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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 138009 (ALL)

MAHIPAL v. STATE OF U.P. THRU. SECY.HOME LKO.

BAIL/3813/2025 · 2025-05-05

Subhash Vidyarthi

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:25918 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 3813 of 2025 Applicant :- Mahipal Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Secy.Home Lko. Counsel for Applicant :- Sudhir Kumar Rai Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J. 1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री ससुधिश्रीर कसु मप्रार रप्राय तरप्रा वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा शश्री आललोक कसु मप्रार वतविप्रारश्री कलो ससुनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा अविललोकन वकयप्रा। 2. धिप्रारप्रा 439 ददं०प०सदं०/483 भप्रारतश्रीय नप्रागररक ससुरकप्रा सदंवहितप्रा (B.N.S.S.) मम पस्तसुत इस पप्राररनप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मसुकदमप्रा अपरप्राधि सदंख्यप्रा 18 सन 2025, अन्तगरत धिप्रारप्रा 80(2), 85 बश्री०एन०एस एविदं धिप्रारप्रा 3/4 दहिकेज पवतषकेधि अधधिवनयम, रप्रानप्रा-भश्रीरप्रा, धजलप्रा- लखश्रीमपसुर खश्रीरश्री मम जमप्रानत ककी पप्राररनप्रा ककी हिहै। 3. वदनप्रादंक 13.01.2025 कलो पप्रारर्थी सवहित सप्रात व्यवकययों कके वविरुद्ध धलखप्राई गई परम ससूचनप्रा ररपलोरर मम कहिप्रा गयप्रा हिहै वक वशकप्रायतकतप्रार नके अपनश्री पसुतश्री कप्रा वविविप्राहि वदनप्रादंक 15.07.2024 कलो पप्रारर्थी कके सप्रार वकयप्रा रप्रा। सभश्री अवभयसुकगण वशकप्रायतकतप्रार ककी पसुतश्री कलो दहिकेज कके धलए पतप्रावड़ित करतके रके। वशकप्रायतकतप्रार ककी पसुतश्री 2 मप्राहि ककी गभरवितश्री रश्री और विहि मप्रायकके सके वदनप्रादंक 12.12.2024 कलो सससुरप्राल गई रश्री तरप्रा वदनप्रादंक 13.12.2024 कलो अवभयसुकगण नके हिश्री वशकप्रायतकतप्रार कलो बतप्रायप्रा वक उसककी पसुतश्री ककी ममृत्यसु हिलो गई हिहै। वशकप्रायतकतप्रार नके कहिप्रा ककी ममृत्यसु सदंवदग्धि हिहै। 4. शवि वविच्छकेदन आख्यप्रा मम शवि कके गलके कके चप्रारयों ओर लरकनके कके वचन्हि पप्रायके गप्रायके धजसमम 2 सके.मश्री कप्रा ररक स्रप्रान रप्रा और ममृत्यसु कप्रा कप्रारण लरकनके कप्रा कप्रारण दम घसुरनप्रा बतप्रायप्रा गयप्रा हिहै। 5. वशकप्रायतकतप्रार नके अपनके बयप्रान मम परम ससूचनप्रा ररपलोरर कके करनयों कप्रा समररन वकयप्रा। वशकप्रायतकतप्रार ककी पत्नश्री (ममृतकप्रा ककी मप्रादं) नके अपनके बयप्रान मम कहिप्रा वक उसककी पसुतश्री चप्रार वदन मप्रायकके मम रुकनके कके बप्राद वदनप्रादंक 13.12.2024 कलो विप्रापस ससुसरप्राल गई रश्री तरप्रा वदनप्रादंक 14.12.2024 कलो पप्रारर्थी नके फलोन सके उसककी पसुतश्री ककी ममृत्यसु ककी ससूचनप्रा दश्री। ममृतकप्रा ककी मप्रादं नके यहि नहिहीं कहिप्रा वक उन चप्रार वदनयों मम उसककी पसुतश्री नके वविपकश्रीगण दप्रारप्रा पतप्रावड़ित करनके कके बप्रारके मम बतप्रायप्रा। 6. पप्राररनप्रा पत कके सप्रार पस्तसुत शपर पत मम कहिप्रा गयप्रा हिहै वक पप्रारर्थी एक 22 विषर्थीय वनदर्दोष व्यवक हिहै, धजसकप्रा कलोई आपरप्राधधिक इवतहिप्रास नहिहीं हिहै। 7. इस न्यप्रायप्रालय दप्रारप्रा एक अन्य सहि-अवभयसुक मदंगसू लप्राल कलो जमप्रानत पप्राररनप्रा -पत सदंख्यप्रा 2657 सन 2025 मम वदनप्रादंक 01.04.2025 दप्रारप्रा वनयवमत जमप्रानत पदप्रान ककी जप्रा चसुककी हिहै। 8. वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा नके पप्राररनप्रा पत कप्रा वविरलोधि करतके हिहए कहिप्रा वक वविविकेचनप्रा मम आरलोपयों ककी पसुवष्टि हिहई हिहै और पप्रारर्थी कके वविरुद्ध आरलोप पत पस्तसुत वकयप्रा जप्रा चसुकप्रा हिहै। 9. उपरलोक तथ्ययों कके दृवष्टिगत , जबवक घरनप्रा वदनप्रादंक 13.12.2024 कलो हिहई तरप्रा परम ससूचनप्रा ररपलोरर वदनप्रादंक 13.01.2025 कलो धलखप्राई गई; ममृतकप्रा ककी मप्रादं नके ममृत्यसु सके ठश्रीक पहिलके चप्रार वदन मप्रायकके मम रहिनके कके ददौरप्रान ममृतकप्रा दप्रारप्रा वकसश्री अवभयसुक दप्रारप्रा पतप्रावड़ित वकए जप्रानके ककी वशकप्रायत करनके कप्रा करन नहिहीं वकयप्रा हिहै ; पप्रारर्थी कके वविरुद्ध कलोई वविशकेष करन नहिहीं वकयप्रा गयप्रा तरप्रा पप्रारर्थी एक 22 विषर्थीय व्यवक हिहै धजसकप्रा कलोई आपरप्राधधिक इवतहिप्रास नहिहीं हिहै एविदं विहि वदनप्रादंक 20.01.2025 सके कप्रारप्रागप्रार मम वनरुद्ध हिहै; एक अन्य सहि- अवभयसुक कलो इस न्यप्रायप्रालय दप्रारप्रा वनयवमत जमप्रानत पदप्रान ककी जप्रा चसुककी हिहै , न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हिहै वक पप्रारर्थी जमप्रानत पर ररहिप्रा वकए जप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हिहै। 10. तदनसुसप्रार, जमप्रानत पप्राररनप्रा-पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जप्रातप्रा हिहै। 11. आविकेदक मवहिपप्राल कलो वनम्नधलधखत शतयों कके अधिश्रीन सदंबदंधधित मधजस्रटकेर /न्यप्रायप्रालय ककी सदंतसुवष्टि कके अनसुसप्रार एक व्यवकगत बदंधिपत और समप्रान रप्रावश ककी दलो जमप्रानतम पस्तसुत करनके पर उपरलोक मप्रामलके मम जमप्रानत पर ररहिप्रा वकयप्रा जप्राए: - (i) आविकेदक अवभयलोजन सप्राक्ष्य कके सप्रार छकेड़िछप्राड़ि नहिहीं करकेगप्रा; (ii) आविकेदक अवभयलोजन पक कके सप्रावकययों पर दबप्रावि नहिहीं डप्रालकेगप्रा; (iii) आविकेदक वविचप्रारण न्यप्रायप्रालय दप्रारप्रा वनयत ककी गई पत्यकेक वतधर पर उपसस्रत हिलोगप्रा। [Subhash Vidyarthi,J.] Order Date :- 5.5.2025 Ankit Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench