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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 138162 (ALL)
ASMIT PATEL v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME LKO. AND 3 OTHERS
NABAIL/413/2025 · 2025-05-08
Subhash Vidyarthi
body2025
[ 2025 DAILYLAW 138162 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:26900 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC. ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 482 BNSS No. - 413 of 2025 Applicant :- Asmit Patel Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Lko. And 3 Others Counsel for Applicant :- Vikas Chaturvedi,Brij Bhushan Singh,Pranjal Apurva,Sandeep Kumar Mishra Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J.
1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा नके एक पपूरक शपर पत्र पस्ततुत वकयप्रा, धजिसके अवभिलकेख पर धलयप्रा जिप्रातप्रा हहै।
2. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री बबृजि भिपूषण धससिंह ,वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा परम शश्री रप्राजिश्रीवि कतु मप्रार विमप्रार्मा तरप्रा वशकप्रायतकतर्थी कके वपतप्रा ककी तरफ सके उपसस्रत वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री आशतुततोष धससिंह कतो सतुनप्रा तरप्रा पत्रप्राविलश्री कप्रा अविलतोकन वकयप्रा।
3. पस्ततुत पप्रारर्मानप्रा-पत्र पप्रारर्थी नके मतुकदमप्रा अपरप्राधि ससिंख्यप्रा 0164 सनन् 2025, अन्तरर्मात धिप्रारप्रा 75, 333, 115(2), 351(3), 64 बश्री०एन०एस० एविसिं 5/6 पपॉक्सतो एक्ट, रप्रानप्रा-अकबरपतुर, धजिलप्रा-अम्बकेडकर नरर मम अवग्रिम जिमप्रानत ककी पप्रारर्मानप्रा ककी हहै।
4. वदनप्रासिंक 14.03.2025 कतो धलखप्राई रई परम सपूचनप्रा ररपतोटर्मा मम वशकप्रायतकतर्थी नके कहप्रा वक पपूविर्मा मम पप्रारर्थी कप्रा उसकके घर आनप्रा -जिप्रानप्रा रप्रा तरप्रा उसनके वशकप्रायतकतर्थी कके सप्रार अपनके फतोटतो खखींच लश्री रश्री , धजिनकतो आधिप्रार बनप्राकर विह वशकप्रायतकतर्थी कतो परकेशप्रान करतप्रा रहतप्रा रप्रा। इसककी वशकप्रायत जिनविरश्री 2025 मम मवहलप्रा हकेल्पलप्राइन 1090 पर भिश्री ककी रश्री , वकन्ततु पप्रारर्थी अपनश्री हरकततों सके बप्राज़ नहखीं आयप्रा। वशकप्रायतकतर्थी कप्रा वविविप्राह अन्यत्र तय हतोनके पर विह फतोटतो सप्राविर्माजिवनक कर कके शप्रादश्री ततोड़नके ककी धिमककी दकेनके लरप्रा। वदनप्रासिंक 14.03.2025 कतो दतोपहर लरभिर 12 बजिके जिब वशकप्रायतकतर्थी घर मम अकके लश्री रश्री, पप्रारर्थी उसकके घर मम घतुस आयप्रा , दतुष्कमर्मा कप्रा पयप्रास वकयप्रा एविसिं
वविरतोधि पर मप्रारप्रा-पश्रीटप्रा और उठप्राकर जिमश्रीन पर पटक वदयप्रा धजिससके वशकप्रायतकतर्थी कतो चतोटम आई। वशकप्रायतकतर्थी दप्रारप्रा बचप्रावि कके धलए हलप्रा-रतुहप्रार लरप्रानके पर रप्रागाँवि कके लतोर आए, तब पप्रारर्थी उसके धिमककी दकेतके हहए भिप्रार रयप्रा।
5.
धिप्रारप्रा 180 बश्री०एन०एस०एस० कके असिंतरर्मात असिंवकत अपनके बयप्रान मम वशकयप्रातकतर्थी नके कहप्रा वक विह पप्रागाँच सप्राल सके पप्रारर्थी सके बप्रात करतश्री रश्री, वकन्ततु जिब उसककी शप्रादश्री कहखीं और तय हतो रई ततो पप्रारर्थी उसके ततोड़नके ककी कतोवशश कर रहप्रा हहै, उसकतो मप्रारतप्रा हहै, रप्राधलयप्रासिं दकेतप्रा हहै तरप्रा जिहप्रागाँ शप्रादश्री तय हतोतश्री हहै विहप्रासिं फतोन कर रप्रालश्री -रललौजि करतप्रा हहै। वदनप्रासिंक 14.03.2025 कतो वशकप्रायतकतर्थी कके घर मम घतुस कर पप्रारर्थी नके उसके कमर, धसर और पश्रीठ मम मप्रारप्रा और उठप्राकर पटक वदयप्रा, धजिससके उसके चतोटम लरश्री। वशकप्रायतकतर्थी नके यह भिश्री कहप्रा वक पप्रारर्थी नके उसके धिमककी दश्री वक अरर विह रप्रागाँवि मम वदख रई ततो यह उसकके धलए ठश्रीक नहखीं हतोरप्रा तरप्रा उसनके यह भिश्री कहप्रा वक उन दतोनतों कके बश्रीच कतोई आएरप्रा ततो मप्रार खप्राएरप्रा।
6. एक पपूरक शपर पत्र कके मप्राध्यम सके दतो अन्य आपरप्राधधिक पकरणतों मम पप्रारर्थी ककी ससिंधलप्ततप्रा दशप्रार्माई रई हहै, धजिसमम सके एक ककी कप्रायर्माविप्राहश्री इस न्यप्रायप्रालय दप्रारप्रा वनरस्त ककी जिप्रा चतुककी हहै तरप्रा दपूसरके मप्रामलके मम पप्रारर्थी कतो जिमप्रानत वमल चतुककी हहै।
7. वशकप्रायतकतर्थी कके वचवकत्सककीय परश्रीक्षण ररपतोटर्मा ककी जितो पवत अवग्रिम जिमप्रानत पप्रारर्मानप्रा पत्र कके सप्रार ससिंलग्न हह, उसमम वकसश्री भिश्री चतोट कप्रा विणर्मान नहखीं हहै, वकन्ततु वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा परम नके वशकप्रायतकतर्थी ककी वचवकत्सककीय परश्रीक्षण ककी पवत न्यप्रायप्रालय कके समक्ष पस्ततुत ककी , धजिसमम वशकप्रायतकतर्थी कके शरश्रीर पर चप्रार चतोटतों कप्रा आनप्रा असिंवकत हहै , धजिससके यह पतश्रीत हतोतप्रा हहै वक पप्रारर्थी नके वशकप्रायतकतर्थी कके वचवकत्सककीय परश्रीक्षण ककी सत्य पवत अपनके शपर पत्र कके सप्रार न्यप्रायप्रालय कके समक्ष नहखीं लरप्राई हहै।
8. वशकप्रायतकतर्थी कके उपरतोक बयप्रानतों कतो दृवष्टिरत रखतके हहए तरप्रा पप्रारर्थी कके इस आचरण कतो दृवष्टिरत रखतके हहए वक उसनके न्यप्रायप्रालय कके समक्ष वचवकत्सककीय परश्रीक्षण ककी सम्पपूणर्मा पवतधलवप नहखीं लरप्राई , न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हहै वक उपरतोक पररसस्रवतयतों मम पप्रारर्थी अवग्रिम जिमप्रानत पप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री नहखीं हहै।
9. तदनतुसप्रार, अवग्रिम जिमप्रानत पप्रारर्मानप्रा पत्र वनरस्त वकयप्रा जिप्रातप्रा हहै। Order Date :- 8.5.2025 Himanshu Digitally signed by :- HIMANSHU SHUKLA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench