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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 139504 (ALL)
VIJAYBHAN v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME LKO.
BAIL/4063/2025 · 2025-05-12
Subhash Vidyarthi
body2025
[ 2025 DAILYLAW 139504 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:27664 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 4063 of 2025 Applicant :- Vijaybhan Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Lko. Counsel for Applicant :- Vishal Tripathi,Jyoti Tripathi,Satyarth Mishra Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J.
1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री वविशप्राल वत्रिपप्राठश्री तरप्रा वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा शश्री रववि शश्रीविप्रास्तवि कको ससुनप्रा तरप्रा पत्रिप्राविलश्री कप्रा पररशश्रीलन वकयप्रा।
2. धिप्रारप्रा 483 भप्रारतश्रीय नप्रागररक ससुरकप्रा ससंवहितप्रा कके असंतगरत पस्तसुत इस पप्राररनप्रा-पत्रि दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मसुकदमप्रा अपरप्राधि ससंख्यप्रा 30 सन 2025 अन्तगरत धिप्रारप्रा 64(1), 333, 351(3) बश्री०एन०एस० रप्रानप्रा महिरुआ धजिलप्रा अम्बकेडकरनगर मम जिमप्रानत ककी पप्राररनप्रा ककी हिहै।
3. वदनप्रासंक 03.03.2025 कको धलखप्राई गई परम ससूचनप्रा ररपकोरर मम यहि कहिप्रा गयप्रा हिहै वक रप्रात 02:30 बजिके पप्रारर्थी नके वशकप्रायतकतप्रार कके घर मम घसुसकर वशकप्रायतकतप्रार ककी 20 विरर्थीयप्रा पसुत्रिश्री कके सप्रार अश्लश्रील हिरकतम ककी। वशकप्रायतकतप्रार ककी लड़ककी कके शकोर मचप्रानके पर घर कके लकोग उठकर आयके और पप्रारर्थी कको पकड़ धलयप्रा वकन्तसु पप्रारर्थी झरकके सके अपनके कको छसु ड़प्राकर जिप्रान सके मप्रारनके ककी धिमककी दकेतके हिहए भप्राग गयप्रा।
4. धिप्रारप्रा 180 भप्रारतश्रीय नप्रागररक ससुरकप्रा ससंवहितप्रा कके असंतगरत असंवकत अपनके बयप्रान मम पश्रीवड़तप्रा नके रप्रात 02:30 बजिके उसकके घर मम घसुसकर पप्रारर्थी दप्रारप्रा उसकके सप्रार बदतमश्रीजिश्री करनके ककी ककोवशश कप्रा करन वकयप्रा तरप्रा उसकके दप्रारप्रा शकोर मचप्रानके पर उसकके घरविप्राललों कप्रा आनप्रा एविसं पप्रारर्थी कप्रा पकड़ धलयप्रा जिप्रानप्रा एविसं पप्रारर्थी कको मप्रारप्रा जिप्रानप्रा कहिप्रा गयप्रा। पश्रीवड़तप्रा नके कहिप्रा वक इसकके बप्राद पप्रारर्थी कके घरविप्रालके आयके और उसके विप्रापस अपनके घर लके गयके।
5. पश्रीवड़तप्रा नके अपनप्रा आसंतररक वचवकत्सककीय परश्रीकण करप्रानके ककी स्विश्रीकक वत नहिहीं दश्री और बप्राह्य परश्रीकण मम उसकके शरश्रीर पर ककोई चकोर नहिहीं पप्रायश्री गयश्री।
6. धिप्रारप्रा 183 भप्रारतश्रीय नप्रागररक ससुरकप्रा ससंवहितप्रा कके असंतगरत असंवकत अपनके बयप्रान मम पश्रीवड़तप्रा नके अपनश्री आयसु 21 विरर बतप्रायश्री और पप्रारर्थी दप्रारप्रा उसकके घर मम घसुसकर उसकके सप्रार बलप्रात्कप्रार करनके कप्रा करन वकयप्रा एविसं कहिप्रा वक शकोर मचप्रानके पर जिब उसकके घरविप्रालके आयके तको पप्रारर्थी विहिप्रासं सके भप्राग गयप्रा।
7. पप्राररनप्रा-पत्रि कके सप्रार पस्तसुत शपर-पत्रि मम कहिप्रा गयप्रा हिहै वक पप्रारर्थी एक 23 विरर्थीय
वनदर्दोर नवियसुविक हिहै और उसकप्रा ककोई आपरप्राधधिक इवतहिप्रास नहिहीं हिहै।
8. एक पसूरक शपर-पत्रि कके मप्राध्यम सके यहि कहिप्रा गयप्रा हिहै वक पप्रारर्थी नके परम ससूचनप्रा ररपकोरर ककी विहैधितप्रा कको चसुननौतश्री दकेतके हिहए इस न्यप्रायप्रालय मम आपरप्राधधिक पककीणर यप्रावचकप्रा ससंख्यप्रा 2750 सन 2025 पस्तसुत ककी हिहै, जिको अभश्री लसंवबत हिहै।
9.
वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा नके पप्राररनप्रा -पत्रि कप्रा वविरकोधि करतके हिहए कहिप्रा वक वविविकेचनप्रा मम आरकोपलों ककी पसुवष्टि हिहई तरप्रा आरकोप -पत्रि वदनप्रासंक 20.04.2025 कको पस्तसुत वकयप्रा जिप्रा चसुकप्रा हिहै।
10. उपरकोक तथ्यलों कको दृवष्टिगत रखतके हिहए , जिबवक कधरत घरनप्रा वशकप्रायतकतप्रार कके घर कके असंदर ककी हिहै; पश्रीवड़तप्रा वियस्क हिहै; परम ससूचनप्रा ररपकोरर मम अश्लश्रील हिरकतम करनके कप्रा आरकोप हिहै; धिप्रारप्रा 180 भप्रारतश्रीय नप्रागररक ससुरकप्रा ससंवहितप्रा कके असंतगरत कके असंतगरत पश्रीवड़तप्रा कके बयप्रान मम बदतमश्रीजिश्री करनके ककी ककोवशश कप्रा आरकोप हिहै एविसं धिप्रारप्रा 183 भप्रारतश्रीय नप्रागररक ससुरकप्रा ससंवहितप्रा कके असंतगरत पश्रीवड़तप्रा कके बयप्रान मम बलप्रात्कप्रार करनके कप्रा आरकोप हिहै वकन्तसु पश्रीवड़तप्रा नके अपनप्रा आसंतररक परश्रीकण करप्रानके सके इसंकप्रार वकयप्रा हिहै ; पप्रारर्थी एक 23 विरर्थीय नवियसुविक हिहै, धजिसकप्रा ककोई आपरप्राधधिक इवतहिप्रास नहिहीं हिहै तरप्रा विहि वदनप्रासंक 13.04.2025 सके न्यप्रावयक अवभरकप्रा मम हिहै ; वविविकेचनप्रा पसूणर हिको चसुककी हिहै , न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हिहै वक पप्रारर्थी जिमप्रानत पर ररहिप्रा वकयके जिप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हिहै।
11. तद्नसुसप्रार, जिमप्रानत पप्राररनप्रा-पत्रि स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जिप्रातप्रा हिहै।
12. आविकेदक वविजियभप्रान कको वनम्नधलधखत शतर्दोसं कके अधिश्रीन ससंबसंधधित मधजिस्रटकेर / न्यप्रायप्रालय ककी ससंतसुवष्टि कके अनसुसप्रार एक व्यवकगत बसंधिपत्रि और समप्रान रप्रावश ककी दको जिमप्रानतम पस्तसुत करनके पर उपरकोक मप्रामलके मम जिमप्रानत पर ररहिप्रा वकयप्रा जिप्राए: - (i) आविकेदक अवभयकोजिन सप्राक्ष्य कके सप्रार छकेड़छप्राड़ नहिहीं करकेगप्रा; (ii) आविकेदक अवभयकोजिन पक कके गविप्राहिलों पर दबप्रावि नहिहीं डप्रालकेगप्रा; (iii) आविकेदक रटप्रायल ककोरर दप्रारप्रा तय ककी गई पत्यकेक तप्रारश्रीख पर उपसस्रत हिकोगप्रा। [Subhash Vidyarthi,J.] Order Date :- 12.5.2025/Ankit Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench