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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 438 CR.P.C. No. - 2470 of 2023 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. आवेदक के िव्षान अिधव्वा एवं राज्य की ओर से उपिस्थत िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा को सुना तथा प्ऴावली का पिरशीलन िकया।
2. वतर्मान अि्षम जमानत आवेदन प्ऴ, मु०अ०सं० 266/2019, अंतगर्त धारा 323/ 406/ 420/ 504/ 506/ भा.दं.सं. थाना गोिवन्द नगर, िजला मथुरा में अि्षम जमानत की मांग करते हुए इस ्ऺाथर्ना के साथ ्ऺस्तुत िकया गया है िक िगरफ्तारी की िस्थित में आवेदक को जमानत पर िरहा िकया जाए।
3. आवेदक के िव्षान अिधव्वा ्षारा तकर् िदया गया है िक आवेदक िनदरॏष है तथा उसे आशंका है िक उसे उपयुर््व मामले में िगरफ्तार िकया जा सकता है, जबिक उसके िवरु्ध कोई िव्षसनीय साष्य नहीं है। आवेदक को उ्व ्ऺकरण में पाटर्बंदी के कारण झूंठा अिभयु्व बना िदया गया। आवेदक के िवरु्ध अब तक कोई बलपूवर्क ्ऺि्वया जारी नहीं की गई है। यह भी ्ऺस्तुत िकया गया िक आवेदक जांच तथा परी्षण के दौरान सहयोग करने का वचन देता है तथा वह जांच एजेंसी/पुिलस/न्यायालय ्षारा अपेि्षत होने पर उपिस्थत होगा। यह कहा गया है िक यिद आवेदक को अि्षम जमानत दी जाती है, तो वह जमानत की स्वतं्ऴता का दुरुपयोग नहीं करेगा और जांच में सहयोग करेगा और जमानत की सभी शतॏल का पालन करेगा।
4. िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा ्षारा आवेदक के अि्षम जमानत का िवरोध िकया िकया तथा आगे यह तकर् ्ऺस्तुत िकया गया िक आवेदक का अि्षम जमानत ्ऺाथर्ना प्ऴ िनरस्त िकये जाने योग्य है।
5. यह ्ऺासंिगक तथ्य यह भी है िक Siddharam Satlingappa Mhetre vs. State of Maharashtra, (2011) 1 SCC 694 के मामले में माननीय उच्चतम न्यायालय ्षारा यह Versus Counsel for Applicant(s) : Rajeev Kumar Saini Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Rakesh .....Applicant(s) State of U.P. and Another .....Opposite Party(s)
अवधािरत िकया गया है िक अि्षम जमानत यािचका पर न्याय-िनणर्यन करते समय न्यायालय को आरोपों की ्ऺकृ ित और गंभीरता, आरोपी की न्याियक ्ऺि्वया से भागने की संभावना पर िवचार करना चािहए और यह िक न्यायालय को आरोपी के िवरू्ध उपलब्ध सभी साम्षी का सावधानी से मूल्यांकन करना चािहए और आरोपी की वास्तिवक भूिमका पर भी िवचार करना चािहए।
6.
उभय प्षों के िव्षान अिधव्वागण को सुनने और वतर्मान आवेदन में िकए गए कथनों पर िवचार करने के उपरांत, यह न्यायालय इस राय पर है िक आवेदक के िव्षान अिधव्वा ्षारा अि्षम जमानत देने के िलए कोई उपयु्व एवं पयार्प्त आधार नहीं ्ऺस्तुत िकया गया है।
7. तदनुसार, आवेदक राके श का यह अि्षम जमानत आवेदन प्ऴ अस्वीकार िकया जाता है।
8. इस वाद में यिद कोई अंतिरम आदेश हो तो, उसे िनरस्त समझा जाय।
9. हालांिक, आवेदक के िलए संबंिधत िवचारण न्यायालय के सम्ष िनयिमत जमानत आवेदन प्ऴ ्ऺस्तुत करने के िलए स्वतं्ऴता है, यिद जमानत के िलए ऐसा कोई आवेदन संबंिधत िवचारण न्यायालय के सम्ष पेश िकया जाता है, तो यह उम्मीद की जाती है िक संबंिधत न्यायालय, न्यायालय के िववेक और जमानत देने में िवचार को िनयंि्ऴत करने वाले वैधािनक ्ऺावधानों को बािधत िकये िबना, मा० उच्चतम न्यायालय के ्षारा Satendra Kumar Antil Vs. Central Bureau of Investigation and another (Special Leave to Appeal (Crl.) No. 5191 of 2021, decided on 07.10.2021) में ्ऺितपािदत या िनधार्िरत जमानत देने के िलए आवश्यक िदशा-िनदरॏशों को ध्यान में रखते हुए उस पर िवचार करेगी और फै सला करेगी।
10. उपयुर््व िटप्पिणयों/िनदरॏशों के साथ, यह वतर्मान आवेदन प्ऴ का िनस्तािरत िकया जाता है। October 6, 2025 S.Mishra ABAIL No. 2470 of 2023 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- SHASHI MISHRA High Court of Judicature at Allahabad