंच नमबूनप्रा कम मप्रातप्रा ककी फप्रामप्रार्मालश्रीन मम ससंरवकत वकयके जिप्रानके कके कप्रारण जिप्रासंच ससंभवि नहिहीं हिको सककी। 7. पप्रारर्मानप्रा-पत कके सप्रार पस्तनुत शपर-पत मम कहिप्रा गयप्रा हिहै वक पप्रारर्थी वनदर्दोष हिहै और उसकप्रा ककोई आपरप्राधधिक इवतहिप्रास नहिहीं हिहै। 8. वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा नके पप्रारर्मानप्रा -पत कप्रा वविरकोधि करतके हिहए कहिप्रा वक वविविकेचक नके वशकप्रायतकतर्थी कप्रा वचवकत्सककीय परश्रीकण करनके विप्रालके वचवकत्सक कप्रा बयप्रान असंवकत वकयप्रा हिहै धजिन्हिनोंनके कहिप्रा वक वशकप्रायतकतर्थी कके वचवकत्सककीय परश्रीकण मम बप्रायम हिप्रार पर लप्राधलमप्रा पप्रायश्री गयश्री रश्री। उन्हिनोंनके कहिप्रा पकरण मम वविविकेचनप्रा अभश्री पचधलत हिहै। 9. उपरकोक तथ्यनों कको दृवष्टिगत रखतके हिहए, जिबवक वशकप्रायतकतर्थी नके दकोननों अवभयनुकनों दप्रारप्रा धिप्रारदप्रार हिधरयप्रार सके विप्रार वकयके जिप्रानके कप्रा करन वकयप्रा; पसंचप्रायतनप्रामके कके गविप्राहिनों नके वविविप्राद कके उपरप्रान्त तवबयत वबगडनके पर अस्पतप्राल लके जिप्रानप्रा एविसं इलप्राजि कके दलौरप्रान वशकप्रायतकतर्थी कके पवत ककी ममृत्यनु हिको जिप्रानके कप्रा करन वकयप्रा एविसं शवि वविच्छकेदन आख्यप्रा मम ककोई भश्री चकोर नहिहीं पप्रायश्री गयश्री हिहै;वचवकत्सककीय परश्रीकण मम पश्रीवडतप्रा कके बप्रायम हिप्रार पर मप्रात लप्राधलमप्रा पप्रायश्री गयश्री जिको सप्राधिप्रारण पकमृ वत कको चकोर रश्री ; पप्रारर्थी कप्रा ककोई आपरप्राधधिक इवतहिप्रास नहिहीं हिहै विहि वदनप्रासंक 13.03.2025 सके न्यप्रावयक अवभरकप्रा मम हिहै; वविविकेचनप्रा पबूणर्मा हिको चनुककी हिहै, न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हिहै वक पप्रारर्थी जिमप्रानत पर ररहिप्रा वकयके जिप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हिहै। 10. तद्ननुसप्रार, जिमप्रानत पप्रारर्मानप्रा-पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जिप्रातप्रा हिहै। 11. आविकेदक पनुनश्रीत कशयप उफर्मा अवभषकेक कशयप कको वनम्नधलधखत शतर्दोसं कके अधिश्रीन ससंबसंधधित मधजिस्रटकेर / न्यप्रायप्रालय ककी ससंतनुवष्टि कके अननुसप्रार एक व्यवकगत बसंधिपत और समप्रान रप्रावश ककी दको जिमप्रानतम पस्तनुत करनके पर उपरकोक मप्रामलके मम जिमप्रानत पर ररहिप्रा वकयप्रा जिप्राए: - (i) आविकेदक अवभयकोजिन सप्राक्ष्य कके सप्रार छकेडछप्राड नहिहीं करकेगप्रा; (ii) आविकेदक अवभयकोजिन पक कके गविप्राहिनों पर दबप्रावि नहिहीं डप्रालकेगप्रा; (iii) आविकेदक रटप्रायल ककोरर्मा दप्रारप्रा तय ककी गई पत्यकेक तप्रारश्रीख पर उपशस्रत हिकोगप्रा। [Subhash Vidyarthi,J.] Order Date :- 15.5.2025 Ankit Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench