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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 138565 (ALL)

TAU v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME DEPTT. LKO.

BAIL/3844/2025 · 2025-05-06

Subhash Vidyarthi

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:26096 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 3844 of 2025 Applicant :- Tau Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Deptt. Lko. Counsel for Applicant :- Ashish Kumar Singh,Ram Prakash Singh Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J. 1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री रप्राम पकप्राश धससिंह तरप्रा वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा शश्री रववि शश्रीविप्रास्तवि कको ससुनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा अविलकोकन वकयप्रा। 2. धिप्रारप्रा 483 भप्रारतश्रीय नप्रागररक ससुरकप्रा ससिंवहतप्रा (B.N.S.S.) मम पस्तसुत इस पप्राररनप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मसुकदमप्रा अपरप्राधि ससिंख्यप्रा 113 सन 2025, अन्तगरत धिप्रारप्रा 103(1), 3(5) बश्री०एन०एस, रप्रानप्रा-ईसप्रानगर, धजिलप्रा-खश्रीरश्री मम जिमप्रानत ककी पप्राररनप्रा ककी हहै। 3. वदनप्रासिंक 21.03.2025 कको पप्रारर्थी सवहत चप्रार व्यवकययों कके वविरुद्ध धलखप्राई गई परम ससूचनप्रा ररपकोरर मम यह कहप्रा गयप्रा हहै वक वशकप्रायतकतप्रार नके नदश्री पप्रार सप्रावबर वि मसुस्तककीन ककी जिमश्रीन बरप्राई पर बकोयप्रा हहै , धजिस जिमश्रीन कको पहलके अवभयसुकगण जिकोततके रके। जिमश्रीन हप्रार सके चलके जिप्रानके कके कप्रारण अवभयसुकगण वशकप्रायतकतप्रार वि उसकके पररविप्रार सके विहैर रखतके हह। वदनप्रासिंक 19.03.2025 कको जिब वशकप्रायतकतप्रार कप्रा 40 विरर्थीय पसुत नदश्री पप्रार खकेत मम मससूर तकोड़नके गयप्रा रप्रा, अवभयसुकगण नके उसके लप्राठश्री डसिंडको सके मप्रार -पश्रीर कर तरप्रा गलप्रा दबप्रा कर मप्रार डप्रालप्रा। 4. इसकके पसूविर घरनप्रा कके वदनप्रासिंक 19.03.2025 कको वशकप्रायतकतप्रार नके पसुधलस कको एक पप्राररनप्रा पत दकेकर यह कहप्रा रप्रा वक उसकके बकेरके कप्रा शवि मससूर कके खकेत मम वमलप्रा हहै , धजिसके विह उठप्राकर अपनके घर मम लके आयप्रा हहै। बकेरके ककी ममृत्यसु ससिंदकेहजिनक पररसस्रवतययों मम हहई हहै , धजिसकप्रा कप्रारण जिप्राननके कके धलए पकोस्रमप्राररम करप्रा धलयप्रा जिप्राए। 5. शवि वविच्छकेदन आख्यप्रा मम धसर कके बप्रासिंई ओर पश्रीछके ककी तरफ ससूजिन, वनचलके हकोठ पर फरप्रा हहआ घप्रावि, गलके कके सप्रामनके वि दकोनको वकनप्रारयों पर ससूजिन कके कई वनशप्रान तरप्रा बप्राएसिं कसिं धिके पर सप्रामनके ककी तरफ ससूजिन पप्राई गई। ममृत्यसु कप्रा कप्रारण गलप्रा घकोरनके कके कप्रारण दम घसुरनप्रा बतप्रायप्रा गयप्रा। 6. वविविकेचनप्रा कके ददौरप्रान वशकप्रायतकतप्रार नके परम ससूचनप्रा ररपकोरर कके करनयों ककी पसुवष्टि ककी हहै तरप्रा एक अन्य गविप्राह रप्रामप्रादल नके कहप्रा वक वदनप्रासिंक 19.03.2025 ककी शप्राम लगभग 4 बजिके जिब विह अपनके खकेत मम कप्राम कर रहप्रा रप्रा तको अवभयसुकगण बहहल जिल्दश्री मम हड़ड़़बड़प्रातके हहए उसकके खकेत कके पप्रास सके वनकलके रके। उक गविप्राह नके अवभयसुकगण कको आविप्राजि भश्री दश्री, लकेवकन अवभयसुकगण उसके अनससुनप्रा करतके हहए जिल्दबप्राजिश्री मम चलके गए। 7. पप्राररनप्रा पत कके सप्रार पस्तसुत शपर पत मम कहप्रा गयप्रा हहै वक पप्रारर्थी एक 55 विरर्थीय वनदर्दोर व्यवक हहै तरप्रा उसकप्रा ककोई पसूविर आपरप्राधधिक इवतहप्रास नहहीं हहै। 8. वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा नके पप्राररनप्रा पत कप्रा वविरकोधि करतकेके हहए कहप्रा वक अवभयसुकगण दप्रारप्रा कप्राररत अपरप्राधि अत्यसिंत जिघन्य पकमृ वत कप्रा हहै , वविविकेचनप्रा मम पप्रारर्थी कके वविरुद्ध आरकोपयों ककी पसुवष्टि हहई हहै और वदनप्रासिंक 22.04.2025 कको आरकोप पत पस्तसुत वकयप्रा जिप्रा चसुकप्रा हहै। 9. उपरकोक तथ्ययों कके दृवष्टिगत , जिबवक घरनप्रा वदनप्रासिंक 19.03.2025 कको हहई एविसिं घरनप्रा कके वदन वदए गए पप्राररनप्रा पत मम वशकप्रायतकतप्रार नके वकसश्री व्यवक कके वविरुद्ध ससिंदकेह नहहीं व्यक वकयप्रा हहै; घरनप्रा कके दको वदनयों कके बप्राद धलखप्राई परम ससूचनप्रा ररपकोरर मम जिमश्रीन बरप्राई पर लकेनके कके कप्रारण पकयों कके बश्रीच पसुरप्रानप्रा विहैर हकोनप्रा एविसिं इस कप्रारण सके अवभयसुकगण दप्रारप्रा अपरप्राधि कप्राररत करनप्रा कहप्रा गयप्रा हहै, जिको वक मप्रात ससिंदकेह कके आधिप्रार पर कहप्रा गयप्रा हहै, क्ययोंवक घरनप्रा वकसश्री नके दकेखश्री नहहीं हहै; एक अन्य गविप्राह नके घरनप्रा कके वदनप्रासिंक कको अवभयसुकगण दप्रारप्रा तकेजिश्री सके जिप्रातके हहए दकेखके जिप्रानके कप्रा करन वकयप्रा हहै तरप्रा उक गविप्राह नके यह नहहीं कहप्रा हहै वक उसनके घरनप्रा दकेखश्री अरविप्रा उसनके अवभयसुकगण कके हप्रार मम ककोई लप्राठश्री इत्यप्रावद दकेखश्री; पप्रारर्थी कप्रा ककोई आपरप्राधधिक इवतहप्रास नहहीं हहै विह वदनप्रासिंक 25.03.2025 सके जिकेल मम वनरुद्ध हहै तरप्रा वविविकेचनप्रा पसूणर हको चसुककी हहै, न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हहै वक पप्रारर्थी जिमप्रानत पर ररहप्रा वकए जिप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हहै। 10. तदनसुसप्रार, जिमप्रानत पप्राररनप्रा-पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जिप्रातप्रा हहै। 11. आविकेदक तप्राऊ कको वनम्नधलधखत शतर्दोसिं कके अधिश्रीन ससिंबसिंधधित मधजिस्रटकेर/न्यप्रायप्रालय ककी ससिंतसुवष्टि कके अनसुसप्रार एक व्यवकगत बसिंधिपत और समप्रान रप्रावश ककी दको जिमप्रानतम पस्तसुत करनके पर उपरकोक मप्रामलके मम जिमप्रानत पर ररहप्रा वकयप्रा जिप्राए: - (i) आविकेदक अवभयकोजिन सप्राक्ष्य कके सप्रार छकेड़छप्राड़ नहहीं करकेगप्रा; (ii) आविकेदक अवभयकोजिन पक कके सप्रावकययों पर दबप्रावि नहहीं डप्रालकेगप्रा; (iii) आविकेदक वविचप्रारण न्यप्रायप्रालय दप्रारप्रा वनयत ककी गई पत्यकेक वतधर पर उपसस्रत हकोगप्रा। Order Date :- 6.5.2025 Himanshu Digitally signed by :- HIMANSHU SHUKLA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench