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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 139251 (ALL)
SHANI SONI v. STATE OF U.P. THRU. ADDL. CHIEF SECY. HOME DEPTT. LKO. AND 3 OTHERS
BAIL/4075/2025 · 2025-05-12
Subhash Vidyarthi
body2025
[ 2025 DAILYLAW 139251 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:27882 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 4075 of 2025 Applicant :- Shani Soni Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Addl. Chief Secy. Home Deptt. Lko. And 3 Others Counsel for Applicant :- Dr.Surendra Singh Chauhan,Anil Kumar Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J.
1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा ससुरकेन्द्र धससिंह चचौहप्रान तरप्रा वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा शश्री अम्बश्रीश विरप्रार्मा कको ससुनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा पररशश्रीलन वकयप्रा।
2. धिप्रारप्रा 483 भप्रारतश्रीय नप्रागररक ससुरकप्रा ससिंवहतप्रा कके असिंतगर्मात पस्तसुत इस पप्रारर्मानप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके रसुकदरप्रा अपरप्राधि ससिंख्यप्रा 300 सन 2024 अन्तगर्मात धिप्रारप्रा 137(2), 87, 64 बश्री०एन०एस० वि धिप्रारप्रा 3/4 ललवगक अपरप्राधिधों सके बप्रालकधों कप्रा ससिंरकण अधधिवनयर रप्रानप्रा बप्राघरप्राय धजिलप्रा पतप्रापगढ़ रम जिरप्रानत ककी पप्रारर्मानप्रा ककी हहै।
3. वदनप्रासिंक 01.09.2024 कको पप्रारर्थी तरप्रा खसुशश्री सकोनश्री कके वविरुद्ध धलखप्राई गई परर ससूचनप्रा ररपकोरर्मा रम कहप्रा गयप्रा हहै वक खसुशश्री सकोनश्री कके सहयकोग सके पप्रारर्थी वशकप्रायतकतर्थी ककी 16 विरर्थीयप्रा पसुतश्री कको वदनप्रासिंक 30.08.2024 कको भगप्रा लके गयप्रा।
4. धिप्रारप्रा 180 भप्रारतश्रीय नप्रागररक ससुरकप्रा ससिंवहतप्रा कके असिंतगर्मात असिंवकत अपनके बयप्रान रम पश्रीवड़ितप्रा नके अपनश्री आयसु 17 हकोनप्रा बतप्रायश्री तरप्रा उसनके कहप्रा वक विह पप्रारर्थी कको लगभग 2 विररसिं सके जिप्रानतश्री पहचप्रानतश्री वि रकोबप्राइल सके बप्रातम वकयप्रा करतश्री रश्री। दकोनधों एक -दसूसरके कको पससिंद करनके लगके और उन्हधोंनके शप्रादश्री करनके कप्रा फहै सलप्रा कर धलयप्रा। वदनप्रासिंक 29.08.2024 कको पश्रीवड़ितप्रा घर सके अकके लश्री वनकलकर पयप्रागरप्राजि गई जिहप्राहाँ विह पप्रारर्थी सके वरलश्री एविसिं उसकके सप्रार लखनऊ गई और विहप्राहाँ सके रटकेन सके उड़िश्रीसप्रा चलश्री गयश्री। उड़िश्रीसप्रा रम पश्रीवड़ितप्रा पप्रारर्थी कके सप्रार लगभग 20-25 वदन रहश्री एविसिं परर ससूचनप्रा ररपकोरर्मा ककी जिप्रानकप्रारश्री हकोनके पर विह विप्रापस आ गयश्री।
5. वचकत्सककीय परश्रीकण कके सरय भश्री पश्रीवड़ितप्रा नके ऐसप्रा हश्री बयप्रान वदयप्रा। वचवकत्सककीय परश्रीकण आख्यप्रा रम पश्रीवड़ितप्रा कके शरश्रीर पर ककोई चकोर अरविप्रा बल पयकोग कप्रा ककोई वचह्न नहह पप्रायप्रा गयप्रा। रकेवडियकोललॉधजिकल परश्रीकण आख्यप्रा कके अनसुसप्रार पश्रीवड़ितप्रा ककी आयसु लगभग 18 हहै। पहैरप्राललॉजिश्री जिप्रासिंच रम विश्रीयर्मा ककी उपसस्रवत नहह पप्रायश्री गयश्री।
6. धिप्रारप्रा 183 भप्रारतश्रीय नप्रागररक ससुरकप्रा ससिंवहतप्रा कके असिंतगर्मात असिंवकत अपनके बयप्रान रम पश्रीवड़ितप्रा नके पप्रारर्थी दप्रारप्रा जिबरदस्तश्री करनके कप्रा आरकोप लगप्रायप्रा।
7. पप्रारर्मानप्रा-पत कके सप्रार पस्तसुत शपर-पत रम कहप्रा गयप्रा हहै वक पप्रारर्थी एक 24 विरर्थीय वनदरर नवियसुविक हहै और उसकप्रा ककोई आपरप्राधधिक इवतहप्रास नहह हहै।
8.
वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा नके पप्रारर्मानप्रा -पत कप्रा वविरकोधि करतके हहए कहप्रा वक वविविकेचनप्रा रम आरकोपधों ककी पसुवष्टि हहई तरप्रा आरकोप -पत वदनप्रासिंक 30.10.2024 कको पस्तसुत वकयप्रा जिप्रा चसुकप्रा हहै।
9. उपरकोक तथ्यधों कको दृवष्टिगत रखतके हहए , जिबवक वचवकत्सककीय परश्रीकण आख्यप्रा कके अनसुसप्रार पश्रीवड़ितप्रा बप्राधलग हहै; धिप्रारप्रा 180 भप्रारतश्रीय नप्रागररक ससुरकप्रा ससिंवहतप्रा कके असिंतगर्मात असिंवकत अपनके बयप्रान रम पश्रीवड़ितप्रा नके अपनश्री रजिर्थी सके पप्रारर्थी कके सप्रार जिप्रानके कप्रा करन वकयप्रा हहै यद्यवप धिप्रारप्रा 183 भप्रारतश्रीय नप्रागररक ससुरकप्रा ससिंवहतप्रा कके असिंतगर्मात असिंवकत अपनके बयप्रान रम पश्रीवड़ितप्रा नके पप्रारर्थी दप्रारप्रा बल पयकोग कप्रा आरकोप लगप्रायप्रा गयप्रा हहै वकन्तसु इस आरकोप ककी पसुवष्टि वचवकत्सककीय परश्रीकण आख्यप्रा सके नहह हहई हहै ; पप्रारर्थी एक नवियसुविक हहै धजिसकप्रा ककोई आपरप्राधधिक इवतहप्रास नहह हहै विह वदनप्रासिंक 21.09.2024 सके न्यप्रावयक अवभरकप्रा रम हहै; वविविकेचनप्रा पसूणर्मा हको चसुककी हहै, न्यप्रायप्रालय कप्रा रत हहै वक पप्रारर्थी जिरप्रानत पर ररहप्रा वकयके जिप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हहै।
10. तद्नसुसप्रार, जिरप्रानत पप्रारर्मानप्रा-पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जिप्रातप्रा हहै।
11. आविकेदक शवन सकोनश्री कको वनम्नधलधखत शतरसिं कके अधिश्रीन ससिंबसिंधधित रधजिस्रटकेर / न्यप्रायप्रालय ककी ससिंतसुवष्टि कके अनसुसप्रार एक व्यवकगत बसिंधिपत और सरप्रान रप्रावश ककी दको जिरप्रानतम पस्तसुत करनके पर उपरकोक रप्रारलके रम जिरप्रानत पर ररहप्रा वकयप्रा जिप्राए: - (i) आविकेदक अवभयकोजिन सप्राक्ष्य कके सप्रार छकेड़िछप्राड़ि नहह करकेगप्रा; (ii) आविकेदक अवभयकोजिन पक कके गविप्राहधों पर दबप्रावि नहह डिप्रालकेगप्रा; (iii) आविकेदक रटप्रायल ककोरर्मा दप्रारप्रा तय ककी गई पत्यकेक तप्रारश्रीख पर उपसस्रत हकोगप्रा। [Subhash Vidyarthi,J.] Order Date :- 12.5.2025 Ankit Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench